<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>featured &#8211; NewsX 24</title>
	<atom:link href="https://newsx24.com/tag/featured/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://newsx24.com</link>
	<description></description>
	<lastBuildDate>Tue, 18 Aug 2026 17:01:00 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.7</generator>

<image>
	<url>https://newsx24.com/wp-content/uploads/2026/02/cropped-ChatGPT-Image-Feb-18-2026-11_44_21-PM-32x32.png</url>
	<title>featured &#8211; NewsX 24</title>
	<link>https://newsx24.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>मुख्यमंत्री डॉ. यादव बहनों के आग्रह पर झूला उत्सव में पहुंचे</title>
		<link>https://newsx24.com/chief-minister-dr-yadav-reached-the-swing-festival-on-the-request-of-the-sisters/</link>
					<comments>https://newsx24.com/chief-minister-dr-yadav-reached-the-swing-festival-on-the-request-of-the-sisters/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 17:01:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[request of the sisters]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/chief-minister-dr-yadav-reached-the-swing-festival-on-the-request-of-the-sisters/</guid>

					<description><![CDATA[भोपाल श्रावण मास पर मुख्यमंत्री निवास परिसर में झूला उत्सव का आयोजन किया गया। इसमें केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री मती सावित्री ठाकुर के अलावा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री&#160; सम्पतिया उइके, महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक राज्य मंत्री मती कृष्णा गौर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री मती &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>भोपाल</strong></p>
<p style="text-align:justify">श्रावण मास पर मुख्यमंत्री निवास परिसर में झूला उत्सव का आयोजन किया गया। इसमें केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री मती सावित्री ठाकुर के अलावा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री&nbsp; सम्पतिया उइके, महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक राज्य मंत्री मती कृष्णा गौर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री मती राधा सिंह, भोपाल की महापौर मती मालती राय, विधायक सु मनीषा सिंह, महिला मोर्चा पदाधिकारी के अलावा अनेक बहनों ने हिस्सा लिया। यह उत्सव महिला जन प्रतिनिधियों के सम्मान में आयोजित हुआ। बहनों के आग्रह पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर सावन के गीत गाए गए और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी ॐ नमः शिवाय सहित &quot;गोविंदा आला रे&#8230;. फूलों का तारों का, सबका कहना है एक हजारों में मेरी बहना है&#8230; गीतों के गायन में बहनों का साथ दिया।</p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सावन के अवसर पर बहनों का स्वागत है। सबके जीवन में वैभव आए,यह कामना है। प्रधानमंत्री&nbsp; नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सभी मिलकर जनकल्याण के कार्य को अंजाम दें। आज प्रदेश के विभिन्न अंचलों की बहनें यहां पधारी हैं। इन्हें सावन के झूला उत्सव में शामिल होते देखकर प्रसन्नता हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों को जन्माष्टमी, रक्षाबंधन और आने वाले त्योहारों की अग्रिम रूप से बधाई दी।</p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/chief-minister-dr-yadav-reached-the-swing-festival-on-the-request-of-the-sisters/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राष्ट्रपति भवन में गूंजी धमतरी के मांदर की थाप</title>
		<link>https://newsx24.com/the-beats-of-dhamtaris-mandar-resonated-in-rashtrapati-bhavan/</link>
					<comments>https://newsx24.com/the-beats-of-dhamtaris-mandar-resonated-in-rashtrapati-bhavan/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 16:46:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[The beats of Dhamtari]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/the-beats-of-dhamtaris-mandar-resonated-in-rashtrapati-bhavan/</guid>

					<description><![CDATA[&#160;रायपुर राष्ट्रपति भवन में गूंजी धमतरी के मांदर की थाप छत्तीसगढ़ की सोंधी माटी की महक और उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति की गूंज इस स्वतंत्रता दिवस पर देश की राजधानी के सबसे गरिमामयी मंच तक जा पहुंची। अवसर था 15 अगस्त का और गवाह बना राष्ट्रपति भवन का प्रतिष्ठित सेंट्रल हॉल, जहां धमतरी जिले के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>&nbsp;रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify"><strong>राष्ट्रपति भवन में गूंजी धमतरी के मांदर की थाप</strong></p>
<p style="text-align:justify">छत्तीसगढ़ की सोंधी माटी की महक और उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति की गूंज इस स्वतंत्रता दिवस पर देश की राजधानी के सबसे गरिमामयी मंच तक जा पहुंची। अवसर था 15 अगस्त का और गवाह बना राष्ट्रपति भवन का प्रतिष्ठित सेंट्रल हॉल, जहां धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के सुदूर गांव सरईटोला (गुडरापार) के कलाकारों ने अपनी मांदरी नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति से समां बांध दिया। &lsquo;जय गढ़िया बाबा आदिवासी लोक मांदरी नृत्य दल&rsquo; के इस प्रदर्शन ने न केवल राष्ट्रपति भवन में मौजूद गणमान्य अतिथियों का दिल जीता, बल्कि संपूर्ण छत्तीसगढ़ की लोककला का परचम राष्ट्रीय पटल पर लहरा दिया।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>राष्ट्रपति भवन में गूंजी धमतरी के मांदर की थाप</strong></p>
<p style="text-align:justify"><strong>*​जब सेंट्रल हॉल में जीवंत हुई जनजातीय परंपरा*&nbsp; &nbsp; &nbsp; </strong>​</p>
<p style="text-align:justify">पारंपरिक वेशभूषा, रंग-बिरंगे आभूषणों और गुट्टा मांदर की थाप के साथ जब सरईटोला के कलाकारों ने मंच संभाला, तो पूरा वातावरण छत्तीसगढ़ी लोक-आत्मा के रंगों में सराबोर हो गया। फसल कटाई के उल्लास, सामाजिक सरोकारों और पीढ़ियों से संजोई जनजातीय जीवन शैली को दर्शाती इस प्रस्तुति ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह नृत्य केवल एक कलात्मक प्रस्तुति नहीं, बल्कि लोक-स्मृतियों और सामुदायिक पहचान का जीवंत प्रदर्शन बन गया।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>राष्ट्रपति भवन में गूंजी धमतरी के मांदर की थाप</strong></p>
<p style="text-align:justify"><strong>*​नागपुर सांस्कृतिक केंद्र से मिला राष्ट्रीय मुकाम*&nbsp; ​</strong></p>
<p style="text-align:justify">दल के सचिव&nbsp; रूपराय नेताम ने इस ऐतिहासिक पल को साझा करते हुए बताया कि दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (नागपुर) द्वारा दल की मौलिकता और कला-साधना को परखते हुए स्वतंत्रता दिवस के इस विशेष कार्यक्रम के लिए चयन किया गया था। ​राष्ट्रीय मंच पर राज्य की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख कलाकारों में ​ रतन लाल निषाद एवं&nbsp; सुरेंद्र सोरी,​ हेमंत सोरी,​कु. सुलोचना सोरी एवं कु. मधु नेताम शामिल रहे।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>*​धमतरी की माटी का बढ़ा मान: कलेक्टर*&nbsp; &nbsp; &nbsp;​</strong></p>
<p style="text-align:justify">कलाकारों की इस अप्रतिम सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए धमतरी कलेक्टर&nbsp; मिश्रा ने पूरे दल और समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि धमतरी की पहचान सिर्फ उसकी प्राकृतिक सुंदरता और कृषि समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की जनजातीय परंपराएं और लोकसंगीत हमारी वास्तविक धरोहर हैं। सरईटोला के कलाकारों ने राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति देकर जिले को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि हमारी युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोककला को आगे बढ़ाने की सशक्त प्रेरणा देगी।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>*​माटी की कला को मिला नया आयाम*&nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align:justify">​ग्रामीण अंचल की पगडंडियों से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान के मंच तक पहुंची यह सांस्कृतिक यात्रा इस बात की साक्षी है कि लोककला की मौलिकता आज भी अमर है। मांदर की यह राष्ट्रीय गूंज यह संदेश दे गई कि जब गांव की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय सम्मान मिलता है, तो वह केवल कलाकारों का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर देती है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/the-beats-of-dhamtaris-mandar-resonated-in-rashtrapati-bhavan/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारत-जर्मनी के बीच ₹80 हजार करोड़ की पनडुब्बी डील करीब, 6 सबमरीन से बढ़ेगी नौसेना की ताकत</title>
