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	<title>Rajasthan High Court &#8211; NewsX 24</title>
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	<title>Rajasthan High Court &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>414 करोड़ कस्टम्स फर्जीवाड़े मामले में आरोपी शंकर माली को हाईकोर्ट से जमानत</title>
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		<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 15:52:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जयपुर 414.09 करोड़ रुपये के कस्टम्स फर्जीवाड़े के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने आरोपी शंकर माली को जमानत दे दी है। शंकर माली पिछले करीब 11 महीने से जयपुर सेंट्रल जेल में बंद था। शुक्रवार को कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ उसकी जमानत मंजूर कर ली। मामले की सुनवाई न्यायाधीश विनोद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर</strong><br />
414.09 करोड़ रुपये के कस्टम्स फर्जीवाड़े के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने आरोपी शंकर माली को जमानत दे दी है। शंकर माली पिछले करीब 11 महीने से जयपुर सेंट्रल जेल में बंद था। शुक्रवार को कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ उसकी जमानत मंजूर कर ली। मामले की सुनवाई न्यायाधीश विनोद कुमार भारवानी ने की। बता दें कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज देखने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।</p>
<p><strong>पहले खारिज हुई थी जमानत</strong><br />
यह मामला अजमेर के रहने वाले जगदीश प्रसाद के बेटे शंकर माली और भारत सरकार के बीच चल रहा था। इससे पहले 8 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आरोपी ने दोबारा जमानत के लिए याचिका लगाई। जानकारी के अनुसार, शंकर माली 1 अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में था और तभी से जयपुर सेंट्रल जेल में बंद था।</p>
<p><strong>कस्टम्स ने लगाए थे करोड़ों के फर्जी बिल के आरोप</strong><br />
कस्टम्स विभाग का आरोप है कि कस्टम्स विभाग का कहना है कि शंकर माली और उसके साथियों ने बेल स्टार टेक्नो सॉल्यूशंस ओपीसी प्रा. लि. और विजुअल बर्डस टेक्नोलॉजी के जरिए 414.09 करोड़ रुपये के सोने और हीरे के फर्जी बिल तैयार किए। विभाग का आरोप है कि इन बिलों के जरिए सीमा शुल्क चोरी की गई और हांगकांग, सिंगापुर तथा यूएई की फर्मों को गैरकानूनी तरीके से पैसे भेजे गए।</p>
<p><strong>बचाव पक्ष और विभाग ने रखे अपने-अपने तर्क</strong><br />
आरोपी की ओर से मौजूद वकील अदालत में कहा कि शंकर माली निर्दोष है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है, पूरक चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है और पूरा मामला दस्तावेजों व इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर टिका है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले के दूसरे आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। वहीं कस्टम्स विभाग के वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अगर आरोपी बाहर आया तो सबूतों पर असर पड़ सकता है और पहले ही मामले के कुछ अन्य आरोपी अभी भी कस्टम्स की पकड़ से बाहर हैं।</p>
<p><strong>दोनों पक्षों की दलीलों के बाद हाईकोर्ट का फैसला</strong><br />
दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर बेंच ने शंकर माली की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। न्यायालय ने कुछ शर्तों के साथ आरोपी को जमानत देने का आदेश जारी किया। यह आदेश न्यायाधीश विनोद कुमार भारवानी ने सुनाया।</p>
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		<title>राजस्थान पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, 5 दिन में तारीख बताने का आदेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Jul 2026 16:07:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[जयपुर राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव में हो रही देरी को लेकर हाईकोर्ट में गुरुवार को एक बार फिर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। जानकारी के अनुसार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने चुनाव आयोग को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर</strong><br />
