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	<title>Nepal &#8211; NewsX 24</title>
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	<title>Nepal &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>नेपाल में बालेन सरकार के बुलडोजर एक्शन से बढ़ी चिंता, भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 May 2026 16:02:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गोरखपुर &#160;नेपाल में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और सरकारी जमीनों पर कब्जे के खिलाफ चल रहे बुलडोजर अभियान के बाद भारत-नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।&#160; उत्तर प्रदेश पुलिस की अभिसूचना इकाई नेपाल बार्डर (एनबी) शाखा की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि नेपाल में बढ़ते दबाव और कार्रवाई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गोरखपुर</strong><br />
&nbsp;नेपाल में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और सरकारी जमीनों पर कब्जे के खिलाफ चल रहे बुलडोजर अभियान के बाद भारत-नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।&nbsp;</p>
<p>उत्तर प्रदेश पुलिस की अभिसूचना इकाई नेपाल बार्डर (एनबी) शाखा की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि नेपाल में बढ़ते दबाव और कार्रवाई के चलते वहां रह रहे रोहिंग्या मुसलमान रोजगार और शरण के लिए अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर सकते हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल सरकार पूरे देश में अवैध निर्माण, झुग्गी-झोपड़ियों और सरकारी जमीनों पर कब्जों के खिलाफ अभियान चला रही है। इस कार्रवाई के तहत बुलडोजर से ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। नेपाली सेना ने भी संबंधित निकायों से अवैध बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों का विस्तृत आंकड़ा मांगा है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि काठमांडू के कपन क्षेत्र समेत नेपाल के विभिन्न हिस्सों में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हिंदूवादी संगठनों द्वारा नेपाल में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की बस्तियों को हटाने की मांग की जा रही है।</p>
<p>नेपाल सरकार की कार्रवाई, सेना के डाटा संकलन और हिंदूवादी संगठनों के विरोध के कारण रोहिंग्या के सामने रोजगार, आवास और आजीविका का संकट गहराने लगा है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश रोहिंग्या मुसलमान उर्दू के साथ नेपाली भाषा भी सीख चुके हैं। कई लोगों द्वारा अवैध तरीके से पहचान पत्र बनवाने की जानकारी भी सामने आई है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यही वजह है कि सीमावर्ती इलाकों में उनकी पहचान कर पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।</p>
<p>नेपाल में बलरामपुर जिले की सीमा से सटे गढ़वा गांव पालिका के कोईलावास वार्ड नंबर-8 में अवैध बस्तियों का चिन्हांकन भी शुरू कर दिया गया है।वहां के वर्तमान प्रधान अब्दुल खालिक सिद्दीकी इस कार्रवाई का विरोध कर रहा है और अवैध रुप से रहने वालों को कानूनी अधिकार व जमीन के दस्तावेज देने की मांग कर रहा है।</p>
<p>खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि नेपाल में प्रतिकूल हालात बनने पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी सीमावर्ती रास्तों का इस्तेमाल कर भारतीय सीमा में प्रवेश की कोशिश कर सकते हैं।</p>
<p>इसी को देखते हुए सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और खुफिया नेटवर्क को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>नेपाल की नई सरकार ने तोड़ी पुरानी परंपरा, सैलरी सिस्टम में बदलाव से कर्मचारियों को मिलेगा फायदा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 10:22:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Nepal]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[काठमांडू&#160; नेपाल सरकार ने एक बड़ा और अलग फैसला लिया है, जिसके तहत अब सरकारी कर्मचारियों को हर महीने की बजाय हर 15 दिन में सैलरी दी जाएगी। Nepal में यह पहली बार होगा जब सैलरी का भुगतान महीने में दो बार (फोर्टनाइटली) किया जाएगा। यह फैसला 17 अप्रैल को वित्त मंत्रालय स्तर पर लिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>काठमांडू&nbsp;</strong></p>
