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	<title>Ganga Expressway &#8211; NewsX 24</title>
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	<title>Ganga Expressway &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>गंगा एक्सप्रेसवे पर सफर हुआ महंगा, अब टू-व्हीलर चालकों से भी वसूला जाएगा टोल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 17 May 2026 06:21:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga Expressway]]></category>
		<category><![CDATA[tolls]]></category>
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					<description><![CDATA[लखनऊ &#160;उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे पर अब यात्रियों को सफर के लिए टोल टैक्स देना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले महीने उद्घाटन किए गए इस एक्सप्रेसवे पर शुरुआती दिनों में लोगों को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई थी, लेकिन अब यह छूट खत्म हो गई है। करीब &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ</strong></p>
<p>&nbsp;उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे पर अब यात्रियों को सफर के लिए टोल टैक्स देना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले महीने उद्घाटन किए गए इस एक्सप्रेसवे पर शुरुआती दिनों में लोगों को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई थी, लेकिन अब यह छूट खत्म हो गई है।</p>
<p>करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है और प्रदेश के कई बड़े जिलों को जोड़ता है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद 15 मई तक वाहनों से कोई शुल्क नहीं लिया गया, लेकिन अब यूपीडा (UPEDA) की ओर से टोल दरें लागू कर दी गई हैं।</p>
<p>जारी दरों के मुताबिक, दोपहिया वाहन, तीन पहिया और ट्रैक्टर चालकों को प्रति किलोमीटर 1.28 रुपये टोल देना होगा। वहीं कार, जीप, वैन और अन्य हल्के मोटर वाहनों के लिए यह शुल्क 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया गया है। सरकार का दावा है कि गंगा एक्सप्रेसवे से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा का समय काफी कम होगा और व्यापार, पर्यटन व परिवहन को नई रफ्तार मिलेगी। हालांकि टोल लागू होने के बाद अब यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ भी बढ़ेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जनपदों को जोड़ता है और इसे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। 15 दिन की टोल छूट दी गई थी। अब इस जाने वाले को टोल देना होगा।</p>
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		<title>गंगा एक्सप्रेसवे पर आज से टोल वसूली शुरू; 15 दिन की मुफ्त यात्रा अवधि समाप्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 May 2026 15:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga Expressway]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) पर अब सफर करने वालों को टोल टैक्स का देना होगा। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार गंगा एक्सप्रेसवे पर गुरुवार आधी रात्रि 12 बजे से टोल टैक्स वसूला जाएगा। यह वसूली अडाणी समूह द्वारा बनाए गए गंगा एक्सप्रेसवे के 80 फीसद हिस्से में होगी। जबकि आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा बनाए गए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;<strong>लखनऊ</strong></p>
<p>गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) पर अब सफर करने वालों को टोल टैक्स का देना होगा। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार गंगा एक्सप्रेसवे पर गुरुवार आधी रात्रि 12 बजे से टोल टैक्स वसूला जाएगा। यह वसूली अडाणी समूह द्वारा बनाए गए गंगा एक्सप्रेसवे के 80 फीसद हिस्से में होगी। जबकि आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा बनाए गए हिस्से में टोल टैक्स की वसूली शुक्रवार रात 12 बजे से शुरू होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 29 अप्रैल को हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। टोल टैक्स की वसूली 15 दिन बाद शुरू किए जाने का निर्णय किया गया था।</p>
<p>सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर बिना किसी शुल्क के सफर करने का आनंद उठा रहे वाहन चालकों की जेब पर अब मार पड़ेगी। शासन द्वारा दी गई 15 दिन की फ्री राइड की समय सीमा गुरुवार को समाप्त हो गयी। 14 मई की आधी रात से इस एक्सप्रेस-वे पर टोल टैक्स वसूलने की प्रक्रिया विधिवत शुरू भी कर दी गयी। इंटरचेंज सोनिक के मैनेजर गौरव शर्मा ने बताया कि टोल का शुल्क वसूलने के लिए सारी मशीनें एक्टिव कर ली गयी हैं। 16 लोगों के स्टाफ से व्यवस्थाएं सुचारू रखी जायेंगी। एंट्री-एग्जिट प्वाइंट्स पर टोल दरों की सूची भी चस्पा कर दी गई है।</p>
<p><strong>15 दिन तक एक्सप्रेसवे का सफर था फ्री</strong><br />
पहले डिजिटल एक्सप्रेसवे का संचालन 30 अप्रैल से आरंभ हो चुका है। शासन ने वाहनों का संचालन आरंभ होने के साथ ही 15 दिन तक टोल वसूली नहीं करने के आदेश दिए थे। अब रात बीती रात 12 बजे टोल का संचालन शुरू कर दिया गया। वाहनों की संख्या बढ़ाने पर भी कार्यदाई संस्थाए जोर जुगत में लगी है। कोई असुविधा न हो इसे लेकर भी जिले से जुड़े दोनों इंटरचेंज पर काम चालू है। लाइट, ट्रामा आदि की व्यवस्थाएं भी पूरी की गई। मैनेजर के मुताबिक एक टोल पर अभी ढाई हजार से तीन हजार वाहन दर्ज हो रहे। इनकी संख्या अब बढ़ने के आसार भी जग रहे हैं।</p>
<p><strong>पूरी तरह ऑनलाइन, जितना सफर उतना टोल</strong><br />