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव में हो रही देरी को लेकर हाईकोर्ट में गुरुवार को एक बार फिर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। जानकारी के अनुसार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए अल्टीमेटम दिया और 5 दिन के अंदर-अंदर चुनावी तारीख बताने का निर्देश दिया। साथ ही OBC आयोग को भी यह बताने के लिए कहा गया है कि वह अपनी रिपोर्ट कब देगा और राज्य सरकार लॉटरी की प्रक्रिया किस दिन पूरी करेगी। इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह और OBC आयोग के सदस्य सचिव भी कोर्ट में मौजूद रहे।</p>
<p><strong>चुनाव आयोग से पूछा- अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू करें?</strong><br />
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से नाराजगी जताई। कोर्ट ने पूछा कि आखिर चुनाव कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है और आयोग के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इस पर राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि चुनाव कराने की पूरी तैयारी हो चुकी है। लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक आरक्षण का वर्गीकरण नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि जैसे ही सरकार लॉटरी निकालकर जानकारी दे देगी, चुनाव आयोग दो दिन के अंदर चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर देगा।</p>
<p><strong>OBC आयोग को भी लगी फटकार</strong><br />
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने OBC आयोग को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने 9 मई 2025 को तीन महीने के लिए आयोग बनाया था, फिर अब तक रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई। अदालत ने साफ कहा कि अगर समय पर काम पूरा नहीं हो सकता था, तो पहले ही बता देना चाहिए था। अब कोर्ट ने OBC आयोग को भी सोमवार तक यह बताने का निर्देश दिया है कि वह अपनी रिपोर्ट सरकार को कब तक सौंपेगा, ताकि चुनाव की आगे की प्रक्रिया में और देरी न हो।</p>
<p><strong>31 जुलाई तक चुनाव कराने के थे आदेश</strong><br />
हाईकोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि 22 मई को राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के आदेश दिए गए थे। लेकिन अब तक चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। इसी वजह से कोर्ट ने इस बार सख्त रुख अपनाया है और सभी पक्षों से तय समय में जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई अब सोमवार को होगी।</p>
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		<title>राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, निर्वाचन आयुक्त तलब आज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Jul 2026 06:02:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;जयपुर राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर एक बार फिर तेजी आ गई है। राजस्थान हाईकोर्ट में आज गुरुवार को पंचायत-निकाय चुनाव के मामले में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई होगी। इन याचिकाओं में अदालती आदेश के बावजूद चुनाव में देरी का आरोप लगाते हुए दोषियों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;जयपुर</strong><br />
राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर एक बार फिर तेजी आ गई है। राजस्थान हाईकोर्ट में आज गुरुवार को पंचायत-निकाय चुनाव के मामले में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई होगी। इन याचिकाओं में अदालती आदेश के बावजूद चुनाव में देरी का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही बुधवार को सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव में देरी को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने अदालती आदेश की पालना नहीं होने को लेकर आज गुरुवार को दोपहर 2 बजे राज्य निर्वाचन आयुक्त को व्यक्तिश: अथवा वर्चुअल माध्यम से हाजिर होने का निर्देश दिया। साथ ही ओबीसी आरक्षण के मामले में जानकारी देने के लिए ओबीसी आयोग सचिव को भी मौजूद रहने को कहा है।</p>
<p><strong>ओबीसी आयोग ने किया 5 लाख से अधिक का सर्वे</strong><br />
ताजा जानकारी के अनुसार ओबीसी आयोग ने पांच लाख से अधिक परिवारों का सर्वे पूरा कर लिया है। इसके अलावा सर्वे कार्य में लगाए गए करीब 15 हजार कर्मचारी तबादले के बाद रिलीव हो गए थे, उनके स्थान पर नए कर्मचारी लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राजस्थान की राजधरा एप में आ रही समस्या को भी दूर कर दिया गया।</p>
<p><strong>उन्होंने अदालती आदेश का उल्लंघन किया&hellip;</strong><br />
