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	<title>Hormuz &#8211; NewsX 24</title>
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	<title>Hormuz &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>होर्मुज संकट के बीच भारत को बड़ी राहत, ओमान बना संकटमोचक; अब आसानी से आएंगे तेल और LPG टैंकर</title>
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		<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 03:31:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली &#160;ईरान-अमेरिका युद्ध का सबसे अहम मुद्दा बना रहा &#8211; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज. ये वो रास्ता है, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल-गैस की ट्रेडिंग होती है. इस मामले को लेकर कई बार बैठकों में बातचीत की गई, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल सका. अमेरिका इसे मुफ्त पैसेज का रास्ता मानता है &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>&nbsp;ईरान-अमेरिका युद्ध का सबसे अहम मुद्दा बना रहा &ndash; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज. ये वो रास्ता है, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल-गैस की ट्रेडिंग होती है. इस मामले को लेकर कई बार बैठकों में बातचीत की गई, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल सका. अमेरिका इसे मुफ्त पैसेज का रास्ता मानता है और ईरान इस पर अपना कब्जा चाहता है, ऐसे में किसी एक जगह पर बात बन नहीं पा रही थी. अब ओमान इस परिस्थिति में संकटमोचक बनकर उभरा है. उसके दिए हुए प्रस्ताव पर ईरान सकारात्मक रुख दिखा रहा है और अगर वो मान गया तो एक बड़ा टंटा खत्म हो जाएगा।&nbsp;</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत अपने अंतिम चरण में है. सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए की रिपोर्ट की मानें तो अरागची ने रविवार को कैबिनेट की बैठक में कहा कि बातचीत आगे बढ़ी है और अब यह अंतिम रूप लेने की ओर है. ये सिर्फ खाड़ी देशों नहीं बल्कि एशिया के सभी देशों के लिए उम्मीद की तरह है, जो अपने जोखिम पर यहां से तेल और गैस के टैंकर मंगा रहे थे. डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले टालने के बाद ये इस युद्ध की सबसे बड़ी पॉजिटिव अपडेट है।&nbsp;</p>
<p><strong>ईरान-ओमान के बीच होर्मुज को लेकर बनी बात?</strong><br />
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट की मानें तो सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में ईरान-ओमान बातचीत के बारे में विस्तार से बताते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने कहा कि दोनों देशों के बीच किसी समझौते पर पहुंचना जलमार्ग के फिर से खुलने या बंद रहने से संबंधित नहीं है. बघाई ने कहा कि ईरान और ओमान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में &lsquo;ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम&rsquo; के तहत एक नया रास्ता तय करने पर काम कर रहे हैं, जो दोनों पक्षों के संप्रभु अधिकारों के साथ-साथ ईरान के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर सके।&nbsp;</p>
<p><strong>अमेरिका को लेकर सख्त हैं तेहरान के तेवर&nbsp;</strong><br />
ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद एब्न अल-रेजा ने रविवार को कहा कि ईरान अमेरिका की की हर धमकी को असली मानता है और उसका जवाब देने के लिए तैयार है. वो इसे सिर्फ मनोवैज्ञानिक युद्ध मानने से इनकार करता है. अल-रेजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा-</p>
<p>&nbsp; &nbsp; &lsquo;हम न तो हैरान होंगे और न ही चुपचाप बैठे रहेंगे. हम धमकियों का इस्तेमाल अपनी तैयारी बढ़ाने, अपनी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और अपनी ताकत बढ़ाने के आधार के तौर पर करते हैं।&nbsp;</p>
<p>यह बात उन्होंने तब कही जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे ईरान पर नए हमले न करने पर सहमत हो गए हैं. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ संयुक्त हमले किए जाने के बाद तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ऐसा घेरा है कि उसे छुड़ाने में अमेरिका भी परेशान है।&nbsp;</p>
<p><strong>ओमान का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर क्या है प्लान?</strong></p>
<p>&nbsp; &nbsp; ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पहले यह सुझाव दिया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन ओमान के साथ मिलकर किया जाए और वहां से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लिया जाए।&nbsp;</p>
<p>&nbsp; &nbsp; उस वक्त ओमान ऐसे किसी टैक्स के बिल्कुल खिलाफ था और इसे अंतरराष्ट्रीय जल मानकर फ्री पैसेज की बात कह रहा था. इस बार ओमान के नए प्रस्ताव में भी इसी तरह की व्यवस्था का जिक्र है, हालांकि इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि शुल्क देना पूरी तरह स्वैच्छिक होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>भारत को कैसे होगा फायदा?</strong><br />
ओमान ने इस समुद्री मार्ग को लेकर जो प्रस्ताव रखा है, उसके मुताबिक इस पर केवल ईरान का नियंत्रण नहीं रहेगा. अगर कोई व्यवस्था होती है तो दोनों देश मिलकर इस व्यवस्था को देखेंगे. ईरान ने पहले भी ये बात कही है कि वो ऐसी किसी भी व्यवस्था में अपने दोस्तों को प्राथमिकता देगा. ईरान के साथ भारत के रिश्ते बुरे नहीं हैं लेकिन ओमान के साथ भारत के रिश्ते ऐतिहासिक और घनिष्ठ रहे हैं. ऐसे में स्वाभाविक है कि भारत होर्मुज में अगर ओमान की सहमति के कोई भी सिस्टम लागू होता है, उसका फायदा जरूर मिलेगा. पिछले दिनों जब होर्मुज में हुए जहाजों पर हमले में भारतीय नाविक फंसे थे, तो ओमान की सेना ने उन्हें निकालने में मदद की थी. ऐसे में इस संबंध की घनिष्ठता समझी जा सकती है।&nbsp;</p>