उन्नाव के सोनिक टोल के मैनेजर गौरव शर्मा ने बताया कि यह पूरी तरह से फास्टटैग आधारित ट्रांजिट सिस्टम है। जिसमें आपके द्वारा तय की गई दूरी के अनुसार ही शुल्क कटता है। प्रारंभिक निर्धारण के अनुसार कार/जीप से 2.55 प्रति किमी (पूरे सफर पर लगभग 1,515) बस और ट्रक पर 8.20 प्रति किलोमीटर (पूरे सफर का करीब 5,700 रुपये उससे अधिक) लिया जाएगा। प्रति किमी कार/जीप के लिए रुपये 2.55, हल्के कमर्शियल वाहन के लिए रुपए 4.5 रुपये, बस/ट्रक के लिए रुपये 8.20 रुपए पूरी यात्रा का है। मेरठ से प्रयागराज तक कार से लगभग रुपये 1500 से रुपये 1800 तक का टोल खर्च आ सकता है। एक्सप्रेसवे पर बैरियरलेस ऑटोमैटिक टोल सिस्टम है, जो फास्टैग से सीधे टोल काटेगा।</p>
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		<title>गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिनों तक टोल फ्री रखने पर कई जिलों के लोगों ने जताई खुशी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 13:36:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga Expressway]]></category>
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					<description><![CDATA[गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिनों तक टोल फ्री रखने पर कई जिलों के लोगों ने जताई खुशी श्रद्धालुओं, व्यापारियों, हाईकोर्ट जाने वाले वकीलों और वादकारियों को होगी सुगमता&#160; लखनऊ/प्रयागराज/बरेली &#160;गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिनों तक टोल-फ्री रखने के योगी सरकार के निर्णय पर कई जिलों के लोगों ने खुशी जताई है। लोगों का कहना है &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिनों तक टोल फ्री रखने पर कई जिलों के लोगों ने जताई खुशी</strong></p>
<p><strong>श्रद्धालुओं, व्यापारियों, हाईकोर्ट जाने वाले वकीलों और वादकारियों को होगी सुगमता&nbsp;</strong></p>
<p>
<strong>लखनऊ/प्रयागराज/बरेली</strong><br />
&nbsp;गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिनों तक टोल-फ्री रखने के योगी सरकार के निर्णय पर कई जिलों के लोगों ने खुशी जताई है। लोगों का कहना है कि इस फैसले से श्रद्धालुओं के अलावा हाईकोर्ट जाने वाले वकीलों, वादकारियों, गवाहों के साथ-साथ व्यापारियों को इस सुविधा का लाभ निशुल्क मिलेगा। मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला यह हाईवे 12 जिलों को जोड़ता है।</p>
<p><strong>प्रयागराज के पर्यटक, व्यापारी, अधिवक्ता और वादकारियों ने जताई खुशी&nbsp;</strong><br />
गंगा एक्सप्रेस वे पूर्वी और पश्चिमी यूपी के आवागमन का सेतुबंध साबित होने वाला है। इसका अंतिम बिंदु प्रयागराज है। यहां के रहने वाले कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल कहते हैं कि इससे व्यापारियों को काफी सुविधा होगी। पश्चिमी यूपी से इलाहाबाद हाईकोर्ट आने वाले हजारों वादकारियों और वकीलों को निशुल्क यात्रा का लाभ मिलेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे का कहना है कि वादकारी और वकीलों को दो हफ्ते गंगा एक्सप्रेसवे की यात्रा को समझने के लिए काफी हैं।</p>
<p><strong>बरेली और आसपास के जिलों से हाईकोर्ट और संगम पहुंचना हुआ आसान</strong><br />
&nbsp;<br />
बरेली से प्रयागराज जाने वालों की संख्या काफी बड़ी है। इस एक्सप्रेसवे से उन लोगों को काफी लाभ मिलेगा। गंगा एक्सप्रेसवे से बरेली, शाहजहांपुर और बदायूं आदि जिलों के लोगों का हाईकोर्ट जाना, त्रिवेणी पर गंगा स्नान करना बहुत आसान हो गया है। दो दिनों में पांच हजार से ज्यादा लोगों ने निशुल्क हाईस्पीड सफर का आनंद लिया है। बरेली के सीबीगंज के रहने वाले सर्वेश सिंह ने बताया कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए यह एक्सप्रेसवे बेहद अहम है। 15 दिन की टोल छूट से लागत और समय दोनों कम होंगे, जिससे कारोबार को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। कारोबारियों को मेरठ से प्रयागराज के बीच के 12 जिलों में व्यापार बढ़ाने में काफी सहूलियत हो जाएगी। माडल टाउन के रहने वाले इंद्रप्रीत सिंह ने कहा कि टोल फ्री शुरुआत से लोगों में सकारात्मक माहौल बनेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मिथिलापुरी के रहने वाले अशोक सक्सेना ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिन टोल फ्री रखने का फैसला दूरदर्शी कदम है। स्टेट बैंक कालोनी के रहने वाले अमित आनंद ने बताया कि लंबी दूरी का सफर अब आसान और सस्ता हो गया है। टोल फ्री से बड़ी राहत मिलेगी।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>गंगा एक्सप्रेसवे का टोल रेट फिक्स नहीं हो पा रहा, 3 दिन में तीसरी बार हुआ बदलाव, जानें नई दर</title>
		<link>https://newsx24.com/the-ganga-expressway-toll-rate-remains-unfixed-with-the-third-change-in-three-days-learn-about-the-new-rate/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 04:42:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga Expressway]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;प्रयागराज&#160; उत्तर प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने वाला प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे आखिरकार शुरू हो चुका है. अब मेरठ से प्रयागराज सिर्फ 5-6 घंटे में पहुंचा जा सकता है. मगर, बताया जा रहा था कि इस एक्सप्रेसवे पर जितनी सुविधा मिल रही, उतना ही मोटा टोल टैक्स भी देना पड़ेगा. &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;प्रयागराज&nbsp;</strong><br />
उत्तर प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने वाला प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे आखिरकार शुरू हो चुका है. अब मेरठ से प्रयागराज सिर्फ 5-6 घंटे में पहुंचा जा सकता है. मगर, बताया जा रहा था कि इस एक्सप्रेसवे पर जितनी सुविधा मिल रही, उतना ही मोटा टोल टैक्स भी देना पड़ेगा. हालांकि, अब यात्री को उलझन में डालने वाली खबर सामने आ रही है. उद्घाटन से पहले और बाद में टोल दरों को लेकर यूपीडा उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में भारी उलझन रही. सिर्फ 3 दिन में तीन बार टोल दरें बदल दी गईं. हर कोई जानना चाहता है कि अब कितना टोल रेट देना पड़ेगा. आइए जानते हैं&hellip;</p>
