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	<title>rail project &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>बिहटा-औरंगाबाद रेल परियोजना को मिला बड़ा बूस्ट: 3606 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए 6500 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित होगी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 05:22:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिहार/झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[rail project]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;अरवल वर्ष 2001 में जहानाबाद से अलग होकर जिला बने अरवल को आज भी अपने रेलवे स्टेशन का इंतजार है। जिला गठन के करीब 25 वर्ष बाद भी अरवल रेल नेटवर्क से नहीं जुड़ सका है। हालांकि अब बहुप्रतीक्षित बिहटा-औरंगाबाद रेल लाइन परियोजना के जरिए जिले को रेल मानचित्र पर लाने की कवायद तेज होती &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;अरवल</strong><br />
वर्ष 2001 में जहानाबाद से अलग होकर जिला बने अरवल को आज भी अपने रेलवे स्टेशन का इंतजार है।</p>
<p>जिला गठन के करीब 25 वर्ष बाद भी अरवल रेल नेटवर्क से नहीं जुड़ सका है। हालांकि अब बहुप्रतीक्षित बिहटा-औरंगाबाद रेल लाइन <strong>परियोजना के जरिए जिले को रेल मानचित्र पर लाने की कवायद तेज होती दिख रही है।</strong></p>
<p><strong>लालू प्रसाद ने क&zwj;िया था श&zwj;िलान्&zwj;यास&nbsp;</strong><br />
बिहटा से अरवल होते हुए औरंगाबाद तक प्रस्तावित रेल लाइन परियोजना का शिलान्यास वर्ष 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था।</p>
<p>इसके बाद वर्षों तक परियोजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। रेल आंदोलन के संयोजक मनोज सिंह यादव के नेतृत्व में लगातार आंदोलन और जनदबाव के बाद अब योजना को गति मिलने की उम्मीद जगी है।</p>
<p>रेलवे के जीएम हाजीपुर द्वारा 30 सितंबर 2025 को जारी प्रेस नोट में बताया गया कि 3606.42 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना को पूर्ण स्वीकृति मिल चुकी है।</p>
<p>आंदोलनकारी मनोज सिंह यादव ने बताया कि परियोजना का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा।</p>
<p><strong>117.6 किमी होगी रेल लाइन की लंबाई</strong><br />
पहले चरण में अनुग्रह नारायण रोड स्टेशन से औरंगाबाद तक 13 किलोमीटर रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है।</p>
<p>वहीं दूसरे चरण में बिहटा से औरंगाबाद तक 117.6 किलोमीटर लंबी रेल लाइन निर्माण के लिए रेलवे ने बिहार सरकार को जमीन अधिग्रहण संबंधी पत्र भेजा है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि अरवल की तत्कालीन डीएम अभिलाषा शर्मा ने 6 दिसंबर 2025 को भू-अर्जन पदाधिकारी को भूमि अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकार नियुक्त किया था।</p>
<p>रेलवे अधिकारियों ने जून माह से भूमि अधिग्रहण कार्य शुरू होने का आश्वासन भी दिया है। पटना, अरवल और औरंगाबाद जिले में मिलाकर करीब 6500 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है।</p>
<p><strong>14 स्टेशन और कई हाल्ट होंगे विकसित</strong><br />
प्रस्तावित रेल लाइन परियोजना में कुल 14 स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें बिहटा, बिक्रम, दुल्हिन बाजार, पालीगंज, बारा, अरवल, खभैनी, मेहंदिया, कलेर, शमशेर नगर, दाउदनगर, ओबरा, भरथौली और अनुग्रह नारायण रोड स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर हाल्ट निर्माण की भी योजना है।</p>
<p><strong>चार लोकसभा क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ</strong><br />
यह रेल परियोजना औरंगाबाद, काराकाट, जहानाबाद और पटना लोकसभा क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए विकास की नई संभावनाएं लेकर आएगी।</p>
<p>रेल लाइन बनने से पटना और औरंगाबाद के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी। वर्तमान में सड़क मार्ग से यह सफर तय करने में चार से पांच घंटे लगते हैं, जबकि रेल परिचालन शुरू होने के बाद यह दूरी महज डेढ़ से दो घंटे में पूरी हो सकेगी।</p>
<p><strong>डीएम ने क्या कहा</strong><br />
हालांकि, अमृशा बैंस ने कहा कि फिलहाल रेलवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई तय होने के बाद ही प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>भोपाल-रामगंजमंडी रेल प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, 2027 तक तैयार होगी 276 KM लंबी नई रेल लाइन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 05:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[rail project]]></category>
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					<description><![CDATA[भोपाल &#160;मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच व्यापार और आवाजाही को नई रफ्तार देने वाली भोपाल-रामगंजमंडी नई रेल लाइन अब अपने मुकाम के करीब है। ₹3,035 करोड़ की लागत वाला यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट साल 2027 तक पूरी तरह चालू हो जाएगा। 276 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के बन जाने से भोपाल, सीहोर और राजगढ़ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong><br />
&nbsp;मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच व्यापार और आवाजाही को नई रफ्तार देने वाली भोपाल-रामगंजमंडी नई रेल लाइन अब अपने मुकाम के करीब है। ₹3,035 करोड़ की लागत वाला यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट साल 2027 तक पूरी तरह चालू हो जाएगा। 276 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के बन जाने से भोपाल, सीहोर और राजगढ़ जैसे जिलों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।</p>
<p><strong>5 जिलों की बदलेगी किस्मत</strong><br />
यह रेल लाइन मध्य प्रदेश के भोपाल, सीहोर और राजगढ़ को राजस्थान के झालावाड़ और कोटा जिले से सीधे जोड़ेगी। प्रोजेक्ट का 187 किलोमीटर का हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका है। भोपाल रेल मंडल के तहत निशातपुरा डी केबिन से श्यामपुर तक का 42 किमी का काम पूरा है, वहीं कोटा मंडल ने रामगंजमंडी से राजगढ़ तक 145 किमी की पटरी बिछा दी है। अब केवल 89 किमी का पैच (ब्यावरा-सोनकच्छ-नरसिंहगढ़-कुरावर) बाकी है, जिसे 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य है।</p>
<p><strong>पहाड़ों के बीच से गुजरेगी ट्रेन</strong><br />
यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग का एक बेमिसाल नमूना है। 276 किमी के इस ट्रैक पर 4 बड़ी सुरंगें, 4 बड़े पुल, 34 मुख्य पुल और 171 अंडरपास बनाए जा रहे हैं। 27 स्टेशनों वाला यह रूट न केवल यात्रियों के लिए आरामदायक होगा, बल्कि मालगाड़ियों के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा।</p>
<p>यह लाइन कनेक्टिविटी को बढ़ाएगी, माल ढुलाई को सुव्यवस्थित करेगी और क्षेत्र में रोजगार एवं औद्योगिक विकास को गति देगी।</p>
<p><strong>सौरभ कटारिया, सीनियर डीसीएम</strong></p>
<p><strong>समय और पैसा दोनों की होगी भारी बचत</strong><br />
इस नई लाइन के शुरू होने से दूरी में भारी कटौती होगी:<br />
कोयला परिवहन: झालावाड़ के कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट के लिए कोयला ले जाने वाली गाड़ियों को अब 42 किमी कम दूरी तय करनी होगी।</p>
<p>लंबी दूरी की ट्रेनें: जयपुर से दक्षिण भारत जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेनें अब वाया कोटा-रामगंजमंडी-भोपाल होकर जाएंगी, जिससे 115 किलोमीटर की दूरी और करीब 3 घंटे का समय बचेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
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