इससे पूर्व बुधवार को हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव में देरी को लेकर नाराजगी जताई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व अन्य की याचिका के संबंध में राज्य सरकार की ओर से पेश प्रार्थना पत्र पर बुधवार को कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-क के तहत राज्य निर्वाचन आयुक्त चुनाव के मामले में अदालती आदेश का पालन करवाने के लिए बाध्य थे। प्रथम दृष्टया लगता है, उन्होंने अदालती आदेश का उल्लंघन किया है।</p>
<p><strong>14 अगस्त तक पेश होगी रिपोर्ट</strong><br />
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि हाईकोर्ट ने 22 मई को राज्य निर्वाचन आयोग को ग्राम पंचायतों तथा नगर निकायों के चुनाव 31 जुलाई तक करवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।</p>
<p>आयोग ने 3 जुलाई को सरकार को बताया कि सर्वे कार्य 23 जुलाई तक पूरा होगा और 14 अगस्त तक रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी।</p>
<p><strong>सरकार ने रखा अपना पक्ष</strong><br />
1- राजनीतिक आरक्षण का निर्धारण संवैधानिक एवं न्यायिक मानकों के अनुरूप किया जाना आवश्यक है, इसलिए प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग रहा है।<br />
2- राज्य की लगभग 50 प्रतिशत जनसंख्या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>राजस्थान MVSI भर्ती 2021 विवाद खत्म, हाईकोर्ट ने डिप्लोमा धारकों को ही माना पात्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 16:01:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[जयपुर राजस्थान में SI भर्ती 2021 पहले से ही विवादों में है, जिसे कोर्ट के आदेश पर रद्द कर दिया गया है. जबकि अब SI भर्ती की परीक्षा फिर से आयोजित होने वाली है. वहीं अब मोटर व्हीकल एसआई भर्ती (MVSI भर्ती 2021) को लेकर भी हाई कोर्ट का फैसला आय गया है, जिस पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर</strong></p>
<p>राजस्थान में SI भर्ती 2021 पहले से ही विवादों में है, जिसे कोर्ट के आदेश पर रद्द कर दिया गया है. जबकि अब SI भर्ती की परीक्षा फिर से आयोजित होने वाली है. वहीं अब मोटर व्हीकल एसआई भर्ती (MVSI भर्ती 2021) को लेकर भी हाई कोर्ट का फैसला आय गया है, जिस पर काफी समय से विवाद चल रहा था. MVSI परीक्षा भी 2021 में हुई थी और इसमें सफल हुए अभ्यर्थी की मेरिट लिस्ट बन चुकी है. लेकिन अब हाई कोर्ट के फैसले से फिर विवाद खड़ा होने वाला है.</p>
<p>दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने Motor Vehicle Sub Inspector (MVSI) भर्ती 2021 विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि भर्ती नियमों में केवल डिप्लोमा योग्यता निर्धारित है, वहां डिग्री धारकों को स्वतः पात्र नहीं माना जा सकता.</p>
<p><strong>कोर्ट ने राज्य सरकार को दिया आदेश</strong><br />
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने परिवहन उप निरीक्षक भर्ती (MVSI) से जुड़ी विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया. कोर्ट ने केवल डिप्लोमा धारकों को भर्ती में शामिल करते हुए राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए.</p>
<p><strong>क्या था विवाद</strong><br />
दरअसल, मोटर व्हीकल एसआई भर्ती परीक्षा में डिग्री धारक यानी बीटेक और बीई करे हुए अभ्यर्थियों ने दावा किया कि चूंकि वे उच्च योग्यता रखते हैं. ऐसे में उन्हें भर्ती में शामिल किया जाए. वहीं, डिप्लोमा धारकों ने तर्क दिया कि भर्ती विज्ञापन विशेष रूप से उनके लिए था और डिग्री धारकों को शामिल करना नियमों के खिलाफ होगा.</p>
<p>हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद बुधवार (27 मई) को यह आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों के शेड्यूल में MVSI पद के लिए &ldquo;minimum qualification&rdquo; शब्द का उल्लेख नहीं है. नियमों में स्पष्ट रूप से Automobile Engineering या Mechanical Engineering में डिप्लोमा को ही पात्रता माना गया है.</p>
<p>साथ ही, केवल वही योग्यताएं मान्य हैं जिन्हें केंद्र या राज्य सरकार द्वारा समकक्ष घोषित किया गया हो. ऐसे में अदालत नियमों में ऐसी योग्यता नहीं जोड़ सकती जो वहां मौजूद ही नहीं है.</p>
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		<title>नागौर में चोरी जांच के दौरान पुलिस ने तांत्रिक का लिया सहारा, हाईकोर्ट सख्त</title>
