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	<title>voter &#8211; NewsX 24</title>
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	<title>voter &#8211; NewsX 24</title>
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		<title>दतिया में स्वीप गतिविधियों अंतर्गत विद्यालयों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 16:01:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[voter]]></category>
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					<description><![CDATA[दतिया में स्वीप गतिविधियों अंतर्गत विद्यालयों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित दतिया दतिया विधानसभा उप निर्वाचन-2026 के अंतर्गत जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशन में जिले के विभिन्न विद्यालयों में मतदाता जागरूकता हेतु स्वीप (SVEEP) गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यालयीन स्टॉफ ने लोकतंत्र को सशक्त बनाने तथा शत-प्रतिशत मतदान के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दतिया में स्वीप गतिविधियों अंतर्गत विद्यालयों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित</strong></p>
<p><strong>दतिया</strong></p>
<p>दतिया विधानसभा उप निर्वाचन-2026 के अंतर्गत जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशन में जिले के विभिन्न विद्यालयों में मतदाता जागरूकता हेतु स्वीप (SVEEP) गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यालयीन स्टॉफ ने लोकतंत्र को सशक्त बनाने तथा शत-प्रतिशत मतदान के लिए प्रेरित करने की मतदाता जागरूकता शपथ दिलाई जा रही है। साथ ही &quot;एक पौधा लोकतंत्र के नाम&quot; के तहत पौध-रोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की जा रही है।</p>
<p>विद्यालयों में रंगोली एवं मेहंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जा रहा है। मतदाताओं को अपने मताधिकार का अनिवार्य रूप से प्रयोग करने तथा निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं शांतिपूर्ण मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।</p>
<p>स्वीप गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन के माध्यम से मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा अधिक से अधिक मतदाताओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सहभागी बनाना है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>नए वोटर के लिए बदला नियम, अब फॉर्म-6 में देनी होगी माता-पिता की SIR जानकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Jul 2026 16:26:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिहार/झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
		<category><![CDATA[voter]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;पटना &#160;नया मतदाता बनने की प्रक्रिया में अब एक बड़ा बदलाव किया गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने अब माता-पिता की एसआईआर डि&#8205;टेल जरूरी कर दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में पहली बार नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने वाले नए आवेदकों को अब अपने माता-पिता से जुड़ी विशेष गहन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;<strong>पटना</strong><br />
&nbsp;नया मतदाता बनने की प्रक्रिया में अब एक बड़ा बदलाव किया गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने अब माता-पिता की एसआईआर डि&zwj;टेल जरूरी कर दी है।</p>
<p>आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में पहली बार नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने वाले नए आवेदकों को अब अपने माता-पिता से जुड़ी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) की जानकारी भी देनी होगी।</p>
<p>यानी अब केवल आयु और निवास का प्रमाण देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आवेदन के दौरान यह भी बताना होगा कि आवेदक के माता-पिता SIR में शामिल थे या नहीं। बिना यह डिक्लेरेशन भरे ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ सकेगा।</p>
<p><strong>क्या-क्या जानकारी देनी होगी?</strong><br />
निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार नए मतदाता को आवेदन के दौरान यह जानकारी देनी होगी&mdash;<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; माता-पिता SIR में शामिल हैं या नहीं।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; यदि शामिल हैं तो उनकी विधानसभा क्षेत्र का नंबर।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; पोलिंग स्टेशन का विवरण।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; मतदाता सूची में दर्ज सीरियल नंबर।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; यदि माता-पिता SIR में शामिल नहीं थे, तो इसका विकल्प चुनना होगा।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; ऐसी स्थिति में माता-पिता का नाम और EPIC (मतदाता पहचान पत्र) नंबर दर्ज करना होगा।</p>
<p>हालांकि आयोग ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि जिन आवेदकों के पास माता-पिता की यह जानकारी उपलब्ध नहीं होगी या जिनके माता-पिता का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, उनके आवेदन का निस्तारण किस प्रकार किया जाएगा।</p>
<p><strong>ऑनलाइन आवेदन में अनिवार्य होगी घोषणा</strong><br />
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन फॉर्म-6 भरता है तो वह तब तक आवेदन जमा नहीं कर पाएगा, जब तक SIR से संबंधित घोषणा पूरी नहीं करता।</p>
<p>हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि फॉर्म-6 में औपचारिक संशोधन नहीं किया गया है। यह व्यवस्था प्रशासनिक निर्देशों के माध्यम से लागू की गई है।</p>
<p>आयोग का कहना है कि इस व्यवस्था से नए मतदाताओं का मौजूदा मतदाता डाटाबेस से मैपिंग आसान होगी और अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत कम पड़ेगी।</p>
<p><strong>बिहार के SIR अभियान से जुड़ा है नया नियम</strong><br />
निर्वाचन आयोग के अनुसार यह प्रावधान पहली बार पिछले वर्ष जून में बिहार में शुरू किए गए SIR के दौरान लागू किया गया था। उस समय भी नए मतदाताओं से फॉर्म-6 के साथ यह घोषणा-पत्र भरवाया गया था।</p>
<p><strong>SIR का उद्देश्य क्या है?</strong><br />
निर्वाचन आयोग के मुताबिक विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य:<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; सभी पात्र भारतीय नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल करना।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान कर नाम हटाना।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; मृत मतदाताओं के नाम हटाना।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं का सत्यापन।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; लंबे समय से अनुपस्थित मतदाताओं के रिकॉर्ड की समीक्षा।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाना।</p>
<p>आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप है।</p>
<p><strong>नया मतदाता बनने के लिए कौन पात्र?</strong><br />
बिहार में मतदाता पहचान पत्र बनवाने के लिए आवेदक को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी&mdash;<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; भारत का नागरिक होना चाहिए।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; अर्हता तिथि तक 18 वर्ष या उससे अधिक आयु होनी चाहिए।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; संबंधित विधानसभा क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; किसी कानून के तहत मतदाता बनने के लिए अयोग्य घोषित नहीं होना चाहिए।</p>
<p><strong>आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज</strong><br />
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदक को निम्न दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; पासपोर्ट आकार का फोटो।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; आयु प्रमाण (जन्म प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस)।<br />
&nbsp;&nbsp;&nbsp; निवास प्रमाण (पासपोर्ट, राशन कार्ड, बिजली/पानी/गैस बिल, आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस)।</p>
<p>निर्वाचन आयोग का कहना है कि नए प्रावधान से मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी, हालांकि माता-पिता की जानकारी उपलब्ध नहीं होने वाले आवेदकों के संबंध में स्थिति अभी स्पष्ट नहीं की गई है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>नगरीय निकायों एवं पंचायतों की मतदाता सूची में नाम जोड़ने- काटने के लिये पहली बार ऑनलाइन आवेदन की सुविधा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 12:15:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[voter]]></category>
