<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Indian Navy &#8211; NewsX 24</title>
	<atom:link href="https://newsx24.com/tag/indian-navy/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://newsx24.com</link>
	<description></description>
	<lastBuildDate>Tue, 11 Aug 2026 05:02:00 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.7</generator>

<image>
	<url>https://newsx24.com/wp-content/uploads/2026/02/cropped-ChatGPT-Image-Feb-18-2026-11_44_21-PM-32x32.png</url>
	<title>Indian Navy &#8211; NewsX 24</title>
	<link>https://newsx24.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>लाल सागर में उतरी भारतीय नौसेना! हूतियों के हमले का दिया जवाब, INS आदित्य-त्रिशूल एक्शन में</title>
		<link>https://newsx24.com/indian-navy-in-the-red-sea-responding-to-houthi-attacks-ins-aditya-and-ins-trishul-swing-into-action/</link>
					<comments>https://newsx24.com/indian-navy-in-the-red-sea-responding-to-houthi-attacks-ins-aditya-and-ins-trishul-swing-into-action/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 05:02:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Navy]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/indian-navy-in-the-red-sea-responding-to-houthi-attacks-ins-aditya-and-ins-trishul-swing-into-action/</guid>

					<description><![CDATA[मुंबई&#160; लाल सागर में बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अब साफ संकेत दे दिया है कि अपने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए वह किसी और पर निर्भर नहीं रहेगा. भारतीय नेवी ने भारत से जुड़े दो तेल टैंकरों को यहां से सुरक्षित एस्कॉर्ट किया है. कुछ दिनों पहले भारतीय झंडे वाले एक जहाज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई&nbsp;</strong></p>
<p>लाल सागर में बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अब साफ संकेत दे दिया है कि अपने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए वह किसी और पर निर्भर नहीं रहेगा. भारतीय नेवी ने भारत से जुड़े दो तेल टैंकरों को यहां से सुरक्षित एस्कॉर्ट किया है. कुछ दिनों पहले भारतीय झंडे वाले एक जहाज पर हमला हुआ था और वो डूब गया था. इसके बाद भारतीय नौसेना खुद मैदान में उतर गई है और हाई-रिस्क जोन में एक्टिव ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं. यमन के पास एक भारतीय जहाज पर हमले के बाद स्थिति अचानक बदल गई. यह सिर्फ एक घटना नहीं थी, बल्कि एक चेतावनी थी कि लाल सागर अब सुरक्षित वैकल्पिक रूट भी नहीं रहा।&nbsp;</p>
<p>इसी के बाद भारतीय नौसेना ने बाब-अल-मंदेब जैसे संवेदनशील जलडमरूमध्य में सीधे दखल देते हुए दो क्रूड ऑयल टैंकरों MT Compass और MT Thalatta को सुरक्षित बाहर निकाला. भारतीय नौसेना ने बाब-अल-मंदेब जैसे खतरनाक इलाके में दो तेल टैंकरों को अपनी सुरक्षा में बाहर निकाला. INS Trishul और INS Aditya ने 9 और 10 अगस्त को इन जहाजों को एस्कॉर्ट किया।&nbsp;</p>
<p>
<strong>क्यों अहम है बाब-अल-मंदेब?</strong><br />
बाब-अल-मंदेब दुनिया के सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक किया, तो सऊदी ने तेल बेचने के लिए लाल सागर का रास्ता चुना. क्योंकि वह पूर्व और पश्चिम दोनों तरफ से समुद्र से जुड़ा है. कई तेल टैंकरों ने इसी रूट को विकल्प के तौर पर चुना. लेकिन अब यहां भी ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोहियों के <strong>हमले बढ़ने से यह रास्ता भी जोखिम में आ गया है. यानी दुनिया के दोनों बड़े तेल रूट होर्मुज और बाब-अल-मंदेब एक साथ अस्थिर हैं।&nbsp;</strong></p>
<p><strong>हूती बने समुद्र के लिए नया खतरा</strong><br />
यमन के हूती विद्रोही लगातार जहाजों को निशाना बना रहे हैं. हालिया हमले में एक भारतीय झंडे वाला जहाज डूब गया, हालांकि सभी 14 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने इस हमले के पीछे हूतियों को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि समूह ने आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली. हूतियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के रेड सी पोर्ट्स के खिलाफ &lsquo;ब्लॉकेड&rsquo; का ऐलान भी किया था, जिससे पूरे इलाके में असुरक्षा और बढ़ गई है।&nbsp;</p>
