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	<title>Child Marriage &#8211; NewsX 24</title>
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	<title>Child Marriage &#8211; NewsX 24</title>
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	<item>
		<title>राजगढ़ में बाल विवाह पर बड़ी कार्रवाई, नाबालिगों की शादी कराने के आरोप में 16 लोगों पर केस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 16:13:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Child Marriage]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;राजगढ़ जिले के खिलचीपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका और नाबालिग युवक का विवाह कराने के मामले में पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। आरोपियों में दोनों पक्षों के परिजन और विवाह आयोजन में शामिल अन्य लोग शामिल हैं। बाल विवाह की मिली थी सूचना पुलिस के अनुसार ग्राम झंझाड़पुर, प्रेमपुरा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;राजगढ़</strong><br />
जिले के खिलचीपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका और नाबालिग युवक का विवाह कराने के मामले में पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।</p>
<p><strong>आरोपियों में दोनों पक्षों के परिजन और विवाह आयोजन में शामिल अन्य लोग शामिल हैं।</strong></p>
<p><strong>बाल विवाह की मिली थी सूचना</strong><br />
पुलिस के अनुसार ग्राम झंझाड़पुर, प्रेमपुरा और खोखरिया के लोगों ने 17 वर्षीय बालिका और 18 वर्षीय युवक का विवाह कराया था। प्रशासन को मामले की सूचना मिलने के बाद जांच की गई, जिसमें सामने आया कि विवाह 12 जून को संपन्न हो चुका है।</p>
<p>इसके बाद पुलिस ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।</p>
<p><strong>इन पर केस दर्ज हुआ</strong><br />
प्रकरण में झंझाड़पुर निवासी कांताबाई, कोयलबाई, शिवसिंह, कनीराम, शैतानबाई, कैलाश, मदन, पांचूबाई और देवसिंह सहित प्रेमपुरा और खोखरिया निवासी थानसिंह, रामनाथ, भगवानसिंह, इंदरसिंह, बीरम, हेमराज और शिवनारायण तंवर को आरोपी बनाया गया है।</p>
<p>पुलिस का कहना है कि बाल विवाह सामाजिक कुरीति है और इसके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस या प्रशासन को अवगत कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>19 साल की बताकर दर्ज कराई बेटी की गुमशुदगी, नोएडा में मिलने पर खुला बाल विवाह का राज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:41:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Child Marriage]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर. 15 दिन पहले लापता हुई युवती को पुलिस ने नोएडा से ढूंढ निकाला। जब उसे बरामद कर कोर्ट में पेश किया, तब खुलासा हुआ-वह नाबालिग है। उसका बाल विवाह करा दिया गया। इस मामले में हाइकोर्ट द्वारा बाल विवाह कराने वालों पर एफआईआर कर गिरफ्तार करने के आदेश पुलिस को दिए हैं। 12 जून &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ग्वालियर.</strong></p>
<p>15 दिन पहले लापता हुई युवती को पुलिस ने नोएडा से ढूंढ निकाला। जब उसे बरामद कर कोर्ट में पेश किया, तब खुलासा हुआ-वह नाबालिग है। उसका बाल विवाह करा दिया गया। इस मामले में हाइकोर्ट द्वारा बाल विवाह कराने वालों पर एफआईआर कर गिरफ्तार करने के आदेश पुलिस को दिए हैं।</p>
<p><strong>12 जून को दर्ज कराई थी गुमशुदगी</strong><br />
बहोड़ापुर स्थित सागरताल स्थित सरकारी मल्टी निवासी एक पुरुष ने 12 जून को शिकायत की थी कि उसकी 19 वर्षीय बेटी लापता हो गई है। जिस पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश की और दो दिन पहले उसे उप्र स्थित गौतमबुद्ध नगर से बरामद किया था। उसे किशन खटीक अपने साथ ले गया था। पुलिस ने किशन को भी पकड़ा है। उसे कोर्ट में पेश किया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया है।</p>
<p><strong>पिता ने ही लगाई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका</strong><br />
इस मामले में जब उसे बरामद किया तब मामला खुला कि वह नाबालिग है। उसकी शादी नाबालिग होने पर भी कर दी थी। अब पुलिस शादी में सहयोग करने वालों के बारे में भी पता लगा रही है। जब पिता ने गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगा दी। तब पुलिस सक्रिय हुई और उसे बरामद कर लिया। उसकी मार्कशीट व अन्य दस्तावेजों के साथ जब कोर्ट में पेश किया। तब खुलासा हुआ कि वह नाबालिग है। पुलिस को भी पहले नहीं पता था। अब इस मामले में कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए हैं।</p>
<p><strong>आरोपित को गिरफ्तार कर भेज दिया जेल &#8211;</strong><br />
<em>पिता ने युवती के लापता होने की जानकारी दी थी। इस आधार पर गुमशुदगी दर्ज की थी। जब कोर्ट में पेश किया, तब सामने आया कि वह नाबालिग है। जो आरोपित किशोरी को ले गया था, उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बाल विवाह भी कराया गया है। पिता ने ही ऐसा किया था।</em><br />