<p><strong>15 दिन तक फ्री सफर, पर क्यूं?</strong><br />
गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को हरदोई में पीएम नरेंद्र मोदी ने किया था. अब यह एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए शुरू हो गया है और इसपर गाड़ियां फर्राटे भरने लगी हैं. फिलहाल किसी को कोई टोल नहीं चुकाना पड़ेगा. इसका कारण है मजदूर दिवस पर योगी सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर आप 15 दिन तक फ्री में सफर कर सकते हैं, यानी आपको कोई टोल नहीं देना पड़ेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या है खासियत?</strong><br />
करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ को सीधे प्रयागराज से जोड़ेगा. साल 2021 में दिसंबर महीने में इस एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास किया गया था. 5 वर्षों की मेहनत के बाद आज इस पर वाहन दौड़ने के लिए तैयार है. पहले जहां 10 से 12 घंटे का समय पहुंचने में लगता था अब वह घटकर 5 से 6 घंटे हो गया है. 120 किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से अब आप इस पर सफर कर सकेंगे. गंगा एक्सप्रेस-वे 6 लेन का है. मेरठ से प्रयागराज जाने तक कुल 12 जिले पड़ेंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>इतना किया था टोल दर तय</strong><br />
इसकी पहले टोल दरें 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर के आधार पर तय की गई थीं. पूरे एक्सप्रेसवे पर कार, जीप, वैन और हल्के मोटर वाहनों (LMV) के लिए कुल टोल 1,514 रुपये तय हुआ था. यह दरें दिसंबर 2025 के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर तय की गई थीं. मगर, उद्घाटन से ठीक पहले 29 अप्रैल को यूपीडा ने नई दरें जारी कीं. हल्के वाहनों के लिए एक तरफ का टोल बढ़ाकर 1,800 रुपये कर दिया गया. दोपहिया, तीनपहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर चालकों को 905 रुपये चुकाने पड़ते. तब यूपीडा (UPEIDA) ने स्पष्ट किया था कि ये दरें एक्सप्रेसवे के पहले टोल प्लाजा से आखिरी टोल प्लाजा तक की पूरी एकल यात्रा पर लागू होंगी।&nbsp;</p>
<p><strong>अब हुआ ये</strong><br />
यह दरें यहां ही तय नहीं हुईं बल्कि एक बार फिर बुधवार को 1,800 रुपये तय होने के बाद गुरुवार 30 अप्रैल को फिर संशोधन कर दिया गया. अब कार जैसे हल्के वाहनों के लिए टोल 1,765 रुपये कर दिया गया. इसमें से 1,365 रुपये अडानी एंटरप्राइजेज और 440 रुपये आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेंगे. एक्सप्रेसवे अभी प्रायोगिक दौर ट्रायल रन में चल रहा है. इसलिए उद्घाटन के बाद बुधवार रात 12 बजे से जनता के लिए खुलने के बावजूद किसी भी वाहन से टोल नहीं लिया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>यूपीडा अधिकारियों का कहना है कि टोल दरों में मामूली बदलाव WPI और अन्य तकनीकी गणनाओं के आधार पर किया गया है. अंतिम दरें जल्द ही स्थिर हो जाएंगी और टोल वसूली शुरू हो जाएगी. 24 घंटे के अंदर वापसी पर 20% डिस्काउंट की सुविधा भी यात्रियों को राहत देगी. फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे का फ्री में मजा उठा सकते हैं।&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
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		<title>गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली जल्द शुरू, वाहन अभी मुफ्त में दौड़ रहे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 01 May 2026 07:01:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga Expressway]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल वाहन बिना टोल का भुगतान किए ही दौड़ेंगे। टोल की दरें तय जरूर कर दी गई हैं पर उसकी वसूली शुरू होने में अभी लगभग दो सप्ताह का वक्त लगेगा। सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 दिन बाद टोल की वसूली शुरू हो सकेगी। इससे पूर्व गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्धारित &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ</strong></p>
<p>गंगा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल वाहन बिना टोल का भुगतान किए ही दौड़ेंगे। टोल की दरें तय जरूर कर दी गई हैं पर उसकी वसूली शुरू होने में अभी लगभग दो सप्ताह का वक्त लगेगा। सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 दिन बाद टोल की वसूली शुरू हो सकेगी। इससे पूर्व गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्धारित टोल दरों के प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृत कराया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।</p>
<p>वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी गंगा एक्सप्रेसवे पर दो पहिया, तीन पहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर के लिए टोल दर 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। ऐसे ही कार, जीप, वैन व हल्के वाहन के लिए 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर, हल्के वाणिज्यिक वाहन, हल्के माल वाहन के लिए 4.05 रुपये प्रति किलोमीटर, मिनी बस, बस व ट्रक के लिए 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर, भारी निर्माण मशीनरी, मिट्टी हटाने वाले वाहन के लिए 12.60 रुपये प्रति किलोमीटर तथा उपकरण व बहुएक्सल वाहन, अत्यधिक बड़े वाहन (सात व अधिक एक्सेल वाले) के लिए 16.10 रुपये प्रति किलोमीटर टोल दर तय की गई है।</p>
<p><strong>हर मौसम के अनुकूल है डामर की परत</strong><br />
लखनऊ।गंगा एक्सप्रेसवे पर 594 किलोमीटर लंबे सफर को आरामदेह व सुरक्षित बनाने के लिए उच्च तकनीक का उपयोग किया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर मौसूम अनुकूल डामर परत (डीबीएम) को 100 मिलीमीटर तक की मोटाई दी गई है। यह तकनीक सड़क को भीषण गर्मी और अत्यधिक बारिश के प्रभाव से सुरक्षित रखती है। इसके लिए 3.67.022</p>