<p><strong>भारत क्यों उतरा सीधे मैदान में?</strong><br />
भारतीय झंडे वाले जहाज के डूबने के बाद यह तय हो गया है कि अब ईरान-अमेरिका के जंग की आग हमारे घर तक पहुंच गई है. यही वजह है कि भारत को पहली बार इस तरह सीधे एस्कॉर्ट ऑपरेशन चलाना पड़ा है. अब तक समुद्री सुरक्षा के लिए बड़े देशों या अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भरोसा किया जाता था, लेकिन मौजूदा हालात में वह व्यवस्था कमजोर पड़ती दिख रही है. भारत का यह कदम इसी बदलाव का संकेत है कि अब अपने जहाजों और ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा खुद करनी होगी।&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/indian-navy-in-the-red-sea-responding-to-houthi-attacks-ins-aditya-and-ins-trishul-swing-into-action/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारतीय नौसेना में तीन स्वदेशी युद्धपोतों का भव्य समावेश, समुद्री शक्ति को मिली नई मजबूती</title>
		<link>https://newsx24.com/grand-induction-of-three-indigenous-warships-into-the-indian-navy-maritime-power-receives-a-significant-boost/</link>
					<comments>https://newsx24.com/grand-induction-of-three-indigenous-warships-into-the-indian-navy-maritime-power-receives-a-significant-boost/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 04:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Navy]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/grand-induction-of-three-indigenous-warships-into-the-indian-navy-maritime-power-receives-a-significant-boost/</guid>

					<description><![CDATA[नई दिल्ली &#160;पाकिस्तानी नौसेना समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए चीन से हंगोर क्लास की पनडुब्बी लेकर आई है। ऐसे में भारत ने भी पनडुब्बियों को डुबो देने वाले तीन घातक स्वदेशी युद्धपोत नीले समंदर में उतार दिए हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तीन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
&nbsp;पाकिस्तानी नौसेना समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए चीन से हंगोर क्लास की पनडुब्बी लेकर आई है। ऐसे में भारत ने भी पनडुब्बियों को डुबो देने वाले तीन घातक स्वदेशी युद्धपोत नीले समंदर में उतार दिए हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तीन नए युद्धपोतों INS दुनागिरि, INS अग्रय और INS संशोधक को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने दुश्मनों को स्पष्ट संकेत दिया कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य जरूरी है और भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत कर रहा है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, &#039;भारत ने हमेशा से समुद्र को सहयोग का माध्यम माना है। लेकिन भारत ये भी जानता है कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य आवश्यक है। समृद्धि की रक्षा के लिए सुरक्षा आवश्यक है। भविष्य के निर्माण के लिए आत्मनिर्भरता अनिवार्य है। आज INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक इसी भावना के प्रतीक बनकर भारतीय नौसेना में शामिल हुए हैं।&#039;</p>
<p><strong>समंदर में ताकत बढ़ा रही भारतीय नौसेना</strong><br />
कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट में आयोजित एक खास समारोह में इन तीनों वॉरशिप को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इनमें एक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरी, दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रेह और तीसरा सर्वे वेसेल लार्ज संशोधक है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब एक ही दिन में तीन वॉरशिप नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं। इससे पहले 15 जनवरी 2025 को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नीलगिरी क्लास का पहला स्टेल्थ फ्रिगेट INS नीलगिरी, डिस्ट्रॉयर INS सूरत और पनडुब्बी INS वागशीर भारतीय नौसेना में शामिल किए गए थे।</p>
<p><strong>नेवी को मिला P17A क्लास का पांचवा वॉरिशप</strong><br />