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		<title>ईरान-US तनाव के बीच एडवाइजरी जारी, होर्मुज रूट पर भारतीय नाविकों की तैनाती से बचने के निर्देश</title>
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		<pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:32:00 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Hormuz]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्ली पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के एक बार फिर से धधक गया है. इस बीच जहाजरानी महानिदेशालय (डीजीएमए) ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा एडवाइजरी जारी किया है. खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात बिगड़ने के बाद डीजीएमए ने सर्कुलर नंबर 36/2026 जारी करते हुए सभी शिप &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्ली</strong></p>
<p>पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के एक बार फिर से धधक गया है. इस बीच जहाजरानी महानिदेशालय (डीजीएमए) ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा एडवाइजरी जारी किया है. खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात बिगड़ने के बाद डीजीएमए ने सर्कुलर नंबर 36/2026 जारी करते हुए सभी शिप ओनर, शिप मैनेजर और आरपीएसएल कंपनियों को निर्देश दिया है कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती न की जाए. साथ ही फारस की खाड़ी और आसपास के इलाकों में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए हैं।&nbsp;</p>
<p>डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है. इसी वजह से यह एहतियाती कदम उठाया गया है. सर्कुलर में साफ कहा गया है कि होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को न भेजा जाए, जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते।&nbsp;</p>
<p>एडवाइजरी में कुछ अहम एहतियाती उपाय भी बताए गए हैं. सबसे पहले, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक रहेगी. दूसरा, फारस की खाड़ी, होर्मुज और आसपास के जलक्षेत्र में सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क रहा जाएगा।&nbsp;</p>
<p>तीसरा, सभी नौवहन चेतावनियों और सुरक्षा एडवाइजरी की लगातार निगरानी की जाएगी और आईएसपीएस कोड यानी अंतरराष्ट्रीय जहाज और पोर्ट सुविधा सुरक्षा संहिता को सख्ती से लागू किया जाएगा. चौथा, किसी भी आपात स्थिति में आईएफसी-आईओआर यानी इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर और DG कम्युनिकेशन सेंटर (MMDAC) के जरिए तुरंत मदद और रिपोर्टिंग की व्यवस्था की जाएगी।&nbsp;</p>
<p>DGMA ने कहा है कि वह खाड़ी क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है. महानिदेशालय ने यह भी भरोसा दिलाया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण को लेकर वह पूरी तरह प्रतिबद्ध है. यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है, और शिपिंग कंपनियों तथा नाविकों के परिवारों में भी बेचैनी देखी जा रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>सरकार बनाएगी रियल-टाइम निगरानी प्रणाली</strong><br />
इन घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने&nbsp; डीजीएमए को निर्देश दिया था कि वह ऐसा रियल-टाइम डैशबोर्ड तैयार करे, जिससे फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में चल रहे हर जहाज पर मौजूद भारतीय नाविकों की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सके।</p>
<p><strong>केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?</strong><br />
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने डीजीएमए से कहा है कि जहाज किसी भी देश का क्यों न हो, यदि उस पर भारतीय नाविक मौजूद हैं तो उनकी पूरी जानकारी एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड पर दर्ज की जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। सरकार का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्थिति सामान्य होने तक एहतियाती कदम जारी रहेंगे।</p>
<p><strong>होर्मुज में न ले जाएं भारतीय नाविक</strong><br />
एडवाइजरी में कहा गया है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी हुई सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए डीजीएमए ने शिप ओनर्स, शिप मैनेजरों और आरपीएसएल कंपनियों को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती से परहेज करें।</p>
<p><strong>फारस की खाड़ी में भी लगातार अलर्ट रहें</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; इस एडवाइजरी के जरिए कुछ और एहतियाती सुरक्षा उपाय बताए गए हैं।</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; होर्मुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी और आसपास के जल क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर कड़ी सतर्कता बरती जाए।</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; नैविकेशन से जुड़ी चेतावनियों और सुरक्षा सलाहों की लगातार निगरानी की जाए, साथ ही आईएसपीएस कोड को सख्ती से लागू किया जाए।</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; किसी भी आपातकालीन स्थिति में आईएफसीआईओआर और डीजी कम्युनिकेशन सेंटर (MMDAC) के माध्यम से तत्काल सूचना पहुंचाएं और सहायता उपलब्ध कराएं।</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; डीजीएमए पैदा होते हालातों पर नजदीकी नजर रख रहा है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।</strong></p>
<p>
