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	<title>crude oil &#8211; NewsX 24</title>
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	<title>crude oil &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>कम तेल आयात के बावजूद 26% बढ़ा भारत का क्रूड बिल, रूस सबसे बड़ा सप्लायर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 06:11:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत का कच्चा तेल आयात बिल पिछले साल के मुकाबले 26% बढ़ गया, जबकि इंपोर्ट वॉल्यूम में 18% की गिरावट आई। यानी कम तेल मंगाने के बावजूद भारत का क्रूड ऑयल बिल एक चौथाई बढ़ गया। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण सप्लाई में रुकावट आई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत का कच्चा तेल आयात बिल पिछले साल के मुकाबले 26% बढ़ गया, जबकि इंपोर्ट वॉल्यूम में 18% की गिरावट आई। यानी कम तेल मंगाने के बावजूद भारत का क्रूड ऑयल बिल एक चौथाई बढ़ गया। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण सप्लाई में रुकावट आई और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। इस दौरान कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। हालांकि हाल में इसमें गिरावट आई है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।</p>
<p>वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने इस साल अप्रैल और जून के बीच कुल 59.7 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 73 मिलयन टन था। हालांकि इस दौरान आयात बिल अप्रैल-जून 2025 के 39 अरब डॉलर से बढ़कर 49 अरब डॉलर हो गया। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का 88% हिस्सा आयात से पूरा होता है।</p>
<p><strong>क्यों बढ़ा आयात का बिल?</strong><br />
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से कम थीं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपमेंट में रुकावट आने के बाद इनमें भारी उछाल आई। यहां से दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल गुजरता है। भारत का लगभग 40% कच्चा तेल आयात इसी रास्ते से होता है। ईरान युद्ध के चरम पर ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। रुपये की कमजोरी ने भी आयात बिल को बढ़ाने में भूमिका निभाई।</p>
<p>भारत हर साल 1.8 से 2 अरब बैरल कच्चा तेल आयात करता है। तेल की कीमत में प्रति बैरल 1 डॉलर की बढ़ोतरी से उसके तेल आयात बिल में 2 अरब डॉलर तक का इजाफा हो सकता है। फ्रेट, इंश्योरेंस और वॉर-रिस्क प्रीमियम में अंतर के कारण अलग-अलग देशों से खरीदे गए कच्चे तेल की औसत लागत अलग-अलग थी। जून तिमाही के दौरान रूस से सप्लाई की औसत लागत 2,408 डॉलर प्रति टन रही जबकि UAE के कच्चे तेल की लागत 2,213 डॉलर प्रति टन थी।</p>
<p><strong>कौन है सबसे बड़ा सप्लायर?</strong><br />
एक सरकारी रिफाइनिंग कंपनी के अधिकारी ने कहा, &quot;उस समय हमारी प्राथमिकता 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जहां से भी संभव हो, सप्लाई हासिल करना थी।&quot; उन्होंने आगे कहा कि संघर्ष से पहले मिलने वाली छूट खत्म हो गई थी और रिफाइनरों को भारी वॉर-रिस्क प्रीमियम चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ा।</p>
<p>पहली तिमाही में रूस एक बार फिर भारत का टॉप क्रूड सप्लायर बना रहा। कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 40% से अधिक रही। उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (14.6%), सऊदी अरब (9.9%), वेनेज़ुएला (5.2%) और ओमान (4.5%) प्रमुख सप्लायर थे।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Crude Oil Price: होरमुज़ में अमेरिका की नो-एंट्री, ईरान के नए बिल से कच्चे तेल की कीमतों में फिर उबाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 07:12:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्&#8205;ली ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज को लेकर तनाव कम नहीं हो रहा है, जहां उम्&#8205;मीद की जा रही थी कि जल्&#8205;द ही दोनों पक्षों के बीच में समझौता हो सकती है और फिर स्&#8205;ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोला जा सकता है, लेकिन अब ईरान के नए बयान ने सरगर्मी बढ़ा दी है।&#160; &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्&zwj;ली</strong></p>
<p>ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज को लेकर तनाव कम नहीं हो रहा है, जहां उम्&zwj;मीद की जा रही थी कि जल्&zwj;द ही दोनों पक्षों के बीच में समझौता हो सकती है और फिर स्&zwj;ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोला जा सकता है, लेकिन अब ईरान के नए बयान ने सरगर्मी बढ़ा दी है।&nbsp;</p>
<p>दरअसल, समाचार एजेंसी फार्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की एक संसदीय समिति एक शुरुआती बिल की समीक्षा कर रही है. इसके तहत अमेरिका, इजरायल और अन्&zwj;य दुश्&zwj;मन देशों के जहाजों को स्&zwj;ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने से रोका जाएगा. इस बिल के तहत कहा गया है कि अगर ये देश नियम को तोड़ते हैं तो इन जहाजों से 20 फीसदी तक का जुर्माना वसूला जाएगा।&nbsp;</p>
<p>हालांकि, अभी इस बिल पर अधिकारिक तौर पर मोहर नहीं लगी है, लेकिन एक्&zwj;स्&zwj;पर्ट्स द्वारा समीक्षा की जा रही है. उम्&zwj;मीद की जा रही है कि इस समीक्षा के बाद इस बिल को पास किया जा सकता है. अब इस खबर के आने के बाद कच्&zwj;चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उबाल देखा जा रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>तेल की कीमतों में भारी उछाल&nbsp;</strong><br />