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					<description><![CDATA[नगरीय निकायों एवं पंचायतों की मतदाता सूची में नाम जोड़ने- काटने के लिये पहली बार ऑनलाइन आवेदन की सुविधा 8317 आवेदकों ने किया ऑनलाइन आवेदन भोपाल राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव ने बताया है कि प्रदेश में पहली बार नगरीय निकायों एवं त्रि-स्तरीय पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नगरीय निकायों एवं पंचायतों की मतदाता सूची में नाम जोड़ने- काटने के लिये पहली बार ऑनलाइन आवेदन की सुविधा</strong></p>
<p><strong>8317 आवेदकों ने किया ऑनलाइन आवेदन</strong></p>
<p><strong>भोपाल</strong></p>
<p>राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव ने बताया है कि प्रदेश में पहली बार नगरीय निकायों एवं त्रि-स्तरीय पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं को नाम जोड़ने, कटवाने और नाम संशोधन के लिये ऑनलाइन सुविधा दी गयी। इस सुविधा का लाभ लेते हुए कुल 8317 आवेदकों ने ऑनलाइन आवेदन किया। इनमें से नगरीय निकायों में 1496 और पंचायतों में 6848 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए।</p>
<p>नगरीय निकायों में 675 ऑनलाइन आवेदन नाम जोड़ने, 770 नाम कटवाने और 24 आवेदन नाम में संशोधन के लिये प्राप्त हुए हैं। वहीं त्रि-स्तरीय पंचायतों में 1701 आवेदन नाम जुड़वाने, 4960 नाम कटवाने और 187 आवेदन नाम में संशोधन के लिये प्राप्त हुए हैं। इन सभी आवेदनों पर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>मुक्तसर में 25 जून से शुरू होगा SIR अभियान, घर-घर जाकर वोटरों से भरवाए जाएंगे फॉर्म</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 May 2026 08:42:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
		<category><![CDATA[voter]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;श्री मुक्तसर साहिब &#160;भारत चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत जिले में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाएगा। जिला चुनाव अधिकारी सह उपायुक्त अमित कुमार पंचाल ने बताया कि जिले में 25 जून से 24 जुलाई तक विशेष अभियान चलाकर घर-घर जाकर मतदाताओं से फार्म &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&nbsp;श्री मुक्तसर साहिब</strong><br />
&nbsp;भारत चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत जिले में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाएगा। जिला चुनाव अधिकारी सह उपायुक्त अमित कुमार पंचाल ने बताया कि जिले में 25 जून से 24 जुलाई तक विशेष अभियान चलाकर घर-घर जाकर मतदाताओं से फार्म भरवाए जाएंगे।</p>
<p>जिला चुनाव अधिकारी ने बताया कि इस अभियान के लिए पूरे चुनावी अमले की ड्यूटी लगा दी गई है। जिले में 753 बूथ स्तरीय अधिकारी, 81 सुपरवाइजर, चार निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और आठ सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बूथ स्तरीय अधिकारी को औसतन 300 घर और लगभग 1200 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी गई है ताकि काम सुचारु रूप से पूरा किया जा सके।</p>
<p>उन्होंने बताया कि 15 जून से 24 जून तक बूथ स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षण देने और अन्य प्रशासनिक तैयारियों का कार्य किया जाएगा। इसके बाद 25 जून से घर-घर जाकर विशेष पुनरीक्षण अभियान शुरू होगा।</p>
<p><strong>दोहरी वोट रखना अपराध</strong><br />
जिला चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दोहरी वोट रखना भारतीय संविधान के अनुसार अपराध है, जिसके लिए एक वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जिले के सभी मतदाताओं को इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत फार्म भरना अनिवार्य होगा।</p>
<p>उपायुक्त ने बताया कि जिला चुनाव कार्यालय द्वारा की गई प्रारंभिक मैपिंग के तहत जिले के कुल 6 लाख 91 हजार 402 मतदाताओं में से 6 लाख 38 हजार 878 मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। यह कुल मतदाताओं का 92.40 प्रतिशत है। ग्रामीण और शहरी दोनों <strong>क्षेत्रों में यह कार्य लगभग पूरा हो चुका है।</strong></p>
<p><strong>जानें SIR के लिए जरूरी बातें</strong><br />
उन्होंने बताया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2003 को योग्यता तिथि निर्धारित की गई है। इसके अलावा मतदान केंद्रों को तर्कसंगत बनाने का कार्य 24 जुलाई 2026 तक पूरा किया जाएगा। मतदाता सूची का प्रारूप 31 जुलाई 2026 को प्रकाशित होगा।</p>
<p>उन्होंने जानकारी दी कि मतदाता सूचियों से संबंधित दावे और आपत्तियां 31 जुलाई से 30 अगस्त 2026 तक जमा करवाई जा सकेंगी, जबकि इनका निपटारा 28 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।</p>