<p>नेपाल सरकार ने एक बड़ा और अलग फैसला लिया है, जिसके तहत अब सरकारी कर्मचारियों को हर महीने की बजाय हर 15 दिन में सैलरी दी जाएगी। Nepal में यह पहली बार होगा जब सैलरी का भुगतान महीने में दो बार (फोर्टनाइटली) किया जाएगा। यह फैसला 17 अप्रैल को वित्त मंत्रालय स्तर पर लिया गया और इसे लागू करने के लिए संबंधित सरकारी विभागों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था पूरी तरह से कब से लागू होगी। सरकार का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, अगर कर्मचारियों को बार-बार पैसे मिलेंगे तो वे नियमित रूप से खर्च करेंगे, जिससे बाजार में पैसा तेजी से घूमेगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। दुनिया के ज्यादातर देशों में, खासकर दक्षिण एशिया में, सरकारी कर्मचारियों को मासिक सैलरी ही दी जाती है। India, Pakistan, Bangladesh, Bhutan, Sri Lanka और Maldives में अभी भी महीने में एक बार सैलरी देने की परंपरा है। हालांकि, इस नए फैसले को लागू करने में कुछ कानूनी अड़चनें आ सकती हैं। नेपाल के मौजूदा कानून के अनुसार सरकारी कर्मचारियों को हर महीने के अंत में सैलरी देने का प्रावधान है। इसलिए इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए कानून में बदलाव करना पड़ सकता है।&nbsp;</p>
<p>फाइनेंशियल कंट्रोलर जनरल ऑफिस के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी रूप से सैलरी हर 15 दिन में देना संभव है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा। सरकार इस पर विचार कर रही है कि अध्यादेश (Ordinance) लाकर इसे जल्दी लागू किया जाए। कुल मिलाकर, नेपाल का यह फैसला आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।</p>
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		<title>नेपाल में बालेन युग की शुरुआत! बालेंद्र शाह ने &#8217;12:34&#8242; के शुभ मुहूर्त में ली प्रधानमंत्री पद की शपथ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:02:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Nepal]]></category>
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					<description><![CDATA[काठमांडू&#160; आज, 27 मार्च 2026 से नेपाल में &#039;बालेन&#039; युग की शुरुआत हो गई है। काठमांडू के पूर्व मेयर और &#039;रैपर&#039; से राजनेता बने बालेन शाह (बालेंद्र शाह) ने नेपाल के 40वें और देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। 35 वर्षीय बालेन ने अपनी पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलाकर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>काठमांडू&nbsp;</strong><br />
आज, 27 मार्च 2026 से नेपाल में &#039;बालेन&#039; युग की शुरुआत हो गई है। काठमांडू के पूर्व मेयर और &#039;रैपर&#039; से राजनेता बने बालेन शाह (बालेंद्र <strong>शाह) ने नेपाल के 40वें और देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। 35 वर्षीय बालेन ने अपनी पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलाकर नेपाल के पुराने राजनीतिक घरानों और पारंपरिक दलों के वर्चस्व को खत्म कर दिया था।</strong></p>
<p><strong>शपथ ग्रहण समारोह और &#039;12:34&#039; का शुभ मुहूर्त</strong><br />
राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल द्वारा काठमांडू स्थित राष्ट्रपति भवन &#039;शीतल निवास&#039; में बालेन शाह को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण के लिए आज दोपहर 12:34 बजे का समय चुना गया था। हिंदू ज्योतिष और पंडितों के अनुसार यह समय बेहद शुभ माना गया और साथ ही यह &#039;1-2-3-4&#039; का एक अनूठा अंकगणितीय पैटर्न भी बनाता है। इसके बाद वह दोपहर 14:15 बजे (14-15 पैटर्न) अपना कार्यभार संभालेंगे।</p>
<p>बालेन शाह नेपाल के शीर्ष कार्यकारी पद पर पहुंचने वाले मधेश मूल के पहले व्यक्ति भी बन गए हैं। इस समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ-साथ बौद्ध लामाओं की प्रार्थनाएं भी शामिल की गई हैं।</p>
<p><strong>प्रचंड बहुमत और दिग्गज नेताओं की हार</strong><br />
बालेन की &#039;राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी&#039; (RSP) ने हाल ही में हुए संसदीय चुनावों में 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 182 सीटों पर क्लीन स्वीप करते हुए दो-तिहाई के करीब बहुमत हासिल किया है। सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब बालेन शाह ने झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से नेपाल के चार बार के प्रधानमंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी (UML) के दिग्गज नेता के.पी. शर्मा ओली को भारी अंतर से हरा दिया।</p>