<strong>जहाजों पर हमले में दो भारतीय नाविकों की मौत</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; पश्चिम एशिया में अमेरिकी हमला दोबारा शुरू होने के बाद से फिर से हालात बिगड़ चुके हैं।</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; ईरान-अमेरिका के बीच जबरदस्त लड़ाई चल रही है और होर्मुज से गुजर रहे जहाज निशाना बन रहे हैं।</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; पिछले तीन दिनों में जहाजों पर किए गए हमले की चपेट में आने से दो भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है।</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; बीआईएमसीओ के अनुमानों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री नाविकों की सप्लाई में भारत का स्थान दूसरा है।</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; दुनिया भर के मर्चेंट शिप पर 3,10,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं।<br />
&nbsp; &nbsp; बीआईएमसीओ एक वैश्विक शिपिंग संगठन है, जिसमें 120 देश शामिल हैं।</strong></p>
<p><strong>&nbsp; &nbsp; इसके 2,100 सदस्य हैं, जिसमें लोकल, ग्लोबल, छोटी और बड़ी कंपनियां शामिल हैं।</strong></p>
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		<item>
		<title>होर्मुज के बाद अब इस समुद्री रूट पर संकट की चेतावनी, कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jul 2026 16:32:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[Hormuz]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्&#8205;ली अमेरिका और ईरान के बीच जंग फिर शुरू हो चुकी है, जिस कारण स्&#8205;ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों का आवगमन रुक सा गया है. ज्&#8205;यादातर जहाज रात के अंधेरे में या गुप्&#8205;त तरीके से जा रहे हैं, लेकिन फिर भी पूरी क्षमता के साथ जहाज निकल नहीं आ पा रहे हैं।&#160; इस तनाव &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्&zwj;ली</strong></p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच जंग फिर शुरू हो चुकी है, जिस कारण स्&zwj;ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों का आवगमन रुक सा गया है. ज्&zwj;यादातर जहाज रात के अंधेरे में या गुप्&zwj;त तरीके से जा रहे हैं, लेकिन फिर भी पूरी क्षमता के साथ जहाज निकल नहीं आ पा रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>इस तनाव की वजह से कच्&zwj;चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्&zwj;ट्रपति डोनाल्&zwj;ड ट्रंप वहां से गुजरने वाले जहाजों से 20 फीसदी टैक्&zwj;स वसूलने की बात कर रहे हैं, जिससे अब ये तनाव और गहराता हुआ दिख रहा है और कच्&zwj;चे तेल की कीमतों में और उछाल आने की संभावना बन रही हैं।&nbsp;</p>
<p>इस बीच,&nbsp; यमन धमकी देने लगा है कि वह होर्मुज की तरह ही एक और रास्&zwj;ता बंद कर देगा, जिससे कच्&zwj;चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. ग्&zwj;लोबल स्&zwj;तर पर महंगाई रिकॉर्ड स्&zwj;तर पर पहुंच सकती है. साथ ही दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट आ सकती है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>यमन ने क्&zwj;या दी धमकी?&nbsp;</strong><br />
दरअसल, ग्&zwj;लोबल एनर्जी सप्&zwj;लाई और समुद्री व्&zwj;यापार को लेकर चिंतओं के बीच, यमन ने रणनीतिक तौर पर महत्&zwj;वपूर्ण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्&zwj;य को बंद करने की धमकी दी है. बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab-el-Mandeb Strait) होर्मुज की तरह से ही एक चोकपॉइंट है. यह जलमार्ग लाल सागर (Red Sea) को अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) और हिंद महासागर से जोड़ता है।&nbsp;</p>
<p>अगर ये रास्&zwj;ता बंद हो गया तो ग्&zwj;लोबल शिपिंग बाधित हो सकती है. कच्&zwj;चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और भारत के व्&zwj;यापार मार्गों को प्रभावित कर सकती है।&nbsp;</p>
<p>यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि अगर सऊदी अरब यमन के इंफ्रास्&zwj;ट्रक्&zwj;चर को निशाना बनाना जारी रखता है, तो बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया जा सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>200 डॉलर तक जा सकती है तेल की कीमत</strong><br />
प्रेस टीवी ने सोमवार को अल-फराह के हवाले से कहा कि अगर मौजूदा स्थिति और बिगड़ती है, तो बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और होर्मुज जलडमरूमध्य को एक कार्यकारी गठबंधन के तहत बंद कर दिया जाएगा. तब तेल की कीमतें आसमान छूकर 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएंगी, जो एक भयानक झटका होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>क्&zwj;यों इतना खास है ये समुद्री मार्ग?&nbsp;</strong><br />
बाब अल-मंडेब, अरब प्रायद्वीप और अफ्रीका के हॉर्न के बीच एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है, जिससे यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक बन जाता है. यह रास्&zwj;ता स्&zwj;वेज नहर के साउथ एंट्री गेट के तौर पर भी काम करता है और ग्&zwj;लोबल समुद्री व्&zwj;यापार का लगभग 10 से 12 फीसदी हिस्&zwj;सा उठाता है, जिसमें ग्&zwj;लोबल एनर्जी शिपमेंट का एक खास हिस्&zwj;सा शामिल है।&nbsp;</p>
<p><strong>भारत के लिए यह क्यों मायने रखता है?</strong><br />
होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद, भारत कच्चे तेल और LNG के आयात के लिए पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्सों पर निर्भर है. निर्यात के लिए भी यह मार्ग उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्राइवेट और पब्लिक भारतीय रिफाइनर्स नियमित रूप से इस जलडमरूमध्य के माध्यम से यूरोपीय खरीदारों को रिफाइन पेट्रोलियम उत्पाद भेजते हैं।&nbsp;</p>