शुक्रवार की सुबह ब्रेंट क्रूड आयल के दाम में 1.30% की तेजी देखने को मिली है और यह 84 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है, जबकि पिछले कुछ समय से स्थिति शांत होने के कारण कच्&zwj;चे तेल के दाम 94 डॉलर से टूटकर 80 के करीब आए थे।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>अब अगर ईरान के इस कदम के बाद अमेरिका कोई एक्&zwj;शन लेता है तो तेल की कीमतें और भी तेजी से ऊपर चढ़ सकती है. हालांकि, अभी तक अमेरिका की ओर से इसपर कोई टिप्&zwj;पणी नहीं आई है. वहीं WTI क्रूड ऑयल की बात करें तो इसकी कीमत आज यह 1 फीसदी चढ़कर 78.03&nbsp; &nbsp; डॉलर प्रति बैरल पर था।&nbsp;</p>
<p><strong>शेयर बाजारों में गिरावट&nbsp;</strong><br />
ईरान के इस अपडेट के बाद अमेरिका से लेकर एशियाई मार्केट तक में गिरावट देखी जा रही है. अमेरिकी बाजार में करीब 1 फीसदी की गिरावट देखी गई है, जबकि भारत के बाजारों में भी गिरावट आई है. इसके अलावा, साउथ कोरिया और जापान के मार्केट में भी एक फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है।&nbsp;</p>
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		<title>Trump Impact: एक ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, क्रूड ऑयल हुआ धड़ाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 08:42:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[मुंबई&#160; अमेरिका-ईरान के बीच जंग में आने वाले हर एक अपडेट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है. ट्रंप जैसे ही ईरान के साथ शांति या अटैक से जुड़ा बयान देते हैं तेल में उथल-पुथल मच जाती है. अब एक बार फिर से उन्होंने ट्रंप के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई&nbsp;</strong><br />
अमेरिका-ईरान के बीच जंग में आने वाले हर एक अपडेट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है. ट्रंप जैसे ही ईरान के साथ शांति या अटैक से जुड़ा बयान देते हैं तेल में उथल-पुथल मच जाती है. अब एक बार फिर से उन्होंने ट्रंप के साथ बातचीत का ऐलान किया है और कूटनीतिक वार्ता आज से शुरू होने जा रही है. शांति की उम्मीद के चलते Crude Oil Price Crash हो गया है और इसमें 5 फीसदी के आसपास बड़ी गिरावट आई है।&nbsp;</p>
<p><strong>ट्रंप ने आखिर ऐसा क्या कहा?&nbsp;</strong><br />
Donald Trump ने ईरान पर हमला टालते हुए एक बड़ा बयान किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि Iran पर टाला गया हमला द्वितीय विश्व युद्ध (World War 2) के बाद का सबसे बड़ा हमला होता. उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज&nbsp; स्ट्रेट और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर तनाव अभी भी अनसुलझा बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद आगे की जान-माल की हानि न हो इसके लिए कूटनीति ही बेहतर विकल्प है।&nbsp;</p>
<p>एयर फोर्स वन में बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ बातचीत सोमवार दोपहर से शुरू होने वाली है, हालांकि उन्होंने समझौते तक पहुंचने की कोई समयसीमा (US Iran War Talk Deadline) नहीं बताई है. साफ है कि ट्रंप बातचीत के जरिए अब ईरान से समझौते पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>कच्चे तेल का दाम धड़ाम</strong><br />
इधर ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते को लेकर ये बयान दिया और उधर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ गई. खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत (Brent Crude Oil Price) 4.80 फीसदी से ज्यादा गिरकर 83 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रही थी. इसके अलावा WTI Crude Oil Price 5.30 फीसदी फिसलकर 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था।&nbsp;</p>
<p><strong>Hormuz पर अटकी है दोनों की गाड़ी</strong><br />
गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच कई बार शांति समझौते की उम्मीद जागी है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों के बीच तनातनी के चलते डील फाइनल नहीं हो पाई है. Hormuz Strait लगातार चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि क्योंकि वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति के लिए ये महत्वपूर्ण है. बता दें कि दुनिया की तेल-गैस जरूरत का लगभग पांचवां हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है. इसमें आने वाली किसी भी तरह की रुकावट सीधे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में नजर आती है. यही नहीं इससे महंगाई का जोखिम भी बढ़ जाता है।&nbsp;</p>
<p>तेल फिसला, तो बाजार उछला&nbsp;<br />
ईरान के साथ बातचीत के ट्रंप के फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजार (US Stock Market) में जोरदार तेजी देखने को मिली थी और सभी इंडेक्स ग्रीन जोन में क्लोज हुए थे. डाउ जोंस 276.97 अंक, डाउ फ्यूचर्स 257 अंक, तो S&amp;P 51 अंक की बढ़त में क्लोज हुआ था।&nbsp;</p>
<p>भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए भी पॉजिटिव संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि सेंसेक्स-निफ्टी के लिए प्रमुख संकेतक माना जाने वाला गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) ओपनिंग के साथ ही तूफानी तेजी लेकर ट्रेड कर रहा है. खबर लिखे जाने तक ये इंडेक्स 1 फीसदी या 243 अंक से ज्यादा उछलकर 24,631 पर कारोबार कर रहा था।&nbsp;</p>
