<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>National Education Policy &#8211; NewsX 24</title>
	<atom:link href="https://newsx24.com/tag/national-education-policy/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://newsx24.com</link>
	<description></description>
	<lastBuildDate>Tue, 30 Jun 2026 18:06:00 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://newsx24.com/wp-content/uploads/2026/02/cropped-ChatGPT-Image-Feb-18-2026-11_44_21-PM-32x32.png</url>
	<title>National Education Policy &#8211; NewsX 24</title>
	<link>https://newsx24.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>राष्ट्रीय शिक्षा नीति से उच्च शिक्षा में भारतीयता का होगा नवोदय: राज्यपाल  पटेल</title>
		<link>https://newsx24.com/the-national-education-policy-will-foster-a-resurgence-of-indianness-in-higher-education-governor-patel/</link>
					<comments>https://newsx24.com/the-national-education-policy-will-foster-a-resurgence-of-indianness-in-higher-education-governor-patel/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Jun 2026 18:06:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[National Education Policy]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/the-national-education-policy-will-foster-a-resurgence-of-indianness-in-higher-education-governor-patel/</guid>

					<description><![CDATA[भोपाल&#160; राज्यपाल&#160; मंगुभाई पटेल ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में भारतीयता का समावेश विकसित भारत की सुदृढ़ आधारशिला है। भारतीय संस्कृति, संस्कार और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>भोपाल&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align:justify">राज्यपाल&nbsp; मंगुभाई पटेल ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में भारतीयता का समावेश विकसित भारत की सुदृढ़ आधारशिला है। भारतीय संस्कृति, संस्कार और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन से आत्मनिर्भर, संस्कारित और विकसित भारत का निर्माण होगा।</p>
<p style="text-align:justify">राज्यपाल&nbsp; पटेल मंगलवार को उज्जैन की कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में पीएचडी की 21 उपाधियों के साथ ही कुल 1 हजार 303 उपाधियां प्रदान की गई। विद्यार्थियों को 16 स्वर्ण पदक, 13 रजत पदक तथा 13 कांस्य पदक, कुल 42 पदक प्रदान किए गए। राज्यपाल&nbsp; पटेल ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित विभिन्न पुस्तकों का विमोचन किया।</p>
<p style="text-align:justify">राज्यपाल&nbsp; पटेल ने कहा कि प्राचीन काल में शिक्षा का केन्द्र हमारा देश था। विदेशों से अध्ययन के लिए विद्यार्थी आते थे। आज हमारे बच्चे विदेश जा रहे है। प्रधानमंत्री&nbsp; नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा से विकसित भारत @2047 बनाने की पहल की है। विकसित भारत में बच्चों को शिक्षा के लिए विदेश नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपेक्षा है कि संस्कृत की पहचान विश्व में स्थापित करने की दिशा में प्रभावी पहल करें क्योंकि अच्छे संस्कारों के अंकुरण से ही संस्कृति का रक्षण संभव है। आज की पीढ़ी को संस्कृत और परंपराओं के ज्ञान की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्राचीन ज्ञान का बोध संस्कृत के माध्यम से ही संभव हो सकता है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महान ग्रंथों के अध्ययन के लिए बच्चों को प्रेरित और संस्कारित आचरण की वैज्ञानिकता के बारे में बताने की भी जरूरत बताई है।</p>
<p style="text-align:justify">राज्यपाल&nbsp; पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में सफलता के बाद भी अपने माता-पिता को कभी नहीं भूलें, क्योंकि उनकी बदौलत ही हमारा जीवन है। राज्यपाल&nbsp; पटेल ने माता-पिता के प्रति सम्मान, भारतीय परंपराओं के प्रति आस्था तथा चरित्र निर्माण को जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज घरों में &lsquo;मातृ छाया&rsquo; और &lsquo;पितृ छाया&rsquo; लिखा तो होता है, लेकिन घरों में बुजुर्ग माता-पिता नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कारों से ही संस्कृति सुरक्षित रहती है। संस्कृति संरक्षण से ही भारत को विकसित बनाने का स्वप्न साकार होगा।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>भारत होगा दुनिया को उर्जा की पूर्ति करने वाला केंद्र</strong></p>
<p style="text-align:justify">उच्च शिक्षा मंत्री&nbsp; इंदर सिंह परमार ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और मान्यताओं को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति की वैज्ञानिकता को समझा था। उदाहरण देते हुए बताया कि सौर मंडल में सूर्य की शक्ति की वैज्ञानिकता का प्रतीक सूर्य देव को प्रणाम करने और अर्ध्य देने की परंपराएं है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में उर्जा को लेकर विवाद हो रहा है। वर्ष 2047 तक भारत दुनिया की उर्जा पूर्ति का केन्द्र और विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा में शामिल करने में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है।</p>
<p style="text-align:justify">समारोह में महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठानम् पुणे के संस्थापक स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज को महामहोपाध्याय (डी.लिट.) और&nbsp; लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को विद्यावाचस्पति (डी.लिट.)की मानद उपाधि प्रदान की गई।</p>
<p style="text-align:justify">कार्यक्रम में दीक्षांत भाषण सारस्वत अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति निवास वरखेड़ी ने दिया। कार्यक्रम को स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने भी संबोधित किया। कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र ने स्वागत भाषण देते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियां बताई। समारोह का संचालन डॉ. उपेंद्र भार्गव ने किया और आभार कुल सचिव डॉ. दिलीप सोनी ने माना।</p>