<p>भारत के लगभग 95% व्यापार का संचालन समुद्र के रास्ते होता है, ऐसे में बाब अल-मंडेब यूरोप, उत्तरी अमेरिका और उत्तरी अफ्रीका को निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है. स्वेज नहर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य मिलकर भारत के कुल विदेशी व्यापार का लगभग 35% सुगम बनाते हैं. वस्त्र, परिधान, दवाइयां, मशीनरी और बासमती चावल समेत कृषि उत्पाद जैसे थोक निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं. यूरोप को निर्यात होने वाले भारतीय माल का लगभग 80% हिस्सा लाल सागर क्षेत्र से होकर गुजरता है।&nbsp;</p>
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		<title>होर्मुज स्ट्रेट फिर संकट में! US हमलों के बाद तेल-गैस सप्लाई पर खतरा, धीमा पड़ा समुद्री ट्रैफिक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 05:53:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[Hormuz]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भी साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिकी सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. भारत समेत लगभग आधी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्ली</strong></p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भी साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिकी सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. भारत समेत लगभग आधी दुनिया को तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है, इसलिए इस इलाके में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।&nbsp;</p>
<p>होर्मुज से गुजरने वाला समुद्री ट्रैफिक अब लगभग रुक गया है. फिलहाल ज्यादातर जहाज सिर्फ उस उत्तरी समुद्री मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे ईरान ने मंजूरी दी है. वहीं ओमान और अमेरिका के समर्थन वाले दक्षिणी कॉरिडोर में जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के घंटों में सिर्फ एक अमेरिकी मंजूरी वाले सुपरटैंकर और एक ईरानी कंटेनर जहाज को स्ट्रेट पार करते देखा गया।&nbsp;</p>
<p>डेटा फर्म Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान के अंतरिम समझौते के बाद पिछले तीन सप्ताह में प्रतिदिन औसतन 34 कमोडिटी जहाज होर्मुज से गुजर रहे थे. 24 जून को यह संख्या 59 तक पहुंच गई थी. लेकिन ताजा सैन्य टकराव के बाद यह आंकड़ा तेजी से गिर गया है. युद्ध के दौरान अधिकांश दिनों में 20 से भी कम जहाज इस रास्ते से गुजर पाए।&nbsp;</p>
<p><strong>होर्मुज पर कंट्रोल के लिए कोई भी नुकसान उठाने को तैयार ईरान!</strong><br />
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ एलेक्स अलफिराज शीर्स का कहना है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए अमेरिका के साथ बड़े संघर्ष का जोखिम उठाने को भी तैयार है. उनके मुताबिक, ईरान इस जलमार्ग को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानता है और भविष्य की किसी भी बातचीत में इसे दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।&nbsp;</p>
<p>वहीं अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों पर भी दबाव है कि वे यह सुनिश्चित करें कि होर्मुज पूरी तरह ईरान के नियंत्रण वाला समुद्री क्षेत्र न बन जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता पूरी तरह खत्म तो नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात में वह बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है।&nbsp;</p>
<p><strong>अमेरिका ने ईरान में किए कई बड़े स्ट्राइक, रेलवे पुल भी ध्वस्त</strong><br />
इस बीच ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाया है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने दो रेलवे पुलों समेत कई ठिकानों पर हमला किया और इसे होर्मुज में जहाजों पर हमलों के जवाब के रूप में पेश करना &quot;झूठा बहाना&quot; है. ईरान का दावा है कि अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>अमेरिका के हमले के बाद कतर, कुवैत और बहरीन पर हमला</strong><br />
उधर ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का भी दावा किया है. वहीं होर्मुज के आसपास स्थित बुशेहर, चाबहार, बंदर अब्बास, सीरिक, जास्क और अबू मूसा द्वीप समेत कई इलाकों में धमाकों की खबरें सामने आई हैं. अगर दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई रूट पर लंबा असर पड़ सकता है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, गैस सप्लाई, शिपिंग लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।&nbsp;</p>
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		<title>होर्मुज जलडमरूमध्य में बड़ा हमला! दो कमर्शियल जहाजों पर मिसाइलें, ईरान पर लगे गंभीर आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 06:35:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[Hormuz]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने मंगलवार तड़के होर्मुज के पास दो व्यापारिक जहाजों पर मिसाइलें दागी हैं. यह जानकारी अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है. इस हमले से अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने की बातचीत पर असर पड़ने की आशंका है।&#160; यह हमला ऐसे समय हुआ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने मंगलवार तड़के होर्मुज के पास दो व्यापारिक जहाजों पर मिसाइलें दागी हैं. यह जानकारी अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है. इस हमले से अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने की बातचीत पर असर पड़ने की आशंका है।&nbsp;</p>
<p>यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान में लोग पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का शोक मना रहे हैं. खामेनेई की मौत ईरान युद्ध की शुरुआत में हुई थी।&nbsp;</p>
<p>रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर पिछले कुछ समय से इस इलाके में जहाजों को धमकी दे रहा था. यह पैरामिलिट्री फोर्स बातचीत की कोशिशों को कमजोर करने में जुटा है. गार्ड कोर ने जहाजों को चेतावनी दी थी कि वे उस रास्ते से न गुजरें जिसे अमेरिकी सेना ने ओमान के तट के पास सुरक्षित घोषित किया है।&nbsp;</p>
