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	<title>crude oil &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>Crude Oil Production: तेल बाजार में बड़ा खेल! 7 देशों के फैसले से बदल सकते हैं कच्चे तेल के दाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 04:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन लगभग खत्म हो गई है, दुनिया की तेल जरूरतों के बड़े हिस्से की आवाजाही और सप्लाई के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस से लदे जहाज निकलने लगे. इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्ली</strong></p>
<p>मिडिल ईस्ट टेंशन लगभग खत्म हो गई है, दुनिया की तेल जरूरतों के बड़े हिस्से की आवाजाही और सप्लाई के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस से लदे जहाज निकलने लगे. इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरते हुए 72 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई।&nbsp;</p>
<p>Crude Oil Price Crash और Hormuz पर हालात सामान्य होने के बीच अब तक एक-दूसरे से लड़ते झगड़ते नजर आने वाले ओपेक+ (OPEC+) देशों ने एक साथ मिलकर बड़ा फैसला लिया है, जो दुनिया के लिए राहत भरा है।&nbsp;</p>
<p><strong>Crude की कीमतों में गिरावट जारी</strong><br />
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है.&nbsp; खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड की कीमत और भी ज्यादा फिसल गई. Brent Crude Oil Price 1 फीसदी के आसपास फिसलकर 71 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था. तो वहीं WTI Crude Oil Price फिसलकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इसके अलावा मर्बन क्रूड ऑयल की कीमत मामूली बढ़त के साथ 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी।</p>
<p><strong>संकट टला, अब आई ये राहत भरी खबर</strong><br />
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बात बनने और बैठकों को लेकर पॉजिटिव संकेतों के बीच पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन तक, दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट खत्म होता नजर आया है. क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट ओपन है और यहां से तेल-गैस के टैंकरों की आवाजाही जारी है. यानी Oil-Gas सप्लाई चेन फिर से सुचारू नजर आ रही है. हालांकि, ये युद्ध पूर्व स्तर से अभी भी नीचे बनी हुई है, लेकिन इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव और गिरावट के रूप में दिखने भी लगा है।&nbsp;</p>
<p>इस बीच एक और राहत भरी खबर ये आई है कि ओपेक+ (OPEC+) देशों ने भी तेल को लेकर बड़ा फैसला किया है. इसमें शामिल सात देशों ने एक साथ मिलकर अगले महीने से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक,&nbsp; सऊदी अरब और रूस की अगुवाई में प्रति दिन 1.88 लाख बैरल एक्स्ट्रा क्रू़ड ऑयल प्रोड्यूश करने को मंजूरी दी गई है. मतलब अब आने वाले समय में तेल पर्याप्त तेल बाजार में सप्लाई होगा. लगातार 5वें महीने इस बढ़ोतरी को लेकर सहमति बनी है।&nbsp;</p>
<p><strong>एक साथ आए ये 7 ओपेक+ देश</strong><br />
गौरतलब है कि बीते कुछ समय में ओपेक+ देशों के बीच उत्पादन कोटा, बाजार हिस्सेदारी और तेल की कीमतों को लेकर बड़े मतभेद देखने को मिल रहे थे. कुछ देश क्रूड प्राइस को लेकर प्रोडक्शन सीमित रखने पर जोर दे रहे थे, तो कुछ उत्पादन में इजाफा कर इनकम बढ़ाने पर फोकस कर रहे थे. लेकिन इन मतभेदों के बाद अब ओपेक+ में शामिल देश सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने एकमत से उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है।&nbsp;</p>
<p>OPEC+ देशों (तेल उत्पादक) देशों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, &#039;बाजार की स्थितियों पर नजर रखना और उनका आकलन करना जारी रखा जाएगा, इसके अलावा तेल बाजार की स्थिरता को बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत सतर्क दृष्टिकोण अपनाने को महत्व दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या भारत में सस्ता होगा Petrol-Diesel?&nbsp;</strong><br />
अगर तेल उत्पादक देशों की सहमति के मुताबिक, अगले महीने से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल क्रूज प्रोडक्शन बढ़या जाता है, तो निश्चित तौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा और इनमें गिरावट देखने को मिल सकती है. Crude Price Fall से इसके आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों राहत मिलेगी, क्योंकि OMCs की लागत कम होगी और इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद भी बढ़ेगी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>हालांकि, ये तुरंत सस्ता होगा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि देश में Petrol-Diesel कितना और कब सस्ता होगा, ये कई कारकों पर निर्भर करेगा. भारत में फ्यूल प्राइस कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव, रिफाइनिंग कॉस्ट, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और राज्यों में लागू VAT पर भी निर्भर करते हैं. देखने वाली बात ये होगी कि प्रोडक्शन बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कितने समय के लिए नीचे बनी रहती हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>पेट्रोलियम मंत्री ने दिए थे ये संकेत&nbsp;</strong><br />
मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी भरकम नुकसान के बीच भारत में करीब चार साल बाद अचानक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चार बार में 7 रुपये प्रति लीटर के आसपास का इजाफा किया गया था. अब होर्मुज ओपन होने और कच्चा तेल सस्ता होने के बीच पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने बीते हफ्ते कीमतों में कटौती के संबंध में तस्वीर साफ की थी।&nbsp;</p>