<p>बता दें कि बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स दिनभर के कारोबार के बाद 166 अंक की उछाल लेकर 78,094 पर क्लोज हुआ था, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स 66 अंकों की तेजी के साथ 24,383 पर बंद हुआ था, लेकिन सोमवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही Sensex 789 अंक उछलकर 78,883 के लेवल पर खुला, तो वहीं Nifty ने भी 24,500 के पार ट्रेड शुरू किया।&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>पेट्रोल-डीजल के दाम में लग सकती है &#8216;आग&#8217;! कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल पार करते ही क्यों बढ़ जाती है टेंशन?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 03:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली &#160;पश्चिम एशिया में भड़के सैन्य संघर्ष की आग अब एक बार फिर आम इंसान की जेब झुलसाने के लिए तैयार है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में हमलों और होर्मुज के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 100 डॉलर प्रति बैरल के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
&nbsp;पश्चिम एशिया में भड़के सैन्य संघर्ष की आग अब एक बार फिर आम इंसान की जेब झुलसाने के लिए तैयार है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में हमलों और होर्मुज के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है. अगर कच्चा तेल लंबे समय तक यूं ही तेवर दिखाता रहा, तो दुनिया में महंगाई का एक और नया दौर आने से रुकने वाला नहीं है. भारत से लेकर अमेरिका तक और गाड़ी के फ्यूल टैंक से लेकर रसोई तक इसका असर दिखेगा. अगर क्रूड का रेट और चढ़ता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>हॉर्मुज (Strait of Hormuz) पहले से ही बंद था और अब और बाब-अल-मंदेब (Bab el-Mandeb) जलडमरूमध्य पर भी युद्ध का साया पड़ गया है. लाल सागर में हूती विद्रोही सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला कर रहे हैं. इस वजह से सऊदी अपना तेल अब स्&zwj;वेज नहर के रास्&zwj;ते एशियाई देशों में भेज रहा है. इस वजह से समुद्री जहाजों को अब पूरे अफ्रीका का चक्कर काटकर भारत, चीन और ताइवान जैसे देशों में आना पड़ रहा है. लाल साग से एशियाई देश आने में 19 दिन लगते थे, अब 48 दिन लग रहे हैं. जहाजों का ईंधन खर्च 1.26 मिलियन डॉलर से बढ़कर सीधा 2.87 मिलियन डॉलर हो गया है. इसके अलावा, स्वेज नहर से गुजरने के लिए लगभग 10 लाख डॉलर का अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>सऊदी अरब से बड़ी मात्रा में तेल लेता है भारत</strong></p>
<p>2025-26 में भारत ने अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 13-15% हिस्सा सऊदी अरब से आयात किया. पिछले कुछ समय से भारत रूस से ज्&zwj;यादा क्रूड ऑयल खरीद रहा है. जून, 2026 में भारत ने रूस से रिकॉर्ड 2.64 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) तेल खरीदा. मई के मुकाबले लगभग 37.4% ज़्यादा था. भारत ने जून में सऊदी अरब से 403,000 bpd तेल का आयात किया. यह तेल मुख्&zwj;य रूप से मुख्य रूप से यानबू बंदरगाह से आया।&nbsp;</p>
<p><strong>100 डॉलर बैरल को क्&zwj;यों माना जाता है क्रिटिकल लेवल?</strong><br />
100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर तेल बाजार में एक मनोवैज्ञानिक (Psychological) और आर्थिक (Economic), दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसका कारण यह है कि जब भी क्रूड ऑयल ने इस स्&zwj;तर को छुआ है तो दुनिया में अफरा-तफरी मची है. साल 2008 तेल इस मनोवैज्ञानिक स्&zwj;तर को तोड़कर 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा गया था. इसका नतीजा यह हुई की दुनिया में मंदी आ गई।&nbsp;</p>
<p>2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के ऊपर चला गया तो दुनिया भर में महंगाई बढ़ी. इसी तरह अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद जब क्रूड ने 100 डॉलर बैरल का आंकड़ा पार किया तो भारत सहित दुनिया के बहुत से देशों में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ गए. यही वजह है कि 100 डॉलर का स्तर एक चेतावनी सीमा (Warning Threshold) माना जाता है।&nbsp;</p>
<p><strong>आम आदमी की जेब पर कैसे होगा असर?</strong><br />
क्रूड ऑयल सिर्फ गाड़ियों का ईंधन नहीं है, यह अर्थव्यवस्था का पहिया है. लगभग हर चीज किसी न किसी रूप में पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भर करती है. क्रूड के दाम बढने से पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और जेट फ्यूल महंगा होता है. ऐसा होने पर बाकी चीजों की कीमतें भी अपने आप बढ़ जाती हैं. और इससे आम आदमी पर पड़ता है महंगाई का बोझ.<br />
उदाहरण के लिए ताजी सब्जियां, फल और डेयरी प्रोडक्ट्स जैसी चीजें जो कोल्ड स्टोरेज और ट्रक ट्रांसपोर्ट पर चलती हैं, उनकी कीमतें तेल के दाम बढ़ने पर उछल सकती हैं. जहाजों, ट्रकों और मालवाहक उड़ानों का किराया बढ़ने से रोजाना इस्तेमाल की चीजें महंगी होने का खतरा पैदा हो जाता है।&nbsp;</p>
<p><strong>भारत के लिए क्यों बजा खतरे का सायरन?<br />
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश भारत के लिए 100 डॉलर पार करता क्रूड एक बड़ा झटका है. इससे भारत के सामने 5 बड़ी चुनौतियां खड़ी होंगी-<br />
&nbsp; &nbsp; आयात बिल में बढ़ोतरी: देश से डॉलर की निकासी बढ़ेगी.<br />
&nbsp; &nbsp; रुपये पर दबाव: डॉलर मजबूत होगा और भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है.<br />
&nbsp; &nbsp; महंगाई (Inflation): पेट्रोल डीजल अगर महंगा होता है तो रोजमर्रा का सामान महंगा होगा.<br />
&nbsp; &nbsp; चालू खाता घाटा (CAD): देश का आर्थिक संतुलन बिगड़ने का खतरा रहेगा.</strong></p>
<p><strong>क्&zwj;या एकदम बढ़ जाएंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?</strong><br />
हालांकि सरकार और रिफाइनरियां शुरुआत में घाटा सहकर कीमतें स्थिर रखने की कोशिश करेंगी, लेकिन अगर क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर के पार रहा, तो पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम बढ़ाना सरकार की मजबूरी हो जाएगी. अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद भी सरकार ने काफी दिन तक पेट्रोल और डीजल के रेट नहीं बढ़ाए थे।&nbsp;</p>
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		<title>भारत ने जून में रूस से रिकॉर्ड कच्चा तेल खरीदा, आयात 34 प्रतिशत बढ़ा</title>
