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	<title>Civic Polls &#8211; NewsX 24</title>
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	<title>Civic Polls &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>पंजाब निकाय चुनाव में गजब नजारे, कहीं टॉस तो कहीं पर्ची निकालकर चुने गए विजेता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 May 2026 07:01:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Civic Polls]]></category>
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					<description><![CDATA[जालंधर. निकाय चुनावों में इस बार कई परिवारों ने राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ दिखाई। कहीं पति-पत्नी और बेटे ने जीत का परचम लहराया तो कहीं सास ने चुनावी मैदान मार लिया। वहीं कुछ राजनीतिक परिवारों को हार का भी सामना करना पड़ा। पंजाब के अलग-अलग शहरों से निकले ये दिलचस्प नतीजे चर्चा का विषय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जालंधर.</strong></p>
<p>निकाय चुनावों में इस बार कई परिवारों ने राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ दिखाई। कहीं पति-पत्नी और बेटे ने जीत का परचम लहराया तो कहीं सास ने चुनावी मैदान मार लिया। वहीं कुछ राजनीतिक परिवारों को हार का भी सामना करना पड़ा। पंजाब के अलग-अलग शहरों से निकले ये दिलचस्प नतीजे चर्चा का विषय बने रहे।</p>
<p>दोराहा नगर कौंसिल चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सुदर्शन कुमार शर्मा ने लगातार सातवीं बार जीत दर्ज कर नया रिकॉर्ड कायम किया। खास बात यह रही कि उनके परिवार ने भी चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया। अलग-अलग वार्डों से चुनाव लड़ रहीं उनकी पत्नी प्रिया शर्मा और पुत्र अनमोल शर्मा ने भी जीत हासिल की। तीनों की जीत के बाद दोराहा में पूरे परिवार की राजनीतिक पकड़ चर्चा में रही। मोहाली नगर निगम चुनाव में भी पति-पत्नी की जोड़ी ने जीत दर्ज की। वार्ड नंबर चार से हरविंदर सिंह और वार्ड नंबर तीन से उनकी पत्नी गुरमीत कौर विजयी रहीं। उधर, कोटकपूरा में भी एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने जीत दर्ज कर सबका ध्यान खींचा। वार्ड नंबर 10 से आम आदमी पार्टी के स्वतंत्र जोशी विजयी रहे, जबकि वार्ड 11 से उनकी भाभी विजयप्रीत जोशी और वार्ड 16 से उनके बेटे एरन जोशी ने भी चुनाव जीत लिया। बठिंडा नगर निगम चुनाव में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संघवी की सास हरबंस कौर ने जीत हासिल कर राजनीतिक हलकों में चर्चा बटोरी।</p>
<p><strong>मानसा में टास व पर्ची से हुआ विजेता का फैसला</strong><br />
मानसा की नगर पंचायत जोगा और बोहा मैदो उम्मीदवार टास व पर्ची डालने के बाद जीते। जोगा के वार्ड नंबर एक में दो उम्मीदवारों को 141-141 वोट मिले। इसके बादटास में सीपीआई की सुखजिंदर कौर विजेता बनीं। बोहा के वार्ड नंबर 10 में दो उम्मीदवारों को 256-256 वोट मिलने के बाद डब्बे में से पर्ची निकाली गई। इसमें अकाली दल के गुरमीत सिंह विजेता बने। उधर, बटाला में आम आदमी पार्टी के कार्यकारी प्रधान शैरी कलसी के परिवार को झटका लगा। पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ रहे उनके भाई अमृत कलसी और बहन उत्तमजीत कौर को कांग्रेस उम्मीदवारों के हाथों हार का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong>विनिंग नंबर है 65</strong><br />
मोहाली नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 34 से आम आदमी पार्टी के सुखदेव सिंह पटवारी 65 वोट से जीते। वे पिछले निगम चुनाव में भी 65 वोट से ही जीते थे।</p>
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		<title>पंजाब निकाय चुनाव में बड़ा झटका, 713 नामांकन खारिज; मैदान में बचे 10,096 उम्मीदवार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 May 2026 12:51:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Civic Polls]]></category>
