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	<title>Jagannath Temple &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>जगन्नाथ मंदिर के रहस्य, जिन्हें विज्ञान भी आज तक नहीं समझ पाया</title>
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		<pubDate>Mon, 13 Jul 2026 09:42:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Jagannath Temple]]></category>
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					<description><![CDATA[हिंदू धर्म में ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर को बैकुंठ धाम माना गया है. हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. इस बार जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई, गुरुवार को शुरू होगी. इस मंदिर और रथ यात्रा से जुड़े &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हिंदू धर्म में ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर को बैकुंठ धाम माना गया है. हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. इस बार जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई, गुरुवार को शुरू होगी. इस मंदिर और रथ यात्रा से जुड़े कई ऐसे चमत्कार और रहस्य हैं, जिनका जवाब आज के आधुनिक विज्ञान और तकनीक के पास भी नहीं है. आइए जानते हैं महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की इस रथ यात्रा और मंदिर से जुड़े वो अनसुने रहस्य, जो आज भी वैज्ञानिकों को हैरान करते हैं.</p>
<p><strong>मूर्तियों का अधूरा रहने का रहस्य</strong><br />
जगन्नाथ मंदिर में स्थापित मूर्तियां अन्य हिंदू मंदिरों की तरह पत्थर या धातु की नहीं, बल्कि नीम की लकड़ी (दारु) से बनी हैं और ये अधूरी हैं. इनके हाथ-पैर नहीं हैं. इसके पीछे एक बेहद भावुक पौराणिक कथा है.</p>
<p>कथा के मुताबिक, राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान विष्णु की मूर्ति बनाने के लिए देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा जी से प्रार्थना की. विश्वकर्मा जी एक वृद्ध मूर्तिकार के रूप में प्रकट हुए और एक शर्त रखी कि वे बंद कमरे में मूर्ति बनाएंगे और जब तक मूर्तियां पूरी नहीं हो जातीं, कोई कमरे का दरवाजा नहीं खोलेगा. कई दिनों तक कमरे से कोई आवाज नहीं आई, तो रानी गुंडिचा को चिंता हुई कि वृद्ध मूर्तिकार भूख-प्यास से मर न गया हो. राजा ने रानी के कहने पर दरवाजा खुलवा दिया. शर्त टूटने के कारण विश्वकर्मा जी अंतर्ध्यान हो गए और मूर्तियां वैसी ही अधूरी रह गईं. तब आकाशवाणी हुई कि भगवान इसी रूप में धरती पर रहना चाहते हैं, और तब से आज तक भगवान जगन्नाथ इसी अधूरे लेकिन अत्यंत मनमोहक रूप में पूजे जाते हैं.</p>
<p><strong>मंदिर के शिखर पर हवा के विपरीत लहराता ध्वज</strong><br />
यह एक ऐसा भौतिक विज्ञान का नियम है जिसे जगन्नाथ मंदिर पूरी तरह चुनौती देता है. आमतौर पर हवा जिस दिशा में चलती है, कपड़ा या झंडा उसी दिशा में लहराता है. जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा लाल रंग का ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है. ऐसा क्यों होता है, इसका रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया.</p>
<p>इस 45 मंजिला ऊंची इमारत के शिखर पर स्थित ध्वज को हर दिन एक पुजारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उल्टा चढ़कर बदलता है. मान्यता है कि अगर एक दिन भी ध्वज नहीं बदला गया, तो मंदिर अगले 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा.</p>
<p><strong>सुदर्शन चक्र की अनोखी बनावट</strong><br />
मंदिर के शिखर पर अष्टधातु से बना एक भव्य सुदर्शन चक्र स्थापित है, जिसे नीलचक्र भी कहा जाता है. आप पुरी के किसी भी कोने में खड़े होकर जब इस चक्र को देखेंगे, तो इसका मुख हमेशा आपकी तरफ ही दिखाई देगा. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि हर दिशा से यह आपके सामने नजर आता है.</p>
<p><strong>समुद्र की लहरों की आवाज का गायब होना</strong><br />
पुरी का मंदिर समुद्र के बिल्कुल किनारे स्थित है, इसलिए बाहर लहरों की बहुत तेज आवाज आती है. जैसे ही आप मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार यानी सिंहद्वार के अंदर अपना पहला कदम रखते हैं, समुद्र की लहरों की आवाज पूरी तरह से गायब हो जाती है. आप मंदिर के अंदर कदम रखते ही एक अजीब सी शांति महसूस करेंगे. लेकिन जैसे ही आप सिंहद्वार से एक कदम बाहर आएंगे, लहरों का शोर फिर से सुनाई देने लगेगा.</p>
<p><strong>पक्षी और विमान का न उड़ना</strong><br />
आज के समय में दुनिया की गगनचुंबी इमारतों या एयरपोट्स के पास से पक्षियों और विमानों का गुजरना आम बात है. जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से आज तक न तो कोई पक्षी उड़ता हुआ देखा गया है और न ही कोई हवाई जहाज या हेलिकॉप्टर इसके ऊपर से गुजरता है. यह मंदिर प्राकृतिक रूप से एक नो-फ्लाई जोन बना हुआ है.</p>
<p><strong>दुनिया की सबसे बड़ी रसोई और प्रसाद का रहस्य</strong><br />