		<link>https://newsx24.com/india-purchased-record-amounts-of-crude-oil-from-russia-in-june-imports-rose-by-34-percent/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 16:11:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली भारत ने जून 2026 में रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की रिकॉर्ड खरीद की है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने जून में रूस से करीब 4.5 अरब यूरो (लगभग ₹49,000 करोड़) का कच्चा तेल खरीदा, जो मई के मुकाबले 34% ज्यादा है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
भारत ने जून 2026 में रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की रिकॉर्ड खरीद की है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने जून में रूस से करीब 4.5 अरब यूरो (लगभग ₹49,000 करोड़) का कच्चा तेल खरीदा, जो मई के मुकाबले 34% ज्यादा है। खास बात यह है कि इतनी बड़ी खरीद के बावजूद रूस की तेल बिक्री से होने वाली कुल कमाई घट गई। इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और सस्ते दाम पर बिक्री रही। चीन के बाद भारत रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। रूस से आयात किया गया कच्चा तेल भारत के कुल रूसी जीवाश्म ईंधन आयात का लगभग 83% हिस्सा रहा।</p>
<p><strong>जून में 5.4% बढ़ी क्रूड ऑयल खरीद</strong><br />
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल क्रूड ऑयल खरीद जून में 5.4% बढ़ी, लेकिन रूसी तेल की हिस्सेदारी सबसे तेज रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी में रूस से आने वाले तेल की आपूर्ति मई के मुकाबले 150% बढ़ गई। वहीं इंडियन ऑयल की पारादीप रिफाइनरी में यह बढ़ोतरी 126%, बीपीसीएल की कोच्चि रिफाइनरी में 83% और नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी में 45% रही। इससे साफ है कि भारतीय रिफाइनरियां सस्ते रूसी तेल का अधिकतम फायदा उठा रही हैं।</p>
<p><strong>रूस का क्रूड निर्यात 14% बढ़ा</strong><br />
दिलचस्प बात यह है कि भारत की रिकॉर्ड खरीद के कारण रूस के कुल क्रूड निर्यात की मात्रा जून में 14% बढ़ गई, लेकिन उसकी रोजाना तेल आय 8% घटकर 348 मिलियन यूरो रह गई। कुल मिलाकर रूस के जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाली दैनिक कमाई भी 1% घटकर 734 मिलियन यूरो पर आ गई, यानी रूस ज्यादा तेल बेच रहा है, लेकिन कम कीमत मिलने की वजह से उसकी आमदनी पहले जैसी नहीं रही।</p>
<p><strong>दुनिया के कई देशों को निर्यात भी</strong><br />
भारत केवल रूसी तेल खरीद ही नहीं रहा, बल्कि उसे रिफाइन करके दुनिया के कई देशों को निर्यात भी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, तुर्किये, ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों ने जून में रूस के कच्चे तेल से बने 814 मिलियन यूरो मूल्य के पेट्रोलियम उत्पाद यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को भेजे। इनमें से करीब 369 मिलियन यूरो के उत्पाद रूसी कच्चे तेल से तैयार किए गए थे। खास बात यह रही कि यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बावजूद जून में भारत की रिफाइनरियों से तैयार रूसी तेल आधारित दो खेप यूरोप पहुंचीं। वहीं ब्रिटेन ने भी नियमों में छूट मिलने के बाद पहली बार जामनगर रिफाइनरी से तैयार जेट फ्यूल की खेप आयात की, जिसकी कीमत करीब 63 मिलियन यूरो बताई गई है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रूस के समुद्री तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा अब तथाकथित &lsquo;शैडो फ्लीट&rsquo; के जरिए हो रहा है। जून में रूस के समुद्री तेल निर्यात का 54% हिस्सा प्रतिबंधित टैंकरों से और 43% हिस्सा G7 देशों द्वारा बीमित या स्वामित्व वाले जहाजों से भेजा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक रूस रियायती कीमतों पर तेल बेचता रहेगा, तब तक भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इसका लाभ उठाती रहेंगी। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है और रिफाइनिंग कंपनियों को भी बेहतर मार्जिन मिलता है। हालांकि, वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते आने वाले महीनों में इस व्यापार पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।</p>
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		<title>Crude Oil Production: तेल बाजार में बड़ा खेल! 7 देशों के फैसले से बदल सकते हैं कच्चे तेल के दाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 04:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन लगभग खत्म हो गई है, दुनिया की तेल जरूरतों के बड़े हिस्से की आवाजाही और सप्लाई के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस से लदे जहाज निकलने लगे. इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्ली</strong></p>
<p>मिडिल ईस्ट टेंशन लगभग खत्म हो गई है, दुनिया की तेल जरूरतों के बड़े हिस्से की आवाजाही और सप्लाई के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस से लदे जहाज निकलने लगे. इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरते हुए 72 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई।&nbsp;</p>
<p>Crude Oil Price Crash और Hormuz पर हालात सामान्य होने के बीच अब तक एक-दूसरे से लड़ते झगड़ते नजर आने वाले ओपेक+ (OPEC+) देशों ने एक साथ मिलकर बड़ा फैसला लिया है, जो दुनिया के लिए राहत भरा है।&nbsp;</p>
<p><strong>Crude की कीमतों में गिरावट जारी</strong><br />