<p>मंगलवार का हमला इसी चेतावनी के बाद हुआ है और इससे इलाके में तनाव और बढ़ गया है. इस बीच यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी यूकेएमटीओ ने भी एक घटना की जानकारी दी है।&nbsp;</p>
<p>UKMTO ने बताया है कि टैंकर ओमान के लिमाह के पास दक्षिण की ओर जा रहा था, तभी उसके बाईं ओर (पोर्ट साइड) टक्कर हुई, जिससे तुरंत ही आग लग गई। हालांकि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ और ना ही पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचा है। अधिकारी फिलहाल इस घटना की जांच कर रहे हैं।</p>
<p><strong>ईरान ने किया हमला: अमेरिका</strong><br />
अमेरिका ने हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार माना है। एक्सियोस अनुसार, दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान की IRGC ने सोमवार रात होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर दो मिसाइलें दागीं। एक ऑयल टैंकर और एक कमर्शियल जहाज इसकी चपेट में आया। दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, 2024 में यहां से हर दिन तकरीबन 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरा, जो दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा है। यह जलमार्ग हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष का केंद्र बना हुआ है।</p>
<p><strong>होर्मुज स्ट्रेट में तनाव</strong><br />
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से यातायात को नियंत्रित करना शुरू किया था। इसके बाद से यहां तनाव चल रहा है। हालांकि अमेरिका-ईरान के समझौते में होर्मुज को खोलने की बात कही गई है लेकिन इस समुद्री गलियारे में चीजें सामान्य होती नहीं दिख रही हैं।</p>
<p>यूकेएमटीओ के मुताबिक ओमान के लीमाह से करीब आठ नॉटिकल मील पूर्व में एक घटना हुई है. एक टैंकर जहाज दक्षिण दिशा में जा रहा था तभी उसे किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने बाईं ओर से टक्कर मारी. इस टक्कर से जहाज में आग लग गई. राहत की बात यह है कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>यूकेएमटीओ ने सभी जहाजों को सावधानी से यात्रा करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत देने की सलाह दी है।&nbsp;</p>
<p>इन दोनों घटनाओं ने होर्मुज में सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है. यह रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम माना जाता है क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल का व्यापार होता है।&nbsp;</p>
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		<title>होर्मुज स्ट्रेट में माइन्स का दावा: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी समुद्री सुरक्षा चिंता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 04:11:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Hormuz]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ओमान के समुद्री क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है. होर्मुज स्ट्रेट से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें ईरान की नौसेना द्वारा बिछाई गई संदिग्ध बारूदी माइन्स दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. ये ईरान की महम-3 (Maham-3) नेवल माइन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ओमान के समुद्री क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है. होर्मुज स्ट्रेट से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें ईरान की नौसेना द्वारा बिछाई गई संदिग्ध बारूदी माइन्स दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. ये ईरान की महम-3 (Maham-3) नेवल माइन हो सकती है, जिसका वजन करीब 300 किलोग्राम बताया जा रहा है.</p>
<p>इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. खास बात यह है कि लगातार तलाशी अभियान चलाने के बावजूद अमेरिकी सेना अब तक इन माइन्स की निश्चित पहचान नहीं कर पाई है. ऐसे में सामने आई तस्वीरों को अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. होर्मुज के समुद्री इलाके में अमेरिकी नौसेना लगातार तलाशी अभियान चला रही है.</p>
<p>इसके बावजूद ईरान द्वारा बिछाई गई एक भी नेवल माइन की आधिकारिक पहचान नहीं हो सकी है. अब सामने आई तस्वीरों ने पूरे मामले को ज्यादा संवेदनशील बना दिया है. माना जा रहा है कि यदि ये वास्तव में महम-3 माइन साबित होती है तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. इसी बीच ईरान की एक और बड़ी खबर सामने आई है.</p>
<p><strong>वीडियो में देखिए होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी माइन्स&#8230;</strong><br />
जानकारी के मुताबिक, तेहरान अब संभावित ड्रोन युद्ध की तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. ईरान के रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन सहायता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है. ईरानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार जल्द ही एक विशेष ड्रोन सहायता केंद्र बनाया जाएगा. यह केंद्र सरकारी और सैन्य दोनों संगठनों को ड्रोन से जुड़ी सभी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराएगा.</p>
<p>माना जा रहा है कि इससे ईरान की मानवरहित हवाई वाहन क्षमता को और मजबूती मिलेगी. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव किसी भी समय बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक ऐसा संदेश साझा किया है, जिसे कई विश्लेषक ईरान के लिए चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं.</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप का AI अवतार सोशल मीडिया पर सामने आया है. इसको लेकर चर्चा है कि अमेरिका ईरान को संकेत देना चाहता है कि वो किसी भी स्थिति के लिए तैयार है. यह भी दिखाने की कोशिश की गई कि ईरान अभी भी अमेरिका की रणनीति को लेकर असमंजस में है. इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान पर सैन्य कार्रवाई का काउंटडाउन शुरू हो चुका है.</p>