<p><strong>&#039;Gen Z&#039; का आंदोलन और बदलाव की लहर</strong><br />
नेपाल में सितंबर 2025 में आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर युवाओं (Gen Z) ने एक बड़ा और हिंसक आंदोलन किया था। इसके बाद हुए इस पहले आम चुनाव में युवाओं ने पुरानी राजनीतिक पार्टियों को पूरी तरह से नकार दिया। अपनी शपथ से ठीक पहले बालेन ने देश में एकता का संदेश देने के लिए &#039;जय महाकाली&#039; नामक एक रैप सॉन्ग का नया वीडियो जारी किया। सोशल मीडिया पर आते ही इसे कुछ ही घंटों में लाखों व्यूज मिल गए।</p>
<p><strong>बालेन शाह का सफर: इंजीनियरिंग से सत्ता के शीर्ष तक</strong><br />
27 अप्रैल 1990 को जन्मे बालेन पेशे से एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं। राजनीति में आने से पहले वे युवाओं के बीच एक लोकप्रिय रैपर के रूप में मशहूर थे, जो अपने गानों के जरिए सिस्टम की कमियों पर निशाना साधते थे। मई 2022 में उन्होंने काठमांडू के मेयर का चुनाव एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीता था। अपने कार्यकाल के दौरान कड़े फैसलों और अतिक्रमण हटाने की मुहिम से उन्होंने &#039;सुधारक&#039; की छवि बनाई। जनवरी 2026 में प्रधानमंत्री पद की रेस में उतरने के लिए उन्होंने मेयर पद से इस्तीफा दे दिया था।</p>
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		<item>
		<title>नेपाल चुनाव में बालेंद्र शाह ने 4 बार के पीएम ओली को हराया, RSP अगली सरकार बनाने को तैयार</title>
		<link>https://newsx24.com/balendra-shah-defeated-four-time-pm-oli-in-the-nepal-elections-with-the-rsp-poised-to-form-the-next-government/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 09:04:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Nepal]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[काठमांडू &#160;आरएसपी के बालेंद्र शाह ने शनिवार को चार बार के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को भारी अंतर से हराकर नेपाल में अगली सरकार बनाने की राह पर कदम रखा. पिछले साल पीढ़ीगत बदलाव और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मांग को लेकर हुए हिंसक &#8216;जेन जेड&#8217; प्रदर्शनों के बाद हुए पहले आम चुनाव में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>काठमांडू</strong><br />
&nbsp;आरएसपी के बालेंद्र शाह ने शनिवार को चार बार के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को भारी अंतर से हराकर नेपाल में अगली सरकार बनाने की राह पर कदम रखा. पिछले साल पीढ़ीगत बदलाव और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मांग को लेकर हुए हिंसक &lsquo;जेन जेड&rsquo; प्रदर्शनों के बाद हुए पहले आम चुनाव में उन्होंने पारंपरिक राजनीतिक दलों को करारा झटका दिया. रैपर से राजनीतिक नेता बने बालेंद्र शाह &lsquo;बालेन&rsquo;, जो राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, ने झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) &ndash; सीपीएन-यूएमएल &ndash; के अध्यक्ष ओली को लगभग 50,000 मतों के भारी अंतर से हराया।</p>
<p>निर्वाचन आयोग ने बताया कि 35 वर्षीय बालेन ने 74 वर्षीय ओली के 18,734 वोट के मुकाबले 68,348 वोट हासिल किए. रात साढ़े आठ बजे तक घोषित परिणामों के अनुसार, रवि लामिछाने द्वारा 2022 में गठित आरएसपी ने अब तक घोषित 87 सीटों के परिणाम में 70 सीट पर जीत दर्ज की है. चुनाव निकाय के आंकड़ों में कहा गया कि आरएसपी ने काठमांडू जिले की सभी 10 सीट जीतकर सूपड़ा-साफ कर दिया तथा देश भर में 52 सीट पर आगे है।</p>
<p>निर्वाचन आयोग के अनुसार, नेपाली कांग्रेस (एनसी) ने दस सीट जीतीं और नौ सीटों पर आगे है. सीपीएन (यूएमएल) ने सिर्फ तीन सीट जीतीं और आठ सीट पर आगे है. इसके आलावा नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) ने दो सीट जीतीं और पांच सीटों पर आगे है. वहीं, श्रम शक्ति पार्टी (एसएसपी) तीन सीट पर आगे है और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) ने एक सीट जीती है. जीतने वालों में एक निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल है।</p>