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है.&nbsp; खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड की कीमत और भी ज्यादा फिसल गई. Brent Crude Oil Price 1 फीसदी के आसपास फिसलकर 71 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था. तो वहीं WTI Crude Oil Price फिसलकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इसके अलावा मर्बन क्रूड ऑयल की कीमत मामूली बढ़त के साथ 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी।</p>
<p><strong>संकट टला, अब आई ये राहत भरी खबर</strong><br />
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बात बनने और बैठकों को लेकर पॉजिटिव संकेतों के बीच पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन तक, दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट खत्म होता नजर आया है. क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट ओपन है और यहां से तेल-गैस के टैंकरों की आवाजाही जारी है. यानी Oil-Gas सप्लाई चेन फिर से सुचारू नजर आ रही है. हालांकि, ये युद्ध पूर्व स्तर से अभी भी नीचे बनी हुई है, लेकिन इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव और गिरावट के रूप में दिखने भी लगा है।&nbsp;</p>
<p>इस बीच एक और राहत भरी खबर ये आई है कि ओपेक+ (OPEC+) देशों ने भी तेल को लेकर बड़ा फैसला किया है. इसमें शामिल सात देशों ने एक साथ मिलकर अगले महीने से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक,&nbsp; सऊदी अरब और रूस की अगुवाई में प्रति दिन 1.88 लाख बैरल एक्स्ट्रा क्रू़ड ऑयल प्रोड्यूश करने को मंजूरी दी गई है. मतलब अब आने वाले समय में तेल पर्याप्त तेल बाजार में सप्लाई होगा. लगातार 5वें महीने इस बढ़ोतरी को लेकर सहमति बनी है।&nbsp;</p>
<p><strong>एक साथ आए ये 7 ओपेक+ देश</strong><br />
गौरतलब है कि बीते कुछ समय में ओपेक+ देशों के बीच उत्पादन कोटा, बाजार हिस्सेदारी और तेल की कीमतों को लेकर बड़े मतभेद देखने को मिल रहे थे. कुछ देश क्रूड प्राइस को लेकर प्रोडक्शन सीमित रखने पर जोर दे रहे थे, तो कुछ उत्पादन में इजाफा कर इनकम बढ़ाने पर फोकस कर रहे थे. लेकिन इन मतभेदों के बाद अब ओपेक+ में शामिल देश सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने एकमत से उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है।&nbsp;</p>
<p>OPEC+ देशों (तेल उत्पादक) देशों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, &#039;बाजार की स्थितियों पर नजर रखना और उनका आकलन करना जारी रखा जाएगा, इसके अलावा तेल बाजार की स्थिरता को बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत सतर्क दृष्टिकोण अपनाने को महत्व दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या भारत में सस्ता होगा Petrol-Diesel?&nbsp;</strong><br />
अगर तेल उत्पादक देशों की सहमति के मुताबिक, अगले महीने से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल क्रूज प्रोडक्शन बढ़या जाता है, तो निश्चित तौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा और इनमें गिरावट देखने को मिल सकती है. Crude Price Fall से इसके आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों राहत मिलेगी, क्योंकि OMCs की लागत कम होगी और इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद भी बढ़ेगी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>हालांकि, ये तुरंत सस्ता होगा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि देश में Petrol-Diesel कितना और कब सस्ता होगा, ये कई कारकों पर निर्भर करेगा. भारत में फ्यूल प्राइस कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव, रिफाइनिंग कॉस्ट, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और राज्यों में लागू VAT पर भी निर्भर करते हैं. देखने वाली बात ये होगी कि प्रोडक्शन बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कितने समय के लिए नीचे बनी रहती हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>पेट्रोलियम मंत्री ने दिए थे ये संकेत&nbsp;</strong><br />
मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी भरकम नुकसान के बीच भारत में करीब चार साल बाद अचानक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चार बार में 7 रुपये प्रति लीटर के आसपास का इजाफा किया गया था. अब होर्मुज ओपन होने और कच्चा तेल सस्ता होने के बीच पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने बीते हफ्ते कीमतों में कटौती के संबंध में तस्वीर साफ की थी।&nbsp;</p>
<p><strong>Hardeep Singh Puri ने</strong> कहा था कि निजी क्षेत्र की कंपनियों और OMCs के पास जो शेयर हैं, वे दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए थे, जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, अगर कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इस बारे में अटकलें लगाना मेरे लिए उचित नहीं होगा।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता? सिटी बैंक ने कच्चे तेल पर की बड़ी भविष्यवाणी, आम लोगों को मिल सकती है राहत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 03:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली &#160;दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की किल्लत का दौर अब खत्म होने की कगार पर है. मॉर्गन स्टैनली और गोल्डमैन सॉक्&#8205;स के बाद अब दिग्गज अमेरिकी निवेश बैंक सिटी (Citigroup) ने भी भविष्यवाणी की है कि साल के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
&nbsp;दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की किल्लत का दौर अब खत्म होने की कगार पर है. मॉर्गन स्टैनली और गोल्डमैन सॉक्&zwj;स के बाद अब दिग्गज अमेरिकी निवेश बैंक सिटी (Citigroup) ने भी भविष्यवाणी की है कि साल के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ सकती हैं. अगर ऐसा होता है तो इससे भारतीय तेल कंपनियों पर बोझ कम होगा और देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती हो सकती है।&nbsp;</p>