<strong>&#8211; आलोक सिंह परिहार, </strong>थाना प्रभारी, बहोड़ापुर</p>
]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>पंजाब में बाल विवाह के खिलाफ बड़ा अभियान, 15 शादियां रुकवाकर बच्चों का बचपन बचाया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 07:51:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Child Marriage]]></category>
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					<description><![CDATA[चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज करते हुए अप्रैल 2026 के दौरान राज्यभर में 15 बाल विवाह समय रहते रुकवाए। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि इन मामलों में त्वरित हस्तक्षेप से बच्चों का बचपन, उनकी शिक्षा और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चंडीगढ़.</strong></p>
<p>पंजाब सरकार ने बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज करते हुए अप्रैल 2026 के दौरान राज्यभर में 15 बाल विवाह समय रहते रुकवाए। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि इन मामलों में त्वरित हस्तक्षेप से बच्चों का बचपन, उनकी शिक्षा और भविष्य सुरक्षित किया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों और उनके उज्ज्वल भविष्य पर गंभीर प्रहार है। रोका गया हर बाल विवाह एक बच्चे के सपनों को नई दिशा देने और उसे सुरक्षित बचपन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य का अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों का स्थान विवाह मंडप में नहीं, बल्कि विद्यालय में है।</p>
<p><strong>महीने में 3000 से अधिक जागरुक कार्यक्रम करवाए</strong><br />
मंत्री के अनुसार, बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अप्रैल माह के दौरान पंजाब में 3000 से अधिक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। स्कूलों, गांवों, आंगनवाड़ी केंद्रों और विभिन्न समुदायों में हुए इन कार्यक्रमों के जरिए अभिभावकों, युवाओं और आम नागरिकों को बाल विवाह के नुकसान तथा बच्चों के अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि जिला बाल संरक्षण इकाइयां, चाइल्ड वेलफेयर कमेटियां, स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। बाल विवाह, बाल शोषण, बाल मजदूरी या बच्चों से जुड़े किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दी जा सकती है, जहां से तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है।</p>
<p><strong>बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने की मांग</strong><br />
डॉ. बलजीत कौर ने पंचायती राज संस्थाओं, शिक्षकों, धार्मिक एवं सामाजिक नेताओं और आम लोगों से अपील की कि वे बाल विवाह के खिलाफ इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और किसी भी संदिग्ध मामले की तुरंत सूचना दें, ताकि समय रहते बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि जनभागीदारी, व्यापक जागरूकता और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के बल पर पंजाब बाल विवाह के पूर्ण उन्मूलन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बच्चों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक तथा अवसरों से भरपूर समाज के निर्माण का लक्ष्य हासिल करेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>कानून बेअसर! बाल विवाह के मामलों में पश्चिम बंगाल सबसे आगे, केरल-दिल्ली बने मिसाल</title>
		<link>https://newsx24.com/laws-prove-ineffective-west-bengal-leads-in-child-marriage-cases-kerala-and-delhi-set-an-example/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 04:52:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[Child Marriage]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली &#34;पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब&#8230;&#34; यह कहावत हम सब बचपन से सुनते आ रहे हैं, लेकिन आज भी हमारे देश की लाखों बेटियों के हाथों से किताबें छीनकर, उनके नाजुक कंधों पर घर-गृहस्थी का भारी बोझ लाद दिया जाता है। सपनों को पंख लगाने की उम्र में उन्हें शादी के मंडप में धकेल दिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>&quot;पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब&#8230;&quot; यह कहावत हम सब बचपन से सुनते आ रहे हैं, लेकिन आज भी हमारे देश की लाखों बेटियों के हाथों से किताबें छीनकर, उनके नाजुक कंधों पर घर-गृहस्थी का भारी बोझ लाद दिया जाता है। सपनों को पंख लगाने की उम्र में उन्हें शादी के मंडप में धकेल दिया जाता है।</p>