<p><strong>मीट्रिक टन डामर का इस्तेमाल किया गया।</strong><br />
यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे को मजबूती देने के लिए मिट्टी की मजबूती का पैमाना अपनाया गया है। कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो (सीबीआर) का प्रयोग किया गया है, जिसकी वैल्यू आठ पर रखी गई है, जो एक अत्यंत स्थिर और ठोस आधार का प्रमाण है। एक्सप्रेसवे पर 19 करोड़ घन मीटर मिट्टी, 2,78,380 मिट्रिक टन स्टील, 14.83.313 मीट्रिक टन सीमेंट व 41.88 लाख घनमीटर रेत का भी प्रयोग किया गया है। संरचनात्मक मजबूती के हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य को पूरा कराया गया है। 154.58 लाख घनमीटर मिट्टी सड़क की निचली और ऊपरी परतों को ठोस स्वरूप देने के लिए प्रयोग की गई है।</p>
<p>एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे की कुल मोटाई 485 मिलीमीटर से 500 मिलीमीटर तक रखी गई है। यह आधा मीटर मोटी बहु-स्तरीय संरचना सुनिश्चित करती है कि सड़क भारी यातायात का दबाव आसानी से झेल सके। इस एक्सप्रेसवे की क्षमता 79 से 108 मिलियन स्टैंडर्ड एक्सल (एमएसए) तक मापी गई है। अधिकारियों का दावा है कि एक्सप्रेसवे करोड़ों भारी मालवाहक वाहनों के भार को बिना किसी संरचनात्मक क्षति के सहन करने की क्षमता रखता है।</p>
<p>254 लाख मैन-डेज का श्रम और लाखों टन उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री एक्सप्रेसवे को सुरक्षा की दृष्टि से भरोसेमंद बनाती हैं। डिजाइन क्रस्ट तकनीक से रखरखाव की लागत में भी कमी आएगी। यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अत्याधुनिक स्विस सेंसर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।</p>
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		<title>प्रयागराज से मेरठ अब सिर्फ 6 घंटे: गंगा एक्सप्रेसवे से सफर होगा आसान</title>
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		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 08:42:00 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Ganga Expressway]]></category>
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					<description><![CDATA[लखनऊ यूपी परिवहन निगम की कोई भी बस अभी प्रयागराज से सीधे मेरठ नहीं जाती है। वहां जाने के दो माध्यम हैं, ट्रेन या फिर निजी साधन। प्रयागराज से जो दो एक्सप्रेस ट्रेन मेरठ जाती है, उसमें से एक जितना समय लेती है उससे आधे से भी कम तो दूसरी से लगभग ढाई घंटे कम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ</strong></p>
<p>यूपी परिवहन निगम की कोई भी बस अभी प्रयागराज से सीधे मेरठ नहीं जाती है। वहां जाने के दो माध्यम हैं, ट्रेन या फिर निजी साधन। प्रयागराज से जो दो एक्सप्रेस ट्रेन मेरठ जाती है, उसमें से एक जितना समय लेती है उससे आधे से भी कम तो दूसरी से लगभग ढाई घंटे कम समय में ही निजी साधन से गंगा एक्सप्रेस वे के जरिए मेरठ पहुंचा जा सकेगा।</p>
<p>दावा किया जा रहा है कि गंगा एक्सप्रेस वे से मेरठ तक की दूरी छह घंटे में तय हो सकेगी। प्रयागराज संगम रेलवे स्टेशन से नौचंदी एक्सप्रेस रोजाना शाम 5.50 बजे चलकर 653 किमी की दूरी तय करते हुए अगले दिन सुबह 8.30 बजे मेरठ पहुंचती है। यह ट्रेन लखनऊ, हरदोई, बरेली, मुरादाबाद, अमरोहा व हापुड़ से होकर मेरठ जाती है।</p>
<p>कुल 14 घंटे लगते हैं पर गंगा एक्सप्रेस वे पर निजी साधन से सफर करने में इससे लगभग आठ घंटा कम लगेगा। इसी तरह सूबेदारगंज स्टेशन से चलने वाली संगम एक्सप्रेस फतेहपुर, कानपुर, इटावा, टुंडला, हाथरस, बुलंदशहर व हापुड़ होते हुए मेरठ तक करीब 8.30 घंटे में पहुंचती है।यह ट्रेन सूबेदारगंज से शाम 5.50 बजे चलती है और अगले दिन 637 किमी की दूरी तय करके सुबह 8.30 बजे पहुंचती है।</p>
<p>इस ट्रेन से जितना वक्त लगता है, उससे ढाई घंटा कम गंगा एक्सप्रेस वे से लगेगा। अपने निजी वाहन से मेरठ जाने वालों को अभी तक कानपुर के रास्ते होकर जाना पड़ता था। एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण हो जाने से 594 किमी का सफर छह घंटे में पूरा हो जाएगा। प्रयागराज की सोरांव तहसील के जूड़ापुर दांदू गांव के पास एक्सप्रेस-वे का दूसरा टोल प्लाजा बनाया गया है।</p>
<p><strong>प्रतापगढ़ से 143 किमी दूरी कम, बचेंगे छह घंटे</strong><br />
अभी तक प्रतापगढ़ से मेरठ जाने के लिए न तो कोई सीधी ट्रेन है और न ही यूपी परिवहन निगम की कोई बस ही वहां के लिए चलती है। काशी और पद्मावत दो ट्रेन हैं, जो प्रतापगढ़ होते हुए हापुड़ तक जाती हैं। हापुड़ तक जाने में ही दोनों ट्रेन दस घंटे से अधिक का समय लेती हैं। सीधे मेरठ जाने वालों के पास एक मात्र विकल्प निजी साधन है। निजी साधन से मेरठ जाने में अभी 11 से 12 घंटे लगते हैं। प्रतापगढ़ से मेरठ तक की कुल दूरी 738 किमी है, गंगा एक्सप्रेस वे से यह दूरी कम होकर 595 रह जाएगी। 143 किमी कम होने और एक्सप्रेस वे के सुगम यातायात की वजह से यह दूरी आधे समय यानी छह घंटे में ही तय की जा सकेगी। इससे उन कारोबारियों को खास तौर से सहूलियत होगी, जिनका कारोबार के सिलसिले में अक्सर मेरठ तक जाना होता है।</p>
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		<title>गंगा एक्सप्रेसवे की कहानी, जिसने लिखी विकास की महागाथा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 05:42:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga Expressway]]></category>
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					<description><![CDATA[गंगा एक्सप्रेसवे की कहानी, जिसने लिखी विकास की महागाथा योगी सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ सपना गंगा एक्सप्रेसवे : कड़ी चुनौतियों के बीच भी नहीं रुकी रफ्तार, निर्धारित समयसीमा में पूरा हुआ सपना लखनऊ &#160;मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा देखा गया एक सपना बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गंगा एक्सप्रेसवे की कहानी, जिसने लिखी विकास की महागाथा</strong></p>