<p><strong>Hardeep Singh Puri ने</strong> कहा था कि निजी क्षेत्र की कंपनियों और OMCs के पास जो शेयर हैं, वे दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए थे, जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, अगर कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इस बारे में अटकलें लगाना मेरे लिए उचित नहीं होगा।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता? सिटी बैंक ने कच्चे तेल पर की बड़ी भविष्यवाणी, आम लोगों को मिल सकती है राहत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 03:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली &#160;दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की किल्लत का दौर अब खत्म होने की कगार पर है. मॉर्गन स्टैनली और गोल्डमैन सॉक्&#8205;स के बाद अब दिग्गज अमेरिकी निवेश बैंक सिटी (Citigroup) ने भी भविष्यवाणी की है कि साल के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
&nbsp;दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की किल्लत का दौर अब खत्म होने की कगार पर है. मॉर्गन स्टैनली और गोल्डमैन सॉक्&zwj;स के बाद अब दिग्गज अमेरिकी निवेश बैंक सिटी (Citigroup) ने भी भविष्यवाणी की है कि साल के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ सकती हैं. अगर ऐसा होता है तो इससे भारतीय तेल कंपनियों पर बोझ कम होगा और देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती हो सकती है।&nbsp;</p>
<p>सिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्&zwj;य पर दोहरी नाकेबंदी जैसी स्थिति बन गई थी. इस वजह से कच्&zwj;चे तेल की सप्&zwj;लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई. लेकिन अब वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम समझौता होने से तनाव कम हुआ है और इस महत्&zwj;वपूर्ण समुद्री रास्&zwj;ते पर जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है. कच्चा तेल पर्याप्&zwj;त मात्रा में उपलब्&zwj;ध है. इस वजह से बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड दूसरी तिमाही में लगभग 30% तक टूटकर 71.92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>भरपूर मात्रा में उपलब्&zwj;ध है कच्&zwj;चा तेल</strong><br />
सिटी बैंक के विश्लेषकों के मुताबिक, तेल बाजार अब तेजी से अपनी पुरानी और सामान्य स्थिति में लौट रहा है. होर्मुज रूट खुलने से रिफाइनरियों को भरपूर कच्चा तेल मिल रहा है. दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश चीन फिलहाल बाजार से थोड़ी दूरी बनाए हुए है, जिससे कच्चे तेल की फिजिकल मांग कमजोर हुई है. वैश्विक तेल भंडारों में उम्मीद के मुकाबले बेहद कम गिरावट दर्ज की गई है, यानी स्टॉक में तेल की कोई कमी नहीं है।&nbsp;</p>
<p><strong>$60-65 के दायरे में आएगा ब्रेंट क्रूड</strong><br />
सिटी के विश्लेषकों का अनुमान है कि गर्मियों के दौरान अगर तेल की कीमतों में कोई अस्थायी तेजी आती भी है, तो उसे केवल बिकवाली का अवसर माना जाना चाहिए क्योंकि अंततः कीमतों को नीचे ही आना है. बैंक के मुताबिक, साल के अंत तक ब्रेंट क्रूड आसानी से 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच जाएगा।&nbsp;</p>
<p>केवल सिटी ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य बड़े वित्तीय संस्थान भी कच्&zwj;चे तेल में गिरावट का अनुमान जता चुके हैं. गोल्डमैन सॉक्&zwj;स ने कहा था कि ईरान विवाद शांत होने के बाद बाजार में फिर से ओवरसप्&zwj;लाई की स्थिति बन जाएगी. वहीं, मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) भी पिछले कुछ हफ्तों में दो बार कच्चे तेल के अपने अनुमानित दामों में कटौती कर चुका है।&nbsp;</p>
<p><strong>भारत के लिए इसके क्या मायने हैं</strong>?<br />
भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का $60 के स्तर पर आना भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकारी तेल कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं होगा. कच्चे तेल के दाम कम होने से कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन बढ़ेगा. इससे कंपनियों को पेट्रोल और डीजल का रेट घटाने का मौका मिलेगा।&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>Petrol Diesel Price Today: US-ईरान डील के बाद भी नहीं मिली राहत, जानें 19 जून को आपके शहर में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:33:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है क्या अब भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा? इस बीच सरकारी तेल कंपनियों ने आज&#160; के लिए पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं. आज पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई खास बदलाव नहीं हुआ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है क्या अब भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा? इस बीच सरकारी तेल कंपनियों ने आज&nbsp; के लिए पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं. आज पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है. ऐसे में गाड़ी की टंकी फुल कराने से पहले आइए जानते हैं आज आपके शहर में पेट्रोल-डीजल किस कीमत पर मिल रहा है और क्या कच्चे तेल की गिरती कीमतों का फायदा जल्द ग्राहकों तक पहुंचेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>देश के बड़े शहरों में क्या हैं नए रेट?</strong><br />
सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी ताजा कीमतों के मुताबिक, आज पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;<strong> &nbsp; दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.<br />
&nbsp; &nbsp; मुंबई में पेट्रोल 111.18 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.<br />
&nbsp; &nbsp; कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है.<br />
&nbsp; &nbsp; चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.</strong></p>