		<link>https://newsx24.com/india-germany-submarine-deal-worth-%e2%82%b980000-crore-nears-finalization-6-submarines-to-boost-navys-strength/</link>
					<comments>https://newsx24.com/india-germany-submarine-deal-worth-%e2%82%b980000-crore-nears-finalization-6-submarines-to-boost-navys-strength/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 16:34:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[submarine]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/india-germany-submarine-deal-worth-%e2%82%b980000-crore-nears-finalization-6-submarines-to-boost-navys-strength/</guid>

					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्ली भारत और जर्मनी के बीच लगभग 9 अरब अमेरिकी डॉलर का सौदा अगले कुछ हफ्तों में साइन होने वाला है. इसमें जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) से छह डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां खरीदा जाएगा. ये पनडुब्बियां मुंबई के मझगांव डॉक में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ बनाई जाएंगी।&#160; यह भारत का अब तक का सबसे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत और जर्मनी के बीच लगभग 9 अरब अमेरिकी डॉलर का सौदा अगले कुछ हफ्तों में साइन होने वाला है. इसमें जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) से छह डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां खरीदा जाएगा. ये पनडुब्बियां मुंबई के मझगांव डॉक में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ बनाई जाएंगी।&nbsp;</p>
<p>यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा हथियार सौदा होगा, हालांकि फ्रांस से 114 राफेल जेट्स का 34 अरब डॉलर का संभावित सौदा इससे भी बड़ा हो सकता है. प्रोजेक्ट 75आई नाम का यह सौदा 20 साल से अधिक समय से पाइपलाइन में था. टीकेएमएस ने रूस, दक्षिण कोरिया, फ्रांस और स्पेन की कंपनियों को पीछे छोड़ते हुए कीमत और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के मामले में बेहतर ऑफर दिया।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>भारतीय नौसेना की पारंपरिक पनडुब्बी बेड़े की स्थिति चिंताजनक है. अधिकांश एसएसके पनडुब्बियां 25 साल से अधिक पुरानी हो चुकी हैं. 1999 में शुरू हुई 30 साल की पनडुब्बी निर्माण योजना में 24 पारंपरिक पनडुब्बियों का लक्ष्य था, लेकिन अब तक केवल छह ही मिली हैं।&nbsp;</p>
<p>भारत ने अरिहंत क्लास की परमाणु पनडुब्बियां खुद बना ली हैं, लेकिन पारंपरिक पनडुब्बियों के डिजाइन में अनुभव की कमी के कारण वह कुछ ही देशों पर निर्भर है. नतीजतन एक 3000 टन की पारंपरिक पनडुब्बी की कीमत स्वदेशी 7000 टन की परमाणु पनडुब्बी जितनी हो जाती है।&nbsp;</p>
<p><strong>क्षमता और तकनीक के फायदे</strong><br />
टीकेएमएस टाइप-214 डिजाइन का बड़ा वर्जन भारतीय नौसेना को देगा. इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) सिस्टम होगा, जो पानी के अंदर रहने की क्षमता लगभग दोगुनी कर देगा. ये पनडुब्बियां दुश्मन के जहाजों और व्यापारी जहाजों पर टॉरपीडो व एंटी-शिप मिसाइल से हमला कर सकेंगी. हिंद महासागर में एरिया-डिनायल मिशन चला सकेंगी. लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल से तटवर्ती ठिकानों पर सटीक हमले कर सकेंगी।&nbsp;</p>
<p>नौसेना को 1980 के दशक में खरीदी गई एचडीडब्ल्यू (अब टीकेएमएस) टाइप-209 पनडुब्बियों का अच्छा अनुभव रहा है, जो अभी भी सेवा में हैं. पहले जहाज की डिलीवरी सात साल बाद यानी 2030 के दशक की शुरुआत में होने की उम्मीद है. तीन और पनडुब्बियां <strong>खरीदने का विकल्प भी सौदे में है।&nbsp;</strong></p>
<p>जर्मनी के लिए यह सौदा भारत को रूसी हथियारों पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है. 2024 के फोकस ऑन इंडिया पेपर में बर्लिन ने साफ कहा था कि वह भारत को जर्मन हथियार कंपनियों पर ज्यादा निर्भर बनाना चाहता है. लेकिन हथियार सौदे राजनीतिक फैसले होते हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>जर्मनी ने दो दशक तक भारत को एमपी5 सबमशीन गन नहीं दी, क्योंकि गठबंधन सहयोगी मानवाधिकार उल्लंघन की आशंका जताते थे. वहीं शीत युद्ध के दौरान उसी जर्मनी ने पाकिस्तान को जी3 राइफल और एमपी5 की उत्पादन लाइनें दीं।&nbsp;</p>
<p>छह पनडुब्बियों का सौदा भारत को जर्मनी से कम से कम चार दशक तक बांध देगा. भविष्य में कोई जर्मन सरकार भारत को रूस के करीब मानकर स्पेयर्स या सपोर्ट रोक सकती है, या तुर्की व पाकिस्तान को भी पनडुब्बी बेच सकती है. सरकार-से-सरकार सौदा थोड़ी सुरक्षा देता है, लेकिन पर्याप्त नहीं।&nbsp;</p>
<p>इसलिए भारत को टीकेएमएस में मजगांव डॉक जैसी डीपीएसयू के जरिए हिस्सेदारी खरीदनी चाहिए. इससे नई दिल्ली कंपनी के अंदर आवाज पा सकेगी. जर्मन सरकार 5 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी पर फैसला करती है, इसलिए यह बर्लिन के लिए अपनी साझेदारी वाली बात को साबित करने का मौका होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>भारत-इजरायल-जर्मनी सहयोग की संभावना</strong><br />
इस सौदे से भारत और इजरायल दोनों जर्मन डिजाइन की पनडुब्बियां संचालित करेंगे. इजरायल की डॉल्फिन क्लास पनडुब्बियां भी टीकेएमएस से बनी हैं. दोनों देश स्पेयर्स पूलिंग, मेंटेनेंस और एआईपी विकास में सहयोग कर सकते हैं. भारत-इजरायल संबंध रणनीतिक हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>कारगिल युद्ध में इजरायल ने मदद की थी और हाल के वर्षों में भारत ने भी इजरायल को ड्रोन व गोला-बारूद उपलब्ध कराया. संयुक्त अरब अमीरात को भी इस सहयोग में शामिल किया जा सकता है. इस तरह यह सिर्फ हथियार सौदा नहीं, बल्कि साझा रणनीतिक दृष्टि वाला सहयोग बन सकता है।&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/india-germany-submarine-deal-worth-%e2%82%b980000-crore-nears-finalization-6-submarines-to-boost-navys-strength/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>100% हाइड्रोजन से चला विमान इंजन, भारत में भी नई तकनीक की टेस्टिंग; पेट्रोल-डीजल से कितना अलग है ये ईंधन?</title>
		<link>https://newsx24.com/aircraft-engine-runs-on-100-hydrogen-new-technology-tested-in-india-too-how-does-this-fuel-differ-from-petrol-and-diesel/</link>
					<comments>https://newsx24.com/aircraft-engine-runs-on-100-hydrogen-new-technology-tested-in-india-too-how-does-this-fuel-differ-from-petrol-and-diesel/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 16:33:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[aircraft]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/aircraft-engine-runs-on-100-hydrogen-new-technology-tested-in-india-too-how-does-this-fuel-differ-from-petrol-and-diesel/</guid>

					<description><![CDATA[बेंगलुरु&#160; देश की नामी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस और रोल्स-रॉयस ने 100 फीसदी हाइड्रोजन चलने वाले विमान इंजन का परीक्षण किया है. इस दौरान एक एडवांस विमान गैस टर्बाइन इंजन को उड़ान के पूरे चक्र में चलाया गया. इस परीक्षण के लिए उड़ान भरने, ऊंचाई पर उड़ने और उतरने जैसी स्थितियों को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बेंगलुरु&nbsp;</strong></p>
<p>देश की नामी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस और रोल्स-रॉयस ने 100 फीसदी हाइड्रोजन चलने वाले विमान इंजन का परीक्षण किया है. इस दौरान एक एडवांस विमान गैस टर्बाइन इंजन को उड़ान के पूरे चक्र में चलाया गया. इस परीक्षण के लिए उड़ान भरने, ऊंचाई पर उड़ने और उतरने जैसी स्थितियों को एक प्रयोगशाला में तैयार किया गया था. इस परीक्षण की तैयारी चार साल से चल रही थी. इस परीक्षण का मकसद यह पता लगाना है कि क्या हाइड्रोजन को भविष्य में विमान में बतौर ईंधन यूज किया जा सकता है या नहीं. खास बात यह है कि इस परीक्षण में फ्यूल में कुछ मिलाया नहीं गया था. यानी पूरी तरह 100 फीसदी हाइड्रोजन पर इंजन को चलाया गया।&nbsp;</p>
<p><strong>100% हाइड्रोजन से इंजन में क्या हुआ?</strong><br />
रोल्स-रॉयस और टीसीएस ने जिस इंजन का परीक्षण किया, उसमें हाइड्रोजन के इस्तेमाल के लिए जरूरी बदलाव किए गए थे. इसके बाद इसे उड़ान के अलग-अलग चरणों की परिस्थितियों में चलाया गया. टेकऑफ के दौरान इंजन की जरूरत अलग होती है. क्रूज यानी लगातार उड़ान के दौरान अलग. वहीं उतरते समय ईंधन और इंजन नियंत्रण की जरूरत फिर बदल जाती है।&nbsp;</p>
<p>इस परीक्षण में इन सभी चरणों को शामिल किया गया. इसका मतलब यह नहीं है कि हाइड्रोजन से चलने वाला विमान यात्रियों को लेकर उड़ान भर चुका है. फिलहाल यह इंजन तकनीक के परीक्षण का चरण है. असली विमान में इसे इस्तेमाल करने से पहले कई और परीक्षण करने होंगे. टीसीएस ने इस परियोजना में ईंधन प्रणाली, इंजन नियंत्रण, हाइड्रोजन को जलाने, परीक्षण, आंकड़ों के विश्लेषण और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में रोल्स-रॉयस की मदद की।&nbsp;</p>
