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		<title>फरीदाबाद में खिले फूल, लेकिन किसान परेशान,गेंदे के दाम ने तोड़ी कमर</title>
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		<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 16:21:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[फरीदाबाद &#160;हरियाणा में फरीदाबाद के खेतों में इन दिनों गेंदे के पीले-नारंगी फूल दूर-दूर तक चमक रहे हैं. खेतों को देखकर कोई भी यही कहेगा कि इस बार किसान की मेहनत रंग लाई है. लेकिन इन खूबसूरत फूलों के पीछे एक किसान की चिंता छिपी है. जिस फसल से हर साल घर चलता था बच्चों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>फरीदाबाद</strong></p>
<p>&nbsp;हरियाणा में फरीदाबाद के खेतों में इन दिनों गेंदे के पीले-नारंगी फूल दूर-दूर तक चमक रहे हैं. खेतों को देखकर कोई भी यही कहेगा कि इस बार किसान की मेहनत रंग लाई है. लेकिन इन खूबसूरत फूलों के पीछे एक किसान की चिंता छिपी है. जिस फसल से हर साल घर चलता था बच्चों की पढ़ाई होती थी और परिवार की जरूरतें पूरी होती थीं. वही फसल इस बार किसानों के लिए परेशानी बन गई है. खेतों में फूलों की भरमार है लेकिन मंडियों में इनके दाम इतने कम मिल रहे हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. किसान दिन-रात मेहनत कर रहा है लेकिन बाजार में उसकी मेहनत की कीमत नहीं मिल रही.</p>
<p>फरीदाबाद के साहुपुरा गांव में गेंदे की खेती करने वाले किसान लक्ष्मण सिंह सैनी ने&nbsp; अपनी परेशानी साझा की. लक्ष्मण ने बताया मैं पीछे से बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव का रहने वाला हूं और पिछले 30 सालों से गेंदे की खेती कर रह रहा हूं. इस बार मैंने एक एकड़ जमीन में कोलकाता की खास वैरायटी का गेंदा लगाया. बेहतर उत्पादन और अच्छे मुनाफे की उम्मीद में मैंने कोलकाता से पौधे मंगवाए. एक पौधा 70 पैसे का पड़ा और एक एकड़ में करीब 25 हजार पौधे लगाए गए. डबल लाइन में रोपाई की गई ताकि उत्पादन ज्यादा हो सके.</p>
<p>लक्ष्मण ने बताया गेंदे की खेती आसान नहीं है. पौधे लगाने से पहले खेत की छह बार जुताई करनी पड़ी. इसके बाद डोलियां तैयार की गईं. पौध रोपाई के लिए 7 से 8 मजदूर लगाए गए जिनकी मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन रही. दिसंबर में पौधे लगाए गए थे और अब खेत फूलों से भर चुके हैं. फसल को रोज पानी देना पड़ता है. हर चौथे दिन सिंचाई करनी होती है. इतनी मेहनत और खर्च के बाद मुझे उम्मीद थी कि इस बार अच्छी कमाई होगी. लेकिन जब फूल मंडी पहुंचे तो दाम सुनकर मेरे होश उड़ गए. फरीदाबाद से लेकर दिल्ली तक गेंदे का भाव केवल 5 से 6 रुपये प्रति किलो मिल रहा है.</p>
<p>लक्ष्मण ने बताया इतने कम दाम में तो ढुलाई का खर्च भी नहीं निकलता. बाजार में यही फूलों की मालाएं 20 से 30 रुपये में बिकती हैं लेकिन खेत में पसीना बहाने वाले किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलता. इस बार गेंदे की बुवाई ज्यादा होने के कारण बाजार में आवक बढ़ गई है. मांग तो सालभर रहती है लेकिन आपूर्ति अधिक होने से दाम गिर गए हैं. कई बार यही गेंदा 200 रुपये किलो तक बिक चुका है लेकिन इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं. उत्तर प्रदेश में तो कई किसानों ने फूल खेतों में ही छोड़ दिए हैं क्योंकि मंडी तक ले जाने का किराया भी नहीं निकल रहा.</p>
<p>लक्ष्मण ने बताया मेरे मामा ने भी उत्तर प्रदेश में गेंदा लगाया था. वहां हालात और भी खराब हैं. लेकिन मैंने अपनी फसल खेत में नहीं छोड़ी. मैं रोज फूल तोड़कर मंडी ले जा रहा हूं. कुछ न कुछ तो मिल ही जाएगा. आखिर परिवार इसी खेती पर निर्भर है. सात लोगों का परिवार है और सभी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है. लक्ष्मण ने बताया इस मुश्किल समय में एक और हादसे ने मेरी परेशानी बढ़ा दी. मैं सुबह चार बजे ओल्ड फरीदाबाद मंडी फूल लेकर जा रहा था तभी रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया. पूरे शरीर में चोट आई. इसके बावजूद मैंने हिम्मत नहीं हारी. आज भी मैं अपनी फसल मंडी पहुंचा रहा हूं.</p>
<p>लक्ष्मण ने बताया जब उत्पादन ज्यादा होता है तो मैं दिल्ली की गाजीपुर मंडी भी लेकर जाता हूं. खेती ही मेरा जीवन है और इसी से मेरा परिवार चलता है. 30 साल के खेती के अनुभव में मैने ऐसा नुकसान पहली बार देखा है. खेतों में फूल जरूर खिले हैं लेकिन किसान के चेहरे पर मुस्कान गायब है. यही आज के किसान की सबसे बड़ी विडंबना है.</p>
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