जगन्नाथ मंदिर की रसोई में भगवान का महाप्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के 7 बर्तनों को एक के ऊपर एक रखा जाता है. चूल्हे पर रखे इन 7 बर्तनों में से सबसे ऊपर वाले बर्तन का खाना सबसे पहले पकता है, उसके बाद उसके नीचे वाले का, और सबसे अंत में सबसे नीचे वाले बर्तन का खाना पकता है जो सीधे आग के संपर्क में होता है.</p>
<p>मंदिर में हर दिन हजारों-लाखों भक्त आते हैं, लेकिन यहां का प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता. मंदिर बंद होने के समय पर प्रसाद अपने आप पूरा खत्म हो जाता है, अन्न का एक भी दाना व्यर्थ नहीं जाता.</p>
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		<title>आस्था और रहस्य से घिरा पुरी का जगन्नाथ मंदिर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 09:57:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Jagannath Temple]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर एक बार फिर चर्चा में है. कारण है उसका रत्न भंडार. मंदिर के रत्न भंडार की जांच शुरू हो गई है, जिसकी जांच अलग-अलग चरणों में की जा रही है और इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. इस विशेष खोज के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर एक बार फिर चर्चा में है. कारण है उसका रत्न भंडार. मंदिर के रत्न भंडार की जांच शुरू हो गई है, जिसकी जांच अलग-अलग चरणों में की जा रही है और इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. इस विशेष खोज के बाद मंदिर से जुड़े रहस्य और भी गहरे हो गए हैं.</p>
<p><strong>जगन्नाथ मंदिर की पौराणिक मान्यता</strong><br />
पुरी का प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर हर साल से हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है. यह भारत के चार धामों में से एक माना जाता है और अपनी भव्य रथ यात्रा के लिए खास पहचान रखता है. मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान विष्णु के आशीर्वाद के बाद कराया था. कहा जाता है कि भगवान ने उन्हें स्वप्न में नील माधव को खोजने का आदेश दिया था.</p>
<p>एक और कथा के मुताबिक, जब पांडव यमराज की ओर अपनी अंतिम यात्रा पर निकले, तो सप्त ऋषियों ने उन्हें मोक्ष के करीब पहुंचने के लिए चार धाम की यात्रा करने की सलाह दी थी. पुरी का जगन्नाथ मंदिर इन्हीं पवित्र धामों में शामिल है. तब से इस मंदिर की कई परंपराएं आज भी वैसी ही चली आ रही हैं, जिनमें भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा से जुड़ी कुछ खास मान्यताएं भी शामिल हैं. इसके अलावा, यह मंदिर कई ऐसी बातों के लिए भी जाना जाता है, जो सामान्य वैज्ञानिक तर्कों से परे मानी जाती हैं. आखिर ये रहस्य क्या हैं, आइए जानते हैं.</p>
<p><strong>लाल झंडे का रहस्य</strong><br />
मंदिर के ऊपर हमेशा एक लाल झंडा लहराता रहता है. यह आम बात लग सकती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह झंडा हवा के उल्टी दिशा में लहराता है. हर बार ऐसा ही होता है. कई लोग इसे भगवान का संकेत मानते हैं, जैसे वह बता रहे हों कि उन्हें पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं है. इसके साथ ही एक खास परंपरा भी जुड़ी है. हर दिन एक पुजारी करीब 200 फीट ऊंचे मंदिर पर बिना किसी सुरक्षा के चढ़कर इस झंडे को बदलता है. मान्यता है कि अगर किसी दिन यह परंपरा नहीं निभाई गई, तो मंदिर कई सालों तक बंद रह सकता है.</p>
<p><strong>समुद्र की आवाज जो अंदर जाते ही गायब हो जाती है</strong><br />
जगन्नाथ मंदिर समुद्र से करीब 2 किलोमीटर दूर है. लेकिन हैरानी की बात ये है कि जैसे ही आप मंदिर के मुख्य द्वार के अंदर कदम रखते हैं, समुद्र की लहरों की आवाज बिल्कुल सुनाई नहीं देती. बाहर आते ही फिर वही आवाज सुनाई देने लगती है. इसलिए लोग कहते हैं कि ये सिर्फ मंदिर नहीं, एक अलग अनुभव है. मान्यता है कि भगवान हनुमान को मंदिर की रक्षा के लिए रखा गया था और उन्होंने ही समुद्र की आवाज को रोक दिया, ताकि भगवान जगन्नाथ शांतिपूर्वक विश्राम कर सकें.</p>
<p><strong>प्रसाद का अनोखा तरीका</strong><br />
यहां रोज भगवान का प्रसाद सात मिट्टी के बर्तनों में एक के ऊपर एक रखकर पकाया जाता है. आमतौर पर नीचे वाला बर्तन पहले पकना चाहिए, लेकिन यहां उल्टा होता है- सबसे ऊपर वाला बर्तन पहले तैयार हो जाता है. इतना ही नहीं, जितने भी लोग दर्शन के लिए आते हैं, प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न ही बचता है. हर दिन बिल्कुल सही मात्रा में ही बनता है.</p>
<p><strong>मंदिर की परछाई नहीं पड़ती</strong><br />
कहा जाता है कि इस मंदिर की बनावट ऐसी है कि दिन के किसी भी समय इसकी छाया दिखाई नहीं देती. यह बात लोगों को आज भी हैरान करती है.</p>
<p><strong>लकड़ी की मूर्तियां, जो हैं सबसे अलग</strong><br />
जगन्नाथ मंदिर की एक और खास बात है यहां की मूर्तियां. जहां ज्यादातर मंदिरों में भगवान की मूर्तियां पत्थर या धातु की होती हैं. यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनी होती हैं. और सबसे अनोखी बात यह है कि इन मूर्तियों को हर 12 से 19 साल में एक खास और गुप्त प्रक्रिया के तहत बदला जाता है, जिसे नवकलेवर कहा जाता है. मान्यता है कि इस दौरान एक रहस्यमयी तत्व, जिसे ब्रह्म पदार्थ कहा जाता है. पुरानी मूर्ति से नई मूर्ति में स्थानांतरित किया जाता है. इस प्रक्रिया को केवल कुछ चुनिंदा पुजारी ही देख सकते हैं, बाकी सब कुछ आज भी रहस्य बना हुआ है.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जगन्नाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 12:16:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Minister Vishnu Deo Sai]]></category>