<p>कुछ शहरों में मामूली बदलाव देखने को मिला है. गुरुग्राम, नोएडा, जयपुर और हैदराबाद में कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि भुवनेश्वर और लखनऊ में पेट्रोल-डीजल थोड़ा सस्ता हुआ है।</p>
<p><strong>कच्चा तेल&nbsp; 79 डॉलर के करीब, एक हफ्ते में 9% की बड़ी गिरावट</strong><br />
ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है. ब्रेंट क्रूड करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है.पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड में 9% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटों में से एक है।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल? मंत्री ने दिया जवाब</strong><br />
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत कम नहीं होंगी.पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि घरेलू ईंधन कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं. इसके अलावा परिवहन लागत, बाजार की स्थिति और पहले खरीदे गए कच्चे तेल की लागत जैसे कई अन्य कारक भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।&nbsp;</p>
<p>सुरेश गोपी के मुताबिक, कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल भारत तक पहुंचने में समय लेता है. यह तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत आता है और वहां जहाजों की आवाजाही सामान्य होने में भी कुछ समय लगेगा. मंत्री ने साफ कहा कि हाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसे केवल इसलिए तुरंत वापस नहीं लिया जा सकता क्योंकि ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल कुछ सस्ता हुआ है।&nbsp;</p>
<p><strong>सरकार पर पड़ा 12,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ</strong><br />
सुरेश गोपी ने कहा कि पश्चिम एशिया में इस साल हुए युद्ध के दौरान ग्लोबल ऑयल मार्केट&nbsp; में काफी अस्थिरता देखने को मिली, जिसका असर सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर पड़ा.उन्होंने बताया कि बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ ग्राहकों पर न पड़े, इसके लिए सरकार ने अतिरिक्त लागत का बड़ा हिस्सा खुद उठाया. इसके कारण सरकार को करीब 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।&nbsp;</p>
<p>मंत्री ने यह भी कहा कि ऊंची ईंधन कीमतों के दौरान किसी भी राज्य सरकार ने अपने टैक्स में कटौती करके राजस्व नहीं छोड़ा. केंद्र सरकार को भी देश चलाना है और तेल कंपनियों को भी वित्तीय रूप से मजबूत बनाए रखना जरूरी है।&nbsp;</p>
<p><strong>देशभर में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सामान्य, घबराकर&nbsp; न करें खरीदारी</strong><br />
सरकारी तेल कंपनियों ने कहा है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. रिफाइनरियां भी उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है.फ्यूल की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए तेल सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) लगातार सरप्राइज निरीक्षण कर रहे हैं. नियमों के उल्लंघन पर 14 पेट्रोल पंपों पर जुर्माना लगाया गया है, जबकि 598 पेट्रोल पंपों को मार्केट डिसिप्लिन गाइडलाइंस के उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>आम लोगों को सलाह दी गई है कि अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।&nbsp;</strong></p>
<p><strong>US-Iran शांति समझौते का क्या पड़ा असर?</strong><br />
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता माना जा रहा है.इस समझौते के बाद दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर शुरू हो गई है. यही जलमार्ग दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है।&nbsp;</p>
<p>अमेरिका ईरान युद्ध के दौरान ईरान और अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण इस मार्ग पर तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं. अब हालात सामान्य होने की उम्मीद के साथ बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई है।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या ग्राहकों को जल्द मिलेगा सस्ते तेल का फायदा?</strong><br />
एक्सपर्ट का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर राहत मिल सकती है.हालांकि फिलहाल सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हालिया गिरावट का फायदा ग्राहकों तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है. इसलिए अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बड़ी कटौती की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>कच्चे तेल की कीमतों में आ सकता है बड़ा क्रैश! Fitch ने बताया कब टूट सकते हैं भाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 04:42:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्ली वेस्ट एशिया तनाव के चलते दुनिया को डराने वाले कच्चे तेल की कीमतें क्रैश हो सकती हैं. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि फिच रेटिंग्स ने अनुमान जाहिर करते हुए कहा है कि वैश्विक तेल बाजार दुनिया की कुल तेल-गैस जरूरत के 20% को पूरा करने के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट पर बारीकी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्ली</strong></p>
<p>वेस्ट एशिया तनाव के चलते दुनिया को डराने वाले कच्चे तेल की कीमतें क्रैश हो सकती हैं. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि फिच रेटिंग्स ने अनुमान जाहिर करते हुए कहा है कि वैश्विक तेल बाजार दुनिया की कुल तेल-गैस जरूरत के 20% को पूरा करने के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट पर बारीकी से नजर रख रहा है।&nbsp;</p>
<p>एजेंसी ने लंबे समय से बंद Hormuz Strait के जुलाई 2026 के अंत तक फिर से खुलने का अनुमान जताया है और उम्मीद जताते हुए कहा है कि ऐसा होने पर Oil-Gas सप्लाई चेन<strong> में रुकावट खत्म होते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी।&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p><strong>70 डॉलर पर आ जाएगा कच्चा तेल!<br />