<p>अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यदि तेहरान के साथ समझौता नहीं हो पाता तो अमेरिका दोबारा हमले शुरू करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है. दोनों पक्ष प्रमुख मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों के बीच पिछले डेढ़ महीने से तनाव कम करने को लेकर बातचीत चल रही है.</p>
<p>हेगसेथ का बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान संकट पर अपने प्रमुख सलाहकारों के साथ अहम बैठक की थी. यह बैठक व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई थी, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की गई. हालांकि, इस बैठक के बाद व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया.</p>
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		<title>खामेनेई के आदेश पर खोला जाएगा होर्मुज, न कि &#8216;इडियट&#8217; के कहने पर; ईरान का ट्रंप पर तीखा हमला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 14:32:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[Hormuz]]></category>
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					<description><![CDATA[तेहरान&#160; ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा कूटनीतिक विवाद अब व्यक्तिगत हमलों और सोशल मीडिया वॉर में बदल गया है। दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने एक वायरल समुद्री ऑडियो क्लिप का हवाला देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इडियट (मूर्ख) करार दिया है। इस तीखे हमले ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल पैदा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान&nbsp;</strong></p>
<p>ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा कूटनीतिक विवाद अब व्यक्तिगत हमलों और सोशल मीडिया वॉर में बदल गया है। दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने एक वायरल समुद्री ऑडियो क्लिप का हवाला देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इडियट (मूर्ख) करार दिया है। इस तीखे हमले ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br />
विवाद की शुरुआत एक वायरल वीडियो और ऑडियो क्लिप से हुई, जो कथित तौर पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना और समुद्र में मौजूद जहाजों के बीच रेडियो संचार की है। इस रिकॉर्डिंग में ईरानी नौसेना का एक अधिकारी इडियट शब्द का इस्तेमाल करता सुनाई दे रहा है। शुरुआत में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि ईरानी अधिकारी ने अपने ही विदेश मंत्री के लिए इस शब्द का प्रयोग किया है।</p>
<p><strong>ईरानी दूतावास का तीखा पलटवार</strong><br />
इन दावों को खारिज करते हुए दक्षिण अफ्रीका में ईरानी मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;X&#039; पर एक बेहद कड़ा और सीधा पोस्ट किया। दूतावास ने लिखा, &quot;ओ बेवकूफ, उसका मतलब तुम्हारे &#039;इडियट&#039; राष्ट्रपति ट्रंप से था। बस गूगल पर &#039;इडियट&#039; सर्च करके देख लो, तुम्हें समझ आ जाएगा कि वह कौन है।&quot; दूतावास का यह बयान सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाता है, जो अक्सर सोशल मीडिया के जरिए अपनी विदेश नीति और घोषणाएं साझा करते रहते हैं।</p>
<p><strong>ऑडियो क्लिप में क्या था?</strong><br />
मैरीटाइम चैनल 16 पर प्रसारित इस रेडियो संदेश में IRGC नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों को सख्त चेतावनी दी थी। संदेश में कहा गया, &quot;यह चैनल 16 पर ईरानी सिपह नौसेना की कॉल है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी बंद है। हम इसे हमारे इमाम खामेनेई के आदेश पर खोलेंगे, न कि किसी &#039;इडियट&#039; के ट्वीट्स के आधार पर।&quot;</p>
<p>यह संदेश स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति ट्रंप के उन हालिया ट्वीट्स और बयानों पर कटाक्ष था, जिनमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूरी तरह खुले होने का दावा किया था।</p>
<p>आम तौर पर दूतावास और राजनयिक मिशन इस तरह की अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल से बचते हैं, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिका की नौसैनिक घेराबंदी ने ईरान के रुख को और अधिक आक्रामक बना दिया है। ईरान का यह हमला दर्शाता है कि वह कूटनीतिक मेज के साथ-साथ नैरेटिव की लड़ाई में भी पीछे नहीं हटना चाहता।</p>
<p>इस निजी हमले के बाद फिलहाल वाइट हाउस या राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।</p>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
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		<title>होर्मुज में भारतीय जहाज पर फायरिंग पर तेहरान का जवाब, जानें 10 लेटेस्ट अपडेट्स</title>
		<link>https://newsx24.com/tehrans-response-to-the-firing-on-the-indian-ship-in-hormuz-10-latest-updates/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 08:12:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[Hormuz]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से एक बार फिर जहाजों का आवाजाही बंद हो गई है. होर्मुज के रास्ते कच्चा तेल ले जा रहे भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों पर फायरिंग की घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया है. समुद्री सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से एक बार फिर जहाजों का आवाजाही बंद हो गई है. होर्मुज के रास्ते कच्चा तेल ले जा रहे भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों पर फायरिंग की घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया है. समुद्री सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब ये जहाज इस संकरे जलमार्ग से गुजर रहे थे, जो पहले से ही क्षेत्रीय संघर्ष के चलते संवेदनशील बना हुआ है. इस घटना के बाद भारत ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के राजदूत को तलब किया और अपने नागरिकों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई।&nbsp;</p>