इसी साल 30 मार्च को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित पांचवां गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट दूनागिरी भारतीय नौसेना को सौंपा था। दूनागिरी, पूर्ववर्ती INS दूनागिरी का आधुनिक स्वरूप है, जो लींडर क्लास का फ्रिगेट था और 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक नौसेना का हिस्सा रहा। यह 16 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा गया पी17ए श्रेणी का पांचवां वॉरशिप है। पहले चार जहाजों के निर्माण से मिले अनुभव के आधार पर इसका निर्माण समय 93 महीनों से घटाकर 80 महीने कर दिया गया।</p>
<p><strong>INS दूनागिरी की खासियत</strong><br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; INS दूनागिरी में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली लगी है, जो एंटी-शिप और एंटी-सर्फेस युद्ध में बेहद प्रभावी मानी जाती है।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; यह वॉरशिप बराक-8 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आधुनिक एयर डिफेंस गन स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम मल्टी-फंक्शन रडार जैसी अत्याधुनिक सिस्टम से लेस हैं।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; यह फ्रिगेट दुश्मन के हमलों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; INS दूनागिरी लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं और इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; 6,700 टन वजनी यह युद्धपोत 30 नॉट की अधिकतम गति से चल सकता है।</p>
<p><strong>INS अग्रेह की खासियत</strong><br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; दुश्मन की सबमरीन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना शुरू की थी। साल 2019 में 16 वॉरशिप के निर्माण का कांट्रेक्ट दिया गया था, जिनमें आठ कोचिन शिपयार्ड और आठ जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं। इसी परियोजना के तहत निर्मित अग्रेह को भी नौसेना में शामिल किया गया है। इससे पहले आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त, आईएनएस माहे और आईएनएस अंजदीप को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।</p>
<p>&nbsp;&nbsp;&nbsp; INS अग्रेह की खासियत है कि यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; यह जहाज 25 नॉट की रफ्तार से चल सकता है और तकरीबन 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है।</p>
<p><strong>INS संशोधक की खासियत</strong><br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; संशोधक की खासियत है कि यह समुद्र तल की स्कैनिंग करना, सुरक्षित नेविगेशन रूट के लिए समुद्री चार्ट तैयार करने के साथ-साथ हाइड्रोग्राफिक सर्वे करना है।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; जीआरएसई, कोलकाता में निर्मित इस जहाज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के नेवल डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; 110 मीटर लंबा और लगभग 3,800 टन वजनी यह जहाज दो डीजल इंजनों से संचालित होता है।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; यह 25 दिनों से ज्यादा समय तक समुद्र में रहने में सक्षम है और इसकी अधिकतम रफ़्तार 18 नॉट है।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद संशोधक देश की समुद्री सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र के मैप और सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/grand-induction-of-three-indigenous-warships-into-the-indian-navy-maritime-power-receives-a-significant-boost/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>समंदर में भारत की दहाड,ऑस्ट्रेलिया से फ्रांस तक दिखा नौसेना का दम, रणनीतिक मोर्चों पर बढ़ाई मौजूदगी</title>
		<link>https://newsx24.com/indias-roar-across-the-seas-navy-demonstrates-prowess-from-australia-to-france-bolstering-presence-on-strategic-fronts/</link>
					<comments>https://newsx24.com/indias-roar-across-the-seas-navy-demonstrates-prowess-from-australia-to-france-bolstering-presence-on-strategic-fronts/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 13:21:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Navy]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/indias-roar-across-the-seas-navy-demonstrates-prowess-from-australia-to-france-bolstering-presence-on-strategic-fronts/</guid>