Fitch Ratings की एक रिपोर्ट में होर्मुज</strong> स्ट्रेट के जुलाई 2026 के अंत तक फिर से खुलने के सवाल पर कहा है कि इसका जवाब संभवतः हां है. एजेंसी के ऑयल आउटलुक के मुताबिक, वैश्विक तेल खपत के लगभग पांचवें हिस्से को संभालने वाला यह स्ट्रेटिजिक समुद्री रूट 5 महीने की क्लोजिंग बंद के बाद फिर से खुलेगा।&nbsp;</p>
<p>फिच के मुताबिक, ऐसा होने पर कच्चे तेल की कीमतों में आने वाली तेज गिरावट का जिक्र करते हुए एजेंसी ने कहा कि जुलाई में होर्मुज ओपन होने के बाद सितंबर से ब्रेंट क्रूड की कीमत (Brent Crude Oil Price) गिरकर करीब 70 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>तेजी से बहाल होगी ऑयल सप्लाई</strong><br />
फिच ने अपनी रिपोर्ट में तर्क देते हुए कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा उछाल मुख्य रूप से उत्पादन क्षमता में स्थायी कमी के बजाय सप्लाई चेन में आई रुकावट से जुड़ा है. एजेंसी का मानना ​​है कि युद्ध की वजह से क्षेत्रीय तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है, जिससे शिपिंग रूट्स सामान्य होने पर मिडिल ईस्ट में प्रोडक्शन भी तेजी से बहाल हो सकता है।&nbsp;</p>
<p>Fitch के अनुमानों पर नजर डालें, तो ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत मई-जुलाई के दौरान 100-110 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जबकि अगस्त में यह घटकर करीब 80 डॉलर पर आ जाएगी और सितंबर में Brent Crude Price&nbsp; 70 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>&#039;अनिश्चितता अभी कम नहीं हुई&#039;</strong><br />
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने तेल की कीमतें क्रैश (Crude Oil Price Crash) होने का अनुमान जताने के साथ ही कहा है कि अनिश्चितता का स्तर अभी भी काफी ऊंचा बना हुआ है. अगर होर्मुज उम्मीद से पहले खुल जाता हैं, तो तेल की कीमतें गिरेंगी, लेकिन अगर लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकता है. इससे भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख आयातकों के लिए ऊर्जा लागत में वृद्धि होगी और महंगाई का खतरा बढ़ेगा।&nbsp;</p>
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		<title>होर्मुज संकट में राहत के संकेत! भारतीय शिपिंग को मिलेगा फायदा, कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 03:35:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्&#8205;ली &#160;खुशखबरी! ईंधन का संकट जल्&#8205;द ही खत्&#8205;म होने वाला है. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की संभावना तेजी से बढ़ रही है और माना जा रहा है कि जल्&#8205;द ही दोनों किसी नतीजे पर पहुंचने वाले हैं. समझौते की यह खुशी कच्&#8205;चे तेल की कीमतों पर भी दिख रही है, जो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्&zwj;ली</strong><br />
&nbsp;खुशखबरी! ईंधन का संकट जल्&zwj;द ही खत्&zwj;म होने वाला है. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की संभावना तेजी से बढ़ रही है और माना जा रहा है कि जल्&zwj;द ही दोनों किसी नतीजे पर पहुंचने वाले हैं. समझौते की यह खुशी कच्&zwj;चे तेल की कीमतों पर भी दिख रही है, जो शनिवार सुबह फिसलकर 6 सप्&zwj;ताह यानी डेढ़ महीने के निचले स्&zwj;तर पर पहुंच गया है. माना जा रहा है कि अब होर्मुज का रास्&zwj;ता दोबारा खोला जा सकता है और ईंधन से लदे भारतीय जहाज सरपट भागने लगेंगे. इससे देश में पैदा हुआ क्रूड व गैस का संकट भी जल्&zwj;द ही खत्&zwj;म हो जाएगा।&nbsp;</p>
<p>ग्&zwj;लोबल मार्केट में कच्&zwj;चे तेल की कीमतों में आज 2 फीसदी से भी ज्&zwj;यादा की गिरावट दिख रही है. डब्&zwj;ल्&zwj;यूटीआई का भाव फिसलहर 87.36 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी 91.12 डॉलर प्रति बैरल के भाव चल रही हैं. यह 6 सप्&zwj;ताह का सबसे निचला स्&zwj;तर है. अमेरिका के राष्&zwj;ट्रपति डोनाल्&zwj;ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ शांति समझौते पर अंतिम बातचीत चल रही है. हालांकि, ईरान के विदेशी मंत्री का अब भी कहना है कि कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है. हालांकि, अमेरिका के तेवर देखकर लगता है कि वह ईरान के साथ न्&zwj;यूक्लियर मुद्दे पर दोबारा नए सिरे से बातचीत शुरू कर सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>फिर सस्&zwj;ता हो जाएगा क्रूड</strong><br />
ग्&zwj;लोबल एनर्जी एजेंसियों का कहना है कि होर्मुज के रास्&zwj;ते में सैकड़ों जहाज खड़े-खड़े इंतजार कर रहे हैं. इस पर ईरान और अमेरिका दोनों ही अपना दावा ठोक रहे हैं और किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दे रहे. अगर दोनों में समझौता होता है और होर्मुज से दोबारा कारोबार शुरू होता है तो जल्&zwj;द ही कच्&zwj;चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे जा सकती हैं. फिलहाल इस गतिरोध की वजह से ग्&zwj;लोबल मार्केट में क्रूड का भंडार करीब 2 करोड़ बैरल नीचे आ चुका है. विश्&zwj;व बैंक, आईएमएफ सहित तमाम ग्&zwj;लोबल एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज संकट लंबा खिंचा तो गर्मी के महीने में ईंधन का संकट गहरा सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>भारत को सबसे बड़ी राहत</strong><br />
होर्मुज जलडमरूमध्&zwj;य का रास्&zwj;ता खुलता है तो सबसे ज्&zwj;यादा लाभ भारत को होगा. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्&zwj;सा ईंधन इसी रास्&zwj;ते से मंगाता है. जहाजरानी मंत्रालय में निदेशक ओपेश कुमार शर्मा का कहना है कि भारत के लिए होर्मुज कितना महत्&zwj;वपूर्ण इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हम अपनी कुल जरूरत का करीब 30 फीसदी क्रूड ऑयल इसी रास्&zwj;ते से मंगाते हैं. इतना ही नहीं, कुल एलपीजी आयात का 70 फीसदी भी इसी रास्&zwj;ते से आता है. लिहाजा अगर शांति वार्ता कामयाब होती है और होर्मुज खुलता है तो भारतीय जहाजों के लिए यह सबसे बड़ी राहत होगी।&nbsp;</p>