<p>नेपाल में 5 मार्च को हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में लगभग 60 प्रतिशत मतदान हुआ था. मतों की गिनती बृहस्पतिवार देर रात शुरू हुई और शनिवार शाम 5 बजे तक 162 निर्वाचन क्षेत्रों में गिनती जारी थी. भारत इस चुनाव पर बारीकी से नजर रख रहा था, जो राजनीतिक रूप से अस्थिर हिमालयी देश में एक स्थिर सरकार की उम्मीद कर रहा है ताकि दोनों पक्षों के बीच विकासात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सके।</p>
<p>इस बीच, ओली ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, &ldquo;बालेन बाबू, जीत के लिए बधाई.&rdquo; नेपाल पिछले 18 साल में 14 सरकार देख चुका है. ओली ने बालेन को बधाई देते हुए कहा, &ldquo;मैं कामना करता हूं कि आपका पांच साल का कार्यकाल निर्बाध, सफल हो और हार्दिक बधाई हो।</p>
<p>ओली ने 2022 की एक तस्वीर संलग्न की जिसमें वह रैपर से राजनीतिक नेता बने बालेन को तबला भेंट करते हुए दिख रहे हैं, जब बालेन ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता था. आरएसपी ने बालेंद्र शाह &lsquo;बालेन&rsquo; को प्रधानमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित किया था और मधेस के जनकपुर से अपने पहले चुनाव अभियान की शुरुआत की थी. पार्टी इस प्रांत में दूसरे दलों का सूपड़ा साफ करती दिख रही है।</p>
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		<item>
		<title>नेपाल के पशुपतिनाथ से भी अनोखी है मंदसौर की अष्टमुखी पशुपतिनाथ प्रतिमा</title>
		<link>https://newsx24.com/the-eight-faced-pashupatinath-statue-in-mandsaur-is-even-more-unique-than-the-pashupatinath-temple-in-nepal/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 10:56:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Mandsaur]]></category>
		<category><![CDATA[Nepal]]></category>
		<category><![CDATA[Pashupatinath]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;मंदसौर मंदसौर में शिवना तट पर विराजे अष्टमुखी श्री पशुपतिनाथ महादेव की प्रतिमा का सौंदर्य अपने-आप में अनूठा है। नेपाल के पशुपतिनाथ में चार मुख की मूर्ति है, जबकि मंदसौर में मूर्ति अष्टमुखी है और अभी तक ज्ञात इतिहास में यह विश्व की एकमात्र अष्टमुखी मूर्ति है। पशुपतिनाथ महादेव की मूर्ति लगभग 1500 वर्ष पुरानी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>
<strong>&nbsp;मंदसौर</strong></p>
<p>मंदसौर में शिवना तट पर विराजे अष्टमुखी श्री पशुपतिनाथ महादेव की प्रतिमा का सौंदर्य अपने-आप में अनूठा है। नेपाल के पशुपतिनाथ में चार मुख की मूर्ति है, जबकि मंदसौर में मूर्ति अष्टमुखी है और अभी तक ज्ञात इतिहास में यह विश्व की एकमात्र अष्टमुखी मूर्ति है। पशुपतिनाथ महादेव की मूर्ति लगभग 1500 वर्ष पुरानी है। और 85 बरस पहले शिवना नदी से ही निकली थी।</p>
<p>19 जून 1940 को शिवना नदी से बाहर आने के बाद 21 साल तक भगवान पशुपतिनाथ की मूर्ति नदी के तट पर ही रखी रही। मूर्ति को नदी से बाहर निकलने के बाद चैतन्य आश्रम के स्वामी प्रत्यक्षानंदजी महाराज ने 23 नवंबर 1961 को प्राण प्रतिष्ठा की। 27 नवंबर को मूर्ति का नामकरण श्री पशुपतिनाथ महादेव किया गया।</p>
<p>इसके बाद मंदिर निर्माण हुआ। सावन में यहां डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं। मुख्य आकर्षण श्रावण में पूरे माह होने वाला मनोकामना अभिषेक है। और अब तो यहां पशुपतिनाथ लोक बनने से पूरा परिसर आकर्षक बन गया है। 101 फीट ऊंचे मंदिर शिखर पर 100 किलो वजनी कलश स्थापित है जिस पर 51 तोला सोने की परत चढ़ाई गई है।</p>
<p><strong>शैव धर्म की 6 प्रमुख परंपराओं में से एक</strong><br />
मंदसौर का पशुपतिनाथ महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित हिंदू मंदिर है। यह पशुपतिनाथ परंपरा से संबंधित है जो शैव धर्म के भीतर 6 प्रमुख परंपराओं में से एक है। शिलालेखों के आधार पर मंदिर की मूर्ति 5वीं या 6ठी शताब्दी की है। प्राचीन समय में इस स्थल को दशपुर कहते थे।</p>
<p>यह मालवा के ऐतिहासिक क्षेत्र में राजस्थान की सीमा के पास इंदौर से लगभग 200 किमी, उदयगिरि गुफाओं से लगभग 340 किमी पश्चिम में और शामलाजी प्राचीन स्थलों से लगभग 220 किलोमीटर पूर्व में है। दोनों ही गुप्त साम्राज्य युग की पुरातात्विक खोजों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।</p>
<p><strong>शिवना से प्रकटे अष्टमुखी महादेव</strong><br />