<p>सिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्&zwj;य पर दोहरी नाकेबंदी जैसी स्थिति बन गई थी. इस वजह से कच्&zwj;चे तेल की सप्&zwj;लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई. लेकिन अब वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम समझौता होने से तनाव कम हुआ है और इस महत्&zwj;वपूर्ण समुद्री रास्&zwj;ते पर जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है. कच्चा तेल पर्याप्&zwj;त मात्रा में उपलब्&zwj;ध है. इस वजह से बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड दूसरी तिमाही में लगभग 30% तक टूटकर 71.92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>भरपूर मात्रा में उपलब्&zwj;ध है कच्&zwj;चा तेल</strong><br />
सिटी बैंक के विश्लेषकों के मुताबिक, तेल बाजार अब तेजी से अपनी पुरानी और सामान्य स्थिति में लौट रहा है. होर्मुज रूट खुलने से रिफाइनरियों को भरपूर कच्चा तेल मिल रहा है. दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश चीन फिलहाल बाजार से थोड़ी दूरी बनाए हुए है, जिससे कच्चे तेल की फिजिकल मांग कमजोर हुई है. वैश्विक तेल भंडारों में उम्मीद के मुकाबले बेहद कम गिरावट दर्ज की गई है, यानी स्टॉक में तेल की कोई कमी नहीं है।&nbsp;</p>
<p><strong>$60-65 के दायरे में आएगा ब्रेंट क्रूड</strong><br />
सिटी के विश्लेषकों का अनुमान है कि गर्मियों के दौरान अगर तेल की कीमतों में कोई अस्थायी तेजी आती भी है, तो उसे केवल बिकवाली का अवसर माना जाना चाहिए क्योंकि अंततः कीमतों को नीचे ही आना है. बैंक के मुताबिक, साल के अंत तक ब्रेंट क्रूड आसानी से 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच जाएगा।&nbsp;</p>
<p>केवल सिटी ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य बड़े वित्तीय संस्थान भी कच्&zwj;चे तेल में गिरावट का अनुमान जता चुके हैं. गोल्डमैन सॉक्&zwj;स ने कहा था कि ईरान विवाद शांत होने के बाद बाजार में फिर से ओवरसप्&zwj;लाई की स्थिति बन जाएगी. वहीं, मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) भी पिछले कुछ हफ्तों में दो बार कच्चे तेल के अपने अनुमानित दामों में कटौती कर चुका है।&nbsp;</p>
<p><strong>भारत के लिए इसके क्या मायने हैं</strong>?<br />
भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का $60 के स्तर पर आना भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकारी तेल कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं होगा. कच्चे तेल के दाम कम होने से कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन बढ़ेगा. इससे कंपनियों को पेट्रोल और डीजल का रेट घटाने का मौका मिलेगा।&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>Petrol Diesel Price Today: US-ईरान डील के बाद भी नहीं मिली राहत, जानें 19 जून को आपके शहर में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:33:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है क्या अब भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा? इस बीच सरकारी तेल कंपनियों ने आज&#160; के लिए पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं. आज पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई खास बदलाव नहीं हुआ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है क्या अब भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा? इस बीच सरकारी तेल कंपनियों ने आज&nbsp; के लिए पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं. आज पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है. ऐसे में गाड़ी की टंकी फुल कराने से पहले आइए जानते हैं आज आपके शहर में पेट्रोल-डीजल किस कीमत पर मिल रहा है और क्या कच्चे तेल की गिरती कीमतों का फायदा जल्द ग्राहकों तक पहुंचेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>देश के बड़े शहरों में क्या हैं नए रेट?</strong><br />
सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी ताजा कीमतों के मुताबिक, आज पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;<strong> &nbsp; दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.<br />
&nbsp; &nbsp; मुंबई में पेट्रोल 111.18 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.<br />
&nbsp; &nbsp; कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है.<br />
&nbsp; &nbsp; चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.</strong></p>
<p>कुछ शहरों में मामूली बदलाव देखने को मिला है. गुरुग्राम, नोएडा, जयपुर और हैदराबाद में कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि भुवनेश्वर और लखनऊ में पेट्रोल-डीजल थोड़ा सस्ता हुआ है।</p>
<p><strong>कच्चा तेल&nbsp; 79 डॉलर के करीब, एक हफ्ते में 9% की बड़ी गिरावट</strong><br />
ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है. ब्रेंट क्रूड करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है.पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड में 9% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटों में से एक है।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल? मंत्री ने दिया जवाब</strong><br />
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत कम नहीं होंगी.पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि घरेलू ईंधन कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं. इसके अलावा परिवहन लागत, बाजार की स्थिति और पहले खरीदे गए कच्चे तेल की लागत जैसे कई अन्य कारक भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।&nbsp;</p>