<p><strong>होर्मुज में अभी हमारे कितने जहाज</strong><br />
ओपेश शर्मा का कहना है कि होर्मुज से अभी भारतीय झंडे वाले 13 जहाजों को ऑपरेट किया जा रहा है. इसमें एक एलपीजी टैंकर से लदा जहाज है, जबकि 5 जहाजों पर कच्&zwj;चे तेल के टैंकर लदे हुए हैं. एक शिप रसायनों से भरा है, जिसका इस्&zwj;तेमाल यूरिया व अन्&zwj;य उर्वरक बनाने में किया जाता है, जबकि 3 कंटेनर लादने वाले शिप हैं और 2 जहाज बल्&zwj;क कैरियर जबकि एक ड्रेगर के रूप में इस रास्&zwj;ते पर खड़ा अपनी बारी का इंतजार कर रहा है. उन्&zwj;होंने बताया कि 2.70 लाख मीट्रिक टन कच्&zwj;चा तेल लादे एक टैंकर निसोस केरोस ने 25-26 मई को सफलतापूर्वक होर्मुज का रास्&zwj;ता पार कर लिया है और इसके 3 जून तक विशाखापत्&zwj;तन बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है।&nbsp;</p>
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		<title>भारत को बड़ी राहत! कच्चे तेल के दाम धड़ाम, अब LPG सप्लाई पर भी नहीं रहेगा संकट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 May 2026 03:34:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्&#8205;ली &#160;कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के कारण सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लुढ़ककर दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 4.55% की गिरावट के साथ 98.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्&zwj;ली</strong><br />
&nbsp;कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के कारण सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लुढ़ककर दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 4.55% की गिरावट के साथ 98.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 4.73% टूटकर 92.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. दोनों ही अनुबंधों के लिए 7 मई के बाद का यह सबसे निचला स्तर है. क्रूड की कीमतों में आई यह गिरावट भारत के लिए बड़ी राहत है।&nbsp;</p>
<p>भारत के लिहाज से सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस संभावित समझौते से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का संकट टल सकता है. तनाव से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और एलएनजी का परिवहन इसी मार्ग से होता था. इस रूट के सुचारू होने से भारत में गैस और तेल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहेगी, जिससे देश में एलपीजी की किल्लत का खतरा पूरी तरह टल जाएगा और आपूर्ति चेन मजबूत होगी।&nbsp;</p>
<p><strong>अमेरिका-ईरान में शांति की उम्मीद से टूटे दाम</strong><br />
तेल की कीमतों में यह बड़ी गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के कारण आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल बना है. ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि दोनों देश एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर &ldquo;काफी हद तक बातचीत पूरी&rdquo; कर चुके हैं. इस समझौते के तहत मध्य पूर्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को दोबारा पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है।&nbsp;</p>
<p>भले ही ते बाजार इस खबर से झूम उठा हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अभी पूरी तरह जश्न मनाना जल्दबाजी होगी. राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों से ईरान के साथ किसी भी समझौते में जल्दबाजी न करने को कहा है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रुकावटों समेत कई जटिल मुद्दों पर दोनों पक्षों में मतभेद अभी भी बरकरार हैं।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>क्या कच्चा तेल $200 बैरल तक जाएगा? ईरान जंग पर एक्सपर्ट ने दी बड़ी चेतावनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 05:22:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्&#8205;ली ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई ने पूरी दुनिया को महंगाई के खतरे में डाल दिया है. हर देश महंगाई के खतरे से बचने के लिए छोटे-मोटे कदम उठा रहा है, लेकिन सवाल है कि ये कब तक चलेगा? अगर वॉर ज्&#8205;यादा दिनों तक चलता है तो दुनिया में महंगाई बढ़ना और ग्&#8205;लोबल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्&zwj;ली</strong></p>
<p>ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई ने पूरी दुनिया को महंगाई के खतरे में डाल दिया है. हर देश महंगाई के खतरे से बचने के लिए छोटे-मोटे कदम उठा रहा है, लेकिन सवाल है कि ये कब तक चलेगा? अगर वॉर ज्&zwj;यादा दिनों तक चलता है तो दुनिया में महंगाई बढ़ना और ग्&zwj;लोबल इकोनॉमी में संकट में आ सकती है. साथ ही तेल के दाम में रिकॉर्ड उछाल आ सकती है, जिससे हर छोटी बड़ी चीजें के दाम में बड़ी बढ़ोतरी हो जाएगी।&nbsp;</p>
<p>ब्रोकरेज फर्म Macquarie ने&nbsp; भी इसी चीज को लेकर चेतावनी दी है. उनका कहना है कि अगर ईरान से जुड़ा मौजूदा संघर्ष जून तक खिंचता है और स्&zwj;ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहता है तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ सकती हैं और इसकी 40% संभावना है।&nbsp;</p>
<p>फर्म ने कहा कि दूसरी तिमाही तक जारी रहने वाला संघर्ष तेल की वास्तविक कीमतों को ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर पहुंचा सकता है. हालांकि, ब्&zwj;लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने 60 फीसदी की ज्&zwj;यादा आशावादी संभावना जताई है, जिसके तहत इस महीने के अंत तक संघर्ष में कमी आ सकती है।&nbsp;</p>
<p>यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ब्रेंट क्रूड की कीमतों में सालों में सबसे मजबूत मंथली उछाल देखी गई है, जिसका मुख्&zwj;य कारण अमेर&zwj;िका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव हैं. ईरान द्वारा स्&zwj;ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग बंद कर देने से आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हुई है और एक गहरे एनर्जी संकट की आशंका बढ़ गई है।&nbsp;</p>