		<link>https://newsx24.com/police-seek-aid-of-tantric-during-theft-investigation-in-nagaur-high-court-takes-strict-stance/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 May 2026 13:16:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[नागौर &#160;आज के आधुनिक दौर में भी क्या पुलिस किसी चोर को पकड़ने के लिए तांत्रिकों और अंधविश्वास का सहारा ले सकती है? आपका जवाब होगा- बिल्कुल नहीं. लेकिन राजस्थान के नागौर जिले में ऐसा ही एक हैरान करने वाला वाकया सामने आया है. यहां चोरी की वारदात को सुलझाने के लिए पुलिस खुद पीड़ित &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नागौर </strong></p>
<p>&nbsp;आज के आधुनिक दौर में भी क्या पुलिस किसी चोर को पकड़ने के लिए तांत्रिकों और अंधविश्वास का सहारा ले सकती है? आपका जवाब होगा- बिल्कुल नहीं. लेकिन राजस्थान के नागौर जिले में ऐसा ही एक हैरान करने वाला वाकया सामने आया है. यहां चोरी की वारदात को सुलझाने के लिए पुलिस खुद पीड़ित परिवार को लेकर एक तांत्रिक (भोपी) के पास पहुंच गई और उसके इशारे पर जांच भी शुरू कर दी.</p>
<p>इस मामले पर अब राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा है कि देश का कानून अंधविश्वास से नहीं चलता और जांच केवल वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए.</p>
<p><strong>क्या है यह पूरा मामला?</strong><br />
यह अजीबो-गरीब मामला नागौर जिले के श्री बालाजी थाने का है. याचिकाकर्ता खेमी देवी ने जोधपुर हाईकोर्ट में जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी. खेमी देवी ने बताया कि इसी साल 7 मार्च 2026 को उनके घर में एक बड़ी चोरी हुई थी, जिसमें चोरों ने घर में रखे सोने-चांदी के गहने और मोटी नकदी साफ कर दी थी. पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन जांच का जिम्मा जिस हेड कांस्टेबल रतिराम को सौंपा गया, उनके काम करने का तरीका बड़ा अनोखा था.</p>
<p><strong>जब सबूत नहीं मिले, तो &#039;भोपी&#039; के दरबार में ले गई पुलिस</strong><br />
याचिका में पुलिस पर आरोप लगाया गया है कि जब काफी दिनों तक चोरी का कोई सुराग नहीं लगा, तो जांच अधिकारी रतिराम ने खुद पीड़ित महिला और गांव के कुछ लोगों को एक तरकीब सुझाई. उन्होंने कहा कि अलवर में एक बैठती है, जो सब सच बता देती है. हद तो तब हो गई जब हेड कांस्टेबल खुद इन लोगों को लेकर अलवर पहुंच गया. वहां उस भोपी ने बिना किसी सबूत के परिवादिया की बहू के पिता मोहनराम का नाम ले दिया और कहा कि चोरी इसी ने की है. इसके बाद पुलिस ने असली चोर को ढूंढने के बजाय मोहनराम को ही आरोपी मानकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया.</p>
<p><strong>कोर्ट में सरकारी वकील ने भी माना सच</strong><br />
खेमी देवी की तरफ से पैरवी कर रहे वकील मनोहर सिंह राठौड़ ने हाईकोर्ट को बताया कि भारतीय कानून में कहीं भी किसी तांत्रिक या भोपी के कहने पर जांच आगे बढ़ाने का कोई नियम नहीं है. हैरान करने वाली बात तब हुई, जब कोर्ट रूम में मौजूद सरकारी वकील ने भी इस बात को स्वीकार किया कि हां, जांच अधिकारी सचमुच अलवर में उस भोपी के ठिकाने पर गया था.</p>
<p><strong>हाईकोर्ट ने बदल दिया जांच अफसर</strong><br />
इस पूरे अंधविश्वास के खेल को सुनकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने माना कि इस तरीके से कभी भी निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती. जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की कोर्ट ने नागौर के पुलिस अधीक्षक को तुरंत आदेश जारी किया है कि इस मामले की जांच वर्तमान हेड कांस्टेबल से तुरंत वापस ली जाए. इस केस की डायरी को श्री बालाजी थाने से हटाकर किसी दूसरे थाने में ट्रांसफर किया जाए. अब इस चोरी के मामले की जांच किसी सब इंस्पेक्टर लेवल के अधिकारी से करवाई जाए, जो अगले 15 दिनों में अपनी जांच शुरू करे.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: SI भर्ती 2021 में याचिकाकर्ताओं को प्रोविजनल राहत</title>
		<link>https://newsx24.com/major-verdict-by-rajasthan-high-court-provisional-relief-granted-to-petitioners-in-2021-si-recruitment/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 May 2026 09:11:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan High Court]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट में आज एसआई भर्ती 2021 को लेकर सुनवाई हुई, जिसमें अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में शामिल किए जाने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी. कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं को भर्ती में आवेदन करने के लिए प्रोविजनल अनुमति प्रदान की है. दोबारा होगी एसआई भर्ती परीक्षा हाईकोर्ट के आदेश के बाद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर</strong></p>