<p>सुरेश गोपी के मुताबिक, कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल भारत तक पहुंचने में समय लेता है. यह तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत आता है और वहां जहाजों की आवाजाही सामान्य होने में भी कुछ समय लगेगा. मंत्री ने साफ कहा कि हाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसे केवल इसलिए तुरंत वापस नहीं लिया जा सकता क्योंकि ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल कुछ सस्ता हुआ है।&nbsp;</p>
<p><strong>सरकार पर पड़ा 12,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ</strong><br />
सुरेश गोपी ने कहा कि पश्चिम एशिया में इस साल हुए युद्ध के दौरान ग्लोबल ऑयल मार्केट&nbsp; में काफी अस्थिरता देखने को मिली, जिसका असर सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर पड़ा.उन्होंने बताया कि बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ ग्राहकों पर न पड़े, इसके लिए सरकार ने अतिरिक्त लागत का बड़ा हिस्सा खुद उठाया. इसके कारण सरकार को करीब 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।&nbsp;</p>
<p>मंत्री ने यह भी कहा कि ऊंची ईंधन कीमतों के दौरान किसी भी राज्य सरकार ने अपने टैक्स में कटौती करके राजस्व नहीं छोड़ा. केंद्र सरकार को भी देश चलाना है और तेल कंपनियों को भी वित्तीय रूप से मजबूत बनाए रखना जरूरी है।&nbsp;</p>
<p><strong>देशभर में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सामान्य, घबराकर&nbsp; न करें खरीदारी</strong><br />
सरकारी तेल कंपनियों ने कहा है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. रिफाइनरियां भी उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है.फ्यूल की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए तेल सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) लगातार सरप्राइज निरीक्षण कर रहे हैं. नियमों के उल्लंघन पर 14 पेट्रोल पंपों पर जुर्माना लगाया गया है, जबकि 598 पेट्रोल पंपों को मार्केट डिसिप्लिन गाइडलाइंस के उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>आम लोगों को सलाह दी गई है कि अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।&nbsp;</strong></p>
<p><strong>US-Iran शांति समझौते का क्या पड़ा असर?</strong><br />
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता माना जा रहा है.इस समझौते के बाद दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर शुरू हो गई है. यही जलमार्ग दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है।&nbsp;</p>
<p>अमेरिका ईरान युद्ध के दौरान ईरान और अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण इस मार्ग पर तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं. अब हालात सामान्य होने की उम्मीद के साथ बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई है।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या ग्राहकों को जल्द मिलेगा सस्ते तेल का फायदा?</strong><br />
एक्सपर्ट का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर राहत मिल सकती है.हालांकि फिलहाल सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हालिया गिरावट का फायदा ग्राहकों तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है. इसलिए अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बड़ी कटौती की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>कच्चे तेल की कीमतों में आ सकता है बड़ा क्रैश! Fitch ने बताया कब टूट सकते हैं भाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 04:42:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्ली वेस्ट एशिया तनाव के चलते दुनिया को डराने वाले कच्चे तेल की कीमतें क्रैश हो सकती हैं. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि फिच रेटिंग्स ने अनुमान जाहिर करते हुए कहा है कि वैश्विक तेल बाजार दुनिया की कुल तेल-गैस जरूरत के 20% को पूरा करने के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट पर बारीकी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्ली</strong></p>
<p>वेस्ट एशिया तनाव के चलते दुनिया को डराने वाले कच्चे तेल की कीमतें क्रैश हो सकती हैं. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि फिच रेटिंग्स ने अनुमान जाहिर करते हुए कहा है कि वैश्विक तेल बाजार दुनिया की कुल तेल-गैस जरूरत के 20% को पूरा करने के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट पर बारीकी से नजर रख रहा है।&nbsp;</p>
<p>एजेंसी ने लंबे समय से बंद Hormuz Strait के जुलाई 2026 के अंत तक फिर से खुलने का अनुमान जताया है और उम्मीद जताते हुए कहा है कि ऐसा होने पर Oil-Gas सप्लाई चेन<strong> में रुकावट खत्म होते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी।&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p><strong>70 डॉलर पर आ जाएगा कच्चा तेल!<br />
Fitch Ratings की एक रिपोर्ट में होर्मुज</strong> स्ट्रेट के जुलाई 2026 के अंत तक फिर से खुलने के सवाल पर कहा है कि इसका जवाब संभवतः हां है. एजेंसी के ऑयल आउटलुक के मुताबिक, वैश्विक तेल खपत के लगभग पांचवें हिस्से को संभालने वाला यह स्ट्रेटिजिक समुद्री रूट 5 महीने की क्लोजिंग बंद के बाद फिर से खुलेगा।&nbsp;</p>
<p>फिच के मुताबिक, ऐसा होने पर कच्चे तेल की कीमतों में आने वाली तेज गिरावट का जिक्र करते हुए एजेंसी ने कहा कि जुलाई में होर्मुज ओपन होने के बाद सितंबर से ब्रेंट क्रूड की कीमत (Brent Crude Oil Price) गिरकर करीब 70 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>तेजी से बहाल होगी ऑयल सप्लाई</strong><br />
फिच ने अपनी रिपोर्ट में तर्क देते हुए कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा उछाल मुख्य रूप से उत्पादन क्षमता में स्थायी कमी के बजाय सप्लाई चेन में आई रुकावट से जुड़ा है. एजेंसी का मानना ​​है कि युद्ध की वजह से क्षेत्रीय तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है, जिससे शिपिंग रूट्स सामान्य होने पर मिडिल ईस्ट में प्रोडक्शन भी तेजी से बहाल हो सकता है।&nbsp;</p>
