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	<title>Atal Pension Yojana &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>RTI में बड़ा खुलासा: अटल पेंशन योजना से 1.49 करोड़ लोगों ने छोड़ा साथ</title>
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		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 05:33:00 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Atal Pension Yojana]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली सरकारी पेंशन स्कीम &#039;अटल पेंशन योजना&#039; की खूब चर्चा होती है. अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. दरअसल, देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से इस स्कीम की शुरुआत की गई है. RTI के जरिये APY को लेकर एक बड़ा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
सरकारी पेंशन स्कीम &#039;अटल पेंशन योजना&#039; की खूब चर्चा होती है. अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. दरअसल, देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से इस स्कीम की शुरुआत की गई है. RTI के <strong>जरिये APY को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है।&nbsp;</strong></p>
<p>&nbsp;सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में पता चला है कि साल 2015 में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 1.49 करोड़ लोग इस स्कीम से बाहर हो चुके हैं. पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के आंकड़ों के मुताबिक योजना में हर साल रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं. लेकिन साथ ही समय से पहले खाता बंद करने या मृत्यु के कारण स्कीम से बाहर होने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।&nbsp;</p>
<p>RTI से मिले आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक अटल पेंशन योजना के तहत कुल रजिस्ट्रेशन 8.96 करोड़ तक पहुंच चुका था. लेकिन इनमें से केवल 7.45 करोड़ सब्सक्राइबर ही फिलहाल एक्टिव हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि एक बहुत बड़ा हिस्सा अब इस योजना का सक्रिय रूप से लाभ नहीं उठा रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>साल-दर-साल बढ़ता एग्जिट का ग्राफ</strong><br />
योजना के शुरुआती साल 2015-16 के दौरान केवल 2 लोगों ने स्कीम छोड़ी थी. लेकिन हालिया वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा सालाना 30.24 लाख से अधिक को पार कर गया. एक तरफ जहां एग्जिट करने वालों की संख्या बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ नए रजिस्ट्रेशन के मामले में योजना ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.35 करोड़ से अधिक नए सब्सक्राइबर्स इस योजना से जुड़े, जो इसके लॉन्च के बाद से किसी भी एक साल में सबसे बड़ी संख्या है।&nbsp;</p>
<p>जब RTI के जरिए यह पूछा गया कि कितने सब्सक्राइबर्स ने रजिस्ट्रेशन के 1 साल, 3 साल या 5 साल के भीतर योगदान देना बंद कर दिया, तो PFRDA ने साफ कर दिया कि अटल पेंशन योजना के तहत &#039;डिसकंटिन्यूएशन&#039; जैसी कोई अवधारणा नहीं है. इसलिए अगर किसी कारणवश कोई सब्सक्राइबर योगदान देना बंद कर देता है, तो वह बाद में बकाया ब्याज और देरी से किए गए योगदान का भुगतान करके अपने खाते को फिर से चालू कर सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या है अटल पेंशन योजना?</strong><br />
अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों जैसे रेहड़ी-पटरी वाले, मजदूर, कारपेंटर, घरेलू सहायक&nbsp; &nbsp;के लिए की गई थी. इसके तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक निवेश कर सकते हैं. 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद सब्सक्राइबर्स को उनके योगदान के आधार पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रति माह तक पेंशन मिलती है।&nbsp;</p>
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		<title>Bihar की महिलाओं की बड़ी भागीदारी: Atal Pension Yojana में 46 लाख रजिस्ट्रेशन पार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:01:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिहार/झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Atal Pension Yojana]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना. अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में निम्न आय-वर्ग के लोगों की अभिरुचि इस कदर है कि इसकी अवधि वित्तीय वर्ष 2030-2031 तक बढ़ाई जा चुकी है। बिहार ने इस योजना को सिर-आंखों पर लिया और अब तक 80 लाख लोग इसमें पंजीकरण करा चुके हैं। पंजीकृत लोगों में 46 लाख से अधिक महिलाएं हैं।&#160;इस संख्या &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना.</strong></p>
<p>अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में निम्न आय-वर्ग के लोगों की अभिरुचि इस कदर है कि इसकी अवधि वित्तीय वर्ष 2030-2031 तक बढ़ाई जा चुकी है। बिहार ने इस योजना को सिर-आंखों पर लिया और अब तक 80 लाख लोग इसमें पंजीकरण करा चुके हैं। पंजीकृत लोगों में 46 लाख से अधिक महिलाएं हैं।&nbsp;इस संख्या के साथ एपीवाई में बिहार देश में दूसरे स्थान पर है। इससे आगे एकमात्र उत्तर प्रदेश है, जिसकी जनसंख्या बिहार से लगभग दोगुनी अधिक है।</p>
<p>एपीवाई से निम्न आय-वर्ग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था में निश्चित आय का उपाय किया गया है। सरकार मानती है कि इसके जरिये एक पेंशन आधारित समाज बनाया जा सकता है, जो कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक होगा। विकसित भारत की तर्ज पर बिहार भी विकास की अवधारणा रखता है और उसके लिए एपीवाई जैसे छोटे-छोटे प्रयासों को बेहद कारगर माना जा रहा है। बहरहाल बिहार में एपीवाई के अंतर्गत हुए पंजीकरण में महिलाओं की संख्या 58 प्रतिशत के लगभग है। इससे स्पष्ट है कि राज्य में महिला सशक्तीकरण की पहल नियोजित तरीके से आगे बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, जैसे कि किसान, सब्जी विक्रेता, ऑटो चालक और छोटे व्यवसायी इस योजना के मुख्य ग्राहक हैं। अगले पांच वर्षों के लिए अवधि-विस्तार के बाद इसमें और पंजीकरण की आशा है। पेंशन लाभ 2035 से प्राप्त होने की आशा है।</p>
<p><strong>पेंशन और आश्रित के लिए प्रविधान</strong><br />
एपीवाई की शुरुआत नौ मई, 2015 को हुई थी। इसके अंतर्गत 60 वर्ष की आयु के बाद एक से पांच हजार रुपये न्यूनतम पेंशन की गारंटी है। पेंशन की यह राशि लाभार्थी द्वारा किए गए निवेश की मात्रा पर निर्भर करती है। मृत्यु या गंभीर बीमारी की स्थिति में समय पूर्व निकासी हो सकती है। एक अक्टूबर, 2022 से आयकर-दाताओं को इस योजना से बाहर कर दिया गया। इसके अलावा पंजीकृत व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात पति/पत्नी को भी पेंशन का प्रविधान है। दोनों की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी यानी नामिनी को जमा राशि वापस मिल जाती है।</p>
<p><strong>एपीवाई के अंतर्गत पंजीकरण</strong><br />
एपीवाई (APY) के अंतर्गत पंजीकरण क्षेत्र<br />
&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp;<strong>कुल संख्या&nbsp; &nbsp; &nbsp;महिलाएं</strong><br />
बिहार&nbsp; &nbsp; &nbsp;79,69,799&nbsp; &nbsp; &nbsp;46,06,393<br />
भारत&nbsp; &nbsp; &nbsp;8,71,74,743&nbsp; &nbsp; &nbsp;4,25,13,682</p>
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