माना जाता है कि प्रतिमा का निर्माण विक्रम संवत 575 ई. में सम्राट यशोधर्मन की हूणों पर विजय के आसपास का है। संभवत: मूर्ति भंजकों से रक्षा के लिए इसे शिवना नदी में दबा दिया गया था। अनुमान के अनुसार अज्ञात कलाकार ने प्रतिमा के ऊपर के चार मुख पूरी तरह बना दिए थे, जबकि नीचे के चार मुख निर्माणाधीन थे।</p>
<p>श्री पशुपतिनाथ महादेव मूर्ति की तुलना नेपाल के काठमांडू स्थित श्री पशुपतिनाथ से की जाती है। मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ मूर्ति अष्टमुखी है। जबकि नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मूर्ति चार मुखी है। मूर्ति में बाल्यावस्था, युवावस्था, अधेड़ावस्था व वृद्धावस्था के दर्शन होते हैं। इसमें चारों दिशाओं में एक के ऊपर एक दो शीर्ष हैं। प्रतिमा में गंगावतरण जैसी दिखाई देने वाली सफेद धारियां हैं।</p>
<p><strong>प्रतिमा की विशेषता</strong><br />
मुख 8, ऊंचाई 7.3 फीट, गोलाई 11.3 फीट, वजन 6 क्विंटल अष्टमुख की विशेषता प्रतिमा के आठों मुखों का नामकरण भगवान शिव के अष्ट तत्व के अनुसार है। हर मुख के भाव व जीवन काल भी अलग-अलग हैं। 1 &#8211; शर्व, 2 &#8211; भव, 3 &#8211; रुद्र, 4 &#8211; उग्र, 5 &#8211; भीम, 6 &#8211; पशुपति, 7 &#8211; ईशान और 8 &#8211; महादेव।</p>
<p><strong>कैसे पहुंचें मंदसौर</strong><br />
रेल सेवाएं &#8211; जयपुर-इंदौर रेलमार्ग पर मंदसौर प्रमुख स्टेशन है। और मुंबई, इंदौर, दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, बड़ौदा, सूरत, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, उदयपुर, मथुरा, भोपाल, नागपुर, हिसार, जोधपुर सहित अन्य प्रमुख शहरों से सीधी रेल सेवा उपलब्ध है।</p>
<p>बस सेवाएं &#8211; मंदसौर महू-नसीराबाद राजमार्ग पर स्थित है। मंदसौर से महज 30 किमी दूर से मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस वे भी निकल रहा है। सभी प्रमुख शहरों से सीधी बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं।</p>
<p>निकटतम हवाई अड्डा &#8211; इंदौर (220 किमी), उदयपुर (190 किमी)</p>
<p><strong>मंदसौर में 25 करोड़ से &#039;पशुपतिनाथ लोक&#039; तैयार</strong><br />
श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में पशुपतिनाथ लोक का प्रथम चरण पूरा हो चुका है। मंदिर के सभा हाल से लेकर पुराने पार्किंग स्थल तक पूरे परिसर में 25 करोड़ रुपये में पर्यटन विकास निगम ने कायाकल्प कर दिया है। मंदिर परिसर में पुराने खंभों पर भी लाल पत्थर का कार्य हो चुका है। माली धर्मशाला व उसके आस-पास बने भवन भी तोड़कर यहां ओपन थियेटर बना दिया गया है। मंदिर के आसपास दीवारों पर लगे लाल पत्थरों पर शिव लीलाएं उकेरी गई हैं।</p>
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		<title>नेपाल में भूकंप से हिली धरती, प्रशासन सतर्क</title>
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		<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:51:00 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Earthquake]]></category>
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					<description><![CDATA[ताप्लेजंग, नेपाल पूर्वी नेपाल के ताप्लेजंग जिले में मंगलवार तड़के चार तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (NEMRC) के अनुसार, भूकंप मंगलवार सुबह 2 बजकर 47 मिनट पर आया।भूकंप का केंद्र ताप्लेजंग जिले के कंचनजंगा क्षेत्र में स्थित था। झटकों के बाद स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ताप्लेजंग, नेपाल</strong></p>
<p>पूर्वी नेपाल के ताप्लेजंग जिले में मंगलवार तड़के चार तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (NEMRC) के अनुसार, भूकंप मंगलवार सुबह 2 बजकर 47 मिनट पर आया।भूकंप का केंद्र ताप्लेजंग जिले के कंचनजंगा क्षेत्र में स्थित था। झटकों के बाद स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई और कई लोग घरों से बाहर निकल आए।</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप के झटके ताप्लेजंग के अलावा पूर्वी नेपाल के अन्य जिलों में भी महसूस किए गए। हालांकि, अब तक किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान या संपत्ति क्षति की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेपाल भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां समय-समय पर इस तरह की गतिविधियां दर्ज की जाती रही हैं।</p>
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