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	<title>sugar &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>Sugar Price Hike: क्या देश में खत्म हो रही चीनी? अचानक बढ़े दामों के पीछे क्या है असली वजह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 16:35:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[sugar]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली &#160;शक्कर हर घर की हर रोज की जरूरत का अहम हिस्सा है। हर दिन हम किसी ना किसी रूप में चीनी का इस्तेमाल करते हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों की सूची में शामिल है, लेकिन इस बार देश में चीनी की कमी को लेकर चर्चा तेज है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong><br />
&nbsp;शक्कर हर घर की हर रोज की जरूरत का अहम हिस्सा है। हर दिन हम किसी ना किसी रूप में चीनी का इस्तेमाल करते हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों की सूची में शामिल है, लेकिन इस बार देश में चीनी की कमी को लेकर चर्चा तेज है। घरेलू आपूर्ति बनाए रखने और चीनी की कीमत को सामान्य रखने का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर बैन लगा दिया। इसके बाद देश में चीनी की आपूर्ति (Sugar Supply) और उपल्बधता को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे।</p>
<p>अब ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) ने चीनी की कमी की खबरों को निराधार बताया है, और उसने अपने सदस्यों से पूरे देश में चीनी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उनकी ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब कारखाने से चीनी की कीमतों में एक महीने से भी कम समय में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।</p>
<p><strong>उद्योग संगठनों ने अफवाहों से बचने की अपील की</strong><br />
&nbsp;रिपोर्ट के मुताबिक, Indian Sugar &amp; Bio-energy Manufacturers Association (ISMA) और National Federation of Cooperative Sugar Factories Ltd (NFCSF) ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घरेलू खपत को पूरा करने में किसी तरह की समस्या नहीं होगी।&nbsp;</p>
<p>दोनों संगठनों ने कहा कि हाल में कीमतों में आई तेजी मांग और सप्लाई की वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं है. बाजार में कमी का माहौल बनाना, सट्टेबाजी करना या गलत जानकारी फैलाना उपभोक्ताओं और चीनी पर निर्भर उद्योगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. संगठनों ने व्यापारियों और अन्य हितधारकों से अनावश्यक स्टॉक जमा करने और अफवाहें फैलाने से बचने की अपील की है।&nbsp;</p>
<p><strong>जल्द शुरू होंगी चीनी मिलें</strong><br />
अपने सदस्यों को भेजे गए एक पत्र में, AISTA ने पिछले हफ्ते जारी भारतीय चीनी और जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) और राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना संघ (NFCSF) के संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कहा कि देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी भंडार मौजूद है। इसमें यह भी कहा गया कि चीनी मिल मालिकों ने कृषि-जलवायु परिस्थितियों के आधार पर 2026-27 सीजन (अक्टूबर-सितंबर) को जल्द से जल्द शुरू करने पर सहमति जताई है।</p>
<p><strong>चीनी की उपलब्धता को लेकर ठोस कदम</strong><br />
&nbsp; &nbsp; मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, AISTA के अध्यक्ष प्रफुल विठलानी ने कहा, &quot;हाल ही में कारखाने से एक महीने से भी कम समय में लगभग 15 प्रतिशत चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने चीनी की कमी की एक निराधार धारणा पैदा कर दी है।&quot;</p>
<p>उन्होंने चीनी मूल्य श्रृंखला के सभी शेयरहोल्डर्स &#8211; मिलों, व्यापारिक घरानों, थोक विक्रेताओं, वितरकों और संस्थागत उपभोक्ताओं से <strong>अनुरोध किया कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए &quot;सकारात्मक कदम&quot; उठाएं कि चीनी पूरे देश में आसानी से उपलब्ध रहे।</strong></p>
<p><strong>जल्दबाजी में ना करें पैनिक खरीदी</strong><br />