					<description><![CDATA[नई दिल्ली भारतीय नौसेना ने दिसंबर 2025 से मार्च 2026 की अवधि के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी को मजबूती से पेश किया है. इस दौरान भारतीय युद्धपोतों ने खाड़ी देशों, लाल सागर, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य हिंद महासागर के विभिन्न देशों में &#039;ओवरसीज पोर्ट कॉल्स&#039; यानी विदेशी बंदरगाहों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
भारतीय नौसेना ने दिसंबर 2025 से मार्च 2026 की अवधि के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी को मजबूती से पेश किया है. इस दौरान भारतीय युद्धपोतों ने खाड़ी देशों, लाल सागर, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य हिंद महासागर के विभिन्न देशों में &#039;ओवरसीज पोर्ट कॉल्स&#039; यानी विदेशी बंदरगाहों का दौरा किया है.</p>
<p>ये ऑपरेशन नौसैनिक कूटनीति की कोशिशों को बेहतर करने और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाए गए थे. नौसेना के विभिन्न जहाजों ने फ्रांस से लेकर ऑस्ट्रेलिया और तंजानिया तक अपनी पहुंच बनाई. खुले स्रोतों और सार्वजनिक रिपोर्टिंग के आधार पर तैयार ये ब्योरा भारत की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपस्थिति बनाए रखने की महत्वाकांक्षा को दिखाता है.</p>
<p><strong>गल्फ-रेड सी क्षेत्र</strong><br />
रिपोर्ट में बताया गया है कि दिसंबर 2025 और मार्च 2026 के बीच भारतीय जहाजों ने खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण दौरे किए. आईएनएस सुदर्शन ने मार्च 2026 में फ्रांस और फरवरी 2026 में ओमान का दौरा किया.</p>
<p>वहीं, आईएनएस त्रिकंड मार्च 2026 में तंजानिया और मोजाम्बिक के बंदरगाहों पर पहुंचा. तलवार क्लास के जहाजों ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान जिबूती और ओमान में उपस्थिति दर्ज कराई.</p>
<p>इसके अलावा आईसीजीएस सार्थक ने दिसंबर 2025 में कुवैत, सऊदी अरब और ईरान के बंदरगाहों पर पोर्ट कॉल किए जो इस क्षेत्र में भारत के बढ़ते सुरक्षा हितों को रेखांकित करता है.</p>
<p><strong>दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय नौसेना</strong><br />
वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री रास्तों पर भी भारतीय नौसेना की सक्रियता काफी ज्यादा रही. दिसंबर 2025 में आईसीजीएस विग्रह ने मलेशिया और इंडोनेशिया का दौरा किया. जनवरी 2026 में आईएनएस शार्दुल और आईएनएस तीर सिंगापुर पहुंचे, जबकि आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी ने इंडोनेशिया और थाईलैंड के बंदरगाहों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. ये पोर्ट कॉल्स न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करते हैं, बल्कि महत्वपूर्ण &#039;सी-लेन&#039; (Sea Lanes) की सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दिखाते हैं.</p>
<p><strong>हिंद महासागर से ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच</strong><br />
उधर, भारत ने मध्य हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में भी भारतीय नौसेना ने अपनी कूटनीति जारी रखी. आईएनएस शारदा और आईएनएस सागरध्वनि ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में मालदीव का दौरा किया.</p>
<p>इसी दौरान आईएनएस सुनयना और संकल्प मॉरीशस पहुंचे. आईएनएस त्रिकंड और संकल्प ने मार्च 2026 तक सेशेल्स में अपनी उपस्थिति बनाए रखी. सबसे महत्वपूर्ण तैनाती मार्च 2026 में आईएनएस नीलगिरी की रही, जिसने ऑस्ट्रेलिया के बंदरगाह पर पोर्ट कॉल किया. ये व्यापक विस्तार भारत की वैश्विक समुद्री भूमिका और सुरक्षा नेटवर्क को और ज्यादा प्रभावी बनाते हैं.</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/indias-roar-across-the-seas-navy-demonstrates-prowess-from-australia-to-france-bolstering-presence-on-strategic-fronts/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>समंदर में बढ़ेगी भारत की धाक,नौसेना को मिला स्वदेशी वारशिप मालवन, जानें क्यों है यह पनडुब्बियों का काल</title>
		<link>https://newsx24.com/indias-maritime-prowess-set-to-soar-navy-inducts-indigenous-warship-malvan-discover-why-it-is-the-ultimate-submarine-hunter/</link>