<p><strong>हाइड्रोजन इतना खास क्यों है?</strong><br />
हाइड्रोजन को भविष्य के स्वच्छ ईंधन के तौर पर देखा जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि हाइड्रोजन को जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड सीधे तौर पर पैदा नहीं होती. इसके मुकाबले पारंपरिक विमानन ईंधन पेट्रोलियम आधारित होता है. उसके जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है. विमानन क्षेत्र बड़ी मात्रा में कार्बन का उत्सर्जन करते हैं. इसलिए इस क्षेत्र के लिए ऐसा ईंधन तलाशना जरूरी है जो उत्सर्जन कम कर सके. यही वजह है कि हाइड्रोजन पर दुनियाभर में शोध हो रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या हाइड्रोजन पेट्रोल-डीजल से ज्यादा पावरफुल है?</strong><br />
यहां थोड़ा भ्रम दूर करना जरूरी है. हाइड्रोजन को सिर्फ पेट्रोल या डीजल की तरह &lsquo;ज्यादा पावरफुल&rsquo; कहना सही नहीं होगा. हाइड्रोजन का वजन बहुत कम है. प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन में पेट्रोल या डीजल की तुलना में काफी ज्यादा ऊर्जा होती है. यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है. लेकिन समस्या दूसरी जगह है. हाइड्रोजन बहुत हल्की गैस है. इसलिए समान मात्रा में ऊर्जा रखने के लिए इसे बहुत बड़े टैंक की जरूरत पड़ सकती है. इसे बेहद कम तापमान पर तरल बनाकर रखा जा सकता है या बहुत अधिक दबाव में गैस के रूप में संग्रहित किया जा सकता है. विमान के मामले में यह चुनौती बहुत बड़ी है. विमान में हर किलो वजन महत्वपूर्ण होता है. इसलिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं कि ईंधन में कितनी ऊर्जा है. यह भी देखना होगा कि उस ईंधन को विमान में कितनी जगह और कितने वजन के साथ रखा जा सकता <strong>है।&nbsp;</strong></p>
<p><strong>विमान में हाइड्रोजन का इस्तेमाल मुश्किल क्यों?</strong><br />
यही हाइड्रोजन विमान की सबसे बड़ी चुनौती है. आज के विमान अपेक्षाकृत छोटे टैंकों में बड़ी मात्रा में विमानन ईंधन ले जा सकते हैं. हाइड्रोजन को उसी तरीके से रखने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत पड़ सकती है. तरल हाइड्रोजन को लगभग -253 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखना पड़ता है. इसका मतलब है कि विमान में विशेष टैंक और ताप नियंत्रण प्रणाली की जरूरत होगी. सिर्फ टैंक बदलने से काम नहीं चलेगा. इंजन की ईंधन प्रणाली में बदलाव करना होगा. हाइड्रोजन का दहन पारंपरिक विमानन ईंधन से अलग होता है. इससे इंजन के तापमान, दहन स्थिरता और नियंत्रण से जुड़े नए सवाल पैदा होते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या अब हाइड्रोजन विमान जल्द उड़ने लगेगा?</strong><br />
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. 100 फीसदी हाइड्रोजन पर इंजन का परीक्षण सफल होना एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि जरूर है. लेकिन इंजन परीक्षण और व्यावसायिक यात्री विमान के बीच लंबा रास्ता है. अगले चरण में सुरक्षा, ईंधन भंडारण, विमान के डिजाइन, वजन, लागत, हाइड्रोजन की उपलब्धता और हवाई अड्डों पर ईंधन भरने की व्यवस्था जैसे सवालों का समाधान करना होगा।&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/aircraft-engine-runs-on-100-hydrogen-new-technology-tested-in-india-too-how-does-this-fuel-differ-from-petrol-and-diesel/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>किसानों के कल्याण के लिए कृषि, पशुपालन और उद्यानिकी को बढ़ावा दे रही सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव</title>
		<link>https://newsx24.com/the-government-is-promoting-agriculture-animal-husbandry-and-horticulture-for-the-welfare-of-farmers-chief-minister-dr-yadav/</link>
					<comments>https://newsx24.com/the-government-is-promoting-agriculture-animal-husbandry-and-horticulture-for-the-welfare-of-farmers-chief-minister-dr-yadav/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 16:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[Animal Husbandry]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/the-government-is-promoting-agriculture-animal-husbandry-and-horticulture-for-the-welfare-of-farmers-chief-minister-dr-yadav/</guid>

					<description><![CDATA[भोपाल&#160; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष में प्रदेश सरकार किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कृषि के साथ पशुपालन और उद्यानिकी को भी बढ़ावा दे रही है। गुना जिले की धनिया और गुलाब उत्पादन के क्षेत्र में विशेष पहचान है। किसानों को उद्यानिकी से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>भोपाल&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष में प्रदेश सरकार किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कृषि के साथ पशुपालन और उद्यानिकी को भी बढ़ावा दे रही है। गुना जिले की धनिया और गुलाब उत्पादन के क्षेत्र में विशेष पहचान है। किसानों को उद्यानिकी से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। गुना जिले के कुंभराज धनिया को शीघ्र ही जीआई टैग प्राप्त होगा। प्रदेश में उद्यानिकी का रकबा 20 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास से गुना कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पशुपालन के क्षेत्र में भी प्रदेश के किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है। बदलते दौर के अनुरूप पशु नस्ल सुधार जैसे कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। किसानों को दिन में विद्युत आपूर्ति का लाभ मिल रहा है, जिससे कृषि कार्य को और आसान बनाने में मदद मिली है।</p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं को भी कृषि, पशुपालन और उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। उन्नत गोपालन और डेयरी विकास के कार्यों से युवा बड़ी संख्या में जुड़ रहे हैं। उन्होंने किसानों से सामाजिक कुरीतियों को त्यागने, विवाह एवं अन्य प्रसंगों पर अनावश्यक खर्च कम करने, कृषि भूमि नहीं बेचने और बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों एवं किसानों से चर्चा भी की।</p>
<p style="text-align:justify">विधायक चाचौड़ा मती प्रियंका पेंची ने कहा कि आज का दिन बहुत अच्छा है। शासन की योजनाओं का लाभ एक-एक व्यक्ति तक पहुंच रहा है। भारत सरकार और राज्य सरकार लगातार ऐसी योजनाएं संचालित कर रही हैं, जिनसे लोगों का जीवन सरल हो रहा है और योजनाओं का लाभ घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify">गुना विधायक&nbsp; पन्नालाल शाक्य ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया जाना अच्छी बात है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जिस धरती से अन्न प्राप्त होता है, उसके प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए। कार्यक्रम में कलेक्टर&nbsp; किशोर कुमार कन्याल, सीईओ जिला पंचायत&nbsp; अभिषेक दुबे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।</p>
<p style="text-align:justify">अतिथियों ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन</p>
<p style="text-align:justify">बलराम कृषि महोत्सव के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं कृषि से संबंधित गतिविधियों की जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी लगाई गई। अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा अधिकारियों से विभागीय योजनाओं की जानकारी ली।</p>
<p style="text-align:justify">सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां</p>
<p style="text-align:justify">कार्यक्रम के प्रारंभ में कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को कृषि की उन्नत तकनीकों, प्राकृतिक खेती एवं अन्य कृषि उपयोगी विषयों की महत्वपूर्ण जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify">उपलब्धियों के लिये कृषक हुए सम्मानित</p>
<p style="text-align:justify">कार्यक्रम में कृषक परिवार के मेधावी छात्र एवं छात्राओं तथा जैविक कृषि एवं उन्नत तकनीक से खेती करने वाले कृषकों को भी सम्मानित किया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता दिवस में सम्मानित होने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/the-government-is-promoting-agriculture-animal-husbandry-and-horticulture-for-the-welfare-of-farmers-chief-minister-dr-yadav/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>फेक न्यूज के जमाने में हम नेक न्यूज वाले बनें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव</title>
		<link>https://newsx24.com/in-this-era-of-fake-news-lets-be-the-ones-who-provide-good-news-chief-minister-dr-yadav/</link>
					<comments>https://newsx24.com/in-this-era-of-fake-news-lets-be-the-ones-who-provide-good-news-chief-minister-dr-yadav/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 16:01:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[this era of fake]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/in-this-era-of-fake-news-lets-be-the-ones-who-provide-good-news-chief-minister-dr-yadav/</guid>