<p><strong>योगी सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ सपना</strong></p>
<p><strong>गंगा एक्सप्रेसवे : कड़ी चुनौतियों के बीच भी नहीं रुकी रफ्तार, निर्धारित समयसीमा में पूरा हुआ सपना</strong></p>
<p><strong>लखनऊ</strong><br />
&nbsp;मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा देखा गया एक सपना बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के रूप में देश को समर्पित हो गया। यह कहानी सिर्फ एक सड़क बनने की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जहां स्पष्ट नीति, मजबूत इच्छाशक्ति, तकनीक और प्रशासनिक दक्षता ने कच्ची मिट्टी पर विकास की महागाथा लिख दी। गंगा एक्सप्रेसवे की निर्माण यात्रा इस बात का प्रमाण है कि बुलंद इरादों और प्रभावी क्रियान्वयन से कुछ भी संभव है। गंगा एक्सप्रेसवे, निर्णय से निर्माण तक की वह कहानी है, जो उत्तर प्रदेश को &lsquo;वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी&rsquo; की दिशा में नई गति देगी।</p>
<p><strong>2017&ndash;2019: सुनियोजित विकास की रूपरेखा</strong><br />
वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार के मुखिया के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यभार संभाला और ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड गंगा एक्सप्रेसवे विकसित करने का फैसला किया गया। 2018&ndash;19 में डीपीआर, भूमि चिन्हांकन और टेक्नो-इकोनॉमिक स्टडी पूरी की गई। यही वह चरण था, जहां प्रदेश के समावेशी विकास तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इस एक्सप्रेसवे की डिजाइन तैयार की गई और इसे अमली जामा पहनाने के लिए डेडिकेटेड टीम तैयार की गई।</p>
<p><strong>2020&ndash;2021: नीति से क्रियान्वयन तक</strong><br />
वर्ष 2020 गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जब परियोजना को आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां प्राप्त हुईं और इसके वित्तीय ढांचे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत अंतिम रूप दिया गया। इससे न केवल निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ, बल्कि परियोजना के समयबद्ध और पेशेवर क्रियान्वयन की मजबूत नींव भी रखी गई। इसके बाद वर्ष 2021 में टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक तरीके से पूरा करते हुए पूरे प्रोजेक्ट को 4 प्रमुख ग्रुप/पैकेज में विभाजित किया गया। इन पैकेजों का कार्यान्वयन देश की अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों, आईआरबी, अडानी, एचजी इंफ्रा और एलएंडटी जैसी एजेंसियों को सौंपा गया। यह मल्टी-पैकेज रणनीति परियोजना के लिए गेम चेंजर साबित हुई, क्योंकि इससे अलग-अलग हिस्सों में एक साथ निर्माण कार्य शुरू हो सका।</p>
<p><strong>2021&ndash;2025: नींव से निर्माण तक</strong><br />
18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया, जिसके साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने जमीन पर वास्तविक गति पकड़ी। शिलान्यास के तुरंत बाद 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के अलग-अलग पैकेजों में निर्माण कार्य शुरू किया गया। नतीजतन, जहां पहले ऐसी मेगा परियोजनाएं वर्षों तक खिंच जाती थीं, वहीं इस रणनीतिक योजना के कारण गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण ने अभूतपूर्व गति पकड़ी और यह प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ने लगा।</p>
<p><strong>2026: सपना बना हकीकत</strong><br />
ट्रायल रन, सेफ्टी ऑडिट और अंतिम तकनीकी जांच पूरी होने के बाद 29 अप्रैल 2026 को गंगा एक्सप्रेसवे का भव्य लोकार्पण हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस परियोजना का 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया था, उसी का उद्घाटन भी उनके कर-कमलों से संपन्न हुआ, जो समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रतिबद्धता का प्रतीक है।&nbsp;</p>
<p><strong>चुनौतियां आईं, लेकिन रुकी नहीं रफ्तार</strong><br />
भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय संतुलन, कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी और जटिल तकनीकी कार्यों जैसी बड़ी चुनौतियों के बावजूद गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कभी थमा नहीं। लगभग एक लाख किसानों से भूमि अधिग्रहण को पारदर्शी मुआवजा और डीबीटी के माध्यम से तेज और विवाद-मुक्त बनाया गया, वहीं पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए अलाइनमेंट को संतुलित ढंग से विकसित किया गया। कोविड काल में श्रमिकों और सप्लाई चेन की बाधाओं के बीच भी स्थानीय संसाधनों के उपयोग और चरणबद्ध निर्माण रणनीति से कार्य निरंतर चलता रहा।</p>
<p><strong>सीएम योगी की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता रही निर्णायक</strong><br />
इस पूरे प्रोजेक्ट की गति बनाए रखने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता निर्णायक रही। उन्होंने नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से हर चरण की प्रगति पर नजर रखी, जबकि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की सक्रिय भूमिका ने जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को गति दी। ड्रोन सर्वे, डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की गई। परिणामस्वरूप, यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल चुनौतियों को पार करता हुआ आगे बढ़ा, बल्कि तय समयसीमा में पूरा होकर प्रभावी प्रशासन और मजबूत नेतृत्व का उदाहरण भी बना।</p>