<p>जिला चुनाव अधिकारी ने जिले के सभी मतदाताओं से अपील की कि वे इस अभियान में चुनाव अमले का पूरा सहयोग करें ताकि मतदाता सूचियों को पूरी तरह सही और पारदर्शी बनाया जा सके।</p>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>बंगाल में 18% वोटिंग, ममता ने गड़बड़ी का आरोप लगाया, नादिया में BJP कार्यकर्ता पर हमला</title>
		<link>https://newsx24.com/18-voter-turnout-in-bengal-mamata-banerjee-alleges-irregularities-bjp-worker-attacked-in-nadia/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 05:34:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
		<category><![CDATA[voter]]></category>
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					<description><![CDATA[कलकत्ता पश्चिम विधानसभा चुनाव के लिए आज दूसरे चरण की वोटिंग जारी है। मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हो चुका है लेकिन मतदान केंद्रों पर सुबह 6 बजे से ही मतदाताओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी।पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की मुख्य बातें: पहले चरण का मतदान पूरा हुआ; अनुमानित मतदान प्रतिशत 92% &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कलकत्ता</strong></p>
<p>पश्चिम विधानसभा चुनाव के लिए आज दूसरे चरण की वोटिंग जारी है। मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हो चुका है लेकिन मतदान केंद्रों पर सुबह 6 बजे से ही मतदाताओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी।पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की मुख्य बातें: पहले चरण का मतदान पूरा हुआ; अनुमानित मतदान प्रतिशत 92% से अधिक रहा।&nbsp;</p>
<p>दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल की 142 सीटों पर आज वोटिंग हो रही है, पिछले विधानसभा चुनाव में इन 142 में में 123 सीटों पर सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इस चरण के चुनाव में सबकी निगाहें भवानीपुर सीट पर टिकी हुई हैं, क्यूंकि यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने है। बता दें कि भवानीपुर ममता बनर्जी की परंपरागत सीट है, इस लिहाज से यहां पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। इससे पहले सुवेंदु अधिकारी 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हरा चुके हैं। गौरतलब हो कि पहले चरण की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 93% मतदान हुआ था। 4 मई को चुनाव के रिजल्ट आएंगे।</p>
<p><strong>&nbsp;बारानगर में एक बूथ पर 5 बार बदली गई EVM, रुका मतदान</strong><br />
बंगाल में हंगामे के बीच मतदान जारी है. इसी बीच बारानगर के बूथ नंबर 72 में ईवीएम में खराबी के कारण मतदान रोक दिया गया है. नाराज मतदाताओं का आरोप है कि मशीन को पांच बार बदला जा चुका है, फिर भी मतदान शुरू नहीं हुआ है. एक मतदाता, मिथु गरई ने कहा, &#039;हम सुबह 7 बजे से लाइन में खड़े हैं. वो कह रहे हैं कि ईवीएम खराब है. अब हम वापस जा रहे हैं।&nbsp;<br />
&nbsp;<br />
<strong>&nbsp;&#039;TMC बना रही है चौथी बार सरकार&#039;, अभिषेक बनर्जी का दावा</strong><br />
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने बंगाल चुनाव में बीजेपी पर केंद्रीय बलों के अत्याधिक तैनात का आरोप लगाया है. अब अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आईएनएस के युद्धपोत और राफेल, जिन्हें तैनात करना है बाकी आप वो भी कर दो जो भी चीज आपको बांग्लादेश और पाकिस्तान के खिलाफ करना है. वो आप बंगाल के लोगों के खिलाफ कर रहे हो।&nbsp;</p>
<p>टीएमसी नेता ने दावा किया कि बंगाल में 30 लाख मतदाताओं को वोट डालने से रोका गया है. उन्होंने अपनी एक साल पुरानी भविष्यवाणी को दोहराते हुए कहा कि टीएमसी 2021 से भी ज्यादा बहुमत हासिल करेगी. टीएमसी चौथी बार सरकार बना रही है. मैं आपसे 4 मई को मिलूंगा।&nbsp;</p>
<p>
<strong>भबानीपुर: ममता बनर्जी के मतदान केंद्र के बाहर पहुंचे शुभेंदु अधिकारी</strong><br />
ममता बनर्जी ने सुबह से ही अपने विधानसभा क्षेत्र भबानीपुर में डेरा डाला हुआ है. उन्होंने बीजेपी पर चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है. इसी बीच बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी भी भबानीपुर पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि बीजेपी नेता उसी मतदान केंद्र के बाहर मौजूद हैं, जहां ममता बनर्जी ने डेरा डाला हुआ है।&nbsp;</p>
<p><strong>मतदाताओं को डराया-धकाया जा रहा है, ममता का केंद्रीय बलों पर आरोप</strong><br />