मीडिया खबरों के मुताबिक AISTA अध्यक्ष ने कोविड-19 महामारी के दौरान आपूर्ति बनाए रखने का उदाहरण देते हुए सदस्यों से अभी भी वैसा ही अप्रोच दिखाने का आग्रह किया और सप्लाई चेन को सुचारू रूप से चलाने तथा इसे बाधित करने वाली गतिविधियों से बचने की सलाह दी।</p>
<p>उन्होंने सदस्यों से घबराहट में खरीदारी (Panic buying) या सट्टेबाजी के लिए स्टोर करने से बचने, सरकारी नियमों का पालन करने और भ्रामक सूचनाओं या अफवाहों को नजरअंदाज करने का भी आग्रह किया।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम स्टॉक का असर</strong><br />
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले एक महीने में कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी महाराष्ट्र और कर्नाटक में देखने को मिली है. ये दोनों राज्य देश के प्रमुख चीनी उत्पादक हैं, लेकिन यहां अन्य राज्यों की तुलना में चीनी का स्टॉक अपेक्षाकृत कम बचा है।&nbsp;</p>
<p>चीनी कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इन राज्यों में स्टॉक कम होने के कारण अब अन्य राज्यों की चीनी मिलों को ऊंची कीमतों का फायदा मिल सकता है. बाजार में सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता ने भी कीमतों में तेजी लाने में अहम भूमिका निभाई है।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्पादन में सुधार की उम्मीद</strong><br />
उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को समाप्त होने वाले 2025-26 Sugar Year में देश का चीनी उत्पादन करीब 27.8 मिलियन टन रहने का अनुमान है. यह पिछले सीजन के 25.6 मिलियन टन की तुलना में लगभग 8.5 प्रतिशत अधिक है. उत्पादन बढ़ने की <strong>उम्मीद से आने वाले महीनों में सप्लाई की स्थिति बेहतर हो सकती है।&nbsp;</strong></p>
<p><strong>एक्सपोर्ट बैन के बाद बदला बाजार</strong><br />
सरकार ने मई 2026 में चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहने के बाद Sugar Export पर रोक लगा दी थी. एक्सपोर्ट बैन लागू होने से पहले करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था. इसमें सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र और कर्नाटक की चीनी मिलों का रहा।&nbsp;</p>
<p>बताया जा रहा है कि इन राज्यों की कई मिलों ने अपने हिस्से के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को आवंटित कुछ Export Quota का भी इस्तेमाल किया था. इसके बदले उत्तर प्रदेश की मिलों को घरेलू बिक्री के लिए अतिरिक्त कोटा दिया गया।&nbsp;</p>
<p><strong>कितने बढ़े शक्कर के दाम?</strong><br />
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश भर में औसत खुदरा चीनी की कीमत एक महीने पहले के ₹47.01 प्रति किलो, तीन महीने पहले के ₹46.48/किलो और छह महीने पहले के ₹46.34/किलो से बढ़कर 17 जुलाई को ₹47.9/किलो हो गई है। थोक बाजार में, पिछले छह महीनों में कीमतें बढ़कर ₹4,294.70/किलो से 17 जुलाई तक ₹4,447.57/क्विंटल हो गई हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>एथेनॉल की बढ़ती मांग से चीनी के दाम में ऐतिहासिक उछाल, ₹4,700 प्रति क्विंटल पहुंचा भाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:12:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[sugar]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर त्योहारी सीजन की दस्तक से पहले ही आम आदमी की रसोई का स्वाद कड़वा होने लगा है। शकर के दाम में ऐतिहासिक तेजी हुई है। थोक में शकर 4,650 से 4,700 रुपए प्रति क्विंटल तो फुटकर बाजार में कीमत 48 से 49 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। शकर खांडसारी एसोसिएशन ग्वालियर के मनीष बांदिल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ग्वालियर</strong></p>
<p>त्योहारी सीजन की दस्तक से पहले ही आम आदमी की रसोई का स्वाद कड़वा होने लगा है। शकर के दाम में ऐतिहासिक तेजी हुई है। थोक में शकर 4,650 से 4,700 रुपए प्रति क्विंटल तो फुटकर बाजार में कीमत 48 से 49 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। शकर खांडसारी एसोसिएशन ग्वालियर के मनीष बांदिल की मानें तो जुलाई की शुरुआत के साथ ही भाव अप्रत्याशित उछले हैं। राष्ट्रीय व्यापारिक कल्याण बोर्ड के सदस्य रमेश खंडेलवाल ने बताया, गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि व एथेनॉल उत्पादन पर सरकार का बढ़ता जोर इसका कारण है। इससे मिलों का फोकस शकर उत्पादन से हटकर एथेनॉल पर हो गया।</p>