<p>रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) की ताजा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट 2024 के विधिक और सांख्यिकीय आंकड़े बताते हैं कि तमाम कड़े कानूनों और जागरूकता अभियानों के बावजूद समाज से बाल विवाह (Child Marriage) का यह कूट डंक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>हर चौथी लड़की की शादी 21 से पहले</strong><br />
देश में महिलाओं के विवाह की मौजूदा स्थिति को लेकर जारी हुए आंकड़े समाज की सोच पर कूट सवाल खड़े करते हैं। साल 2024 में भारत में जितनी भी महिलाओं की शादियां हुईं, उनका सांख्यिकीय गणित कुछ इस प्रकार है:</p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; 18 साल से कम (नाबालिग): </strong>2.1% लड़कियां ऐसी थीं जिनकी विधिक उम्र पूरी होने से पहले ही शादी कर दी गई।</p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; 18 से 20 साल के बीच: 24.5% लड़कियों का विवाह इस उम्र में हुआ।</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; 21 वर्ष या उससे अधिक: राहत की बात है कि 73.5% महिलाओं की शादी 21 साल के बाद हुई।</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; चौंकाने वाला सच: </strong>देश में आज भी हर चार में से एक महिला (करीब 26.6%) की शादी विधिक रूप से परिपक्व होने यानी 21 साल की उम्र पूरी करने से पहले ही कर दी जा रही है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि अब भारत में महिलाओं की शादी की औसत उम्र बढ़कर 23.1 वर्ष हो गई है।</p>
<p><strong>बाल विवाह में पश्चिम बंगाल टॉप पर</strong><br />
अगर राज्यों के स्तर पर इस सामाजिक बुराई का कूट विश्लेषण करें, तो पूर्वी और मध्य भारत के हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं:</p>
<p><strong>बाल विवाह में पश्चिम बंगाल टॉप पर</strong></p>
<p>अगर राज्यों के स्तर पर इस सामाजिक बुराई का कूट विश्लेषण करें, तो पूर्वी और मध्य भारत के हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं:</p>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>राज्य (States)</strong></td>
<td><strong>बाल विवाह का प्रतिशत (18 साल से कम)**</strong></td>
<td><strong>विधिक एवं कूट स्थिति (Current Status)**</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>पश्चिम बंगाल</strong></td>
<td><strong>6.3%</strong></td>
<td>पूरे देश में <strong>शीर्ष (Top)</strong> स्थान पर, स्थिति सबसे गंभीर।</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>झारखंड</strong></td>
<td><strong>4.9%</strong></td>
<td>देश में दूसरे स्थान पर, ग्रामीण इलाकों में दर अधिक।</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>असम</strong></td>
<td><strong>2.8%</strong></td>
<td>पूर्वोत्तर राज्यों में सामाजिक सुधारों की गति धीमी।</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>बिहार / ओडिशा</strong></td>
<td><strong>2.6%</strong></td>
<td>दोनों राज्यों में स्थिति समान रूप से चिंताजनक बनी हुई है।</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>राजस्थान</strong></td>
<td><strong>2.4%</strong></td>
<td>ऐतिहासिक रूप से बदनाम यह राज्य अब राष्ट्रीय औसत के करीब आ रहा है।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h3>राष्ट्रीय औसत (2.1%) के बराबर और नीचे वाले राज्य</h3>
<ul>
<li><strong>गुजरात और मध्य प्रदेश:</strong> इन दोनों राज्यों में बाल विवाह का ग्राफ ठीक राष्ट्रीय औसत यानी 2.1% पर टिका है।</li>
<li><strong>दक्षिण और बड़े राज्य:</strong> तेलंगाना (1.8%), आंध्र प्रदेश (1.7%) और उत्तर प्रदेश (1.6%) की स्थिति राष्ट्रीय औसत से थोड़ी बेहतर है।</li>
<li><strong>पहाड़ी और औद्योगिक राज्य: </strong>उत्तराखंड में यह आंकड़ा 1.5%, जम्मू और कश्मीर में 1.2% और महाराष्ट्र में 1.0% दर्ज किया गया है।&nbsp;</li>
</ul>
<ul>
<li><strong>दिल्ली और केरल ने पेश की मिसाल</strong></li>
</ul>
<h3>&nbsp;</h3>
<p>इस स्याह तस्वीर के बीच देश के कुछ राज्यों ने कूट बदलाव की एक बेहद खूबसूरत और उम्मीद जगाने वाली मिसाल पेश की है:</p>
<ul>
<li><strong>केरल: </strong>साक्षरता में अव्वल रहने वाले इस राज्य में बाल विवाह लगभग ना के बराबर यानी महज 0.04% रह गया है।</li>
<li><strong>दिल्ली : </strong>देश की राजधानी दिल्ली ने इस मोर्चे पर इतिहास रच दिया है। पूरे सर्वे के दौरान दिल्ली से बाल विवाह का एक भी मामला (0%) रिपोर्ट नहीं हुआ है।</li>
<li><strong>बेहतर प्रदर्शन: </strong>हिमाचल प्रदेश (0.4%), हरियाणा (0.7%), कर्नाटक व तमिलनाडु (0.8%) और पंजाब (0.9%) ने भी इस कुप्रथा को 1% से नीचे समेटने में विधिक सफलता पाई है।</li>
</ul>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<ul>
<li><strong>ग्रामीण बनाम शहरी भारत</strong></li>
</ul>
<h3>&nbsp;</h3>
<p>आमतौर पर माना जाता है कि शहरों में शिक्षा और जागरूकता के कारण बाल विवाह नहीं होते। राष्ट्रीय औसत भी यही कहता है कि ग्रामीण भारत में बाल विवाह 2.4% है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह महज 1.1% है।</p>
