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		<title>नर्मदापुरम बना प्रदेश का एकमात्र जिला जहां चारों प्रकार का होता है रेशम उत्पादन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 04:04:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[नर्मदापुरम बना प्रदेश का एकमात्र जिला जहां चारों प्रकार का होता है रेशम उत्पादन मालाखेड़ी, पचमढ़ी, मढ़ई के रेशम केंद्रों से हजारों किसानों को हो रहा लाभ भोपाल&#160; प्रदेश में रेशम उद्योग को नई पहचान मिल रही है। नर्मदापुरम जिले ने रेशम उत्पादन में प्रदेशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले में मलबरी, टसर, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नर्मदापुरम बना प्रदेश का एकमात्र जिला जहां चारों प्रकार का होता है रेशम उत्पादन</strong></p>
<p><strong>मालाखेड़ी, पचमढ़ी, मढ़ई के रेशम केंद्रों से हजारों किसानों को हो रहा लाभ</strong></p>
<p><strong>भोपाल&nbsp;</strong></p>
<p>प्रदेश में रेशम उद्योग को नई पहचान मिल रही है। नर्मदापुरम जिले ने रेशम उत्पादन में प्रदेशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले में मलबरी, टसर, ईरी और मूंगा, चारों प्रकार का रेशम उत्पादित हो रहा है। नर्मदापुरम प्रदेश का पहला जिला है जहां चारों प्रकार के रेशम का उत्पादन होता है। जिले के रेशमी वस्त्र अब फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी बिक रहे हैं।</p>
<p><strong>मालाखेड़ी बना रेशम उत्पादन का मुख्य केंद्र</strong></p>
<p>जिले का मुख्य रेशम केंद्र मालाखेड़ी सिल्क कैंपस में संचालित है। यहाँ &quot;फार्म से फेब्रिक&quot; तक पूरी प्रक्रिया होती है।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; वर्ष 2025 में मालाखेड़ी केंद्र में 742 किलोग्राम मलवरी रेशम धागा उत्पादन हुआ।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; 32 महिलाओं को 5.78 लाख रुपये की मजदूरी दी गई, जबकि 415 किलोग्राम धागे की ट्विस्टिंग में 10 महिलाओं को 2.50 लाख रुपये मिले।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; मालाखेड़ी में मध्यप्रदेश की पहली ककून मंडी संचालित है। यहाँ से 13,781 किलोग्राम ककून पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के व्यापारियों को भेजे गए, जिससे किसानों को 51.99 लाख रुपये की आय हुई।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; मालाखेड़ी में तैयार प्राकृत ब्रांड की साड़ियां और परिधान शोरूम में भी बिक रहे हैं।</p>
<p><strong>पचमढ़ी और मढ़ई में विस्तार</strong></p>
<p>&nbsp; &nbsp; पचमढ़ी रेशम केंद्र में 5 एकड़ क्षेत्र में मूंगा रेशम का पौधरोपण कर 500 नग ककून उत्पादन किया जा रहा है।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; मढ़ई रेशम उत्पादन केंद्र को सिल्क टूरिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ पर्यटक रेशम पालन की प्रक्रिया देखने आते हैं।</p>
<p><strong>जिले में 28 केंद्र सक्रिय</strong></p>
<p>नर्मदापुरम में कुल 16 मलबरी रेशम केंद्र और 12 टसर रेशम केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इनसे हजारों किसान और स्थानीय महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।</p>
<p>2025 में जिले में मलबरी रेशम ककून उत्पादन 15,426.5 किलोग्राम रहा, जिससे 255 हितग्राहियों को लाभ मिला। टसर ककून उत्पादन में पिछले साल की तुलना में 2.68 लाख किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p><strong>रेशम से दवाइयाँ भी बन रहीं</strong></p>
<p>मालाखेड़ी रेशम विकास केंद्र में अब रेशम के धागे से दवाइयाँ और मेडिकल उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। फाई ब्रोहित कंपनी और सरदार वल्लभ भाई पटेल पॉलिटेक्निक कॉलेज के साथ अनुबंध कर यहाँ पाउडर, क्रीम, सेरी बैंडेज और सिजेरियन बैंडेज बनाए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर</strong></p>