<p style="text-align:justify">समारोह के प्रारंभ में अकादमिक शोभायात्रा निकाली गई। राष्ट्रगान, विश्वविद्यालय कुलगान का गायन हुआ। राज्यपाल सहित सभी अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।</p>
<p style="text-align:justify">दीक्षांत समारोह में सांसद&nbsp; अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी संत&nbsp; उमेश नाथ महाराज, विधायक&nbsp; अनिल जैन कालूहेडा, कार्य परिषद् के सदस्य&nbsp; गौरव धाकड़, डॉ. विश्वास व्यास, डॉ. हरीश व्यास, एडवोकेट गीतांजलि चौरसिया, डॉ. केशर सिंह चौहान एवं विश्वविद्यालय के समस्त संकायाध्यक्ष और विद्यार्थी उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/the-national-education-policy-will-foster-a-resurgence-of-indianness-in-higher-education-governor-patel/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>यूपी में प्री-प्राइमरी शिक्षा को नई दिशा, आंगनबाड़ी-बालवाटिका में मिलेगा आधुनिक लर्निंग सिस्टम</title>
		<link>https://newsx24.com/a-new-direction-for-pre-primary-education-in-up-anganwadis-and-balvatikas-to-feature-modern-learning-systems/</link>
					<comments>https://newsx24.com/a-new-direction-for-pre-primary-education-in-up-anganwadis-and-balvatikas-to-feature-modern-learning-systems/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 16:21:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[National Education Policy]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newsx24.com/a-new-direction-for-pre-primary-education-in-up-anganwadis-and-balvatikas-to-feature-modern-learning-systems/</guid>

					<description><![CDATA[&#160;लखनऊ &#160;उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के बाद अब प्री-प्राइमरी शिक्षा के ढांचे को भी जड़ से मजबूत करने में जुट गई है। राज्य के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल और गतिविधि आधारित आधुनिक शिक्षण सामग्री का वितरण &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;लखनऊ</strong></p>
<p>&nbsp;उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के बाद अब प्री-प्राइमरी शिक्षा के ढांचे को भी जड़ से मजबूत करने में जुट गई है। राज्य के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल और गतिविधि आधारित आधुनिक शिक्षण सामग्री का वितरण शुरू कर दिया गया है। &lsquo;चहक-1, 2, 3&rsquo;, &lsquo;कदम&rsquo;, &lsquo;कलांकुर&rsquo;, और &#039;बिग बुक&#039; जैसी विशेष तौर पर तैयार सामग्रियों के माध्यम से अब प्रदेश के लाखों नौनिहालों को उनकी शुरुआती शिक्षा का एक नया, रचनात्मक और बेहतर माहौल मिलने जा रहा है।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के विजन को मिली गति</strong><br />
योगी सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसके तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को बच्चों के सीखने की मुख्य बुनियाद माना गया है। उत्तर प्रदेश में अब आंगनबाड़ी केंद्रों को सिर्फ पोषण और बुनियादी देखभाल तक सीमित न रखकर, उन्हें आधुनिक और गतिविधि आधारित शिक्षा के जीवंत केंद्रों के रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है</p>
<p><strong>&#039;चहक&#039; और &#039;कलांकुर&#039; से निखरेगी बच्चों की रचनात्मकता</strong><br />
विशेषज्ञों के अनुसार, 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास के लिए सबसे संवेदनशील समय होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए &#039;चहक&#039; श्रृंखला की पुस्तिकाएं बच्चों में भाषा के विकास और बुनियादी दक्षताओं को बढ़ाएंगी, जबकि &lsquo;कदम&rsquo; और &lsquo;कलांकुर&rsquo; जैसी सामग्री उनकी सोच, जिज्ञासा और रचनात्मकता को नई उड़ान देगी। इसके साथ ही, बड़ी तस्वीरों वाली &#039;बिग बुक&#039; और &#039;टीचर गाइड&#039; के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी शिक्षण की आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा।</p>
<p><strong>किताब वितरण ऐप&#039; से होगी डिजिटल मॉनिटरिंग</strong><br />
पूरी वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए योगी सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है। इस अभियान के तहत सामग्री के वितरण की रीयल-टाइम निगरानी के लिए &lsquo;किताब वितरण ऐप&rsquo; लागू किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) से लेकर डायट मेंटर्स और प्रधानाध्यापकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे सीधे शासन स्तर पर यह ट्रैक किया जा सके कि किस बालवाटिका तक सामग्री पहुंच चुकी है।</p>
<p><strong>प्री-प्राइमरी शिक्षा को मिला नया संस्थागत स्वरूप</strong><br />
उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है जब प्री-प्राइमरी शिक्षा को इतने व्यापक पैमाने पर एक मजबूत संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। पहले जहाँ सरकारी तंत्र का पूरा ध्यान केवल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर केंद्रित रहता था, वहीं अब बच्चों की शुरुआती नींव को मजबूत करने पर समान प्राथमिकता दी जा रही है। &#039;ऑपरेशन कायाकल्प&#039; और &#039;निपुण भारत&#039; जैसी बड़ी योजनाओं की सफलता के बाद, प्री-प्राइमरी स्तर पर किया जा रहा यह सुधार आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को देश के शिक्षा मॉडल में सबसे आगे खड़ा कर सकता है।</p>
<p>कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह कदम ग्रामीण और वंचित परिवारों के बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जिन्हें अब निजी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बचपन में ही आधुनिक और रचनात्मक शिक्षा का अधिकार मिल रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://newsx24.com/a-new-direction-for-pre-primary-education-in-up-anganwadis-and-balvatikas-to-feature-modern-learning-systems/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