<p>लेकिन पश्चिम बंगाल से आए आंकड़े समाजशास्त्रियों को चौंका रहे हैं। बंगाल के ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह की दर 5.9% है, जबकि वहां के शहरी इलाकों में यह ग्राफ बढ़कर 7.6% तक पहुंच गया है, जो कि देश के शहरी औसत से सात गुना ज्यादा है। इसके विपरीत, झारखंड के ग्रामीण इलाकों में यह दर 5.8% है।&nbsp;</p>
<p><strong>स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता पर असर</strong></p>
<p>स्वास्थ्य और विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बेटियों के जीवन के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है।</p>
<ul>
<li><strong>शिक्षा पर ब्रेक: </strong>कम उम्र में शादी होने की वजह से लड़कियों को बीच में ही स्कूल-कॉलेज छोड़ना पड़ता है।</li>
<li><strong>स्वास्थ्य को खतरा:</strong> विधिक रूप से शारीरिक परिपक्वता आने से पहले ही वे गर्भवती हो जाती हैं, जिससे मातृ मृत्यु दर (MMR) और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संबंधी कूट खतरे बढ़ जाते हैं।</li>
<li><strong>आर्थिक बेड़ियां: </strong>शिक्षा अधूरी रहने के कारण ये लड़कियां कभी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बन पातीं और जीवनभर घरेलू निर्भरता के चक्रव्यूह में फंसी रह जाती हैं।</li>
</ul>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बाल विवाह रोकने के लिए सख्त अभियान के निर्देश दिए</title>
		<link>https://newsx24.com/ranchi-chief-minister-hemant-soren-directs-strict-campaign-to-curb-child-marriage/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 08:41:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिहार/झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Child Marriage]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[रांची &#160;मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में हो रहे बाल विवाह पर चिंता जताई है। साथ ही उन्होंने इसपर हर हाल में रोक लगाने को कहा है। मंगलवार को महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा विभाग की समीक्षा के क्रम में उन्होंने कहा कि गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा जैसे जिलों में बाल विवाह के ज्यादा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रांची</strong></p>
<p>&nbsp;मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में हो रहे बाल विवाह पर चिंता जताई है। साथ ही उन्होंने इसपर हर हाल में रोक लगाने को कहा है। मंगलवार को महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा विभाग की समीक्षा के क्रम में उन्होंने कहा कि गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा जैसे जिलों में बाल विवाह के ज्यादा<br />
मामले आ रहे हैं। वहां अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाए।</p>
<p>बाल विवाह में सम्मिलित तथा इसे बढ़ावा देने वालों पर की जाने वाली कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानकारी भी आम लोगों को दें, ताकि कानून के प्रति उनमें डर हो।<br />
मुख्यमंत्री ने कहा कि आडियो-वीडियो के माध्यम से एवं विभिन्न इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से भी लोगों में बाल विवाह को लेकर प्रभावी जागरूकता लाई जा सकती है।</p>
<p>साथ ही स्कूल-कालेज की छात्राओं सहित आम लोगों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह मुक्त झारखंड की दिशा में अपनी साहस और दृढ़ संकल्प को दिखाने वाली बालिकाओं को ब्रांड एंबेसडर/वालेंटियर बनाकर समाज में जागरूकता फैलाएं, ताकि बालिकाओं के अल्प आयु में विवाह करने की सामाजिक विसंगति पर रोक लगाई जा सके।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने विभाग को बजट की राशि शत-प्रतिशत खर्च करते हुए योजनाओं का सीधा लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि सीडीपीओ के 106 पद, महिला पर्यवेक्षिका के 433 पद, आंगनबाड़ी सेविका के 583 पद एवं आंगनबाड़ी सहायिका के 897 पद रिक्त हैं।</p>
<p>इन पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाएगी। मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत संरचनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के भीतर मिशन मोड में माडल आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाएं। आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण के लिए सीएसआर एवं डीएमफटी फंड का उपयोग कर पहले जीर्ण-शीर्ण एवं किराए के भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को शिफ्ट कराना सुनिश्चित करें।</p>
<p>सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करें। मुख्यमंत्री ने सखी वन स्टाप सेंटर की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि सखी वन स्टाप सेंटर के उपयोग के प्रति महिलाओं को जागरूक कर विभिन्न हिंसा से प्रभावित महिलाओं को सहायता प्रदान करें।</p>