					<comments>https://newsx24.com/indias-maritime-prowess-set-to-soar-navy-inducts-indigenous-warship-malvan-discover-why-it-is-the-ultimate-submarine-hunter/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 17:16:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Navy]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/indias-maritime-prowess-set-to-soar-navy-inducts-indigenous-warship-malvan-discover-why-it-is-the-ultimate-submarine-hunter/</guid>

					<description><![CDATA[नई दिल्ली भारतीय नौसेना को दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शिप &#039;मालवन&#039; सौंप दिया गया है। 80% स्वदेशी तकनीक से बना यह जंगी जहाज दुश्मनों की पनडुब्बियों को नेस्तनाबूद करने में सक्षम है। जानें इसकी ताकत और खासियतें। पनडुब्बियों का काल, पानी में छिपकर करेगा वार! नेवी को मिला समंदर का नया सिकंदर &#039;मालवन&#039; भारतीय नौसेना की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
भारतीय नौसेना को दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शिप &#039;मालवन&#039; सौंप दिया गया है। 80% स्वदेशी तकनीक से बना यह जंगी जहाज दुश्मनों की पनडुब्बियों को नेस्तनाबूद करने में सक्षम है। जानें इसकी ताकत और खासियतें।</p>
<p><strong>पनडुब्बियों का काल, पानी में छिपकर करेगा वार! नेवी को मिला समंदर का नया सिकंदर &#039;मालवन&#039;</strong><br />
भारतीय नौसेना की ताकत और तटीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए 31 मार्च, 2026 को &#039;मालवन&#039; नामक पनडुब्बी रोधी युद्धक शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) नौसेना को सौंप दिया गया है। यह देश में स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने वाली &#039;आत्मनिर्भर भारत&#039; पहल के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस युद्धपोत का निर्माण कोच्चि स्थित &#039;कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड&#039; (CSL) द्वारा किया गया है।</p>
<p>नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किए जा रहे आठ विशेष युद्धपोतों की श्रृंखला में &#039;मालवन&#039; दूसरा जहाज है। अधिकारियों के अनुसार, इस जहाज के शामिल होने से भारत की तटीय रक्षा और पानी के भीतर युद्ध (अंडरवाटर वारफेयर) करने की क्षमताओं में भारी वृद्धि होगी।</p>
<p><strong>शिवाजी महाराज की विरासत</strong><br />
इस युद्धपोत का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखा गया है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज की गौरवशाली समुद्री विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह नाम भारतीय नौसेना के पूर्व जहाज &#039;आईएनएस मालवन&#039; की विरासत को भी आगे बढ़ाता है, जो एक माइनस्वीपर था और जिसने वर्ष 2003 तक नौसेना में अपनी सेवाएं दी थीं।</p>
<p><strong>प्रमुख विशेषताएं और तकनीकी क्षमताएं</strong><br />
इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो रक्षा उत्पादन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) सहित घरेलू उद्योग की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इसकी लंबाई लगभग 80 मीटर है और इसका विस्थापन करीब 1,100 टन है। यह उन्नत &#039;वाटरजेट प्रोपल्शन&#039; प्रणाली द्वारा संचालित होता है।</p>
<p><strong>हथियार और सेंसर</strong><br />
यह आधुनिक रडार, सोनार सिस्टम, टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट से लैस है। यह पानी के भीतर छिपे खतरों का सटीक पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में पूरी तरह सक्षम है। यह जहाज तटीय जल में पनडुब्बी रोधी अभियानों, अंडरवाटर सर्विलांस (निगरानी), कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन और खदान युद्ध (माइन वारफेयर) मिशनों को अंजाम देने में माहिर है।</p>
<p><strong>&nbsp;मेक इन इंडिया के तहत एक और बड़ा रक्षा सौदा</strong></p>
<p>स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ावा देने के इस व्यापक अभियान के बीच, रक्षा मंत्रालय ने एक और बड़ा कदम उठाया है। &#039;मेक इन इंडिया&#039; कार्यक्रम को और गति देते हुए, मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए दो माउंटेन रडार की खरीद हेतु &#039;भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड&#039; (BEL) के साथ लगभग 1,950 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/indias-maritime-prowess-set-to-soar-navy-inducts-indigenous-warship-malvan-discover-why-it-is-the-ultimate-submarine-hunter/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