<p>इस बीच एक ऑडियो क्लिप भी सामने आई है, जिसमें एक भारतीय जहाज के क्रू मेंबर समुद्री अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं, &lsquo;आपने मुझे रास्ता दिया और अब फायरिंग कर रहे हैं, मुझे वापस मुड़ने दीजिए.&rsquo; इस बीच ईरान की ओर से शांति का संदेश भी आया है, लेकिन जमीनी हालात और समुद्री गतिविधियां लगातार बढ़ते तनाव की ओर इशारा कर रही हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>होर्मुज के हालात पर 10 लेटेस्ट अपडेट्स&hellip;</strong></p>
<p>&nbsp; &nbsp; होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों के पास अचानक फायरिंग शुरू हो गई. बताया गया कि ये गोलियां आसपास हो रही &lsquo;स्मॉल आर्म्स फायरिंग&rsquo; का हिस्सा थीं, जो जहाजों तक पहुंच गईं. हालांकि किसी भी क्रू मेंबर को चोट नहीं आई.</p>
<p>&nbsp; &nbsp; सरकार से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया कि दोनों जहाजों को हल्का नुकसान हुआ है. इन जहाजों की ब्रिज विंडो पर गोली लगने की बात सामने आई है, लेकिन कोई बड़ा तकनीकी नुकसान या जानमाल की हानि नहीं हुई।&nbsp;</p>
<p>&nbsp; &nbsp; एक टैंकर के कप्तान ने दावा किया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े दो गनबोट्स जहाज के पास आए और फायरिंग शुरू कर दी. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp; &nbsp; इस घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत मोहम्मद फताअली को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी राजदूत को इस &lsquo;गोलीबारी की घटना&rsquo; पर भारत की &lsquo;गहरी चिंता&rsquo; से अवगत कराया.उन्होंने भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।&nbsp;</p>
<p>&nbsp; &nbsp; विदेश मंत्रालय ने याद दिलाया कि पहले भी ईरान ने भारत जाने वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने में सहयोग किया है. अब भारत चाहता है कि वही प्रक्रिया जल्द बहाल की जाए।&nbsp;</p>
<p>&nbsp; &nbsp; भारतीय सूत्रों के मुताबिक, जहाजों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया, बल्कि वे &lsquo;भटकी हुई गोलियों&rsquo; की चपेट में आए. इसके बावजूद घटना ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।&nbsp;</p>
<p>&nbsp; &nbsp; उधर यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने ओमान तट से करीब 20 नॉटिकल मील दूर सुरक्षा घटना की पुष्टि की है, जिससे क्षेत्र में खतरे का स्तर और बढ़ गया है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp; &nbsp; कई जहाजों ने दावा किया कि उन्हें VHF रेडियो पर ईरानी नौसेना की ओर से संदेश मिला कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया गया है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इससे जहाजों में दहशत फैल गई।&nbsp;</p>
<p>&nbsp; &nbsp; होर्मुज में गोलीबारी की इस घटना पर भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा, &lsquo;ईरान और भारत के बीच रिश्ते बहुत मज़बूत हैं और जिस घटना का आपने ज़िक्र किया है, उसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।&nbsp;</p>
<p>हमें उम्मीद है कि सब ठीक हो जाएगा और यह मामला सुलझ जाएगा.&rsquo; इसके साथ ही उन्होंने कहा, &lsquo;&hellip;हम यह युद्ध नहीं चाहते. हम शांति चाहते हैं, और हमें उम्मीद है कि दूसरा पक्ष भी शांति का पालन करेगा, ताकि हम एक शांतिपूर्ण क्षेत्र बना सकें।&nbsp;</p>
<p>&nbsp; &nbsp; इसी बीच ईरानी नेता मोहम्मद बाकेर क़ालिबाफ़ और सईद खतिबजादेह के बयानों ने हालात को और जटिल बना दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका को लेकर सख्त रुख अपनाया है और परमाणु मुद्दे पर किसी भी दबाव को मानने से इनकार किया है. इससे क्षेत्र में टकराव की आशंका और बढ़ गई है।&nbsp;</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई यह घटना सिर्फ एक फायरिंग नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा संकेत है. भारत जैसे देश, जिनका बड़ा व्यापार इस मार्ग से गुजरता है, अब अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में हालात शांत होते हैं या यह संकट और गहराता है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>होर्मुज जलमार्ग खुला, 11% गिरे तेल के दाम – क्या फिर से संकट बढ़ेगा?</title>
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		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 06:04:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[Hormuz]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्&#8205;ली हार्मुज खुलने के ऐलान के बाद इंटरनेशनल मार्केट में भारी उलटफेर देखने को मिला है, जहां कल तक कच्&#8205;चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने हुए थे. वहीं अब इसकी कीमत अचानक से सस्&#8205;ती हो चुकी हैं. मार्केट समय के दौरान इसकी कीमत 86 डॉलर के करीब चुकी थीं. &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्&zwj;ली</strong><br />
हार्मुज खुलने के ऐलान के बाद इंटरनेशनल मार्केट में भारी उलटफेर देखने को मिला है, जहां कल तक कच्&zwj;चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने हुए थे. वहीं अब इसकी कीमत अचानक से सस्&zwj;ती हो चुकी हैं. मार्केट समय के दौरान इसकी कीमत 86 डॉलर के करीब चुकी थीं. हालांकि कुछ देर बाद तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर आ गईं।&nbsp;</p>