<p>साथ ही इसे स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ जोड़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला हेल्पलाइन नंबर को लेकर लोगों में जागरूकता लाएं और इस नंबर पर प्राप्त शिकायतों को तत्परता के साथ निराकरण करना सुनिश्चित की जाए।</p>
<p>बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह, निदेशक समाज कल्याण किरण कुमार पासी, विभाग के अपर सचिव अभय नंदन अम्बष्ट, निदेशक आइसीपीएस विजय कुमार सिन्हा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p><strong>सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में हो बिजली, शौचालय और पेयजल की व्यवस्था</strong><br />
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली, शौचालय एवं पेयजल आपूर्ति की बेहतर सुविधा सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि किराए पर संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकारी विद्यालय परिसरों में शिफ्ट किए जाने का कार्य भी विभाग द्वारा किया जा रहा है।</p>
<p>इससे बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा और इसका सकारात्मक प्रभाव बच्चों पर पड़ेगा। मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि पोषण अभियान योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी सेविकाओं को मोबाइल फोन उपलब्ध कराने के पश्चात पोषण ट्रैकर पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक दिन की गतिविधियों को अपलोड किया जा रहा है। इससे पर्यवेक्षण में आसानी हो रही है।</p>
<p><strong>छूटे हुए पात्र लाभुकों को मिले मंइयां सम्मान एवं सर्वजन पेंशन योजना का लाभ</strong><br />
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्धारित आयु वर्ग के सभी पात्र व्यक्तियों को पेंशन योजना का लाभ मिले। जो पात्र लाभुक छूटे हुए हैं, उन्हें भी शीघ्र योजना से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने मंइयां सम्मान योजना की कार्य प्रगति की भी जानकारी ली एवं अहर्ता पूरा करने वाले छूटे हुए लाभुकों को भी इस योजना से जोड़ने के निर्देश दिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान: महिलाओं को जागरूक कर समाज में फैलाई नई चेतना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 May 2026 11:46:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Child Marriage]]></category>
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					<description><![CDATA[पॉक्सो एक्ट, बाल विवाह प्रतिषेध कानून और हेल्पलाइन सेवाओं की दी गई जानकारी रायपुर प्रदेश में संचालित बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेश में लगातार जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पॉक्सो एक्ट, बाल विवाह प्रतिषेध कानून और हेल्पलाइन सेवाओं की दी गई जानकारी<br />
रायपुर</strong><br />
प्रदेश में संचालित बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेश में लगातार जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में बाल विवाह रोकथाम, महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।</p>
<p>इसी क्रम में 21 मई को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला के जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्डलाइन की संयुक्त टीम द्वारा वैभव संकुल संगठन दनगढ़ में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को पॉक्सो एक्ट एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।<br />
कार्यक्रम में बताया गया कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का हनन करने के साथ ही उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। महिलाओं को जागरूक करते हुए बताया गया कि बालिकाओं की वैधानिक विवाह आयु 18 वर्ष तथा बालकों की 21 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही विवाह किया जाना कानूनन मान्य है।</p>
<p>इस दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 एवं आपातकालीन सेवा 112 की जानकारी देते हुए किसी भी आपात स्थिति या बाल संरक्षण से जुड़ी समस्या की सूचना तत्काल देने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही समाज से बाल विवाह जैसी कुरीति को समाप्त करने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया गया।</p>
<p>प्रदेश सरकार द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को बाल अधिकारों, महिला सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।</p>