					<description><![CDATA[भोपाल&#160; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि फेक न्यूज़ के जमाने में हम नेक न्यूज़ वाले बने। पत्रकारिता में सत्ता का विरोध ठीक है, लेकिन देश विरोध नहीं होना चाहिए। हमारे लिए न्यूज़ से ऊपर नेशन हो, देश हित को हम सर्वोपरि रखें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के सत्रारंभ &#8211; &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>भोपाल&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि फेक न्यूज़ के जमाने में हम नेक न्यूज़ वाले बने। पत्रकारिता में सत्ता का विरोध ठीक है, लेकिन देश विरोध नहीं होना चाहिए। हमारे लिए न्यूज़ से ऊपर नेशन हो, देश हित को हम सर्वोपरि रखें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के सत्रारंभ &#8211; अभ्युदय 2026 के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मां सरस्वती, भारत माता और दादा माखनलाल चतुर्वेदी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय के प्रकाशनों का किया लोकार्पण</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय के प्रकाशनों क्रमशः &quot;दो सदी साक्षी&quot;, विकल्प लैब जरनल &quot;मैं न्यूज़ रूम&quot; और भारत की टेंपल इकोनॉमी पर केंद्रित जरनल &quot;इंडियन कलाईडोस्कोप&quot; का विमोचन किया तथा विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों सु परिधि पुजारी, सु तमन्ना लश्कर और सु शिविका गुप्ता का उनकी उपलब्धियां के लिए सम्मान कर उन्हें अलंकरण प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी &quot;100 साल से 100 सुर्खियां&quot; का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आगमन पर कुलगुरु&nbsp; विजय मनोहर तिवारी ने डॉ. यादव को विश्वविद्यालय की परंपरा अनुसार पुस्तकें &quot;माखन के लाल&quot; और &quot;कार्टून कथा&quot; तथा अंग वस्त्रम भेंट कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध अभिनेता, लेखक और साहित्यकार&nbsp; पीयूष मिश्रा और देशभर से आए विश्वविद्यालय के 50 पूर्व विद्यार्थी विशेष रूप से उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>पत्रकारिता विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने देशभर में अपनी साख बनाई हैं</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय आज देश का उत्कृष्ट पत्रकारिता व संचार संस्थान बन चुका है। यह पत्रकारों के लिए एक पवित्र मंदिर की तरह है। यहां के विद्यार्थियों ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और आधुनिक दौर की डिजिटल पत्रकारिता के जरिए देशभर में अपनी साख और धाक बनाई है। आजादी के दौर में दादा पंडित माखनलाल चतुर्वेदी, कवि प्रदीप को उनकी रचनाओं के लिए अंग्रेजों ने सजा सुनाई थी। हमारे साहित्यकार और पत्रकार उस दौर में निडरता के साथ सच्चाई के साथ खड़े थे और आज भी वे उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार पत्रकारिता विश्वविद्यालय के विकास के लिए संकल्पबद्ध है। कुलगुरु&nbsp; विजय मनोहर तिवारी और समस्त स्टॉफ ने विश्वविद्यालय की विरासत को प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>आपातकाल के दौर में समाचार पत्रों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के स्वाधीनता आंदोलन में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर ने पत्रकार की भूमिका में महत्वूपर्ण योगदान दिया। वे पढ़ाई के लिए लंदन गए और 1857 के संघर्ष के सही स्वरूप को सबके सामने लाते हुए बताया कि यह मात्र सैनिक विद्रोह नहीं अपितु स्वतंत्रता के लिए समर था। दो बार कालापानी की सजा मिलने पर भी उन्होंने पत्रकारिता और लेखन कार्य को जारी रखा। उन्होंने हिंदी भाषा को समाज में प्रतिष्ठित स्थान दिलवाने के लिए आंदोलन चलाया। देश में हिंदी पत्रकारिता के स्वनामधन्य पत्रकारों की लंबी परंपरा रही है। इसके बाद आपातकाल के दौर में समाचार पत्रों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए तत्कालीन सत्ता का विरोध किया और अपनी असहमति स्वरूप समाचार पत्रों के संपादकीय पृष्ठ खाली छोड़ दिए गए।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>भारत में प्राचीन काल से ही संप्रेषण की सशक्त परंपरा रही है</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही संप्रेषण की सशक्त परंपरा रही है। महर्षि वाल्मीकि ने लव-कुश को भगवान राम की कथा से परिचित कराया और बाद में दोनों बालकों ने अयोध्या पहुंचकर राम के दरबार में राम कथा का सस्वर गायन किया। महर्षि वाल्मीकि भगवान राम के अतीत के स्वर्णिम पक्ष को लव और कुश के माध्यम से समाज के सामने लाए, यह कुशल संप्रेषण का ही प्रभावी तरीका था। इसी प्रकार भगवान कृष्ण के काल में देवऋषि नारद जी ने सूचनाओं के आदान-प्रदान से एक पत्रकार के रूप में भूमिका निभाई। भगवान कृष्ण ने मध्यप्रदेश की धरती पर 64 कला और 14 विद्याएं सीखकर हम सभी को गौरवान्वित किया है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>भगवान कृष्ण और आचार्य आदि शंकर, दोनों की शिक्षा मध्यप्रदेश की धरती पर हुई</strong></p>
<p style="text-align:justify">कुलगुरु&nbsp; विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी आज देशभर के शीर्ष संस्थानों में नाम रोशन कर रहे हैं। भगवान कृष्ण और आचार्य आदि शंकर, दोनों की शिक्षा मध्यप्रदेश की धरती पर हुई है। विद्यार्थी नकारात्मक विचारों को कभी स्वयं पर हावी न होने दें और सकारात्मक कार्यों के माध्यम से देश को आगे बढ़ाएं। सुप्रसिद्ध अभिनेता, लेखक और साहित्यकार&nbsp; पीयूष मिश्रा ने कहा कि भोपाल की सुंदरता यहां की आत्मीय बोली, लोगों का व्यवहार, खानपान और परंपराएं सभी को सहज ही आकर्षित करती हैं। विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. पी. शशिकला ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. विजय अग्रवाल,&nbsp; हेमंत मुक्तिबोध सहित विश्वविद्यालय के सभी प्राध्यापक, अतिथि विद्वान, नवागत एवं पूर्व विद्यार्थी और समस्त अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/in-this-era-of-fake-news-lets-be-the-ones-who-provide-good-news-chief-minister-dr-yadav/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन (नमन मिशन)&#8221; के गठन की स्वीकृति</title>
		<link>https://newsx24.com/approval-for-the-establishment-of-the-nirmal-and-aviral-maa-narmada-mission-naman-mission/</link>
					<comments>https://newsx24.com/approval-for-the-establishment-of-the-nirmal-and-aviral-maa-narmada-mission-naman-mission/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 15:46:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Narmada Mission]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/approval-for-the-establishment-of-the-nirmal-and-aviral-maa-narmada-mission-naman-mission/</guid>

					<description><![CDATA[भोपाल&#160; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और जीवनदायिनी माँ नर्मदा के संरक्षण, पुनर्जीवन तथा दीर्घकालीन सतत् प्रबंधन के लिए &#039;निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन (नमन मिशन)&#039; के गठन की स्वीकृति प्रदान की गयी। इसी तरह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>भोपाल&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और जीवनदायिनी माँ नर्मदा के संरक्षण, पुनर्जीवन तथा दीर्घकालीन सतत् प्रबंधन के लिए &#039;निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन (नमन मिशन)&#039; के गठन की स्वीकृति प्रदान की गयी। इसी तरह मंत्रि-परिषद ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 734 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। पिछले बीस वर्षों में प्रदेश में वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन द्वारा बजट में लगभग 150 गुना वृद्धि की गयी है।प्रदेश के सर्वांगीण विकास, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और तकनीकी प्रगति को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी गई। बैठक में राज्य की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं के आगामी वर्षों में निर्बाध संचालन के लिए लगभग 1 लाख 46 हजार करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई।</p>
<p style="text-align:justify">महिला कल्याण को प्राथमिकता देते हुए &#039;मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना&#039; के लिए 1,14,365 करोड़ रुपये, &#039;मध्यप्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना&#039; के लिए 16,326.47 करोड़ रुपये और &#039;प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना&#039; के लिए 2,137.65 करोड़ रुपये की वित्तीय निरंतरता को मंजूरी दी गई है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण एवं अधोसंरचना विस्तार के लिए 11 हजार 835.35 करोड़ रुपये, कृषि शिक्षा व अनुसंधान के लिए 870 करोड़ 16 लाख रुपये तथा प्रशासनिक कार्य कुशलता और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम में 35 नवीन पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>&#039;निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन (नमन मिशन)&#039; के गठन की स्वीकृति</strong></p>