<p>राजस्थान हाईकोर्ट में आज एसआई भर्ती 2021 को लेकर सुनवाई हुई, जिसमें अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में शामिल किए जाने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी. कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं को भर्ती में आवेदन करने के लिए प्रोविजनल अनुमति प्रदान की है.</p>
<p><strong>दोबारा होगी एसआई भर्ती परीक्षा</strong><br />
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) रद्द की गई एसआई भर्ती 2021 का पुनः आयोजन करवा रहा है.&nbsp; हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि पुनर्परीक्षा में केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को शामिल किया जाएगा, जिन्होंने वर्ष 2021 की भर्ती परीक्षा में शामिल हुए थे.</p>
<p><strong>3 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने दी थी परीक्षा</strong><br />
एसआई भर्ती 2021 के लिए लगभग 7.95 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, लेकिन सितंबर 2021 में आयोजित परीक्षा में केवल 3,83,097 अभ्यर्थी ही दोनों पेपर में शामिल हुए थे. आयोग पुनर्परीक्षा में भी इन्हीं अभ्यर्थियों को शामिल करने पर कायम है.</p>
<p><strong>हाई कोर्ट में दायर की याचिका</strong><br />
इस निर्णय का अन्य अभ्यर्थियों द्वारा विरोध किया गया, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कोरोना महामारी और अन्य कारणों से जो अभ्यर्थी उस समय परीक्षा में शामिल नहीं हो सके, उन्हें भी एक और अवसर दिया जाना चाहिए. याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट हरेंद्र नील, रवींद्र सैनी और निखिल कुमावत ने पैरवी की.</p>
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		<title>राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर बम धमाका के दोषियों को राहत देने से किया इनकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 01 May 2026 11:56:00 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2008 में हुए जयपुर सीरियल बम धमाकों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दो दोषियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है. जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने शुक्रवार को मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद की उस अर्जी (स्टे एप्लीकेशन) को खारिज कर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;<strong>जयपुर</strong></p>
<p>राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2008 में हुए जयपुर सीरियल बम धमाकों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दो दोषियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है. जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने शुक्रवार को मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद की उस अर्जी (स्टे एप्लीकेशन) को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी.</p>
<p><strong>क्या है &#039;नौवें बम&#039; का मामला?</strong><br />
13 मई 2008 को जयपुर में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था. इन धमाकों में 71 बेगुनाहों की जान गई थी, और 185 लोग घायल हुए थे. पुलिस को चांदपोल बाजार के पास एक 9वां बम भी मिला था, जिसे फटने से महज 15 मिनट पहले डिफ्यूज कर दिया गया था. इसी &#039;जिंदा बम&#039; मामले में विशेष अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है.</p>
<p><strong>&#039;जब 8 केस में बरी, तो यहां क्यों नहीं?&#039;</strong><br />
दोषियों के वकील ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट पहले ही मुख्य 8 ब्लास्ट मामलों में उन्हें बरी कर चुका है. ऐसे में &#039;जिंदा बम&#039; मामले में भी उन्हें राहत मिलनी चाहिए. उन्होंने दलील दी कि अपील पर सुनवाई में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उनकी सजा पर रोक लगाकर उन्हें जमानत दी जाए.</p>
<p><strong>ई-मेल बना मुख्य सबूत</strong><br />
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए इन दलीलों का पुरजोर विरोध किया गया. सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता और अतिरिक्त साक्ष्य मौजूद हैं. धमाकों के तुरंत बाद दो न्यूज चैनलों को ई-मेल भेजकर इन लोगों ने धमाकों की जिम्मेदारी ली थी. ई-मेल के जरिए धमाकों को &#039;सही&#039; ठहराना इनके शामिल होने का बड़ा प्रमाण है.</p>
<p><strong>अदालत का फैसला</strong><br />
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल सजा पर रोक लगाना सही नहीं होगा. इस फैसले के बाद अब सरवर और शाहबाज को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा.</p>