<p><strong>इन तीन कारणों से महंगी हुई मिठास&nbsp;</strong><br />
एथेनॉल उत्पादन पर बढ़ता जोर: सरकार पेट्रोल में मिश्रण के लिए एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसमें बड़े पैमाने पर गन्ने का उपयोग हो रहा है। चीनी (Sugar Price Ethanol Production) मिलों में कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हुई।</p>
<p>गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि: अधिकांश राज्यों में गन्ने का समर्थन मूल्य बढऩे से उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर शकर की कीमतों पर दिख रहा है।</p>
<p>12 साल में सबसे कम जून की बारिश: इस वर्ष जून में 12 साल की तुलना में सबसे कम वर्षा हुई। देश में सामान्य से 38त्न कम वर्षा व जुलाई में भी कमजोर मानसून की आशंका से शकर उत्पादन 80 लाख टन तक कम हो सकता है।</p>
<p><strong>कैसे बनाया जाता है एथेनॉल? भारत में किससे तैयार हो रहा?</strong><br />
एथेनॉल बनाने वाली सामग्री को फीड स्टॉक (Sugar Price Hit Record 2026) कहा जाता है। कई तरह के एथेनॉल उत्पादन संयंत्र अलग-अलग फीडस्टॉक का उपयोग करते हैं। इसके लिए मक्का, गेहूं या अन्य प्रकार के कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया एक ही जैसी होती है। जबकि भारत में गन्ने का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे गन्ना उत्पादक राज्यों में शुरू होती है। पकने के बाद गन्नों की कटाई की जाती है। इसके बाक प्रसंस्करण के लिए चीनी मिलों और डिस्टिलरी में ले जाया जाता है।</p>
<p><strong>जानें गन्ने से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया से पेट्रोल पंप तक का सफर</strong></p>
<p>&nbsp; &nbsp; चीनी मिल में गन्नों को पेराई मशीनों में डाला जाता है। यह गन्ने का रस निचोड़ लेती हैं। यह रस चीनी और एथेनॉल के उत्पादन के लिए आधार सामग्री तैयार होती है।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; गन्ने के रस को संशोधित कर चीनी बनाई जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान गुड़, नामक एक गाढ़ा गहरे रंग का सिरप उप उत्पाद के रूप में मिलता है। गुड़ परम्परागत रूप से भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल में से माना जाता है।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; मॉडर्न एथेनॉल संयंत्र गुड़ और गन्ने के रस दोनों से एथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है। इन कच्चे माल को आसवन संयंत्रो तक पहुंचाया जाता है जहां इनले जैव ईंधन एथेनॉल शुरू किया जाता है।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; कच्चे माल के मिश्रण में सबसे पहले खमीर उठाया जाता है। फिर सूक्ष्मजीव शर्करा का सेवन करते हैं और प्राकृतिक किण्वन प्रक्रिया द्वारा उन्हें अल्कोहल में बदला जाता है। उत्पादन की विधियों (Sugar Price break record 2026) के आधार पर यह चरण चंद घंटों से लेकर कुछ दिन तक का हो सकता है।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; किण्वित द्रव में अल्कोहल, पानी और अन्य यौगिक होते हैं। अब आसवन विधि से अल्कोहल को अलग कर लिया जाता है और फिर सांद्रित किया जाता है। इस विधि से उच्च शुद्धता वाला एथेनॉल तैयार होता है।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; संयंत्र से निकाले जाने से पूर्व एथेनल की गुणवत्ती की कड़ी जांच होती है। इसके बाद उत्पादक शुद्धता स्तर, रासायनिक संरचना और ईंधन के मानकों के अनुपालन की जांच कर सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद सरकारी विनिर्देशों के पूरा करता है या नहीं।&nbsp;</p>
<p>&nbsp; &nbsp; मंजूरी के बाद एथेनॉल को टैंकरों के माध्यम से तेल विपणन कंपनियों के डिपो तक पहुंचाया जाता है। ये सुविधाएं ईंधन के उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले मिश्रण प्रक्रिया संभालती हैं।