बंगाल में मतदान के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यालय में बैठक के बाद केंद्रीय बलों पर मतदाताओं को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के घरों में जबरन घुसने का भी आरोप लगाया है।&nbsp;</p>
<p><strong>नदिया में भाजपा पोलिंग एजेंट पर हमला, अस्पताल में भर्ती</strong><br />
बंगाल विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के लिए मतदान जारी है. मतदान से पहले सुबह करीब 5:30 बजे चापड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हात्रा पंचायत में बूथ नंबर 52 पर भाजपा पोलिंग एजेंट मोशर्रफ पर कथित रूप से बदमाशों के एक गिरोह ने लोहे की रॉड से हमला कर दिया. पुलिस ने बाद में उन्हें बचाया और चापड़ा रूरल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है. डॉक्टरों ने बताया कि उनके सिर में चोट लगी है. उनके सिर में छह टांके ल<strong>गाए हैं।&nbsp;</strong></p>
<p><strong>मतदान केंद्र के बाहर हंगामा, CRPF ने कई लोगों को हटाया</strong><br />
मतदान के दौरान तनाव के बीच एक मतदान केंद्र के बाहर हंगामा मच गया. CRPF जवानों ने कई व्यक्तियों को वहां से हटा दिया. मतदाताओं के अनुसार, EVM मशीन में बार-बार खराबी आने के कारण तीन असफल प्रयासों के बाद सुबह करीब 8:30 बजे मतदान शुरू हो सका. मतदाताओं ने आरोप लगाया कि कुछ लोग मतदान प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने वहां से हटा दिया. एक मतदाता मयूर जैन ने बताया कि वो सुबह 7 बजे से इंतजार कर रहे थे।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा, &#039;मशीन खराब होने के कारण हमें तीन बार वोट डालने से रोका गया. नई मशीन लाई गई, लेकिन उसमें भी समस्या आई. अंदर चीख-पुकार मच गई और गेट बंद कर दिए गए. बाद में कुछ लोगों ने हंगामा करने की कोशिश की, उन्हें पीटा गया और ले जाया गया. आखिरकार सुबह 8:30 बजे मतदान शुरू हुआ.&#039; मयूर जैन ने ये भी कहा कि CRPF के जवान मौजूद थे और प्रशासन पूरी तरह सतर्क था।&nbsp;</p>
<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए बुधवार सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया है. दूसरे चरण में सात जिलों की 142 विधानसभा सीटों पर कुल 3,21,73,837 मतदाता वोट डालेंगे. इनमें 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाएं और 792 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं. मतदान के लिए 41,001 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां हर बूथ की वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2,321 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनात किया गया है. कोलकाता में सबसे अधिक 273 कंपनियां लगाई गई हैं।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए हैं. ड्रोन कैमरों से भी मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी. इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवार मैदान में हैं. भांगर सीट पर सबसे अधिक 19 उम्मीदवार हैं, जबकि हुगली जिले की गोगहाट सीट पर सबसे कम 5 उम्मीदवार हैं।&nbsp;</p>
<p>इस चरण में कई दिग्गज नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (भबानीपुर), विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी (भबानीपुर), राज्य मंत्री सुजीत बोस (बिधाननगर), फिरहाद हकीम (कोलकाता पोर्ट), ज्योतिप्रिया मल्लिक (हावड़ा), ब्रात्य बसु (दम दम), सोवंदेब चट्टोपाध्याय (बालीगंज) और बीजेपी के अर्जुन सिंह (नोआपाड़ा), स्वपन दासगुप्ता (राशबिहारी), रूद्रनील घोष (शिबपुर) शामिल हैं. सीपीआई(एम) की मीनाक्षी मुखर्जी (उत्तरपाड़ा), दीप्सिता धर (दम दम उत्तर), कलातन दासगुप्ता (पानीहाटी) और आईएसएफ के नौशाद सिद्दीकी (भांगर) भी चुनावी मैदान में हैं।&nbsp;</p>
<p>वहीं, राज्यपाल आर.एन. रवि और चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए मतदाताओं से भारी संख्या में निकलने की अपील की है. इससे पहले 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान में 152 सीटों पर 93.19 प्रतिशत रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया था।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>बंगाल में 10% बढ़ा मतदान, 3 करोड़ से ज्यादा वोटर्स की बंपर वोटिंग: ममता या BJP को मिलेगा फायदा?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:33:00 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[voter]]></category>