<p>Fitch के अनुमानों पर नजर डालें, तो ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत मई-जुलाई के दौरान 100-110 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जबकि अगस्त में यह घटकर करीब 80 डॉलर पर आ जाएगी और सितंबर में Brent Crude Price&nbsp; 70 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>&#039;अनिश्चितता अभी कम नहीं हुई&#039;</strong><br />
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने तेल की कीमतें क्रैश (Crude Oil Price Crash) होने का अनुमान जताने के साथ ही कहा है कि अनिश्चितता का स्तर अभी भी काफी ऊंचा बना हुआ है. अगर होर्मुज उम्मीद से पहले खुल जाता हैं, तो तेल की कीमतें गिरेंगी, लेकिन अगर लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकता है. इससे भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख आयातकों के लिए ऊर्जा लागत में वृद्धि होगी और महंगाई का खतरा बढ़ेगा।&nbsp;</p>
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		<title>होर्मुज संकट में राहत के संकेत! भारतीय शिपिंग को मिलेगा फायदा, कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 03:35:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[crude oil]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्&#8205;ली &#160;खुशखबरी! ईंधन का संकट जल्&#8205;द ही खत्&#8205;म होने वाला है. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की संभावना तेजी से बढ़ रही है और माना जा रहा है कि जल्&#8205;द ही दोनों किसी नतीजे पर पहुंचने वाले हैं. समझौते की यह खुशी कच्&#8205;चे तेल की कीमतों पर भी दिख रही है, जो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्&zwj;ली</strong><br />
&nbsp;खुशखबरी! ईंधन का संकट जल्&zwj;द ही खत्&zwj;म होने वाला है. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की संभावना तेजी से बढ़ रही है और माना जा रहा है कि जल्&zwj;द ही दोनों किसी नतीजे पर पहुंचने वाले हैं. समझौते की यह खुशी कच्&zwj;चे तेल की कीमतों पर भी दिख रही है, जो शनिवार सुबह फिसलकर 6 सप्&zwj;ताह यानी डेढ़ महीने के निचले स्&zwj;तर पर पहुंच गया है. माना जा रहा है कि अब होर्मुज का रास्&zwj;ता दोबारा खोला जा सकता है और ईंधन से लदे भारतीय जहाज सरपट भागने लगेंगे. इससे देश में पैदा हुआ क्रूड व गैस का संकट भी जल्&zwj;द ही खत्&zwj;म हो जाएगा।&nbsp;</p>
<p>ग्&zwj;लोबल मार्केट में कच्&zwj;चे तेल की कीमतों में आज 2 फीसदी से भी ज्&zwj;यादा की गिरावट दिख रही है. डब्&zwj;ल्&zwj;यूटीआई का भाव फिसलहर 87.36 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी 91.12 डॉलर प्रति बैरल के भाव चल रही हैं. यह 6 सप्&zwj;ताह का सबसे निचला स्&zwj;तर है. अमेरिका के राष्&zwj;ट्रपति डोनाल्&zwj;ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ शांति समझौते पर अंतिम बातचीत चल रही है. हालांकि, ईरान के विदेशी मंत्री का अब भी कहना है कि कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है. हालांकि, अमेरिका के तेवर देखकर लगता है कि वह ईरान के साथ न्&zwj;यूक्लियर मुद्दे पर दोबारा नए सिरे से बातचीत शुरू कर सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>फिर सस्&zwj;ता हो जाएगा क्रूड</strong><br />
ग्&zwj;लोबल एनर्जी एजेंसियों का कहना है कि होर्मुज के रास्&zwj;ते में सैकड़ों जहाज खड़े-खड़े इंतजार कर रहे हैं. इस पर ईरान और अमेरिका दोनों ही अपना दावा ठोक रहे हैं और किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दे रहे. अगर दोनों में समझौता होता है और होर्मुज से दोबारा कारोबार शुरू होता है तो जल्&zwj;द ही कच्&zwj;चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे जा सकती हैं. फिलहाल इस गतिरोध की वजह से ग्&zwj;लोबल मार्केट में क्रूड का भंडार करीब 2 करोड़ बैरल नीचे आ चुका है. विश्&zwj;व बैंक, आईएमएफ सहित तमाम ग्&zwj;लोबल एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज संकट लंबा खिंचा तो गर्मी के महीने में ईंधन का संकट गहरा सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>भारत को सबसे बड़ी राहत</strong><br />
होर्मुज जलडमरूमध्&zwj;य का रास्&zwj;ता खुलता है तो सबसे ज्&zwj;यादा लाभ भारत को होगा. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्&zwj;सा ईंधन इसी रास्&zwj;ते से मंगाता है. जहाजरानी मंत्रालय में निदेशक ओपेश कुमार शर्मा का कहना है कि भारत के लिए होर्मुज कितना महत्&zwj;वपूर्ण इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हम अपनी कुल जरूरत का करीब 30 फीसदी क्रूड ऑयल इसी रास्&zwj;ते से मंगाते हैं. इतना ही नहीं, कुल एलपीजी आयात का 70 फीसदी भी इसी रास्&zwj;ते से आता है. लिहाजा अगर शांति वार्ता कामयाब होती है और होर्मुज खुलता है तो भारतीय जहाजों के लिए यह सबसे बड़ी राहत होगी।&nbsp;</p>
<p><strong>होर्मुज में अभी हमारे कितने जहाज</strong><br />
ओपेश शर्मा का कहना है कि होर्मुज से अभी भारतीय झंडे वाले 13 जहाजों को ऑपरेट किया जा रहा है. इसमें एक एलपीजी टैंकर से लदा जहाज है, जबकि 5 जहाजों पर कच्&zwj;चे तेल के टैंकर लदे हुए हैं. एक शिप रसायनों से भरा है, जिसका इस्&zwj;तेमाल यूरिया व अन्&zwj;य उर्वरक बनाने में किया जाता है, जबकि 3 कंटेनर लादने वाले शिप हैं और 2 जहाज बल्&zwj;क कैरियर जबकि एक ड्रेगर के रूप में इस रास्&zwj;ते पर खड़ा अपनी बारी का इंतजार कर रहा है. उन्&zwj;होंने बताया कि 2.70 लाख मीट्रिक टन कच्&zwj;चा तेल लादे एक टैंकर निसोस केरोस ने 25-26 मई को सफलतापूर्वक होर्मुज का रास्&zwj;ता पार कर लिया है और इसके 3 जून तक विशाखापत्&zwj;तन बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है।&nbsp;</p>
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