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		<title>कमजोर इम्युनिटी और खराब लाइफस्टाइल से बढ़ता टीबी का खतरा, जानें लक्षण और बचाव के उपाय</title>
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		<pubDate>Wed, 04 Mar 2026 08:42:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सर्दी-खांसी हो या बुखार, कुछ लोग इसे मामूली मानकर लंबे समय तक अनदेखा करते रहते हैं, या फिर कुछ एंटीवायरल दवाओं या घरेलू उपाय से इसे ठीक करने का प्रयास करते हैं। उक्त समस्याओं के साथ अगर अचानक वजन में कमी आ जाए या भूख कम लगे, तो देर किए बगैर विशेषज्ञ से परामर्श करना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>
सर्दी-खांसी हो या बुखार, कुछ लोग इसे मामूली मानकर लंबे समय तक अनदेखा करते रहते हैं, या फिर कुछ एंटीवायरल दवाओं या घरेलू उपाय से इसे ठीक करने का प्रयास करते हैं। उक्त समस्याओं के साथ अगर अचानक वजन में कमी आ जाए या भूख कम लगे, तो देर किए बगैर विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।</p>
<p>डॉ. राकेश कुमार, एडि. प्रोफेसर, सेंटर फार कम्युनिटी मेडिसिन, एम्स, नई दिल्ली बताते हैं कि ये सभी टीबी के लक्षण हो सकते हैं। जागरूकता नहीं होने के कारण ही आज टीबी की समस्या तमाम प्रयासों के बावजूद कम नहीं हो रही है।</p>
<p>दरअसल, वैश्विक स्तर पर टीबी को 2030 तक और भारत में वर्ष 2025 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया था, पर बीते कुछ समय से अनेक जगहों पर टीबी मरीजों&nbsp; की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, टीबी ऐसा संक्रामक रोग है जो दुनियाभर में होने वाली मौत के 10 शीर्ष कारणों में शामिल है।</p>
<p><strong>समझें टीबी के जोखिम को</strong><br />
टीबी का संक्रमण बड़ी आबादी में हो सकता है, पर वह बीमारी में बदल जाए जरूरी नहीं। प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है तो शरीर संक्रमण के खिलाफ कार्य करता है और बीमारी से बचाता है। इसलिए, टीबी का कारण कमजोर प्रतिरोधी क्षमता ही है। यह पोषण की कमी का परिणाम है। मधुमेह, एचआइवी ग्रस्त लोगों में टीबी संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है।</p>
<p><strong>कितने हैं प्रकार</strong><br />
वयस्कों में दो प्रकार के टीबी होतें हैं- पल्मोनरी व एक्स-पल्मोनरी। पल्मोनरी में फेफड़े में संक्रमण होता है। इसके लक्षण खांसी व बुखार हैं। संक्रमण बढ़ने पर वजन में कमी आने लगती है। वहीं, एक्स-पल्मोनरी में फेफड़े के अलावा अन्य अंगों जैसे, हड्डी, पेट, लिंफ नोडस, दिमाग आदि में टीबी हो सकता है।</p>
<p><strong>पोषण का रखें ध्यान</strong><br />
पोषण की कमी भारत में टीबी के बड़े कारणों में से एक है। खराब खानपान व जीवनशैली से शुगर की शिकायत हो सकती है। यह भी शरीर में पोषण की कमी कर सकता है और आपकी प्रतिरोधी शक्ति कम होने लगती है। इससे टीबी का संक्रमण होना आसान हो जाता है और पर्याप्त ध्यान न दें तो यह जानलेवा भी हो सकता है। बता दें कि यदि खानपान सही है तो टीबी की आशंका कम हो सकती है। इसके अलावा, अल्कोहल व तंबाकू से भी दूरी बनाने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<p><strong>दो घंटे में रिपोर्ट</strong><br />
बच्चों में पहचान कम होती है। जांच में लापरवाही, समाज में टीबी को लेकर गलत धारणाएं इलाज में बड़ी अवरोधक हैं। आज इसका निदान आसान है। दो घंटे में टीबी की रिपोर्ट मिल जाती है व इलाज शुरू कर सकते हैं।</p>
<p><strong>कोर्स पूरा करें</strong><br />
टीबी के मरीजों के उपचार के लिए प्राय: एंटीबायोटिक दी जाती है। कई मरीजों में देखा गया है कि वे दवा का कोर्स इसलिए भी पूरा नहीं करते क्योंकि दवा लंबे समय तक लेना पड़ता है। कुछ लोग आर्थिक कारण या इसके परिणामों से अनभिज्ञ रहने के कारण दवा बीच में ही छोड़ देते हैं। इससे इलाज और कठिन हो सकता है। दवा प्रतिरोधी होने से इलाज कठिन और अधिक महंगा हो सकता है।</p>
<p><strong>ये हैं मुख्य लक्षण</strong><br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; लगातार 2-3 सप्ताह तक खांसी<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; कभी-कभी कफ में खून आना।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; बुखार आना और यह रात में बढ़ जाना।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; रात में पसीना आना।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; लगातार थकान व कमजोरी<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; सांस में तकलीफ, सीने में दर्द आदि।</p>
<p><strong>बचाव के उपाय</strong><br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से बचें।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; खांसते या छींकते समय रुमाल या टिश्यू पेपर रखें ताकि बैक्टीरिया न फैले।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; भीड़ में मास्क का प्रयोग करें।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; बच्चों को बीसीजी का टीका लगवाएं।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम व पर्याप्त नींद सुनिश्चित करें।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; लक्षण दिखें तो इलाज में देरी न करें।</p>
<p>&nbsp;</p>
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