<p style="text-align:justify">मंत्रि-परिषद ने प्रदेश को जीवनदायिनी नर्मदा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और दीर्घकालीन सतत प्रबंधन के लिए &#039;निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन (नमन मिशन)&#039; के गठन की स्वीकृति दी है। मध्यप्रदेश की लगभग 33 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर निर्भर है। इसे ध्यान में रखते हुए इस मिशन को एकीकृत, वैज्ञानिक और बहु-विभागीय संस्थागत व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>नमन मिशन की प्रबंधन संरचना</strong></p>
<p style="text-align:justify">&#039;नमन मिशन&#039; को म.प्र. सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1973 के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में पंजीकृत किया जाएगा, जो पूर्व में गठित मंत्रिमंडल समिति, अन्तर्विभागीय कार्यकारिणी समिति और राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति की प्राथमिकताओं व अनुश्रवण तंत्र को समाहित कर सुदृढ़ कार्य योजना पर कार्य करेगा। नमन मिशन का प्रशासनिक ढांचा त्रि-स्तरीय रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>मुख्यमंत्री करेंगे साधारण सभा की अध्यक्षता</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री सर्वोच्च साधारण सभा के अध्यक्ष रहेंगे। इसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री उपाध्यक्ष तथा 19 सहभागी विभागों के मंत्रीगण सदस्य होंगे। इसके अतिरिक्त साधारण सभा में नदी विज्ञान, जल विज्ञान, पर्यावरण, जैव विविधता और सामुदायिक प्रबंधन क्षेत्र के अधिकतम 10 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी नामांकित किए जाएंगे। मिशन की प्रशासनिक कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव उपाध्यक्ष और संचालन के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी कार्यकारिणी के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। इस कार्यकारिणी समिति में आईआईएसईआर, आईआईटी, आईआरएमए, एनआईएच, आईआईएफएम, आईसीएआर और एनईईआरआई जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों को भी जोड़ा गया है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>मिशन का होगा मजबूत वित्तीय ढांचा</strong></p>
<p style="text-align:justify">मिशन के सुचारू संचालन और परियोजनाओं के निष्पादन के लिए एक मजबूत वित्तीय ढांचा तैयार किया गया है। नर्मदा संरक्षण व विकास कार्यों के लिए &#039;निर्मल एवं अविरल नर्मदा मिशन निधि&#039; के तहत राज्य अनुदान से प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, वन विभाग की कैम्पा निधि से प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये का उपयोग किया जाएगा। आपवादिक परिस्थितियों में प्रचलित योजनाओं से भिन्न कार्यों के लिए 5 वर्षों में राज्य बजट से 100 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। मिशन में सीएसआर फंड, केंद्रीय सहायता और पीपीपी मॉडल के माध्यम से भी जन-सहयोग जुटाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट करेगी वैज्ञानिक मूल्यांकन</strong></p>
<p style="text-align:justify">तकनीकी दक्षता के लिए गठित की जा रही प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट एक टेक-इंजन और नवाचार केंद्र के रूप में कार्य करेगी। यह इकाई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और जलवायु परिवर्तन मॉडलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों का उपयोग कर नदी स्वास्थ्य का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 2,137.65 लाख करोड़ रूपये की स्वीकृति</strong></p>
<p style="text-align:justify">मंत्रि-परिषद ने मिशन शक्ति- उपयोजना सामर्थ्य अंतर्गत केन्द्र प्रवर्तित योजना &quot;प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना&quot; की वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तरता एवं क्रियान्वयन के लिए 2,137 करोड़ 65 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।</p>
<p style="text-align:justify">प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को मजदूरी की हानि की आंशिक क्षतिपूर्ति के रूप में नकद प्रोत्साहन प्रदान करना एवं द्वितीय प्रसव में बालिका जन्म को प्रोत्साहन प्रदान करना है। योजना अन्तर्गत प्रथम प्रसव वाली पात्र गर्भवती महिला को गर्भावस्था का शीघ्र पंजीकरण एवं अंतिम मासिक चक्र (एल.एम.पी) के 6 माह के अंदर कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच कराने पर प्रथम किश्त तीन हजार रूपये और बच्चे के जन्म के पंजीकरण एवं प्रथम चक्र का टीकाकरण पूर्ण होने पर द्वितीय किश्त दो हजार रूपये, इस प्रकार कुल 5 हजार रूपये तथा द्वितीय प्रसव पर बालिका जन्म पर प्रथम चक्र का टीकाकरण पूर्ण होने के पश्चात् 6 हजार रूपये का लाभ एक किश्त में प्रदान किये जाने का प्रावधान है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए 1,14,365 करोड़ रूपये की स्वीकृति</strong></p>
<p style="text-align:justify">मंत्रि-परिषद ने &quot;मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना&quot; के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तर संचालन के लिए 1 लाख 14 हजार 365 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महिलाओं के आर्थिक स्वालंबन, उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सतत् सुधार एवं परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023, लागू की गई है। योजना के प्रावधानों के अनुसार लाभार्थी महिलाओं को प्रत्येक माह 1500 रूपये मासिक आर्थिक सहायता राशि को उनके डीबीटी सक्रिय खाते में प्रदाय किया जा रहा है। वर्तमान में लाड़ली बहना योजना अन्तर्गत लगभग 1.27 करोड़ महिलाएं लाभान्वित की जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 16 हजार 326.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति</strong></p>
<p style="text-align:justify">मंत्रि-परिषद ने लाड़ली लक्ष्मी योजना का वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 16 हजार 326.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है।बालिका जन्म के प्रति जनता में सकारात्मक सोच, लिंग अनुपात में सुधार,&nbsp; बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर, स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार और उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के उद्देश्य से लाड़ली लक्ष्मी योजना लागू की गई है। योजना में अब तक लगभग 50.99 लाख बालिकाओं को लाभांवित किया जा चुका है। योजना अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को कक्षा 6वीं में प्रवेश पर 2 हजार रूपये, कक्षा 9वीं में प्रवेश पर 4 हजार रूपये, कक्षा 11वीं में प्रवेश पर रुपये 6 हजार रूपये और कक्षा 12वीं में प्रवेश पर 6 हजार रूपये ई-पेंमेंट के माध्यम से प्रदाय किया जाता है। महाविद्यालय में प्रवेश लेने पर प्रथम वर्ष में प्रोत्साहन राशि 12,500 रूपये एवं अंतिम वर्ष में 12,500 रूपये दो समान किश्तों में प्रदाय किया जाता है। साथ ही 21 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर 1 लाख रूपये का भुगतान किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>कृषि, शिक्षा एवं अनुसंधान गतिविधियों के लिए 870 करोड़ 16 लाख रूपये की स्वीकृति</strong></p>
<p style="text-align:justify">मंत्रि-परिषद ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग अंतर्गत तीन योजनाओं की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि तक संचालन की निरंतरता के लिए 870 करोड़ 16 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।</p>
<p style="text-align:justify">जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर स्ववित्तीय पेंशन योजना के लिए 310 करोड़ 23 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। इससे विश्वविद्यालय के सेवानिवृत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पेंशन का नियमित भुगतान किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify">राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर को ब्लाक ग्रांट योजना के लिए 469 करोड़ 93 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।विश्वविद्यालय प्रदेश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कृषि विस्तार गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र है। ब्लॉक ग्रांट योजना के माध्यम से अधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, अनुसंधान गतिविधियों, संस्थागत व्ययों तथा अन्य अनुमत्य वित्तीय दायित्वों का नियमित निर्वहन किया जाता है। योजना की निरंतरता विश्वविद्यालय की संस्थागत क्षमता, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं कृषि विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक हैं।</p>
