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	<title>Palm oil &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>बिहार के किसान तेलंगाना में सीखेंगे पाम ऑयल खेती, तेलंगाना के किसान मखाना सीखेंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 16:23:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिहार/झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Palm oil]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना &#160;बिहार एवं तेलंगाना के बीच कृषि क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने, आधुनिक तकनीक तथा नवाचारों के आदान-प्रदान, किसानों के प्रशिक्षण तथा दोनों राज्यों में किए जा रहे सफल कृषि प्रयोगों को साझा करने पर महत्वपूर्ण बैठक हुई। बिहार के किसान तेलंगाना जाकर अब पाम आयल की खेती, उसके प्रसंस्करण एवं तेल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना</strong><br />
&nbsp;बिहार एवं तेलंगाना के बीच कृषि क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने, आधुनिक तकनीक तथा नवाचारों के आदान-प्रदान, किसानों के प्रशिक्षण तथा दोनों राज्यों में किए जा रहे सफल कृषि प्रयोगों को साझा करने पर महत्वपूर्ण बैठक हुई।</p>
<p>बिहार के किसान तेलंगाना जाकर अब पाम आयल की खेती, उसके प्रसंस्करण एवं तेल निष्कर्षण तथा इससे जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।</p>
<p>वहीं, तेलंगाना के किसान बिहार आकर मखाना की खेती, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन एवं विपणन से संबंधित उन्नत तकनीकों और सफल प्रयोगों को समझेंगे तथा उनका व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे।</p>
<p><strong>हैदराबाद स्थित तेलंगाना सचिवालय, तेलंगाना के कृषि मंत्री थुम्मला नागेश्वर राव</strong><br />
की अध्यक्षता में हुई बैठक में बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अतिरिक्त विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि बिहार और तेलंगाना दोनों ही कृषि के क्षेत्र में अपनी अलग-अलग विशेषताओं, अनुभवों और सफल प्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।</p>
<p>इस बैठक का उद्देश्य दोनों राज्यों की कृषि व्यवस्था में उपलब्ध अनुभवों, तकनीकी ज्ञान और सफल माडलों को एक-दूसरे के साथ साझा करना तथा किसानों के हित में उनका उपयोग सुनिश्चित करना है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि किसानों के बीच प्रत्यक्ष अनुभव एवं ज्ञान का आदान-प्रदान कृषि क्षेत्र के विकास के लिए अत्यंत उपयोगी है। दोनों राज्यों के किसानों को एक-दूसरे के राज्य में प्रशिक्षण एवं अध्ययन भ्रमण का अवसर दिया जाना चाहिए। इससे किसानों को अपने-अपने राज्य की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने में सहायता मिलेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में राज्यों के बीच अनुभवों एवं सफल प्रयोगों को साझा करना और आधुनिक तकनीकों को एक-दूसरे तक पहुंचाना किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।</p>
<p>इससे दोनों राज्यों के किसान एक-दूसरे के अनुभवों से लाभान्वित होंगे और कृषि क्षेत्र में नवाचार एवं आधुनिक तकनीक के उपयोग को और बढ़ावा मिलेगा।</p>
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		<title>एक एकड़ में सवा लाख रुपए का मुनाफा देने वाला पाम ऑयल की खेती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 14:26:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Palm oil]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर किसान मुकेश कमा रहे हैं एक पेड़ से 3 हजार रुपए वार्षिक आय पाम ऑयल उत्पादन में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, आयात पर निर्भरता कम करने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल &#8211; ऑयल पाम योजना महासमुंद जिले के किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify"><strong>किसान मुकेश कमा रहे हैं एक पेड़ से 3 हजार रुपए वार्षिक आय</strong></p>
<p style="text-align:justify">पाम ऑयल उत्पादन में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, आयात पर निर्भरता कम करने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल &#8211; ऑयल पाम योजना महासमुंद जिले के किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इस योजना के माध्यम से किसान अपनी बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर लाखों रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। जिले में इस योजना तहत लगभग 400 किसान लगभग 450 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify">इसी क्रम में सरायपाली भलेसर गांव के उन्नत किसान श्री मुकेश चंद्राकर, जिन्होंने वर्षों से बंजर पड़ी अपनी 33 एकड़ भूमि पर वर्ष 2016 में ऑयल पाम की खेती प्रारंभ की। वे शासन की योजना से पाम खेती के लिए प्रेरित हुए और अपनी पूरी भूमि पर लगभग 1900 पौधे लगाए। योजना के अंतर्गत उन्हें पौध प्रदाय, फेंसिंग, रखरखाव तथा ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाएं अनुदान पर मिला। तीन से चार वर्षों में उत्पादन प्रारंभ हुआ, जो लगभग 35 वर्षों तक लगातार फल देता रहेगा। वर्तमान में श्री चंद्राकर एक पौधे से औसतन 3000 रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं। प्रति एकड़ लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify">इसके अतिरिक्त, उन्होंने पाम पौधों के बीच अंतरवर्तीय फसल के रूप में पहले केले की खेती की, जिससे उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपए का लाभ हुआ। वर्तमान में वे कोको की खेती कर निजी कंपनियों को उत्पाद विक्रय कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। श्री चंद्राकर बताते है कि कम पानी, कम खाद एवं कम कीटनाशक में अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ मिलने के कारण किसानों को पाम की खेती अपनानी चाहिए। श्री चंद्राकर न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अपने खेतों में दो दर्जन से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं। स्थानीय मजदूरों के अनुसार, पहले रोजगार के लिए भटकना पड़ता था, जबकि अब वर्षभर यहीं नियमित कार्य उपलब्ध हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify">सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग श्रीमती पायल साव ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य पाम ऑयल उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके अंतर्गत किसानों को अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन एवं विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें उत्पादन एवं विक्रय में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। जिले में पाम ऑयल की खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। यहां किसानों के रूझान और भूमि की प्रकार को देखते हुए कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने भी किसानों से अधिकाधिक संख्या में पाम की खेती करने अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify">गौरतलब है कि खाद्य पदार्थों, साबुन, शैम्पू, सौंदर्य प्रसाधन तथा औषधि निर्माण में इसका व्यापक उपयोग होता है। ऐसे में जिले में कम लागत, कम श्रम, कम पानी एवं अधिक आय देने वाली पाम खेती किसानों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। यह पहल फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हो रही है।</p>
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