<p><strong>तेल क्षेत्रों में संकट बढ़ी&nbsp;</strong><br />
एक महीने से चल रहे इस वॉर ने प्रमुख तेल उत्&zwj;पादक क्षेत्रों में हलचल तेज कर दी है. एशिया को तेल की आपूर्ति करने वाले एक महत्&zwj;वपूर्ण हिस्&zwj;से को कंट्रोल करने वाले स्&zwj;ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के कंट्रोल ने एनर्जी मार्केट में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है. ब्रोकरेज ने अपनी नोट में कहा कि अगर यह रास्&zwj;ता लंबे समय तक बंद रहता है तो कीमतों में इतनी तेजी होनी चाहिए कि ग्&zwj;लोबल तेल डिमांड में भारी गिरावट आ आ जाए. हालांकि यह रास्&zwj;ता खुलने का संकेत मिला है।&nbsp;</p>
<p><strong>ब्रेंट के दाम फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार&nbsp;</strong><br />
27 मार्च को दो चीनी जहाजों को होर्मुज से गुजरने से रोके जाने के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे यह संकेत मिला कि ईरान इस खास समुद्री मार्ग से आने-जाने पर प्रतिबंध लगाना जारी रखे हुए है. मई डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 2.82% बढ़कर 111.06 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट फ्यूचर 2.68% बढ़कर 97.01 डॉलर हो गया।&nbsp;</p>
<p>समुद्री यातायात पर नज़र रखने वाली कंपनी मरीनट्रैफिक के अनुसार, चाइना ओशन शिपिंग कंपनी के मालिकाना हक वाले जहाजों को वापस भेज दिया गया. वॉर शुरू होने के बाद से किसी बड़े कंटेनर वाहक द्वारा इस मार्ग को पार करने का यह पहला प्रयास था. क्षमता के हिसाब से COSCO दुनिया की चौथी सबसे बड़ी शिपिंग लाइन है।&nbsp;</p>
<p><strong>ट्रंप का बड़ा ऐलान&nbsp;</strong><br />
वहीं डोनाल्&zwj;ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज फिर से खोलने के लिए 10 दिन का समय देने का फैसला किया है. साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा है कि वे 10 दिनों तक ईरान के एनर्जी इंफ्रा पर हमला नहीं करेंगे. सोशल मीडिया पोस्&zwj;ट में ट्रंप ने कहा कि ईरान से बातचीत अभी अच्&zwj;छी चल रही है. इस कदम के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह 6 अप्रैल तक ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोक देंगे।&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>प्लास्टिक, पेंट, टूथपेस्ट, वैसलीन&#8230; ये 50 चीजें तेल-गैस के कुओं से निकले क्रूड से बनती हैं</title>
		<link>https://newsx24.com/plastic-paint-toothpaste-vaseline-these-50-things-are-made-from-crude-oil-and-gas-wells/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 05:22:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्ली ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग से सिर्फ तेल और गैस का संकट ही नहीं बढ़ा है. इस जंग से हमारी रोजमर्रा की जरूरतों के समान पर भी संकट मंडराने लगा है. क्योंकि, हम हर दिन, हर वक्त कोई न कोई ऐसी चीज का इस्तेमाल करते रहते हैं, जो पेट्रो केमिकल्स या पेट्रोलियम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्ली</strong></p>
<p>ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग से सिर्फ तेल और गैस का संकट ही नहीं बढ़ा है. इस जंग से हमारी रोजमर्रा की जरूरतों के समान पर भी संकट मंडराने लगा है. क्योंकि, हम हर दिन, हर वक्त कोई न कोई ऐसी चीज का इस्तेमाल करते रहते हैं, जो पेट्रो केमिकल्स या पेट्रोलियम मैटेलियल से बना होता है. ऐसे में जानते हैं कि&nbsp; पेट्रोलियम बेस्ड उन छोटी-छोटी चीजों के बारे में, जिनका हम हर रोज इस्तेमाल करते हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>हम हर जो रोज जिस बोतल से पानी पीते हैं, उसकी प्लास्टिक या फिर जिस गाड़ी से चलते हैं, उसके टायर की रबड़ या जो लोशन चेहरे और शरीर पर लगाते हैं, उसमें मिला केमिकल कहां से आता है. ये सब पेट्रो केमिकल उत्पाद हैं और मिडिल ईस्ट की जंग से&nbsp; सिर्फ गैस और तेल ही नहीं, पेट्रोलियम से बनने वाले इन छोटे-छोटे प्रोडक्ट्स पर भी संकट गहरा रहा है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;हमारी सुबह की शुरुआत ही पेट्रोकेमिकल से बने टूथपेस्ट ट्यूब से होती है. इसके बाद बाथरूम में मौजूद शैम्पू , शैम्पू की बोतलें, साबुन, लोशन, बॉडी वॉश और सिंथेटिक कपड़ों की बारी आती है. पेट्रोलियम का मतलब सिर्फ पेट्रोल, डीजल और गैस नहीं होता है. इससे और भी कई तरह की चीजें निकलती है, जो हमारी कई छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करती है।&nbsp;</p>
<p><strong>1. प्लास्टिक और पैकेजिंग मैटेरियल</strong></p>
<p><strong>पानी की बोतलें</strong></p>
<p><strong>फूड कंटेनर, टिफिन बॉक्स</strong></p>
<p><strong>पॉलिथीन बैग, रैपर</strong></p>
<p><strong>मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान की पैकेजिंग</strong></p>
<p><strong>नोट &#8211; इन सबमें ज्यादातर प्लास्टिक, पॉलिथीन और पॉलीप्रोपेलीन पेट्रोकेमिकल से बनते हैं.&nbsp;</strong></p>
<p><strong>पेट्रो केमिकल्स​</strong></p>
<p><strong>2. कपड़े और टेक्सटाइल</strong></p>
<p><strong>पॉलिएस्टर&nbsp;</strong></p>
<p><strong>नायलॉन&nbsp;</strong></p>
<p><strong>स्पोर्ट्स वियर क्लोथिंग मैटेरियल</strong></p>
<p><strong>कारपेट और परदे</strong></p>
<p><strong>नोट- ये सभी&nbsp; सिंथेटिक कपड़े हैं और&nbsp; पूरी तरह पेट्रोकेमिकल बेस्ड हैं.</strong></p>
<p><strong>3. पर्सनल केयर और कॉस्मेटिक्स</strong></p>
<p><strong>साबुन, शैम्पू</strong></p>
<p><strong>क्रीम, लोशन</strong></p>
<p><strong>टूथपेस्ट</strong></p>
<p><strong>परफ्यूम</strong></p>
<p><strong>नोट &#8211; इन प्रोडक्ट्स को बनाने में ग्लीशरीन और दूसरे पेट्रो केमिकल्स यूज होते हैं.</strong></p>