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		<title>हाईटेक डिजाइन और विश्वस्तरीय निर्माण का उदाहरण है गंगा एक्सप्रेसवे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 13:36:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga Expressway]]></category>
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					<description><![CDATA[हाईटेक डिजाइन और विश्वस्तरीय निर्माण का उदाहरण है गंगा एक्सप्रेसवे 594 किमी लंबा मेगा प्रोजेक्ट, आधुनिक सुविधाएं, इंडस्ट्रियल क्लस्टर और सुरक्षा तंत्र के साथ बदलेगा यूपी का आर्थिक परिदृश्य लखनऊ/हरदोई &#160;मेरठ से प्रयागराज तक फैला गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक हाईवे नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास का नया सुपर कॉरिडोर बनकर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हाईटेक डिजाइन और विश्वस्तरीय निर्माण का उदाहरण है गंगा एक्सप्रेसवे</strong></p>
<p><strong>594 किमी लंबा मेगा प्रोजेक्ट, आधुनिक सुविधाएं, इंडस्ट्रियल क्लस्टर और सुरक्षा तंत्र के साथ बदलेगा यूपी का आर्थिक परिदृश्य</strong></p>
<p><strong>लखनऊ/हरदोई</strong><br />
&nbsp;मेरठ से प्रयागराज तक फैला गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक हाईवे नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास का नया सुपर कॉरिडोर बनकर उभरा है। लगभग 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के साथ प्रदेश को &lsquo;एक्सप्रेसवे स्टेट&rsquo; के रूप में स्थापित कर रहा है। 120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाला यह प्रोजेक्ट यात्रा को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाते हुए विकास की नई इबारत लिख रहा है।</p>
<p><strong>हाईटेक डिजाइन और विश्वस्तरीय निर्माण</strong><br />
गंगा एक्सप्रेसवे को आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। 6 लेन के इस एक्सप्रेसवे पर 14 दीर्घ सेतु, 165 लघु सेतु, 7 आरओबी, 32 फ्लाईओवर, 453 अंडरपास और 795 बॉक्स कलवर्ट बनाए गए हैं। प्रमुख मार्गों से बेहतर कनेक्टिविटी के लिए 21 स्थानों पर इंटरचेंज विकसित किए गए हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह निर्बाध रहेगा। प्रोजेक्ट की एक खासियत यह भी है कि इसे भविष्य की जरूरतों के मुताबिक डिजाइन किया गया है। आने वाले सालों में ट्रैफिक लोड बढ़ने की स्थिति में इसे आसानी से 6 से 8 लेन में परिवर्तित किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>सुरक्षित और स्मार्ट यात्रा का अनुभव</strong><br />
यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे पर हर एक किलोमीटर पर सोलर ऊर्जा से संचालित हाईटेक स्मार्ट कैमरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही 9 आधुनिक जन-सुविधा परिसरों में फूड कोर्ट, फ्यूल स्टेशन और विश्राम की व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर 737 किमी लंबी सर्विस रोड स्थानीय लोगों के आवागमन को आसान बनाती है।</p>
<p><strong>एयरस्ट्रिप और सामरिक महत्व</strong><br />
गंगा एक्सप्रेसवे की एक विशेषता इसकी आपातकालीन एयरस्ट्रिप है, जिसे भारतीय वायुसेना के फाइटर प्लेन की लैंडिंग और टेकऑफ के लिए तैयार किया गया है। इससे यह एक्सप्रेसवे केवल यातायात ही नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है। इस सुविधा के साथ उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे पर एयरस्ट्रिप के मामले में देश में अग्रणी बन गया है।</p>
<p><strong>इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन ग्रोथ मॉडल</strong><br />
यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित 12 जिलों को जोड़ता है। इससे न केवल यात्रा समय में कमी आएगी, बल्कि इन जिलों के बीच व्यापार, उद्योग और संसाधनों का प्रवाह भी तेज होगा। गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में अग्रणी बन रहा है। यह परियोजना राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन ग्रोथ मॉडल को मजबूत करती है और &lsquo;वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी&rsquo; के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।</p>
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		<title>गंगा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां ही नहीं, दौड़ेंगे सपने और अवसर</title>
		<link>https://newsx24.com/the-ganga-expressway-will-not-only-carry-vehicles-but-also-dreams-and-opportunities/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 13:32:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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		<category><![CDATA[Ganga Expressway]]></category>
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					<description><![CDATA[गंगा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां ही नहीं, दौड़ेंगे सपने और अवसर मेरठ से प्रयागराज: 594 किमी लंबा एक्सप्रेसवे बनेगा स्पीड, कनेक्टिविटी, इन्वेस्टमेंट व एंप्लायमेंट का नया गलियारा &#8216;वन ट्रिलियन डॉलर&#8217; की अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार देगा नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे लखनऊ सुबह का समय है&#8230; मेरठ के बिजौली गांव से एक गाड़ी हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे पर उतरती है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गंगा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां ही नहीं, दौड़ेंगे सपने और अवसर</strong></p>
<p><strong>मेरठ से प्रयागराज: 594 किमी लंबा एक्सप्रेसवे बनेगा स्पीड, कनेक्टिविटी, इन्वेस्टमेंट व एंप्लायमेंट का नया गलियारा</strong></p>
<p><strong>&lsquo;वन ट्रिलियन डॉलर&rsquo; की अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार देगा नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे</strong></p>