<p style="text-align:justify">इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में अधोसंरचना विकास योजना के लिए 90 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के माध्यम से प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षण सुविधाओं, अनुसंधान अधोसंरचना तथा अन्य आवश्यक परिसंपत्तियों का विकास एवं उन्नयन किया जाता है। योजना की निरंतरता से विभाग एवं कृषि विश्वविद्यालयों की संस्थागत क्षमता सुदृढ़ होगी और कृषि क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत सुविधाओं का विकास सुनिश्चित होगा।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन एवं सुदृ&zwnj;ढ़ीकरण के लिए 11 हजार 835.35 करोड़ रूपये की स्वीकृति</strong></p>
<p style="text-align:justify">मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन एवं सुदृ&zwnj;ढ़ीकरण के लिए कुल 11 हजार 835.35 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार उप स्वास्थ्य केन्द्र योजना के लिए 4,742 करोड़ 45 लाख रूपये स्वीकृत किए गये है। उप स्वास्थ्य केन्द्र योजना के अंतर्गत प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के अधीन कार्यरत ए.एन.एम./एल.एच.व्ही. का वेतन आहरित किया जाता है। यह योजना मुख्य रूप से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालयों के लिए ही संचालित हैं।</p>
<p style="text-align:justify">स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन एवं सुदृ&zwnj;ढ़ीकरण योजना के लिए 518 करोड़ 93 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन एवं सुदृ&zwnj;ढ़ीकरण योजना के अंतर्गत प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक तथा उप स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आंतरिक एवं बाह्य रोगियों के उपचार के लिए लगने वाले अत्याधुनिक उपकरणों का प्रबंध किया जाता हैं।</p>
<p style="text-align:justify">अस्पताल एवं औषधालय के लिए भवन निर्माण योजना के लिए 3,219 करोड़ 22 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। योजनांर्गत प्रदेश के विभिन्न चिकित्सालयों जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला चिकित्सालय एवं सिविल अस्पताल के भवनों का उन्नयन तथा भवन निर्माण कार्य किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify">आशा कार्यकर्ता को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदाय करने संबंधी योजना के लिए 3,354 करोड़ 75 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की जमीनी कड़ी हैं, जो घर-घर जाकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, टीवी, मलेरिया, कुपोषण तथा अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी, सेवा और समर्थन प्रदान करती हैं। इसके साथ ही ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत को पूरा करने में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में 5200 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 65,800 कुल 71,000 आशा कार्यकर्ता तथा 5200 आशा पर्यवेक्षक ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के 35 नवीन पदों की स्वीकृति</strong></p>
<p style="text-align:justify">मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम की पदीय सरंचना में पूर्व में स्वीकृत 288 पदों के अतिरिक्त 35 नवीन पदों एवं पूर्व से स्वीकृत 07 पदों की निरंतरता आगामी 5 वर्षों अर्थात् 18 सितम्बर 2031 तक रखे जाने की स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृति अनुसार समस्त नियुक्तियों के लिए समेकित वेतनमान का निर्धारण करने, विभिन्न पदों की प्रतिपूर्ति के लिए न्यूनतम अर्हता/योग्यता विहित करने के लिए प्रबंध संचालक अधिकृत होंगे। पदोन्नति के लिए न्यूनतम अर्हता तथा प्रक्रिया संचालक मंडल द्वारा विहित की जा सकेगी तथा कार्य के स्वरूप के मद्देनजर किसी पद का पदनाम परिवर्तन संचालक मंडल कर सकेगा। इसके फलस्वरूप कुल 4 करोड़ 12 लाख रूपये का वार्षिक वित्तीय भार आना संभावित है, जिसकी पूर्ति निगम द्वारा अपने स्त्रोतों से की जायेगी।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 734 करोड़ रूपये की स्वीकृति</strong></p>
<p style="text-align:justify">मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने से संबंधित विज्ञान एवं प्रौ&zwnj;द्योगिकी विभाग अंतर्गत योजनाओं के 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि तक निरंतर संचालन के लिए 734 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। पिछले 20 वर्षों में प्रदेश में वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन द्वारा बजट में लगभग 150 गुना वृद्धि की गयी है।</p>
<p style="text-align:justify">निर्णय अनुसार अनुसंधान योजना तथा विकासीय गतिविधियों&#039; से संबंधित योजना के लिए 201 करोड़ 28 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के अंतर्गत अनुसंधान, नवाचार एवं तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ कर विज्ञान-आधारित एवं साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना के माध्यम से सुदूर संवेदन एवं जीआईएस, अनुसंधान एवं विकास, जैव प्रौ&zwnj;द्योगिकी, पेटेंट सूचना, जलवायु परिवर्तन अध्ययन, ग्रामीण प्रौ&zwnj;द्योगिकी तथा एटलस परियोजना के माध्यम से प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, नवाचार, कौशल विकास, बौ&zwnj;द्धिक संपदा संरक्षण एवं तकनीकी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify">&#039;निर्देशन एवं प्रशासन&#039; संबंधी योजना के लिए 119 करोड़ 04 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के अंतर्गत परिषद् के सामान्य प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, अधोसंरचना संचालन तथा योजनाओं के समन्वय एवं अनुश्रवण से संबंधित कार्य संपादित किए जायेगे। योजना के माध्यम से वेतन-भत्ते, कार्यालयीन व्यय, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, बैठकों, कार्यशालाओं तथा तकनीकी एवं प्रशासनिक सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित कर विज्ञान एवं तकनीकी योजनाओं के प्रभावी, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक आधार उपलब्ध कराया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify">इसी तरह &#039;विज्ञान को लोकप्रिय करना, विज्ञान के प्रसार के लिए सहायता&#039; संबंधी योजना के लिए 172 करोड़ 52 लाख रूपये और मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रानिक विकास निगम की गतिविधियों के लिए 241 करोड़ 16 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के अंतर्गत ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में विज्ञान एवं प्रौ&zwnj;द्योगिकी के लोकव्यापीकरण के उद्देश्य से विज्ञान जागरुकता कार्यक्रम, मोबाइल विज्ञान प्रयोगशालाएँ, विज्ञान शिक्षा एवं नवाचार कार्यशालाएँ तथा विज्ञान मंथन यात्राओं का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, योजना की गतिविधियों की नियमित निगरानी, मूल्यांकन एवं दस्तावेजीकरण के माध्यम से इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाएगा। इस के अंतर्गत राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, राष्ट्रीय गणित दिवस, विश्व पर्यावरण दिवस, राष्ट्रीय तकनीकी दिवस, संभाग स्तरीय विज्ञान मेले (संभागीय वैज्ञानिक सम्मेलन) और साइंस ऑन व्हील तथा क्रिएटिविटी लर्निंग सेंटर द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/approval-for-the-establishment-of-the-nirmal-and-aviral-maa-narmada-mission-naman-mission/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारत-अफगानिस्तान रिश्तों पर तालिबान का बड़ा संदेश, नूर ने मांगा नई दिल्ली का समर्थन</title>
		<link>https://newsx24.com/taliban-sends-major-message-regarding-india-afghanistan-relations-noor-seeks-new-delhis-support/</link>
					<comments>https://newsx24.com/taliban-sends-major-message-regarding-india-afghanistan-relations-noor-seeks-new-delhis-support/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 15:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[India-Afghanistan]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/taliban-sends-major-message-regarding-india-afghanistan-relations-noor-seeks-new-delhis-support/</guid>

					<description><![CDATA[नई दिल्ली भारत में अफगानिस्तान के प्रभारी राजदूत नूर अहमद नूर ने सोमवार को कहा कि काबुल और नयी दिल्ली के बीच मजबूत राजनीतिक भरोसा, आर्थिक साझेदारी और संबंधों की निरंतरता से न केवल दोनों देशों को लाभ होगा बल्कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा। पहली बार दिल्ली में सार्वजनिक कार्यक्रम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
भारत में अफगानिस्तान के प्रभारी राजदूत नूर अहमद नूर ने सोमवार को कहा कि काबुल और नयी दिल्ली के बीच मजबूत राजनीतिक भरोसा, आर्थिक साझेदारी और संबंधों की निरंतरता से न केवल दोनों देशों को लाभ होगा बल्कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p><strong>पहली बार दिल्ली में सार्वजनिक कार्यक्रम</strong><br />