<p>रेशम केंद्रों के फिर से शुरू होने से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। जिससे लखपति दीदियों की संख्या में भी वृद्धि होगी। नर्मदापुरम की यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती दे रही है और जिले की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>कुटीर और ग्रामोद्योग को नए आयाम देने की तैयारी में मध्यप्रदेश हथकरघा, खादी, रेशम और महिला रोजगार पर विशेष फोकस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 May 2026 18:26:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Khadi]]></category>
		<category><![CDATA[silk]]></category>
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					<description><![CDATA[भोपाल&#160; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अब कुटीर एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र को रोजगार, नवाचार और बाजार से जोड़कर नया स्वरूप देने जा रही है। पारंपरिक शिल्प को आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ाने और ग्रामीण कारीगरों को बेहतर आय और पहचान दिलाने के लिये निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल&nbsp;</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अब कुटीर एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र को रोजगार, नवाचार और बाजार से जोड़कर नया स्वरूप देने जा रही है। पारंपरिक शिल्प को आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ाने और ग्रामीण कारीगरों को बेहतर आय और पहचान दिलाने के लिये निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की पहचान महेश्वरी, चंदेरी, खादी और रेशम जैसे उत्पादों को सिर्फ संरक्षित ही नहीं, बल्कि विस्तारित और प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश</strong></p>
<p>हथकरघा क्लस्टर का विस्तार : महेश्वरी और चंदेरी की सफलता को देखते हुए प्रदेश के अन्य जिलों में भी नए हथकरघा क्लस्टर चिन्हित कर विकसित किए जाएंगे।</p>
<p>खादी उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा: पुराने कॉटन मिल क्षेत्रों और पारंपरिक बुनाई वाले इलाकों को जोड़कर खादी उत्पादन की नई योजना बनेगी। इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय रोजगार सृजित करना है।</p>
<p>महिला सशक्तिकरण पर जोर: लूम और चरखा प्रदाय योजना को महिला एवं बाल विकास तथा कृषि विभाग के साथ जोड़कर रोजगारपरक बनाया जाएगा। रेशम उत्पादन को लखपति दीदियों से जोड़ने का लक्ष्य है।</p>
<p>ब्रांड आउटलेट का विस्तार : मृगनयनी, कबीरा और विंध्यावैली जैसे ब्रांड के एम्पोरियम अब फ्रेंचाइजी मॉडल पर अन्य जिलों में खुलेंगे। पर्यटन निगम के साथ मिलकर प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आउटलेट स्थापित किए जाएंगे।</p>
<p>धार्मिक और सांस्कृतिक उत्पादों को बढ़ावा: धार्मिक स्थानों के लिए गुणवत्तापूर्ण पूजन सामग्री के उत्पादन और विक्रय को अनुदान और बैंक ऋण आधारित योजना से जोड़ा जाएगा।</p>
<p>नवाचार और युवा जुड़ाव: इंदौर की साड़ी वॉकथॉन की तर्ज पर उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर में आयोजन होंगे। साड़ी पहनावे को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार योजना भी शुरू होगी।</p>
<p>रेशम और सिल्क टेक पार्क का विस्तार: ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन में &quot;प्राकृत&quot; रेशम शोरूम खुलेंगे। पचमढ़ी के सिल्क टेक पार्क की तर्ज पर रातापानी और अमरकंटक में भी संभावनाएं तलाशी जाएंगी।</p>
<p>ग्रामोद्योग इकाइयों को एमएसएमई से जोड़ना: ग्रामोद्योग इकाइयों की स्थापना के लिए एमएसएमई विभाग की उद्यम क्रांति योजना के तहत लक्ष्य और आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन अनुसार कुटीर और ग्रामोद्योग सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का आधार है।</p>
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