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					<description><![CDATA[चंडीगढ़. पंजाब में 26 मई को होने वाले निकाय चुनाव को लेकर स्क्रुटनी के बाद योग्य उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी गई है। राज्य चुनाव आयोग से मिली जानकारी अनुसार नगर निगम नगर कौंसिल और नगर पंचायत की 105 सीटों के लिए कुल 10809 आवेदन जमा हुए थे। मंगलवार शाम तक आवेदन वापस लेने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चंडीगढ़.</strong></p>
<p>पंजाब में 26 मई को होने वाले निकाय चुनाव को लेकर स्क्रुटनी के बाद योग्य उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी गई है। राज्य चुनाव आयोग से मिली जानकारी अनुसार नगर निगम नगर कौंसिल और नगर पंचायत की 105 सीटों के लिए कुल 10809 आवेदन जमा हुए थे।</p>
<p>मंगलवार शाम तक आवेदन वापस लेने की अंतिम सीमा रखी गई है। सोमवार यानी 18 मई को चुनाव आयुक्त की ओर से स्क्रुटनी के बाद 10096 उम्मीदवार ही अब मैदान में रह गए हैं। स्क्रुटनी में 713 आवेदनों को विभिन्न कारणों से रद्द कर दिया गया है। जानकारी अनुसार आठ नगर निगम के चुनाव के लिए 2154 आवेदन आए जिसमें से 151 विभिन्न कारणों से कारण रद्द कर दिए गए । ऐसे में 2003 योग्य उम्मीदवार अब मैदान में रह गए हैं। उधर नगर कौंसिल की सीटों के लिए 7334 आवेदन जमा हुए जिसमें से 447 को रद्द कर दिया गया।</p>
<p>अब चुनावी मैदान में 6887 उम्मीदवार ही बचे हैं। उधर नगर पंचायत के लिए कुल 1321 आवेदन आए जिसमें से 115 को रद्द कर दिया गया और अब मैदान में 1206 उम्मीदवार ही बचे हैं। मंगलवार को आवेदन लेने की अंतिम तिथि है। इसके बाद चुनाव में उम्मीदवारों की असली संख्या का पता चलेगा। आवेदन खारिज किए जाने को लेकर पंजाब के विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन भी जारी है। पंजाब में 26 मई को 105 सीटों के लिए निकाय चुनाव होने जा रहे हैं, जिसमें 29 मई को मतदान के बाद मतगणना और रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा।</p>
<p>चुनाव आयोग की ओर से इन चुनाव में 35000 के करीब कर्मचारियों और साडे 35000 सुरक्षा कर्मियों को चुनावी ड्यूटी पर तैनात किया गया है। चुनाव आयोग की ओर से इस बार मतदान वैलेट पेपर से करने का फैसला लिया गया है। इसे लेकर भी विपक्षी पार्टियों लगातार विरोध कर रही है।</p>
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		<title>Ambala निकाय चुनाव: 11 पुराने-9 नए चेहरे, Bharatiya Janata Party ने बाहरी उम्मीदवारों पर भी जताया भरोसा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:01:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[Civic Polls]]></category>
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					<description><![CDATA[अंबाला शहर. लंबे इंतजार के बाद वीरवार सुबह जैसे ही भाजपा ने 20 वार्डों के अपने पार्षद उम्मीदवारों की सूची जारी की, शहर की सियासत में हलचल तेज हो गई। यह सूची सिर्फ नामों का एलान नहीं, बल्कि उस राजनीतिक प्रयोग का खाका है जिसमें वफादारी से ज्यादा विजय क्षमता को तवज्जो दी गई है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अंबाला शहर.</strong></p>
<p>लंबे इंतजार के बाद वीरवार सुबह जैसे ही भाजपा ने 20 वार्डों के अपने पार्षद उम्मीदवारों की सूची जारी की, शहर की सियासत में हलचल तेज हो गई। यह सूची सिर्फ नामों का एलान नहीं, बल्कि उस राजनीतिक प्रयोग का खाका है जिसमें वफादारी से ज्यादा विजय क्षमता को तवज्जो दी गई है।</p>
<p>इस बार का चुनाव सीधे-सीधे भाजपा बनाम कांग्रेस का मुकाबला जरूर दिख रहा है, लेकिन असल कहानी इससे कहीं ज्यादा पेचीदा है। वजह टिकट वितरण में पुराने चेहरों की वापसी, विपक्ष से आए नेताओं को मौका और नए चेहरों पर जोखिम भरा भरोसा। भाजपा की सूची में जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है उनमें 11 ने पिछला चुनाव लड़ा था। इनमें से दो हार गए थे। 9 जितने वालों में एक कांग्रेस और एक हरियाणा जनचेतना पार्टी जोकि भाजपा में विलय हो गई और शेष 7 भाजपाई ही थे। अब जब भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं, तो सियासत का फोकस टिकट से हटकर टक्कर पर आ गया है। हर वार्ड में समीकरण अलग हैं कहीं जातीय गणित, कहीं व्यक्तिगत पकड़, तो कहीं विकास के मुद्दे चुनाव की दिशा तय करेंगे। इस बार का चुनाव एक तरह से हाइब्रिड माडल बन गया है जहां पुराने नेता, नए चेहरे और दल-बदल की राजनीति एक साथ मैदान में है।</p>