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		<title>राजस्थान हाईकोर्ट में शनिवार कार्यदिवस पर विवाद, अधिवक्ताओं का बहिष्कार जारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 12:11:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट में शनिवार (25 अप्रैल) को कार्य दिवस बनाए जाने पर एक बार फिर से विवाद रहा. हाईकोर्ट में आज महीने के चौथे शनिवार को कार्य दिवस घोषित किया गया है. हालांकि, हर शनिवार की तरह आज भी अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार किया. दरअसल, हाईकोर्ट में महीने के पहले और चौथे शनिवार को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर</strong></p>
<p>राजस्थान हाईकोर्ट में शनिवार (25 अप्रैल) को कार्य दिवस बनाए जाने पर एक बार फिर से विवाद रहा. हाईकोर्ट में आज महीने के चौथे शनिवार को कार्य दिवस घोषित किया गया है. हालांकि, हर शनिवार की तरह आज भी अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार किया. दरअसल, हाईकोर्ट में महीने के पहले और चौथे शनिवार को कार्यदिवस घोषित किया गया है. अधिवक्ता इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. आज सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत भी जयपुर में है. इस दौरान जयपुर में 39 न्यायाधीश एक साथ हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए मौजूद रहे. आज विशेष रूप से 12 न्यायाधीशों की चार लार्जर बेंच का गठन भी किया गया है.</p>
<p><strong>पिछले साल लिया गया था फैसला</strong><br />
हालांकि आज कोर्ट में न्यायाधीश तो उपस्थित रहे, लेकिन अधिवक्ता नदारद रहे. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने इस पर चिंता भी जताई. बता दें कि पिछले साल 12 दिसंबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट की फुल कोर्ट की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि जनवरी से हाईकोर्ट हर महीने के दो शनिवार खुला रहेगा. इससे वर्षभर में 24 दिन अतिरिक्त काम हो सकेगा और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी.</p>
<p><strong>लगातार बढ़ रहा है केस का दवाब</strong><br />
फुल कोर्ट बैठक में यह माना गया कि अदालतों में लगातार बढ़ते मामलों के दबाव को देखते हुए न्यायिक समय का विस्तार आवश्यक हो गया है. महीने के दो शनिवार को हाईकोर्ट के खुलने से न केवल लंबित मामलों की संख्या कम होगी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी, तेज और समयबद्ध बनेगी.</p>
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		<title>हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बहू को भी मिलेगा अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 05:22:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[जयपुर राजस्थान में अब अनुकंपा नियुक्ति को लेकर &#039;बहू और बेटी&#039; के बीच का कानूनी फर्क खत्म हो गया है. हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट कर दिया कि ससुर की मौत के बाद उनकी बहू भी उतनी ही हकदार है, जितनी एक बेटी होती है. जस्टिस रवि चिरानियां की एकल पीठ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर</strong></p>
<p>राजस्थान में अब अनुकंपा नियुक्ति को लेकर &#039;बहू और बेटी&#039; के बीच का कानूनी फर्क खत्म हो गया है. हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट कर दिया कि ससुर की मौत के बाद उनकी बहू भी उतनी ही हकदार है, जितनी एक बेटी होती है. जस्टिस रवि चिरानियां की एकल पीठ ने सुंदरी देवी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए विभाग की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया, जो बहू को परिवार का हिस्सा मानने से कतरा रही थीं. कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग की सुस्ती और आपत्तियों पर सख्त नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि बहू को नौकरी से रोकना कानून की मूल भावना के खिलाफ है.</p>
<p><strong>डिवीजन बेंच के फैसले का दिया हवाला</strong><br />
सुनवाई के समय अदालत ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली को आइना दिखाया. कोर्ट ने याद दिलाया कि साल 2023 में ही डिवीजन बेंच यह तय कर चुकी है कि बहू को बेटी के समान ही माना जाए. जब कानूनी रूप से बहू अनुकंपा नियुक्ति के लिए पूरी तरह योग्य है, तो विभाग का तकनीकी अड़ंगे लगाना समझ से परे है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब न्यायपालिका पहले ही इस मुद्दे पर स्थिति साफ कर चुकी है, तो प्रशासन को इसमें नई आपत्ति करने का कोई अधिकार नहीं है.</p>