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					<description><![CDATA[कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 152 सीटों पर 1478 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. पहले फेज में मतदाओं का उत्साह देखने के लायक था और वोटिंग के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. आजादी के बाद पहली बार है कि बंगाल में 90 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कलकत्ता</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 152 सीटों पर 1478 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. पहले फेज में मतदाओं का उत्साह देखने के लायक था और वोटिंग के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. आजादी के बाद पहली बार है कि बंगाल में 90 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है. इसे लेकर सियासी दल अपने नफे-नुकसान का आकलन कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों पर 92.88 फीसदी मतदान रहा. अगर यही पैटर्न दूसरे चरण की 142 सीटों पर रहा, तो यह पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा वोटिंग टर्नआउट होगा. हालांकि, 2021 में बंगाल विधानसभा चुनाव 8 चरणों में हुए थे।&nbsp;</p>
<p>2021 के विधानसभा चुनाव में इन 152 सीटों पर 83.2 फीसदी मतदान रहा था जबकि 2026 के विधानसभा चुनाव 92.88 फीसदी वोटिंग हुई. इस लिहाज से 10 फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है. ऐसे में वोटिंग पैटर्न कहता है कि पिछले चुनाव से बढ़ी वोटिंग ने राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी है. ऐसे में सवाल है कि 10 फीसदी ज्यादा वोटिंग बीजेपी या फिर ममता बनर्जी किसे खाते में जाएगी?&nbsp;</p>
<p><strong>पहले चरण की सीटों पर वोटिंग के टूटे रिकॉर्ड</strong><br />
पश्चिम बंगाल के 16 जिलों की 152 सीटों पर गुरुवार को वोटिंग हुई, जिसमें 92.88 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. बंगाल में पुरुष की तुलना में महिला मतदाताओं की भागीदारी ज़्यादा रही. महिला मतदान प्रतिशत 92.69 फीसदी रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान 90.92 प्रतिशत था. तीसरे लिंग के मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 56.79 प्रतिशत रहा।&nbsp;</p>
<p>आजादी के बाद बंगाल में पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने वोट डाले हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बंगाल के पहले चरण और तमिलनाडु में वोटिंग संपन्न होने के बाद बयान जारी कर मताधिकार का प्रयोग करने वाले वोटरों और उनके जज्बे को सलाम किया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ये वोटिंग का सबसे ऊंचा ग्राफ है।&nbsp;</p>
<p>बंगाल में इतनी ज्यादा संख्या में मतदान कभी भी नहीं हुआ है. साल 2006 से लेकर अभी तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, उसमें&nbsp; 80 फीसदी से ज्यादा ही वोटिंग रही है. हालांकि, इस बार वोटिंग पैटर्न 90 फीसदी की सीमा को भी पार कर गया है, जिसके पीछे मुख्य वजह एसआईआर प्रक्रिया को मानी जा रही है. बंगाल में हुई एसआईआर प्रकिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के वोट काटे गए हैं, जिसके लिए लोग इस बार मतदान न करके जोखिम नहीं लेना चाहते. यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से निकलकर मतदान करने पहुंचे थे।&nbsp;</p>
<p><strong>किसके पक्ष में जाएगा बढ़ा 10 फीसदी वोट</strong><br />
पश्चिम बंगाल में गुरुवार को 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग हुई, जिनमें 12 जिलों में मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत या उससे ज्यादा रहा. इनमें भी सबसे ज्यादा वोटिंग दक्षिण दिनाजपुर में हुई, जहां 94.4 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले. दक्षिण दिनाजपुर में हर 100 में से लगभग 95 वोटर्स मतदान केंद्रों पर अपना वोट डालने आए. दक्षिण दिनाजपुर में कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जहां मुसलमानों की आबादी लगभग 25 प्रतिशत है और हिंदुओं की आबादी 73.5 प्रतिशत है. इस तरह हिंदू बहुल इलाके की सीटों पर जबरदस्त मतदान दिखा।</p>
<p>दक्षिण दिनाजपुर के बाद कूचबिहार जिले में 94 प्रतिशत मतदान हुआ है, बीरभूम में 93.2 प्रतिशत, जलपाईगुड़ी में 92.7 प्रतिशत और मुर्शिदाबाद ज़िले में भी लगभग 93 प्रतिशत मतदान हुआ है. मुर्शिदाबाद में पश्चिम बंगाल की 22 विधानसभा सीटें आती हैं. इस जिले में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं. यहां मुसलमानों की आबादी 65 प्रतिशत से ज्यादा है जबकि हिन्दुओं की आबादी सिर्फ 33 प्रतिशत है. हालांकि, पश्चिम बंगाल के पहले चरण में जो वोटिंग बढ़ी है, वो किसी एक इलाके में नहीं बल्कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही बेल्ट में देखने को मिल रही है।&nbsp;</p>