नूर ने यह टिप्पणी दिल्ली स्थित अफगानिस्तान के दूतावास में &#039;विक्ट्री डे&#039; यानी 15 अगस्त 2021 को काबुल में तालिबान की सत्ता में वापसी की पांचवीं सालगिरह मनाने के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए की। पांच साल पहले तालिबान के सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद अफगानिस्तान की ओर नई दिल्ली में पहली बार आधिकारिक रूप से कोई सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था।</p>
<p><strong>भारत के अधिकारी भी हुए शामिल</strong><br />
दूतावास प्रभारी ने अफगानिस्तान इस्लामिक अमीरात की विदेश नीति को रेखांकित करते हुए कहा कि यह नीति &#039;&#039;संतुलित जुड़ाव और दखल न देने&#039;&#039; पर आधारित है और इसमें भारत के साथ प्रगाढ़ आर्थिक संबंध स्थापित करने की बात है। इस कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान-ईरान संभाग के प्रमुख और संयुक्त सचिव आनंद प्रकाश भी शामिल हुए।</p>
<p>भारत ने अब तक आधिकारिक रूप से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है। नूर ने कहा, &#039;हमारा मानना ​​है कि अफगानिस्तान और भारत के बीच मज़बूत राजनीतिक भरोसा, आर्थिक साझेदारी और संबंधों की निरंतरता से न केवल दोनों देशों को लाभ होगा, बल्कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता, संपर्क और साझा समृद्धि की दिशा में भी अहम योगदान मिलेगा।&#039; उन्होंने भारत-अफगानिस्तान संबंधों के अलग-अलग पहलुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि राजनयिक संपर्क बढ़े हैं, दूतावास और वाणिज्य दूतावास अधिक सक्रिय हुए हैं और पिछले कुछ सालों में दोनों पक्षों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने एक-दूसरे की राजधानियों का दौरा किया है।</p>
<p>नूर ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय सहयोग को लेकर रचनात्मक समझ विकसित हुई है। उन्होंने कहा, &#039;&#039;अफगानिस्तान के प्राचीन शहरों, जैसे काबुल, हेरात और कंधार ने भारतीय व्यापारियों और कारवां का स्वागत किया, जबकि दिल्ली और लाहौर जैसे भारतीय शहरों को अफगान विद्वानों, कवियों और सूफियों के प्रभाव से लाभ हुआ।&#039;</p>
<p>नूर ने कहा, &lsquo;राजनीतिक क्षेत्र में भी, दोनों देशों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से आजादी और स्वतंत्रता के संघर्ष में एक-दूसरे को प्रभावित किया। यह हमारा साझा अतीत है, जिससे हम बेहतर भविष्य के लिए प्रेरणा लेते हैं।&rsquo; नूर ने अफगानिस्तान के &#039;अंतरराष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा और सम्मान&#039; के लिए भारत से समर्थन मांगा। इससे पहले तालिबानी अधिकारी भारत का दौरा कर चुके हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/taliban-sends-major-message-regarding-india-afghanistan-relations-noor-seeks-new-delhis-support/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>तीस्ता जल समझौते पर बांग्लादेश का बड़ा बयान, भारत से दोस्ती कायम रखने की अपील</title>
		<link>https://newsx24.com/bangladesh-issues-major-statement-on-teesta-water-treaty-appeals-to-maintain-friendly-ties-with-india/</link>
					<comments>https://newsx24.com/bangladesh-issues-major-statement-on-teesta-water-treaty-appeals-to-maintain-friendly-ties-with-india/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 15:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[Teesta water treaty]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/bangladesh-issues-major-statement-on-teesta-water-treaty-appeals-to-maintain-friendly-ties-with-india/</guid>

					<description><![CDATA[नई दिल्ली बांग्लादेश के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि उनका देश लंबे समय से अटके तीस्ता जल बंटवारा समझौते को लेकर भारत के साथ अपने मैत्रीपूर्ण संबंधों को खराब नहीं करना चाहता। साथ ही उन्होंने नई दिल्ली से आग्रह किया कि वह अपने हितों के साथ-साथ ढाका के हितों को भी ध्यान में रखे। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली </strong><br />
बांग्लादेश के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि उनका देश लंबे समय से अटके तीस्ता जल बंटवारा समझौते को लेकर भारत के साथ अपने मैत्रीपूर्ण संबंधों को खराब नहीं करना चाहता। साथ ही उन्होंने नई दिल्ली से आग्रह किया कि वह अपने हितों के साथ-साथ ढाका के हितों को भी ध्यान में रखे। जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने समाचार पोर्टल &#039;टीबीएसन्यूज डॉट नेट&#039; द्वारा यहां आयोजित एक संगोष्ठी में कहा, &#039;&#039;पड़ोसी देश एक मित्र देश है। उन्हें यह सोचना होगा कि जिस तरह उनके अपने हित हैं, उसी तरह हमारे भी हित हैं।&#039;&#039;</p>
<p>उन्होंने कहा, &#039;एक मित्र को दूसरे मित्र के हितों की रक्षा करनी चाहिए। हम कभी नहीं चाहते कि उनके साथ हमारे मैत्रीपूर्ण संबंध खराब हों।&#039; अनी की यह टिप्पणी रविवार को ऐसे समय आई जब बांग्लादेश ने तीस्ता नदी के मुद्दे को हल करने के लिए नए सिरे से प्रयास तेज किए हैं। इसमें चीन के सहयोग से प्रस्तावित &#039;तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना&#039; भी शामिल है। ढाका इस परियोजना के माध्यम से देश के उत्तरी जिलों में बार-बार आने वाली बाढ़, नदी कटाव और सूखे के मौसम में पानी की कमी जैसी समस्याओं से निपटना चाहता है।</p>
<p><strong>तीस्ता पर क्या हो रही है चर्चा</strong><br />
उन्होंने बताया कि फरवरी में हुए चुनाव के बाद सरकार ने प्रस्तावित तीस्ता परियोजना को लेकर विशेषज्ञों की राय जानने के लिए कई संगोष्ठी आयोजित की हैं और विचार-विमर्श किए हैं। अनी ने कहा कि इन सुझावों के आधार पर तैयार विस्तृत अध्ययन से सरकार को परियोजना के संबंध में ठोस कदम उठाने में मदद मिलेगी। यह संगोष्ठी &#039;तीस्ता नदी का सतत प्रबंधन&#039; विषय पर जल संसाधन मंत्रालय और बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी।</p>
<p><strong>बांग्लादेश की परेशानियां गिनाईं</strong><br />
मंत्री ने इस परियोजना को एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि उत्तर बांग्लादेश के पांच-छह जिलों के लोगों को इससे काफी उम्मीदें हैं। ये लोग वर्षों से नदी कटाव और अन्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, &#039;यदि हम इसे लागू करने में विफल रहते हैं, तो इन क्षेत्रों के परिवारों को होने वाला नुकसान और उनकी समस्याएं लगातार बढ़ती रहेंगी। हमें किसी भी तरह इस चुनौती से पार पाना होगा।&#039;</p>
<p><strong>भारत और बांग्लादेश के बीच पुराना मुद्दा</strong><br />
तीस्ता का मुद्दा दशकों से भारत-बांग्लादेश जल सहयोग में एक प्रमुख विवाद का विषय बना हुआ है। तीस्ता नदी हिमालय से निकलती है और सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। वहां यह आगे चलकर जमुना नदी में मिलती है, जिसे बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र के नाम से जाना जाता है।</p>
<p>उत्तरी बांग्लादेश में कृषि और लोगों की आजीविका के लिए यह नदी बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं, पश्चिम बंगाल में सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए भी इसका विशेष महत्व है। नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में कई जलविद्युत परियोजनाएं हैं और उत्तर बंगाल के करीब छह जिले इसके पानी पर निर्भर हैं।</p>
<p>भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता के पानी के बंटवारे को लेकर 1980 के दशक से बातचीत होती रही है। वर्ष 1983 में हुए एक अंतरिम समझौते के तहत भारत को 39 प्रतिशत और बांग्लादेश को 36 प्रतिशत पानी देने का प्रावधान था, जबकि 25 प्रतिशत पानी को आवंटित नहीं किया गया था। इसके बाद भी बातचीत जारी रही, लेकिन कोई व्यापक दीर्घकालिक समझौता नहीं हो सका।</p>
<p><strong>15 साल पहले हुआ था समझौता</strong><br />
वर्ष 2011 में एक अंतरिम समझौते का मसौदा तैयार किया गया था, जिसमें सूखे के मौसम में पानी के बंटवारे का फार्मूला प्रस्तावित था। हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध के कारण इस पर हस्ताक्षर नहीं हो सके। पश्चिम बंगाल सरकार को आशंका थी कि इससे राज्य में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।</p>
<p><strong>बांग्लादेश के पीएम की इस मुद्दे पर नजर</strong><br />
अनी ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान नियमित रूप से इस परियोजना पर चर्चा करते हैं और संबंधित विभागों तथा अंतर-मंत्रालयी बैठकों में इसकी प्रगति की समीक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि एक समझौते की &#039;तत्काल आवश्यकता&#039; है। उन्होंने कहा, &#039;इसे तीस्ता संधि कहें, तीस्ता मास्टर प्लान कहें या इस परियोजना को लागू करने के लिए जो भी जरूरी हो, हम इसके कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ेंगे।&#039;</p>