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		<title>बाल विवाह के खिलाफ छत्तीसगढ़ की निर्णायक लड़ाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 May 2026 17:46:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Child Marriage]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर छत्तीसगढ़ में बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान को केंद्र में रखकर शुरू किया गया बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब सामाजिक बदलाव की बड़ी मिसाल बनती जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify">छत्तीसगढ़ में बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान को केंद्र में रखकर शुरू किया गया बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब सामाजिक बदलाव की बड़ी मिसाल बनती जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बना दिया है। गांव-गांव में जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के जरिए बाल विवाह जैसी कुरीति पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में लगातार ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। 10 मार्च 2024 से शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बाल विवाह रोकना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना भी है।</p>
<p style="text-align:justify">महिला एवं बाल विकास मंत्री&nbsp; लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, मितानिनें और महिला स्व-सहायता समूह लगातार जमीनी स्तर पर लोगों को जागरूक करने में जुटे हुए हैं। यही वजह है कि अभियान अब प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर सामाजिक चेतना का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।</p>
<p style="text-align:justify">राज्य सरकार ने वर्ष 2028-29 तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। चरणबद्ध योजना के तहत 2025-26 तक 40 प्रतिशत, 2026-27 तक 60 प्रतिशत, 2027-28 तक 80 प्रतिशत और 2028-29 तक सभी ग्राम पंचायतों तथा नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की तैयारी है। अभियान की प्रगति भी उत्साहजनक रही है।&nbsp;</p>
<p style="text-align:justify">31 मार्च 2026 तक राज्य की 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों में से 7 हजार 498 पंचायतें बाल विवाह मुक्त घोषित की जा चुकी हैं, जो कुल पंचायतों का लगभग 64 प्रतिशत है। वहीं 196 नगरीय निकायों में से 85 निकाय इस श्रेणी में शामिल हो चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify">राज्य के बालोद जिले ने इस दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त घोषित कराया है। प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से मिली यह सफलता अब दूसरे जिलों के लिए प्रेरणा बन रही है।</p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटियां ही होंगी। इसी सोच के साथ सरकार बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता के साथ लागू कर रही है।&nbsp;</p>
<p style="text-align:justify">कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं की पढ़ाई प्रभावित होती है, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ते हैं और उनके भविष्य की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। यही कारण है कि अभियान के तहत किशोरियों और अभिभावकों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify">पंचायत आधारित जनभागीदारी, सतत निगरानी और सामाजिक जागरूकता के प्रभावी मॉडल के कारण बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। राज्य सरकार का यह प्रयास केवल एक सामाजिक कुरीति को समाप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेटियों के सम्मान और सशक्तिकरण का व्यापक संकल्प बनकर उभर रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>बूंदी में बाल विवाह का पर्दाफाश, 7 मासूम बच्चियों की शादी रुकवाई गई</title>
		<link>https://newsx24.com/child-marriages-foiled-in-bundi-weddings-of-7-innocent-girls-stopped/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 14:21:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Child Marriage]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; बूंदी राजस्थान के बूंदी जिले में मासूम बचपन को कुचलने की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. यहां नीम का खेड़ा गांव में 10 से 13 साल की 7 बच्चियों को &#039;नए घर&#039; ले जाने का लालच देकर मंडप में बैठा दिया गया. सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली इन बच्चियों को जब एहसास हुआ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp; <strong>बूंदी</strong></p>
<p>राजस्थान के बूंदी जिले में मासूम बचपन को कुचलने की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. यहां नीम का खेड़ा गांव में 10 से 13 साल की 7 बच्चियों को &#039;नए घर&#039; ले जाने का लालच देकर मंडप में बैठा दिया गया. सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली इन बच्चियों को जब एहसास हुआ कि उनका बाल विवाह कराया जा रहा है तो वे फूट-फूट कर रोने लगीं.</p>