<p><strong>पुराने सिपाहियों पर भरोसा, लेकिन पूरी तरह नहीं&#8230;.</strong><br />
भाजपा ने पिछले चुनाव में जीत दर्ज करने सातों चेहरों को दोबारा मैदान में उतारकर यह संकेत दिया है कि पार्टी अपने विनिंग काम्बिनेशन को पूरी तरह छोड़ने के मूड में नहीं है। मन्नी आनंद, अर्चना छिब्बर, मोनिका मल, मीना ढिंगरा, शोभा पूनिया, हितेष जैन और प्रीति सूद के पति दिनेश सूद, जैसे नाम फिर से टिकट पाकर यह साबित करते हैं कि पार्टी को अपने पुराने प्रदर्शन पर भरोसा है। लेकिन दिलचस्प यह है कि दो जीतने वाले चेहरों को किनारे कर नए समीकरण बनाए गए यहीं से राजनीति का असली खेल शुरू होता है।</p>
<p><strong>दल-बदलुओं पर दांव या मजबूरी&#8230;</strong><br />
इस सूची का सबसे बड़ा संदेश है दल बदलने वालों के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं। कांग्रेस से आए राजेश मेहता, हरियाणा जनचेतना और हरियाणा डेमोक्रेटिक मोर्चों से जुड़े चेहरे, अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। यह रणनीति साफ करती है कि भाजपा इस बार वोट बैंक इंपोर्ट करने की कोशिश कर रही है।यानी जहां संगठन कमजोर है, वहां विपक्ष के मजबूत चेहरों को शामिल कर सीधे मुकाबले को अपने पक्ष में मोड़ने की तैयारी है।</p>
<p><strong>दोधारी तलवार, पुरानों को टिकट ने मिलने से बेचैनी</strong><br />
लेकिन भाजपा का यह दांव दोधारी तलवार भी है स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष और बगावत का खतरा भी उतना ही बड़ा है। पांच पूर्व पार्षदों को टिकट नहीं मिली। इनमें से एक ने तो खुद नामांकन नहीं भरा था, एक ने नामांकन भरा था लेकिन चुनाव नहीं लड़ने की बात भी खुद ही कह दी थी। तीन ऐसे हैं जिन्होंने टिकट मांगी थी लेकिन नहीं मिली। इनमें से एक भाजपा का सबसे पुराना चेहरा भी शामिल है जबकि दो चेहरे हरियाणा जनचेतना से चुनाव जीतने वाले पूर्व पार्षद हैं। लेकिन इनके बदले भाजपा ने इसी पार्टी से जुड़े बाद और अब भाजपा का हिस्सा बने दो अन्य उम्मीदवारों को टिकट देकर संतुलन भी साधने का काम किया है।</p>
<p><strong>परिवारवाद की सॉफ्ट एंट्री</strong><br />
सूची में कुछ ऐसे नाम भी हैं जो सीधे तौर पर नहीं, लेकिन रिश्तों के जरिए राजनीति में उतर रहे हैं। शिवानी सूद और दिनेश सूद, गुरप्रीत साहनी जैसे उदाहरण बताते हैं कि पार्टी अब फैमिली कनेक्शन को भी चुनावी पूंजी मान रही है। यह ट्रेंड बताता है कि स्थानीय पहचान और नेटवर्क को प्राथमिकता दी जा रही है, चाहे उम्मीदवार खुद पहली बार मैदान में क्यों न हो।</p>
<p><strong>गुटबाजी की झलक भी साफ</strong><br />
टिकट वितरण में अलग-अलग गुटों का संतुलन भी नजर आता है। कार्तिकेय शर्मा गुट से जुड़े दो उम्मीदवारों को टिकट मिलना इस बात का संकेत है कि पार्टी ने अंदरूनी समीकरणों को साधने की कोशिश की है। यह संतुलन फिलहाल कागज पर तो ठीक दिखता है, लेकिन चुनावी मैदान में यही गुटबाजी कभी-कभी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है।</p>
<p><strong>नए चेहरों पर रिस्क फैक्टर</strong><br />
करीब 9 नए चेहरों को टिकट देकर भाजपा ने यह भी साफ कर दिया है कि वह सिर्फ पुराने फार्मूले पर निर्भर नहीं रहना चाहती। विशाल राणा, वरखा सहोता, वरिंद्र नाथ, गुरविंद्र सिंह, कविता सैनी, कमल अग्रवाल, बीनू गर्ग, सपना रानी, राजकुमार गुप्ता उम्मीदवारों को मौका देकर पार्टी ने फ्रेश फेस का कार्ड भी खेला है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये नए चेहरे जमीन पर उतनी ही मजबूती दिखा पाएंगे, जितनी उम्मीद पार्टी कर रही है?</p>
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