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; अंतिम चरण में अनुमोदित मिश्रण अनुपात के मुताबिक एथनॉल (Sugar Price Hike making fuel) को पेट्रोल में मिलाया जाता है। फिर इस मिश्रित ईंधन को देशभर के पेट्रोल पंपों पर वितरित कर दिया जाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>अल-नीनो और इथेनॉल की दोहरी मार! भारत के चीनी एक्सपोर्ट पर कई साल तक लग सकता है ब्रेक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Jun 2026 15:32:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[sugar]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;नई दिल्ली भारत दुनिया के चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन आने वाले सालों में तस्वीर बदल सकती है. मौसम विशेषज्ञों ने इस साल अल-नीनो के असर से कम बारिश की आशंका जताई है. सरकार के इथेनॉल पर बढ़ते फोकस की वजह से गन्ने का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. ऐसे में जानकारों का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;नई दिल्ली</strong></p>
<p>भारत दुनिया के चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन आने वाले सालों में तस्वीर बदल सकती है. मौसम विशेषज्ञों ने इस साल अल-नीनो के असर से कम बारिश की आशंका जताई है. सरकार के इथेनॉल पर बढ़ते फोकस की वजह से गन्ने का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. ऐसे में जानकारों का कहना है कि कम से कम तीन साल तक भारत के पास इतनी ज्यादा चीनी नहीं बच सकती कि वह बड़े पैमाने पर देशों को बेच सके।&nbsp;</p>
<p>भारत में गन्ने की खेती काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर करती है. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से कम रह सकती है. जून महीने में भी कई जगहों पर सामान्य से कम बारिश हुई है. इसी वजह से कुछ किसान गन्ने की जगह सोयाबीन, अरहर और दूसरी कम पानी वाली फसलें लगाने का फैसला कर रहें हैं. अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले सीजन में गन्ने की खेती और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>चीनी की जरूरत ज्यादा, उत्पादन कम</strong><br />
उद्योग के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रह सकता है. वहीं देश में हर साल करीब 2.85 करोड़ टन चीनी की खपत होती है. यानी देश में जितनी चीनी बन रही है, उससे ज्यादा चीनी की जरूरत है. इसी वजह से मिलों में चीनी का स्टॉक घटकर करीब 35 लाख टन रह सकता है, जो कई दशक में सबसे कम लेवल में से एक होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>इथेनॉल की बढ़ती मांग भी बड़ी वजह</strong><br />
सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर जोर दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके. इसके लिए गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ रहा है. फिलहाल देश में इथेनॉल की मांग करीब 12 से 13 अरब लीटर है. आने वाले सालों में यह बढ़कर 30 अरब लीटर तक पहुंच सकती है. ऐसे में गन्ने का बड़ा हिस्सा चीनी की बजाय इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>सरकार की नजर घरेलू सप्लाई पर&nbsp;</strong><br />
भारत पहले दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी का एक्सपोर्टर था. 2022-23 तक पांच सालों में देश हर साल आमतौर पर 68 लाख टन चीनी विदेशों में बेचता था, जो वैश्विक चीनी करोबार का करीब 10% हिस्सा था. अब हालात बदल चुके हैं. सरकार की प्राथमिकता देश के भीतर चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है. आने वाले सीजन में भी चीनी निर्यात को लेकर सख्त रुख देखने को मिल सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या भारत को भी चीनी खरीदनी पड़ सकती है?</strong><br />
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अल-नीनो का असर ज्यादा रहा और गन्ने की खेती में बड़ी गिरावट आई, तो आने वाले वर्षों में भारत को विदेशों से चीनी खरीदने की जरूरत भी पड़ सकती है. भारत ने आखिरी बार 2016-17 और 2017-18 में चीनी आयात की थी. उस समय सूखे और कम उत्पादन की वजह से ऐसी स्थिति बनी थी।&nbsp;</p>
<p>इससे पहले 2009 और 2010 में भारत की बड़ी खरीदारी ने दुनिया भर में चीनी की कीमतों को काफी ऊपर पहुंचा दिया था. कम बारिश की आशंका, गन्ने की खेती पर बढ़ता दबाव और इथेनॉल की बढ़ती मांग भारत के चीनी सेक्टर के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>अगर मौसम के अनुमान सही साबित होते हैं, तो आने वाले कुछ सालों तक देश के पास विदेशों में बेचने के लिए अतिरिक्त चीनी कम बच सकती है. इतना ही नहीं, हालात ज्यादा बिगड़े तो भारत को भविष्य में चीनी आयात करने पर भी विचार करना पड़ सकता है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>किसानों को बड़ी राहत: सरकार ने 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चीनी के निर्यात को दी मंजूरी</title>