<p><strong>मंडप में गूंजी मासूमों की सिसकियां</strong><br />
बच्चियों ने काउंसलिंग में अधिकारियों को बताया कि परिजनों ने उन्हें कुछ दिन के लिए दूसरे घर जाने की बात कही थी. लेकिन जब मंडप में पंडित ने फेरे शुरू कराए और उन्हें एक अजनबी युवक के साथ बैठाया गया तो उनके होश उड़ गए. खुशी से सजाए गए मंडप में मासूमों की सिसकियां गूंजने लगीं. समाज की भीड़ के आगे उनकी आवाज दब रही थी लेकिन तभी प्रशासन वहां देवदूत बनकर पहुंच गया.</p>
<p><strong>टीम का एक्शन और 50 शादियों पर रोक</strong><br />
सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की टीम ने मौके पर पहुंचकर इन सात बाल विवाह को तुरंत रुकवा दिया. बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि हाल ही में चलाए गए अभियान के तहत 14 बाल विवाह रोके गए हैं. नैनवा, हिंडोली, दबलाना जैसे गांवों में दबिश दी गई. पिछले 4 महीनों में ही बूंदी प्रशासन ने 50 मासूमों की शादियां रुकवाकर उनकी जिंदगी बर्बाद होने से बचाई है.</p>
<p><strong>परंपरा के नाम पर बचपन की बलि</strong><br />
यह मामला भील समाज से जुड़ा है जहां बच्चों के रिश्ते जन्म के समय ही तय कर दिए जाते हैं और आखातीज जैसे मौकों पर एक साथ कई शादियां कर दी जाती हैं. प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बाद अब समाज में डर का माहौल है. सभी मामलों में कोर्ट से स्टे प्राप्त कर लिया गया है जिससे आगे इन शादियों को नहीं कराया जा सकेगा.</p>
<p><strong>&quot;हमें शादी नहीं करनी, हमें पढ़ना है&quot;</strong><br />
जब बाल कल्याण समिति के सामने माता-पिता अपनी बच्चियों को वापस ले जाने के लिए गिड़गिड़ाने लगे तो बच्चियों ने गजब की हिम्मत दिखाई. डरी-सहमी होने के बावजूद उन्होंने साफ कह दिया कि वे अपने परिजनों के साथ नहीं जाना चाहतीं. बच्चियों का सिर्फ एक ही सपना था कि उन्हें आगे पढ़ना है. प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बाल विवाह करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी और समाज को भी इस कुरीति के खिलाफ जागरूक होना होगा.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>Manendragarh प्रशासन का एक्शन: 3 बाल विवाह रुकवाए, परिवारों को दी सख्त समझाइश</title>
		<link>https://newsx24.com/manendragarh-administration-takes-action-3-child-marriages-stopped-families-given-strict-admonition/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 13:41:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Child Marriage]]></category>
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					<description><![CDATA[मनेन्द्रगढ़. जिले में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर त्वरित कार्रवाई करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर प्राप्त सूचना के आधार पर ग्राम कोडांगी (थाना खड़गवां), ग्राम पंचायत केलुआ एवं ग्राम पंचायत दुगला थाना केल्हारी में होने वाले बाल विवाह को समय रहते रोका गया। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मनेन्द्रगढ़.</strong></p>
<p>जिले में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर त्वरित कार्रवाई करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर प्राप्त सूचना के आधार पर ग्राम कोडांगी (थाना खड़गवां), ग्राम पंचायत केलुआ एवं ग्राम पंचायत दुगला थाना केल्हारी में होने वाले बाल विवाह को समय रहते रोका गया।</p>
<p>सूचना मिलते ही कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा के मार्गदर्शन में जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने तत्काल संयुक्त टीम का गठन किया। ब्लॉक परियोजना अधिकारी के नेतृत्व में गठित इस टीम में सेक्टर सुपरवाइजर, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन, थाना केल्हारी एवं थाना खड़गवां का पुलिस बल, विधिक सेवा प्राधिकरण बैकुंठपुर के सदस्य, सरपंच और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शामिल रहे।</p>
<p><strong>बाल विवाह पर जानिए क्या है सजा का प्रावधान</strong><br />
टीम ने तीनों स्थानों पर पहुंचकर बाल विवाह की प्रक्रिया को रुकवाया और संबंधित परिवारों को समझाइश दी। अधिकारियों ने मौके पर ही बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसके कानूनी पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक और कानूनी अपराध है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत जानकारी देते हुए बताया गया कि इस प्रकार के विवाह में शामिल किसी भी व्यक्ति जैसे पंडित, पुरोहित, टेंट संचालक, रिश्तेदार या अन्य सहयोगी को 2 वर्ष तक की सजा और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही यह भी बताया गया कि विवाह की वैधानिक आयु बालक के लिए 21 वर्ष और बालिका के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है।</p>