<p><strong>बेटे की बीमारी और मौत ने बढ़ाई मुश्किलें</strong><br />
इस मामले के पीछे एक परिवार के संघर्ष की लंबी कहानी है. याचिकाकर्ता के वकील आरसी गौतम ने कोर्ट को बताया कि सुंदरी देवी के ससुर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) में तैनात थे और 19 नवंबर 2016 को ड्यूटी के दौरान ही उनकी मौत हो गई. उस समय मृतक के इकलौते बेटे यानी सुंदरी के पति एक गंभीर हादसे का शिकार होकर बिस्तर पर थे. ऐसे में बहू ने ही परिवार को संभालने के लिए अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन किया, जिसे विभाग ने ठंडे बस्ते में डाल दिया. इस बीच 25 मई 2020 को सुंदरी के पति का भी निधन हो गया, जिससे पूरे परिवार के गुजर-बसर का संकट खड़ा हो गया.</p>
<p><strong>30 दिन की नियुक्ति पत्र सौंपने के आदेश</strong><br />
हाईकोर्ट ने सुंदरी देवी के हक में फैसला देते हुए पीडब्ल्यूडी विभाग को अल्टीमेटम दिया है. अदालत ने कहा कि विभाग बिना किसी बहानेबाजी के अगले 30 दिनों में याचिकाकर्ता को नियुक्ति पत्र सौंपे. कोर्ट ने कड़ी हिदायत दी है कि अब किसी भी तरह की तकनीकी अड़चन नहीं आनी चाहिए और प्रक्रिया में एक दिन की भी देरी बर्दाश्त नहीं होगी.</p>
<p><strong>45 दिन में पेश करनी होगी रिपोर्ट</strong><br />
अदालत ने इस मामले में सीधे अधिकारियों की जवाबदेही तय की है. कोर्ट ने आदेश दिया कि 45 दिनों के भीतर इस फैसले पर अमल की रिपोर्ट (Compliance Report) पेश की जाए. जस्टिस चिरानियां ने सख्त चेतावनी दी कि यदि आदेश लागू करने में लापरवाही हुई, तो जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी. इस फैसले ने उन हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद जगाई है जो ससुराल में रहकर पूरे परिवार का सहारा बनी हुई हैं.</p>
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		<title>राजस्थान हाउसिंग बोर्ड भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक, जूनियर असिस्टेंट के पदों पर नियुक्तियों पर लगा ग्रहण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 16:24:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan High Court]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[जयपुर &#160;राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (RHB) में जूनियर असिस्टेंट बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने इस भर्ती प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं को देखते हुए नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि अगली सुनवाई तक इन पदों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर</strong></p>
<p>&nbsp;राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (RHB) में जूनियर असिस्टेंट बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने इस भर्ती प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं को देखते हुए नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि अगली सुनवाई तक इन पदों को नहीं भरा जाएगा।</p>
<p><strong>कोर्ट में क्यों नाराज हुए जज?</strong><br />
आज कोर्ट रूम में माहौल काफी गरमाया रहा। दरअसल, सुनवाई के दौरान रेस्पोंडेंट (बोर्ड) पक्ष के वकील बार-बार समय मांग रहे थे, जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। अभ्यर्थियों के वकील आनंद शर्मा और अरविंद कुमार शर्मा ने मजबूती से पक्ष रखते हुए बताया कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं।</p>
<p><strong>भर्ती में धांधली के आरोप</strong><br />
सूत्रों और याचिकाकर्ताओं के वकीलों की मानें तो इस भर्ती में पारदर्शिता की भारी कमी रही है। कोर्ट के सामने दलील दी गई कि विज्ञापन में लिखा था कि मुख्य परीक्षा और टाइपिंग टेस्ट के नंबर जोड़कर मेरिट बनेगी, लेकिन बोर्ड ने टाइपिंग के अंक जोड़े ही नहीं। भर्ती का परिणाम कई बार संशोधित किया गया, जिसके पीछे कोई ठोस वजह नहीं दी गई। सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि जिन अभ्यर्थियों के नाम दस्तावेज सत्यापन (DV) सूची में थे, उन्हें बाद में बिना किसी कारण बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।</p>
<p>वहीं मामले की गंभीरता और अभ्यर्थियों के भविष्य को देखते हुए न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी कर सभी संबंधित पदों को रिजर्व रखने के निर्देश दिए हैं। यानी जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक बोर्ड किसी को जॉइनिंग नहीं दे पाएगा।</p>
]]></content:encoded>
					
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