<p><strong>लखनऊ</strong><br />
सुबह का समय है&hellip; मेरठ के बिजौली गांव से एक गाड़ी हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे पर उतरती है। 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हुई यह गाड़ी खेतों, कस्बों और कई शहरों को पार करती है। रास्ते में आधुनिक टोल प्लाजा, फ्यूल स्टेशन, वे-साइड सुविधाएं और औद्योगिक नोड्स दिखाई देते हैं। शाम होते-होते यही गाड़ी प्रयागराज पहुंच जाती है, वह सफर जो कभी 10-12 घंटे का समय लेता था, अब 6-7 घंटे में पूरा हो जाता है। यह सिर्फ एक सड़क नहीं&hellip; यह उत्तर प्रदेश की वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर दौड़ता हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर है। नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे पर सिर्फ गाड़ियां ही नहीं फर्राटा भरेंगी, उद्योग, निवेश, सपने और अवसर भी दौड़ेंगे। मेरठ से प्रयागराज तक विस्तारित यह सड़क वास्तव में एक नई आर्थिक धारा है, जो उत्तर प्रदेश को विकास की उस गति तक ले जाने जा रही है, जहां &ldquo;वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी&rdquo; का लक्ष्य हकीकत बनता दिखाई देगा।</p>
<p><strong>पूर्व और पश्चिम यूपी को जोड़ता विकास कॉरिडोर</strong><br />
गंगा एक्सप्रेसवे 594 किमी लंबा ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे है, जो मेरठ से प्रयागराज तक 12 जिलों को एक सशक्त आर्थिक धुरी में पिरोता है। 6 लेन (भविष्य में 8 लेन तक विस्तार योग्य) वाला यह मेगा प्रोजेक्ट लगभग 36-37 हजार करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मॉडल पर विकसित किया गया है। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विकसित औद्योगिक बेल्ट को पूर्वांचल के कृषि और श्रम-आधारित क्षेत्रों से सीधे जोड़ते हुए उत्पादन, आपूर्ति और बाजार के बीच दूरी को कम करता है। परिणामस्वरूप, यह केवल यातायात का मार्ग नहीं, बल्कि निवेश, उद्योग और रोजगार को गति देने वाला वह कनेक्टिविटी इंजन है, जो प्रदेश की आर्थिक ताकत को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखता है।</p>
<p><strong>यात्रा से व्यापार तक समय की बचत, लागत में कमी</strong><br />
गंगा एक्सप्रेसवे के संचालन में आने के साथ मेरठ से प्रयागराज की यात्रा अब महज 6-7 घंटे में पूरी हो सकेगी, जबकि पहले यही दूरी तय करने में 10-12 घंटे लगते थे। यह समय की बचत सीधे तौर पर लॉजिस्टिक्स लागत में कमी का आधार बनेगी। तेज और निर्बाध आवागमन से सप्लाई चेन अधिक प्रभावी होगी, जिससे कृषि उत्पादों को खेत से बाजार तक पहुंचने में कम समय लगेगा और उनकी गुणवत्ता व मूल्य दोनों सुरक्षित रहेंगे। साथ ही, ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को नई गति मिलेगी। दरअसल, समय की यह बचत ही आर्थिक दक्षता में बदलती है और यही दक्षता किसी भी राज्य की विकास गति को कई गुना बढ़ा देती है।</p>
<p><strong>12 जिलों में &lsquo;इकोनॉमिक रेवोल्यूशन&rsquo;</strong><br />
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को जोड़ते हुए एक व्यापक आर्थिक परिवर्तन की नींव रखता है। इन जिलों की भौगोलिक और आर्थिक विशेषताओं के अनुरूप विकास की नई संभावनाएं उभर रही हैं। मेरठ-हापुड़ में मैन्युफैक्चरिंग और स्पोर्ट्स गुड्स, बुलंदशहर-अमरोहा में फूड प्रोसेसिंग और डेयरी, शाहजहांपुर-हरदोई में एग्री-बेस्ड इंडस्ट्री, उन्नाव-रायबरेली में टेक्सटाइल और एमएसएमई, जबकि प्रयागराज लॉजिस्टिक्स और टूरिज्म हब के रूप में विकसित हो सकता है। इस तरह, यह एक्सप्रेसवे अलग-अलग आर्थिक क्षमताओं वाले इन जिलों को एकीकृत करते हुए उन्हें एक सिंगल, इंटरकनेक्टेड इकोनॉमिक नेटवर्क में बदल देता है, जहां उत्पादन, प्रसंस्करण और वितरण एक ही विकास धारा में प्रवाहित होते हैं।</p>
<p><strong>इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, पूरा इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम</strong><br />
गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट कॉरिडोर के रूप में तैयार किया गया है, जो परिवहन के साथ-साथ औद्योगिक विकास की मजबूत आधारशिला रखता है। इसमें 2 मुख्य टोल प्लाजा और 19 रैंप टोल के साथ सुगम प्रवेश-निकास व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जबकि 9 आधुनिक जन-सुविधा परिसरों में फूड कोर्ट, फ्यूल स्टेशन और रेस्ट एरिया जैसी सुविधाएं यात्रियों और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस को सपोर्ट करेंगी। इसके अलावा, 960 मीटर लंबा गंगा ब्रिज और 720 मीटर का रामगंगा ब्रिज जैसी इंजीनियरिंग संरचनाएं इसकी क्षमता को और मजबूत बनाती हैं। 120 मीटर का राइट ऑफ वे भविष्य में विस्तार और अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराता है। समग्र रूप से यह एक्सप्रेसवे एक ऐसी सुविचारित संरचना है, जिसे लॉन्ग-टर्म इंडस्ट्रियल ग्रोथ, तेज ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और सतत आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।</p>
<p><strong>निवेश का हाईवे: रोजगार का इंजन, यूपी बनेगा &lsquo;नेशनल लीडर&rsquo;</strong><br />
गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर विकसित हो रहे इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स हब इसे निवेश का सशक्त केंद्र बना रहे हैं, जहां वेयरहाउसिंग और कोल्ड स्टोरेज, एमएसएमई क्लस्टर, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और डिफेंस-मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उद्योग तेजी से आकार ले रहे हैं। यह पूरा इकोसिस्टम न केवल सप्लाई चेन को मजबूत करेगा, बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के लाखों अवसर भी सृजित करेगा, जिससे स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले में काम मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी। वहीं, इस मेगा प्रोजेक्ट के संचालन में आते ही उत्तर प्रदेश देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में अग्रणी भूमिका में पहुंच जाएगा और इसकी हिस्सेदारी लगभग 60% तक हो सकती है। यह स्पष्ट संकेत है कि राज्य अब इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन ग्रोथ मॉडल पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहां सड़कें सिर्फ रास्ते नहीं, बल्कि आर्थिक नेतृत्व का माध्यम बन रही हैं।</p>