<p>दरअसल, ईरान ने कहा कि जबतक सीजफायर लागू है, तबतक कमर्शियल जहाजों से होर्मुज से गुजरने की मंजूरी रहेगी. वहीं ट्रंप ने भी कहा कि अब ईरान कभी भी होर्मुज को बंद नहीं करेगा. ईरान ने सहमति जताई है. इस खबर के आते ही तेल-गैस की कीमतें तेजी से गिरें।&nbsp;</p>
<p><strong>11 फीसदी तक सस्&zwj;ता हुआ तेल</strong><br />
ब्रेंट क्रूड वायदा रात में 10.42 डॉलर या 10.48% गिरकर 88.97 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, सत्र के दौरान यह 86.09 डॉलर के निचले स्तर पर भी पहुंचा था. WTI क्रूड वायदा 11.48 डॉलर या 12.12% गिरकर 83.21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो 80.56 डॉलर तक पहुंच गया था. हालांकि, कारोबार बंद होने तक क्रूड ऑयल 90.38 डॉलर पर पहुंच गया. तेल की कीमतों में एक दिन में यह सबसे बड़ी गिरावट रही।&nbsp;</p>
<p><strong>गैस की कीमतों पर भी असर&nbsp;</strong><br />
खबर आते ही गैस की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली. एलएनजी की की कीमत 2.624 डॉलर आ गईं. हालांकि ईरानी राष्&zwj;ट्रपति की ओर से अपडेट आने के बाद यह वायदा बाजार में 2.674 डॉलर पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि नेचुरल गैस की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।&nbsp;</p>
<p><strong>होर्मुज को लेकर फिर बना संकट?&nbsp;</strong><br />
शनिवार की सुबह ईरान के सांसद अध्&zwj;यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि होर्मुज को अमेरिका के इशारे पर नहीं, बल्कि ईरान के नियम के आधार पर संचालित किया जाएगा. साथ ही उन्&zwj;होंने कहा कि अगर अमेरिका ईरानी पोर्ट पर प्रतिबंध लगाकर रखता है तो होर्मुज बंद कर दिया जाएगा. उन्&zwj;होंने ट्रंप के बयानों की आलोचना की. इस खबर के बाद सोमवार को तेल की कीमतों पर असर दिखाई दे सकता है. तेल-गैस की कीमतों में फिर से तेजी दिख सकती हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>बाजार में क्&zwj;या होगा असर?&nbsp;</strong><br />
स्&zwj;ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से अमेरिकी बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली. अमेरिकी बाजार 2 फीसदी से ज्&zwj;यादा चढ़ गया. वहीं भारतीय बाजार का इंडिकेटर गिफ्ट निफ्टी भी शानदार तेजी का संकेत दे रहा है. सोमवार को भारतीय बाजार में करीब 300 अंकों का गैपअप देखने को मिल सकता है।&nbsp;</p>
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		<title>होर्मुज जलडमरूमध्य में हलचल: अमेरिकी जहाज ने संभाली कमान, बारूदी सुरंगों की सफाई जारी; ईरान की कड़ी चेतावनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 15:26:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Hormuz]]></category>
		<category><![CDATA[mine clearance operation]]></category>
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					<description><![CDATA[वाशिंगटन. ईरान से जारी बातचीत के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य बलों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को साफ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के सभी 28 माइन ड्रॉपर जहाजों को डुबो दिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन.</strong><br />
ईरान से जारी बातचीत के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य बलों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को साफ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के सभी 28 माइन ड्रॉपर जहाजों को डुबो दिया गया है और वे अब समुद्र की तलहटी में पड़े हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी बलों ने ईरान की नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, साथ ही उसके बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को भी गंभीर क्षति पहुंचाई है।</p>
<p>अमेरिका का दावा है कि अमेरिकी नौसेना के कई जहाज शनिवार को होर्मुज स्ट्रेट को पार कर गए, जो ईरान के साथ तालमेल के बिना किया गया कदम था। एक्सिओस ने एक अज्ञात अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह खबर दी। खबर में कहा गया कि संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहली बार हुआ है जब ऐसा कदम उठाया गया हो। हालांकि, ईरान अमेरिकी मीडिया के इस दावे से इससे इनकार कर रहा है।<br />
अमेरिकी दावे से ईरान का इनकार</p>
<p>ईरानी स्टेट टेलीविजन ने शनिवार को अमेरिकी सैन्य जहाज को 30 मिनट के अंदर हमला करने की चेतावनी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, कई अमेरिकी नौसेना के जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार करने की कोशिश कर रहे हैं, जो संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार हुआ। ईरान की सेमी-ऑफिशियल न्यूज एजेंसी फार्स के अनुसार, एक अमेरिकी डिस्ट्रॉयर फुजैरा से जलमार्ग की ओर बढ़ा, जिस पर ईरान ने नजर रखी और पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए चेतावनी भेजी। इसके बाद अमेरिकी जहाज वापस लौट गया।</p>
<p>ताजा घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता शनिवार को इस्लामाबाद में शुरू हुई। सूत्रों ने बताया कि बातचीत पाकिस्तानी अधिकारियों के माध्यम से संदेशों के आदान-प्रदान से शुरू हुई, जिससे संकेत मिलता है कि शुरुआती बातचीत परोक्ष रूप से हुई। उन्होंने कहा कि अगर कोई सकारात्मक घटनाक्रम होता है तो सीधी बातचीत भी हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि बातचीत के लिए ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचा, जबकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शनिवार सुबह पहुंचा।</p>
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