		<category><![CDATA[Jagannath Temple]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय&#160; आज राजधानी रायपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुँचकर भगवान जगन्नाथ महाप्रभु की भव्य महाआरती में शामिल हुए और विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि और श्रद्धालुजन उपस्थित थे।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायपुर</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री विष्णु देव साय&nbsp; आज राजधानी रायपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुँचकर भगवान जगन्नाथ महाप्रभु की भव्य महाआरती में शामिल हुए और विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की।</p>
<p>इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि और श्रद्धालुजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>जमशेदपुर में 100 करोड़ से बनेगा श्री जगन्नाथ मंदिर, राष्ट्रपति 26 फरवरी को करेंगी शिलान्यास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 10:56:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिहार/झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Jagannath Temple]]></category>
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					<description><![CDATA[जमशेदपुर. श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चर चैरिटेबल सेंटर की ओर से मरीन ड्राइव क्षेत्र में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से भव्य श्री जगन्नाथ मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इस मंदिर का शिलान्यास 26 फरवरी को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा किया जाएगा। उक्त जानकारी ट्रस्ट के चेयरमैन सह आरसीबी ग्रुप इंटरनेशनल के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जमशेदपुर.</strong></p>
<p>श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चर चैरिटेबल सेंटर की ओर से मरीन ड्राइव क्षेत्र में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से भव्य श्री जगन्नाथ मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इस मंदिर का शिलान्यास 26 फरवरी को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा किया जाएगा। उक्त जानकारी ट्रस्ट के चेयरमैन सह आरसीबी ग्रुप इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक एसके बेहरा ने आयोजन स्थल पर मंगलवार दोपहर प्रेस वार्ता में दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि यह भव्य मंदिर लगभग ढाई एकड़ भूमि पर बनेगा। इसमें डेढ़ एकड़ क्षेत्र में मुख्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जबकि एक एकड़ भूमि पर आध्यात्मिक केंद्र का निर्माण होगा। मंदिर की संरचना उड़ीसा के श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी की तर्ज पर की जाएगी, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा सहित सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित होंगी। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण कार्य लगभग चार वर्षों में पूर्ण होगा, जबकि आध्यात्मिक केंद्र दो वर्षों में तैयार हो जाएगा। आध्यात्मिक केंद्र का मुख्य उद्देश्य युवाओं का सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास करना है। इसके तहत गीता और भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को जीवन मूल्यों की शिक्षा दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस मंदिर से 200 से 250 किलोमीटर के दायरे में स्थित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को यहां 25-15 दिनों मर आमंत्रित किया जाएगा, ताकि उनके भीतर नैतिकता, अनुशासन और आत्मबल का विकास हो सके। उद्देश्य यह है कि युवा जीवन में आने वाली कठिनाइयों का साहसपूर्वक सामना कर सकें और समाज के लिए जिम्मेदार नागरिक बनें। शिलान्यास समारोह में राष्ट्रपति के अलावा झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति भी रहेगी। कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी देते हुए बताया गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दोपहर 12:20 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगी और 1:20 बजे अपने संबोधन के पश्चात रवाना होंगी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए भोग-प्रसाद की भी विशेष व्यवस्था की गई है।</p>
<p>ट्रस्ट पदाधिकारियों ने कहा कि यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि जमशेदपुर को एक नई आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी देगा। आने वाले समय में यह स्थल देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।</p>
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