<p><strong>बाल विवाह हाेने पर टोल फ्री नंबर 1098 पर दें सूचना</strong><br />
कार्रवाई के दौरान संबंधित प्रकरणों में पंचनामा एवं प्रतिवेदन भी तैयार किया गया। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं और ऐसी किसी भी सूचना को तत्काल टोल फ्री नंबर 1098 पर साझा करें। इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ने न केवल तीन बाल विवाहों को रोककर नाबालिगों के भविष्य को सुरक्षित किया है, बल्कि समाज में एक सशक्त संदेश भी दिया है कि कानून के विरुद्ध किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>जिला प्रशासन की सतर्कता से रुका बाल विवाह, कटनी शहर और ढीमरखेड़ा में 3 बाल विवाह रुकवाए</title>
		<link>https://newsx24.com/the-district-administrations-vigilance-prevented-child-marriages-preventing-three-child-marriages-in-katni-city-and-dhimarkheda/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 07:12:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Child Marriage]]></category>
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					<description><![CDATA[जिला प्रशासन की टीम की सजगता और सतर्कता से रूका बाल विवाह, कटनी शहर में 1 और ढीमरखेड़ा क्षेत्र में हो रहे 2 बाल विवाह को प्रशासन ने रूकवाया कटनी अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त पर संभावित बाल विवाह की रोकथाम के लिए कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा गठित कोर ग्रुप पूरे जिले सतर्क और सजग &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जिला प्रशासन की टीम की सजगता और सतर्कता से रूका बाल विवाह, कटनी शहर में 1 और ढीमरखेड़ा क्षेत्र में हो रहे 2 बाल विवाह को प्रशासन ने रूकवाया</strong></p>
<p><strong>कटनी</strong><br />
अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त पर संभावित बाल विवाह की रोकथाम के लिए कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा गठित कोर ग्रुप पूरे जिले सतर्क और सजग रहा। जिससे जिला प्रशासन की की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए, कटनी शहर और ढीमरखेड़ा क्षेत्र में बाल विवाह की गुप्त सूचना मिलने पर फौरी तौर पर पहुंचे अधिकारियों की टीम ने दोनों स्थानों में हो रहे 3 बाल विवाह को रुकवाया और परिजनों को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।</p>
<p>कलेक्टर&nbsp; तिवारी के निर्देश पर इस साल संभावित बाल विवाह पर रोक लगाने एक सशक्&zwj;त, समन्वित और बहुस्&zwj;तरीय व्&zwj;यापक कार्ययोजना के तहत संबंधित एसडीएम की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कोर टीम का गठन किया गया और जिला व विकासखंड स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित कर निगरानी तंत्र को पुख्ता और मजबूत कर पैनी नजर रखी गई। इसी वजह से समय रहते प्रशासन की सजगता से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने में कामयाबी मिली।</p>
<p><strong>संयुक्त कार्यवाही</strong><br />
महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचना प्राप्त हुई कि कटनी के आधार कॉप में एक 18 वर्ष से कम आयु की बालिका का विवाह किया जा रहा है। सूचना प्राप्त होने पर महिला एवं बाल विकास विभाग एवं कोतवाली थाना की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। टीम द्वारा बालिका एवं बालक के आयु सम्बन्धी दस्तावेजों की जाँच कर पाया गया कि बालिका की आयु 16 वर्ष है और बालक की आयु 22 वर्ष है। अधिकारियों द्वारा परिजनों, बारातियों, बैंड, कैटरिंग कर्मियों,कैमरा मैन को बताया गया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु की बालिका का विवाह बाल विवाह है, जो अपराध की श्रेणी में आता है। संयुक्त टीम के परामर्श उपरांत परिजन बालिका के 18 वर्ष के होने के उपरांत विवाह करने पर सहमत हो गये ।संयुक्त टीम में निधि पटेल, पर्यवेक्षक, रजनीश सोनी, महिला एवं बाल विकास, सुनील सिंह, कोतवाली थाना आदि सम्मिलित रहे।</p>
<p><strong>ढीमरखेड़ा में रोके गये दो बाल विवाह</strong></p>
<p><strong>विकासखंड ढीमरखेड़ा में ग्राम</strong><br />
संकुई के दो 21 वर्ष से कम आयु के बालकों का विवाह किया जा रहा था। बालकों का विवाह जिन बालिकाओं से तय हुआ था,।उनमें से एक बालिका ग्राम पिपरिया सहलावन की थी, जिसकी आयु 19 वर्ष थी। वहीं दूसरी बालिका जो ग्राम बरेली की थी कि ,आयु 20 वर्ष पाई गई। अंजना पटेल, पर्यवेक्षक एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की टीम द्वारा दोनो बालकों के परिजनों को समझाया गया कि विवाह के लिए वर की वैधानिक आयु 21 वर्ष है। इससे कम आयु में बालक का विवाह करना कानूनन अपराध है। मौके पर टीम द्वारा पंचनामा भी तैयार किया गया। परिजनों द्वारा बालकों की आयु 21 वर्ष होने पर विवाह करने की सहमति दी गई।</p>
]]></content:encoded>
					
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