<p><strong>पेट्रो केमिकल्स​</strong></p>
<p><strong>4. घरेलू सामान</strong></p>
<p><strong>डिटर्जेंट और क्लीनिंग लिक्विड</strong></p>
<p><strong>प्लास्टिक फर्नीचर</strong></p>
<p><strong>किचन के कुछ नॉन स्टीक बर्तन&nbsp;</strong></p>
<p><strong>फोम, मैट्रेस और कुशन</strong></p>
<p><strong>5. ऑटोमोबाइल और ट्रांसपोर्ट</strong></p>
<p><strong>टायर (Synthetic rubber)</strong></p>
<p><strong>कार के डैशबोर्ड, सीट कवर</strong></p>
<p><strong>लुब्रिकेंट (Engine oil)</strong></p>
<p><strong>पेंट और कोटिंग</strong></p>
<p><strong>नोट &#8211; इन उत्पादों का निर्माण विशुद्ध पेट्रो केमिकल्स से होता है.</strong></p>
<p><strong>6. इलेक्ट्रॉनिक्स</strong></p>
<p><strong>मोबाइल फोन के पार्ट्स</strong></p>
<p><strong>लैपटॉप/टीवी का बॉडी</strong></p>
<p><strong>वायर और केबल (इंसुलेशन)</strong></p>
<p><strong>7. दवाइयां और मेडिकल प्रोडक्ट</strong></p>
<p><strong>कई दवाओं के केमिकल कंपोनेंट</strong></p>
<p><strong>सिरिंज, बैग</strong></p>
<p><strong>मेडिकल प्लास्टिक उपकरण</strong></p>
<p><strong>8. कंस्ट्रक्शन मैटेलियल</strong></p>
<p><strong>PVC पाइप</strong></p>
<p><strong>पेंट और वार्निश</strong></p>
<p><strong>इन्सुलेशन मटेरियल</strong></p>
<p><strong>फ्लोरिंग विनायल</strong></p>
<p><strong>9. खिलौने और स्पोर्ट्स मैटेलियल</strong></p>
<p><strong>प्लास्टिक टॉय</strong></p>
<p><strong>फुटबॉल, हेलमेट</strong></p>
<p><strong>जिम इक्विपमेंट</strong></p>
<p><strong>10. फूड पैकेजिंग मैटेलियल</strong></p>
<p><strong>फूड पैकेजिंग फिल्म</strong></p>
<p><strong>बोतलें और कैन</strong></p>
<p><strong>फूड स्टोरेज कंटेनर</strong></p>
<p><strong>पेट्रो केमिकल्स​</strong><br />
कच्चे तेल और गैस को रिफाइन करने के दौरान अलग-अलग स्टेज पर उससे अलग-अलग कैमिकल निकलते हैं और उनका इस्तेमाल कई तरह की जरूरी चीजों को बनाने में होता है. कच्चे तेल और गैस का शोधन या डिस्टिलेशन के अलग-अलग चरणों में होता है और हर स्टेज में अलग-अलग पेट्रो केमिकल्स या हाईड्रोकार्बन प्राप्त होते हैं.&nbsp;</p>
<p>पहले चरण में ही इससे एथेन, मीथेन, प्रोपेन, ब्यूटेन जैसे गैस निकलते हैं. इनमें से प्रोपेन और ब्यूटेन से एलपीजी, पीएनजी और अन्य गैस बनाए जाते हैं,जिनका इस्तेमाल किचन से लेकर ऑटोमोबाइल तक में होता है.&nbsp;</p>
<p>इसके साथ ही ब्यूटाडाइन, बेंजीन, टोल्यून, मेथनॉल, ग्लिसरीन जैसे तत्व निकलते हैं, जिससे प्लास्टिक, पेंट, रबर, फॉर्मास्यूटिकल उत्पाद, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स, लोशन, क्रीम जैसी चीजें बनती हैं. आगे के स्टेज में एथिलीन, प्रोपिलीन, ब्यूटिलीन जैसे पदार्थ निकलते हैं, जिनसे प्लास्टिक, पॉलिथीन, रबड़ और ऐसे ही अन्य मैटेरियल बनाए जाते हैं.&nbsp;</p>
<p>शोधन प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाती है &#8211; एक्रिलोनाइट्राइल और आइसोब्यूटिलीन जैसे पेट्रो केमिकल प्राप्त होते हैं, जिससे फोम, रेजिन, पेंट और कोटिंग्स जैसे मेटेलियल बनते हैं. इन हाईड्रोकार्बन का इस्तेमाल पैकेजिंग मैटेरियल, चिपकने वाले पदार्थ, विस्फोटक, गोंद, औद्योगिक रसायन, सिंथेटिक रबर, टायरों, साबुन और डिटर्जेंट, रंग, दवाई, क्लीनिंग मैटेरियल और कई तरह के मेडिकल उपकरणों बनाने में होता है. पेट्रोलियम को रिफाइन करने के दौरान ही अमोनिया और यूरिया जैसे उर्वरक बनाने वाले तत्व भी निकलते हैं.&nbsp;</p>
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		<title>हफ्तेभर के युद्ध में ही हिली दुनिया, ईरान संकट के बीच उछले कच्चे तेल के दाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 07:41:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
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					<description><![CDATA[तेहरान. ईरान और अमेरिका-इजरायल के युद्ध को आज एक सप्ताह पूरा हो रहा है। एक सप्ताह में ही इस युद्ध का असर पूरी दुनिया में पड़ा है। एक तरफ यूरोप से लेकर एशिया तक की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं तो दूसरी ओर खाड़ी देशों में हमले भी खूब हुए हैं जिनमें जान &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान.</strong></p>
<p>ईरान और अमेरिका-इजरायल के युद्ध को आज एक सप्ताह पूरा हो रहा है। एक सप्ताह में ही इस युद्ध का असर पूरी दुनिया में पड़ा है। एक तरफ यूरोप से लेकर एशिया तक की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं तो दूसरी ओर खाड़ी देशों में हमले भी खूब हुए हैं जिनमें जान और माल दोनों का नुकसान हुआ है। खाड़ी देशों में फंसे पर्यटक अब भी संकट का सामना कर रहे हैं। ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए थे जिनमें ईरान के सर्वोच्चा नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे।</p>
<p><strong>संघर्ष बढ़ता ही जा रहा</strong><br />
इस सैन्य हमले के बाद ईरान ने मुख्य रूप से इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन तथा सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले किए। पिछले तीन दिनों में दोनों पक्षों की ओर से हमलों और जवाबी हमलों के बीच यह संघर्ष काफी बढ़ गया है।</p>
<p><strong>कच्चे तेल की कीमतों में उछाल</strong><br />
युद्ध के सातवें दिन शुक्रवार को भी इजरायल के लड़ाकू विमान मंडराते रहे। समंदर में हजारों तेल के जहाज फंसे हुए हैं। इनमें 36 जहाज भारत के भी हैं। ऐसे में तेल की आपूर्ति में बड़ी बाधा उत्पन्न हुई है। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी कि यह युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने पर तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। शुक्रवार को अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत दो वर्षों में पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई।</p>
<p><strong>तेहरान में तेज हो गए हमले</strong><br />
ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार तड़के कई विस्फोट हुए, जिनसे आसमान में काले धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल की ओर मिसाइलें दागीं। इस बीच अमेरिका ने चेतावनी दी कि जल्द ही बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान शुरू किया जा सकता है, जिसे अधिकारी सप्ताह भर से जारी संघर्ष का अब तक का सबसे तीव्र हमला बता रहे हैं।</p>
<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप सख्त</strong><br />
क्षेत्र में लड़ाई खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इज़राइल को 15.1 करोड़ डॉलर के नए हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के &#039;&#039;बिना शर्त आत्मसमर्पण&#039;&#039; करने तक उससे कोई बातचीत नहीं होगी। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि देश अपनी रक्षा के लिए &#039;&#039;हर जरूरी कदम&#039;&#039; उठाएगा। एक वीडियो फुटेज में पश्चिमी तेहरान के ऊपर विस्फोटों से धुएं के गुबार दिखाई दिए, जबकि इजराइल ने कहा कि उसने व्यापक हमलों का नया दौर शुरू किया है। इजराइली सेना ने कहा कि वह ईरान से दागी गई नयी मिसाइलों को रोकने की कोशिश कर रही है। ईरान के हमलों के बाद बहरीन में शनिवार सुबह सायरन बजे। सऊदी अरब ने कहा कि उसने अपने विशाल शायबह तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे ड्रोन नष्ट कर दिए और प्रिंस सुल्तान एयर बेस की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया। इस बीच अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के अनुसार, रूस ने ईरान को ऐसी जानकारी दी है जिससे वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात कर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर संवेदना जताई।</p>
<p><strong>ईरान में 1200 से ज्यादा मौतें</strong><br />
इस संघर्ष में अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 200 से अधिक और इजराइल में करीब 12 लोग मारे गए हैं। छह अमेरिकी सैनिक भी इस संघर्ष में जान गंवा चुके हैं। ईरान के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा कि &#039;&#039;कुछ देशों&#039;&#039; ने मध्यस्थता के प्रयास शुरू कर दिए हैं, लेकिन उन्होंने इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया।</p>
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		<title>क्रूड ऑयल कहां और कैसे होगा इस्तेमाल? प्राथमिकता तय कर रही भारत सरकार, ईरान जंग का असर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 03:36:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्ली ईरान जंग के मद्देनजर भारत सरकार कच्चे तेल के इस्तेमाल की प्रायरिटी फिर से तय कर रही है. कच्चा तेल कहां और कैसे इस्तेमाल हो इसके लिए सरकार योजना बना रही है. हालांकि सरकार ने कहा है कि भारत के पास इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे क्रूड से ज़्यादा क्रूड है. LPG &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्ली</strong></p>
<p>ईरान जंग के मद्देनजर भारत सरकार कच्चे तेल के इस्तेमाल की प्रायरिटी फिर से तय कर रही है. कच्चा तेल कहां और कैसे इस्तेमाल हो इसके लिए सरकार योजना बना रही है. हालांकि सरकार ने कहा है कि भारत के पास इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे क्रूड से ज़्यादा क्रूड है. LPG की कोई कमी नहीं है. सरकार ने रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है।</p>
<p>वेस्ट एशिया से सप्लाई में रुकावट के बाद भारत ने ऑयल रिफाइनरीज को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG)&nbsp; प्रोडक्शन ज़्यादा से ज़्यादा करने का निर्देश दिया है. सरकार ने घरेलू प्रोड्यूसर को उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन रिसोर्स का इस्तेमाल करके LPG आउटपुट को प्रायोरिटी देने का आदेश दिया है।</p>
<p>भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG इंपोर्टर है, और पिछले साल इसने 33.15 मिलियन मीट्रिक टन फ्यूल की खपत क. इंपोर्ट डिमांड का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है, जिसमें वेस्ट एशिया 85 से 90 परसेंट सप्लाई करता है, जिससे भारत रीजनल रुकावटों के प्रति कमज़ोर हो जाता है।</p>
<p>सरकार ने कहा है कि भारत में LPG की किल्लत नहीं होने दी जाएगी. भारत खाड़ी देशों के अलावा दूसरे क्षेत्रों से LNG खरीदना शुरू कर दिया है. इसके अलावा भारत कतर सरकार से भी बात कर रहा है ताकि LNG की सप्लाई फिर से शुरू की जा सके. बता दें कि कतर भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर है. कतर के गैस प्लांट पर ईरानी हमले के बाद कतर ने गैस प्रोडक्शन बंद कर दिया है और भारत को एक्सपोर्ट रोक दिया है।&nbsp;</p>
<p>जनवरी से US से LPG भारत आनी शुरू हो गई है. नवंबर 2025 में भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने 2026 के लिए US गल्फ कोस्ट से लगभग 2.2 MTPA LPG इंपोर्ट करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है।&nbsp;</p>
<p>रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सभी ऑयल रिफाइनर को निर्देश दिया गया है कि वे अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करें और यह पक्का करें कि LPG प्रोडक्शन के लिए उनका इस्तेमाल हो. प्रोड्यूसर को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सरकारी रिफाइनर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को घरों में बांटने के लिए LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन उपलब्ध कराएं. भारत में लगभग 332 मिलियन एक्टिव LPG कंज्यूमर हैं।</p>
<p>LPG के लिए प्रोपेन और ब्यूटेन का ज़रूरी इस्तेमाल करने से एल्काइलेट्स का प्रोडक्शन कम हो जाएगा, जो गैसोलीन ब्लेंडिंग का एक हिस्सा है।</p>
<p>रिफाइनर को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल न करें, जिससे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों के लिए फीडस्टॉक कम हो जाएगा।</p>
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