<p>जून में चीन की आधिकारिक यात्रा के दौरान रहमान ने चीनी नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बातचीत की थी। इस दौरान बीजिंग ने विवादित तीस्ता बहाली परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता का अध्ययन जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई थी। तीस्ता परियोजना में चीन को शामिल करने के बांग्लादेश के फैसले ने इस मुद्दे को रणनीतिक आयाम भी दे दिया है।</p>
<p><strong>भारत के लिए क्यों है संवेदनशील मुद्दा</strong><br />
भारत के लिए उत्तरी बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी संवेदनशील विषय है, क्योंकि यह क्षेत्र सिलीगुड़ी गलियारे के करीब है। यह संकरा भू-भाग भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। भारत का कहना है कि तीस्ता मुद्दे का समाधान पश्चिम बंगाल समेत सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जुलाई में कहा था कि प्रस्तावित तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भारत का पक्ष बांग्लादेश को पहले ही बता दिया गया है। उन्होंने कहा था कि भारत तीस्ता मुद्दे पर अपने &#039;समग्र दृष्टिकोण&#039; में इससे जुड़े &#039;सभी घटनाक्रमों&#039; को ध्यान में रखेगा।</p>
<p>तीस्ता का मुद्दा गंगा जल बंटवारा संधि से अलग है। भारत और बांग्लादेश ने 1996 में गंगा जल बंटवारे को लेकर 30 वर्ष के लिए समझौता किया था, जिसकी अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। भारत और बांग्लादेश की सीमाओं से होकर गुजरने वाली 54 नदिया हैं और जल संबंधी मुद्दों का समाधान दोनों देश संयुक्त नदी आयोग के माध्यम से करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/bangladesh-issues-major-statement-on-teesta-water-treaty-appeals-to-maintain-friendly-ties-with-india/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सर्वसमाज को एकजुटता के सूत्र में पिरोना हमारा लक्ष्य हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव</title>
		<link>https://newsx24.com/our-goal-is-to-unite-the-entire-community-chief-minister-dr-yadav/</link>
					<comments>https://newsx24.com/our-goal-is-to-unite-the-entire-community-chief-minister-dr-yadav/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 15:01:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[Our goal]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/our-goal-is-to-unite-the-entire-community-chief-minister-dr-yadav/</guid>

					<description><![CDATA[भोपाल&#160; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री&#160; नरेन्द्र मोदी ने समरसता संकल्प अभियान के माध्यम से सर्वसमाज को एकजुटता के सूत्र में पिरोने का लक्ष्य रखा है। हमें जातिवाद जैसी चुनौतियों से भरे वातावरण में स्वयं के मन में पवित्र भाव जागृत करने और समरसता लाने की आवश्यकता है। देश में समय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>भोपाल&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री&nbsp; नरेन्द्र मोदी ने समरसता संकल्प अभियान के माध्यम से सर्वसमाज को एकजुटता के सूत्र में पिरोने का लक्ष्य रखा है। हमें जातिवाद जैसी चुनौतियों से भरे वातावरण में स्वयं के मन में पवित्र भाव जागृत करने और समरसता लाने की आवश्यकता है। देश में समय बदला है अब प्रभु राम की नगरी अयोध्या में बने एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि और पंजाब में एयरपोर्ट का नाम संत रविदास महाराज के नाम पर रखा गया है। यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि सागर में 100 करोड़ की लागत से संत रविदास महाराज का भव्य मंदिर और स्मारक बनकर तैयार हो रहा है। बहुत जल्द प्रधानमंत्री&nbsp; मोदी को इस धाम के लोकार्पण के लिए आमंत्रित किया जाएगा। संत रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष में उज्जैन में उनकी वस्तुओं और शिष्य के समाधि स्थल को संरक्षित करते हुए भव्य गुरुद्वारा निर्माण के लिए भूमि-पूजन किया जाएगा। प्रदेश में जहां रविदास जी के चरण पड़े, उन तीर्थ स्थलों का उन्नयन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को रवींद्र भवन में संत शिरोमणि&nbsp; गुरु रविदास महाराज जी की 650वीं जन्म जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान एवं कलश वंदन यात्रा का रविन्द्र भवन में शुभारंभ कर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत रविदास महाराज के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा उनकी जन्मस्थली काशी से आए कलशों का पूजन किया और संभागीय प्रतिनिधियों को कलशों का वितरण किया।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>राज्य सरकार समरसता संकल्प अभियान में हरसंभव सहयोग देगी</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार समरसता संकल्प अभियान की कार्ययोजना में हर स्तर पर सहयोग देने के लिए तत्पर है। उन्होंने प्रदेशवासियों से संत रविदास जी महाराज के बताए मार्ग का अनुसरण करने और जीवन में उनके विचारों को धारण करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काशी की पवित्र भूमि पर जन्मे संत शिरोमणि&nbsp; गुरु रविदास महाराज ने भारत को एक करने का कार्य किया। तत्कालीन समय में विधर्मी आक्रांता भारतीय परंपराओं को नष्ट करना चाहते थे। तब छोटे बालक के रूप में रविदास जी ने बनारस के घाटों पर संत रामानंद आचार्य महाराज के प्रवचन और कथाएं सुनकर भक्तिभाव से समाज को एक करने का संकल्प लिया था। संत रविदास जी ने &#8211; जातपात पूछे न कोई हरि को भजे सो हरि का होई, का संदेश दिया था। संत रविदास ने कर्म करते हुए सदैव अपने मन में भक्ति भाव को बनाए रखा। हमारे साधु-संतों ने सामाजिक समरसता की इस पताका को अपने हाथों में थामा और समरसता के विचार को आगे बढ़ाया। उस दौर के सबसे महान संत रामानंद जी महाराज ने संत रविदास जी को दीक्षा दिलवाई थी। संत रविदास के भजन आज भी भक्ति भाव से लोगों के मन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>गांव-गांव तक जाएगी कलश वंदन यात्रा</strong></p>
<p style="text-align:justify">अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री&nbsp; नागर सिंह चौहान ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जन्म जयंती वर्ष के अवसर पर समरसता संकल्प अभियान और कलश वंदन यात्रा को प्रदेश में गांव-गांव तक तक ले जाया जाएगा। पूर्व मंत्री&nbsp; लालसिंह आर्य ने कहा कि संत शिरोमणि&nbsp; गुरु रविदास महाराज ने सामाजिक समरसता, मानव कल्याण, धर्मांतरण के विरूद्ध खड़े होने की प्रेरणा दी है। प्रधानमंत्री&nbsp; नरेन्द्र मोदी की 01 फरवरी 2026 को हुई जालंधर यात्रा में संत रविदास जी की 650वीं जयंती मनाने का निर्णय लिया गया था। इस क्रम में कलश वंदन यात्रा आरंभ की गई है। सभी गांव और कस्बों में कलशों की शोभायात्रा निकाली जाएगी। अभियान के अंतर्गत बड़े पैमाने पर संतगण से संपर्क किया जा रहा है। अंतिम चरण में छात्रावास संपर्क अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों को संत रविदास जी के जीवन दर्शन से परिचित कराया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>प्रधानमंत्री&nbsp; मोदी ने राष्ट्रवाद को मजबूत कर वंदे मातरम् को घर-घर पहुंचाया</strong></p>
<p style="text-align:justify">पूर्व राज्यसभा सदस्य&nbsp; दुष्यंत गौतम ने कहा कि संत शिरोमणि&nbsp; गुरु रविदास महाराज जी की 650वीं जन्म जयंती वर्ष के अवसर पर समरसता संकल्प अभियान और कलश वंदन यात्रा की शुरुआत गुरुपूर्णिमा से शुरू हुई और माघ पूर्णिमा 20 फरवरी तक चलेगी। देश की संस्कृति और विरासत को आगे बढ़ाने वाले सभी संत, महंत और महापुरुष हमारे आराध्य हैं। देश में जब तलवार के बल पर बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा था, उस दौर में भक्तिकाल की अलख जगी और तुलसीदास जी, गुरुनानक देव जी, संत रविदास जी ने भक्ति काल को बल दिया। संत रविदास ने जन-जन तक अपनी वाणी को पहुंचाया। संत रविदास ने वेद और सनातन को नहीं छोड़ा और जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए अभियान चलाया। प्रधानमंत्री&nbsp; मोदी सामाजिक समरसता और सामाजिक विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। काशी से शुरू हुआ कलश अभियान देश के विभिन्न राज्यों में जाएगा और संत रविदास जी की वाणी घर-घर तक पहुंचेगी।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>हमें समाज के हर वर्ग को जोड़कर समरसता की मिसाल प्रस्तुत करनी है</strong></p>
<p style="text-align:justify">वरिष्ठ विधायक&nbsp; हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि संत रविदास ने कटुता को छोड़कर समाज को समरसता को अपनाने का मंत्र दिया। हमें इस समरसता संकल्प अभियान को जन-जन तक लेकर जाना है। सागर में संत रविदास का भव्य मंदिर और स्मारक बनाया जा रहा है। हमें समाज के हर वर्ग को जोड़कर समरसता की मिसाल प्रस्तुत करनी है और हमें देश को विकसित भारत बनाना है। कार्यक्रम में मंत्रिगण, सांसद, विधायक, बड़ी संख्या में संतगण, जनप्रतिनिधि तथा श्रद्धालु उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/our-goal-is-to-unite-the-entire-community-chief-minister-dr-yadav/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