<p>पहले चरण में यह वही इलाका है, जहां पर मुस्लिम वोटर बड़ी संख्या में हैं और घुसपैठ का मुद्दा भी काफी हावी रहा.इसके अलावा वोटिंग में बढोत्तरी में एसआईआर (SIR) को भी अहम वजह माना जा रहा है.अब तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टीएमसी इस जिले में सबसे मजबूत थी, लेकिन अब हुमायूं कबीर चुनौती बन गए हैं. वहीं, बीजेपी ने इस इलाके में घुसपैठ का मुद्दा उठाया था, जिसके चलते भी ध्रुवीकरण हुआ है&nbsp;</p>
<p><strong>बीजेपी और टीएमसी किसे मिलेगा सियासी लाभ</strong><br />
विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी ने पहले चरण की 152 में से 59 सीटें जीती थीं, जबकि दूसरे चरण की 142 सीटों में वह केवल 18 पर सिमट गई थी.ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस 2021 में उसने पहले चरण की 152 में से 92 सीटें जीती थीं, जबकि दूसरे चरण में 142 में से 123 सीटों पर कब्जा जमाया था।&nbsp;</p>
<p>2011 से 2024 तक के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें, तो पहले चरण की इन 152 सीटों पर बीजेपी का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है. 2011 में बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. 2016 में यह आंकड़ा सिर्फ 3 तक पहुंचा. लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर बीजेपी ने 86 पर बढ़त बनाई. 2021 विधानसभा चुनाव में 59 सीटें जीतीं. इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में 64 सीटों पर आगे रही।&nbsp;</p>
<p>पीएम मोदी और अमित शाह की अगुवाई में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत इस चरण में झोंक दी है. हालांकि, TMC के लिए भी यह इलाका किसी दुर्ग से कम नहीं है. 2011 में उसने 68 सीटें जीतीं, 2016 में 86 सीटों पर कब्जा किया था जबकि 2021 में 92 सीटों पर पहुंच गई थी. 2019 लोकसभा चुनाव में 57 सीटों पर टीएमसी को बढ़त बनाई. TMC ने 2021 में 92 सीटें जीतकर बड़ा संदेश दिया और 2024 लोकसभा चुनाव में 76 सीटों पर आगे रही. TMC के लिए यह चरण परंपरागत तौर पर मजबूत रहा है, हालांकि 2019 में उसे झटका भी लगा था।&nbsp;</p>
<p>पहले चरण की सीटों में मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिले अहम हैं, जहां 50 से 66 फीसदी तक मुस्लिम हैं. इन तीन जिलों की 43 सीटों में से पिछली बार TMC ने 35 सीटें जीती थीं, जबकि BJP को 8 सीटें मिली थीं. इस बार बीजेपी को हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण पर भरोसा है और ममता बनर्जी की बढ़त को चुनौती देने की थी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>पश्चिम बंगाल का क्या कहता है वोटिंग पैटर्न</strong><br />
आजादी के बाद से पश्चिम बंगाल की सियासत में तीन बार सत्ता परिवर्तन हुए हैं, जिसमें 1952 से लेकर 1977 तक कांग्रेस का दबदबा रहा. 1977 में लेफ्ट ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर पहली बार बंगाल में सरकार बनाई थी. 1977 में 56.15 फीसदी मतदान हुआ था जबकि 1972 के चुनाव में हुए 60.80 फीसदी मतदान की तुलना में 4 फीसदी कम रहा।&nbsp;</p>
<p>बंगाल में दूसरी बार सत्ता परिवर्तन 2011 में हुआ जब ममता बनर्जी ने लेफ्ट को सत्ता से बाहर करने में सफल रही थी. 2006 के चुनाव में 81.58 फीसदी मतदान रहा जबकि 2011 में 84.72 फीसदी वोटिंग हुई थी. इस तरह से बंगाल में तीन फीसदी ज्यादा वोटिंग ने लेफ्ट को सत्ता से बाहर कर दिया था और ममता ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आईं थी।&nbsp;</p>
<p>2016 के विधानसभा चुनाव में 83.02 फीसदी मतदान रहा और 2021 के विधानसभा चुनाव में 82.30 फीसदी वोटिंग रही. इन तरह दोनों विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौंटी थी. ये वोटिंग पैटर्न बता रहा है कि ममता राज में टीएमसी को वोटिंग प्रतिशत घटने का लाभ मिला, लेकिन इस बार 10 फीसदी वोटिंग के बढ़ने का लाभ क्या ममता बनर्जी को मिलेगा या फिर बीजेपी के लिए मुफीद होगा?&nbsp;</p>
<p><strong>बंगाल में वोटिंग फीसदी बढ़ने के कारण</strong><br />
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में में मत प्रतिशत बढ़ने के अलग-अलग कारणों में से एक कारण एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न) को भी माना जा रहा है. एसआईआर प्रक्रिया के दौरान काफी वोटर्स मृत, डिस्प्लेस और नॉन एग्ज़िस्टिंग वोटर्स की वजह से काटे गए. ऐसे में जहां मत घटा, तो मत प्रतिशत बढ़ा है।&nbsp;</p>
<p>एसआईआर की वजह से लोग अलर्ट हुए, जिसने मतदाताओं को बूथ तक जाने के लिए मजबूर किया. एसआईआर प्रक्रिया के बीच नागरिकता (CAA/NRC) और वोटर लिस्ट से नाम कटने की चर्चाओं के बीच, आम जनता में यह संदेश गया कि वोट डालना उनकी पहचान और नागरिकता साबित करने का सबसे बड़ा जरिया है।&nbsp;</p>