		<link>https://newsx24.com/major-relief-for-farmers-the-government-has-approved-the-export-of-2-5-million-tons-of-wheat-and-500000-tons-of-sugar/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 13:32:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[government]]></category>
		<category><![CDATA[sugar]]></category>
		<category><![CDATA[Wheat]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली घरेलू बाजार में बंपर पैदावार और गोदामों में भरे सरप्लस स्टॉक को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने शुक्रवार को 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का सीधा मकसद घरेलू कीमतों में स्थिरता लाना और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p>घरेलू बाजार में बंपर पैदावार और गोदामों में भरे सरप्लस स्टॉक को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने शुक्रवार को 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का सीधा मकसद घरेलू कीमतों में स्थिरता लाना और रबी सीजन की नई फसल आने से पहले किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना है।</p>
<p>खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, गेहूं के अलावा 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की भी अनुमति दी गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब निजी और सरकारी, दोनों ही स्तरों पर देश में अनाज का भंडार आरामदायक स्थिति में है।</p>
<p><strong>गेहूं: गोदाम फुल, निर्यात का रास्ता खुला</strong><br />
सरकार के इस फैसले के पीछे का सबसे बड़ा कारण गेहूं का भारी स्टॉक है। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट होती है:</p>
<p>निजी क्षेत्र के पास स्टॉक: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निजी कंपनियों और व्यापारियों के पास लगभग 75 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 32 लाख टन ज्यादा है।</p>
<p>एफसीआई की स्थिति: भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास 1 अप्रैल, 2026 तक केंद्रीय पूल में लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध होने का अनुमान है। यह आंकड़ा यह सुनिश्चित करने के लिए काफी है कि निर्यात की अनुमति देने से देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई आंच नहीं आएगी।</p>
<p>बुवाई में बढ़ोतरी: रबी सीजन 2026 में गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह दर्शाता है कि किसानों ने एमएसपी और सरकारी खरीद पर भरोसा जताते हुए जमकर बुवाई की है और इस बार भी बंपर पैदावार की उम्मीद है।</p>
<p><strong>चीनी मिलों को नई राहत</strong><br />
गेहूं के साथ-साथ सरकार ने चीनी उद्योग को भी राहत दी है। चीनी सत्र 2025-26 के लिए &#039;इच्छुक&#039; चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी गई है।</p>
<p>पिछला ट्रैक रिकॉर्ड: इससे पहले 14 नवंबर, 2025 को सरकार ने 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। हालांकि, मिलों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 31 जनवरी, 2026 तक केवल 1.97 लाख टन चीनी का ही निर्यात हो पाया है, जबकि लगभग 2.72 लाख टन के सौदे अनुबंधित हो चुके हैं।</p>
<p>कड़ी शर्तें: अतिरिक्त पांच लाख टन का कोटा केवल उन मिलों को दिया जाएगा जो इसके लिए इच्छा जताएंगे। शर्त यह है कि आवंटित कोटे का कम से कम 70% हिस्सा 30 जून, 2026 तक निर्यात करना अनिवार्य होगा। आवंटन प्रो-राटा (अनुपातिक) आधार पर होगा और मिलों को आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपनी सहमति देनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि इस निर्यात कोटे को किसी दूसरी मिल के साथ बदला नहीं जा सकेगा।</p>
<p>सरकार का यह कदम बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) सुधारने और पीक सीजन में &#039;डिस्ट्रेस सेल&#039; (औने-पौने दाम पर बिक्री) को रोकने के लिए उठाया गया है। निर्यात खुलने से घरेलू बाजार में कीमतों को सपोर्ट मिलेगा, जिससे किसानों की आय सुरक्षित रहेगी।&nbsp;</p>
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