<p><strong>वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का आधार</strong><br />
उत्तर प्रदेश ने 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसमें गंगा एक्सप्रेसवे एक मजबूत आधार स्तंभ की भूमिका निभाने जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी निवेश को आकर्षित करती है, निवेश से उद्योग स्थापित होते हैं, उद्योग रोजगार पैदा करते हैं, रोजगार से लोगों की आय बढ़ती है और बढ़ी हुई आय व्यापक आर्थिक विस्तार का मार्ग प्रशस्त करती है। इसी क्रम में गंगा एक्सप्रेसवे एक &lsquo;इकोनॉमिक मल्टीप्लायर&rsquo; के रूप में कार्य करेगा, जो विकास की इस पूरी श्रृंखला को गति देता हुआ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।</p>
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		<title>गंगा एक्सप्रेसवे से महाभारत, जैन और संभल सर्किट को नई रफ्तार, पश्चिम और पूर्व यूपी को जोड़ा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 12:26:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[Ganga Expressway]]></category>
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					<description><![CDATA[लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण होने के साथ उत्तर प्रदेश में विकास, आस्था और पर्यटन को नई रफ्तार मिल गई है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे केवल यातायात का आधुनिक मार्ग नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों को जोड़ने वाला मजबूत आध्यात्मिक कॉरिडोर बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>लखनऊ</strong></p>
<p style="text-align:justify">गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण होने के साथ उत्तर प्रदेश में विकास, आस्था और पर्यटन को नई रफ्तार मिल गई है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे केवल यातायात का आधुनिक मार्ग नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों को जोड़ने वाला मजबूत आध्यात्मिक कॉरिडोर बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साकार हुआ 594 किलोमीटर लंबा विश्वस्तरीय कॉरिडोर मेरठ से प्रयागराज तक पश्चिम, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को तेज रफ्तार संपर्क से जोड़ रहा है। करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने छह लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे से यात्रा समय में भारी कमी आएगी और मेरठ से प्रयागराज का सफर अब करीब 6 घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यावरण पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, साथ ही व्यापार, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>मेरठ के हस्तिनापुर को मिला अधिक फायदा&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align:justify">गंगा एक्सप्रेसवे से सबसे अधिक लाभ पाने वाले क्षेत्रों में मेरठ जिले का हस्तिनापुर है। महाभारत काल से जुड़ा हस्तिनापुर जैन धर्म का भी प्रमुख तीर्थस्थल है। यहां योगी सरकार 15 करोड़ रुपये से अधिक की एकीकृत पर्यटन विकास परियोजना चला रही है। बेहतर सड़क संपर्क से दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। पाण्डेश्वर महादेव मंदिर, करण मंदिर, उल्टा खेड़ा उत्खनन स्थल और हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे स्थल अब नई पहचान पाएंगे। संभल क्षेत्र को भी इस परियोजना से नई ऊर्जा मिलेगी। यहां विकसित हो रहे कुरुक्षेत्र तीर्थ स्थल तक पहुंच आसान होने से धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा।&nbsp;</p>
<p style="text-align:justify"><strong>यह मार्ग धार्मिक तथा प्राकृतिक पर्यटन को एक साथ जोड़ता है</strong><br />
&nbsp;<br />
हापुड़ के ब्रजघाट गढ़मुक्तेश्वर, बुलंदशहर के अवंतिका देवी मंदिर, अमरोहा के वासुदेव मंदिर, बदायूं के श्रीरामचंद्र विराजमान मंदिर और शाहजहांपुर के परशुराम मंदिर जैसे स्थलों को भी इस कॉरिडोर से बड़ा लाभ मिलेगा। बागपत के लाक्षागृह जैसे ऐतिहासिक स्थलों के पर्यटन महत्व में भी वृद्धि होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरदोई के वनेश्वर महादेव मंदिर, उन्नाव के नवाबगंज इको-टूरिज्म क्षेत्र, रायबरेली के चामुंडा शक्तिपीठ, प्रतापगढ़ के मां ज्वाला देवी धाम और प्रयागराज तक यह मार्ग धार्मिक तथा प्राकृतिक पर्यटन को एक साथ जोड़ता है। प्रयागराज ब्लैकबक रिजर्व जैसे स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यावरण पर्यटन को भी गति मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>इको-टूरिज्म स्थलों को प्रदान करेगा नई ऊर्जा</strong></p>
<p style="text-align:justify">पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि गंगा एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन आसान होगा। यह एक्सप्रेस-वे जैन सर्किट, महाभारत सर्किट और &#039;कल्कि धाम&#039; संभल के अतिरिक्त मार्ग के आसपास के इको-टूरिज्म स्थलों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, गंगा एक्सप्रेस-वे अब केवल एक सड़क नहीं, यह एक सपने की मूर्त अभिव्यक्ति है। गंगा एक्सप्रेस वे से मेरठ और प्रयागराज की दूरी 10-12 घंटे से घटकर महज 5 घंटे रह जाने की उम्मीद है। मेरठ से एक्सप्रेस-वे की शुरुआत होगी जो हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज में समाप्त होगी।</p>
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