<p>एसआईआर प्रक्रिया के चलते बड़ी संख्या में लोग बंगाल आए हैं, विभिन्न राज्यों में प्रवास करने वाले मतदाताओं भी बड़ी संख्या में पहुंचकर वोटिंग किए हैं.&nbsp; बंगाल में महिला वोटर बड़ी संख्या में घर से निकलकर बूथ तक गईं हैं, जिनकी संख्या पुरुषों की तुलना में काफी ज्यादा रही।&nbsp;</p>
<p>बीजेपी और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर ने दोनों पक्षों के कैडरों को जमीन पर बेहद सक्रिय कर दिया. &#039;करो या मरो&#039; की इस लड़ाई में मतदाताओं को बूथ तक लाने के लिए जबरदस्त लामबंदी की गई. इस बार दोनों ही पार्टियां अपने-अपने वोटों को बूथ तक ले जाने में पूरी ताकत लगा दी है. इसके चलते भी वोटिंग बढ़ी है।&nbsp;</p>
<p>वोटिंग बढ़ने के दूसरा कारण ये भी है कि चुनाव आयोग ने बंगाल में इस बार बड़ी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बल लगाए हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग बिना डरे वोट डालने के लिए पहुंचे हैं. ऐसे में बढ़ी वोटिंग फीसदी किसका खेल बनाएगी और किसका बिगाड़ेगी, ये तो 4 मई को ही पता चलेगा, लेकिन बड़ी संख्या में वोटर बूथ तक पहुंचकर वोटिंग कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>मप्र में 34.25 लाख मतदाता हटने से बढ़ी चिंता, भाजपा और कांग्रेस कराएंगी मतदाता सत्यापन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 03:53:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[भोपाल &#160;Madhya Pradesh में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एसआइआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने सियासी दलों की चिंता बढ़ा दी है। अंतिम सूची से 34.25 लाख मतदाताओं के नाम हटने के बाद खासतौर पर Bharatiya Janata Party सक्रिय हो गई है। पार्टी को आशंका है कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कमी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong><br />
&nbsp;Madhya Pradesh में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एसआइआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने सियासी दलों की चिंता बढ़ा दी है। अंतिम सूची से 34.25 लाख मतदाताओं के नाम हटने के बाद खासतौर पर Bharatiya Janata Party सक्रिय हो गई है।</p>
<p>पार्टी को आशंका है कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कमी आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भाजपा ने बूथ स्तर पर रणनीति बनाते हुए अपने बूथ लेवल एजेंट बीएलए को सक्रिय करने का निर्णय लिया है।</p>
<p><strong>बूथवार सत्यापन का अभियान</strong></p>
<p>भाजपा अब बूथवार उन मतदाताओं की तलाश करेगी, जो या तो स्थानांतरित हो गए हैं या अनुपस्थित दर्ज किए गए हैं। यह संख्या 31.50 लाख से अधिक बताई जा रही है। पार्टी का कहना है कि यदि ये मतदाता पात्र हैं तो उनके नाम दोबारा सूची में जुड़वाने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा प्रदेश एसआइआर टोली के सहसंयोजक एएस उप्पल ने अभियान चलाने की घोषणा की है।</p>
<p><strong>कांग्रेस भी करेगी घर घर मिलान</strong></p>
<p>Indian National Congress ने भी अपने बीएलए के माध्यम से हटाए गए मतदाताओं का सत्यापन कराने का फैसला किया है। कांग्रेस का कहना है कि वह पुरानी, प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची का मिलान कराएगी। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई तो न्यायालय का रुख किया जाएगा।</p>
<p><strong>आंकड़ों में बदलाव की तस्वीर</strong></p>
<p>&nbsp; &nbsp; एसआइआर से पहले कुल मतदाता 5,74,06,143 थे। प्रारूप सूची के बाद यह संख्या घटकर 5,31,31,983 रह गई। अंतिम सूची में कुल मतदाता 5,39,81,065 दर्ज किए गए, यानी प्रारूप के बाद 8,49,082 की शुद्ध वृद्धि हुई। पूर्व सूची के अनुरूप 34,25,078 नाम हटाए गए।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; श्रेणीवार देखें तो 8।46 लाख नाम मृतक श्रेणी में हटे, 31।50 लाख अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए गए और 2।77 लाख नाम दो या अधिक स्थानों पर दर्ज थे। पुरुष मतदाता 2,93,91,548 से घटकर 2,79,04,975 और महिला मतदाता 2,80,13,362 से घटकर 2,60,75,186 रह गए।</p>
<p>&nbsp; &nbsp; राजनीतिक दलों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है, इसलिए अब दोनों प्रमुख दल बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने में जुट गए हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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