फैक्ट्रियों के लिए जमीन और जरूरी सुविधाएं बढ़ाने पर काम

फैक्ट्री में नई मशीनें हों, लेकिन बाहर सड़क खराब हो या माल लेकर जाने वाला ट्रक घंटों फंसा रहे, तो कारोबार में परेशानी होती है। पंजाब के औद्योगिक इलाकों में सड़क, पानी और सीवरेज बेहतर करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने 2026 की उद्योग नीति में पुराने फोकल पॉइंट, यानी तय औद्योगिक इलाकों, को सुधारने और नए औद्योगिक पार्क बनाने की बात रखी है।
लुधियाना फोकल पॉइंट में मई 2026 में शुरू हुए काम इसका एक उदाहरण हैं। उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने करीब 52 करोड़ रुपये के कामों की शुरुआत की। सरकारी जानकारी के अनुसार, इनमें लगभग 16 करोड़ रुपये सड़कों, 21 करोड़ रुपये पार्कों और हरियाली, 6 करोड़ रुपये पानी व सीवरेज और 9 करोड़ रुपये स्ट्रीट लाइटों के लिए रखे गए। ये काम शुरू किए गए हैं; इन्हें अभी पूरा हुआ नहीं माना जा सकता।
नीति में राज्य के 52 पुराने फोकल पॉइंट की कमियां दूर करने का लक्ष्य भी है। इसमें सड़क, बिजली, पानी, जल निकासी और इंटरनेट जैसी सुविधाएं शामिल हैं। छोटे कारोबारियों के लिए तैयार शेड और मिलकर इस्तेमाल की जाने वाली सुविधाओं की योजना भी है। इससे नया कारोबार शुरू करते समय जमीन और भवन पर होने वाला खर्च कम हो सकता है। गंदा पानी साफ करने के साझा संयंत्र, पार्किंग और माल रखने की जगह भी काम आसान बना सकती है।
पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम, जिसे पीएसआईईसी कहा जाता है, इन औद्योगिक इलाकों में प्लॉट और सुविधाओं का काम संभालता है। जिन लोगों को प्लॉट मिले हैं, वे निगम की ऑनलाइन व्यवस्था में अपनी संपत्ति का ब्योरा और बकाया रकम देख सकते हैं। प्लॉट से जुड़ी सेवाओं के लिए आवेदन, पानी व सीवरेज के बिल का भुगतान और आवेदन की स्थिति देखने की सुविधा भी है। इससे बार-बार दफ्तर जाने की जरूरत कम हो सकती है।
औद्योगिक प्लॉट देने के लिए निगम का ऑनलाइन नीलामी पोर्टल भी है। इसमें खाली प्लॉट का आकार, नीलामी की शुरुआती तय कीमत, नक्शा और नियम देखे जा सकते हैं। इससे कारोबारी आवेदन करने से पहले पूरी जानकारी ले सकते हैं। हालांकि प्लॉट मिलने के बाद सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं मिलना भी उतना ही जरूरी है।
भगवंत मान सरकार की नीति में प्लॉट की ऑनलाइन नीलामी और बड़े प्लॉट को छोटे हिस्सों में बांटने जैसे उपाय शामिल हैं। लीज पर मिली संपत्ति को नियमों के अनुसार पूरा मालिकाना हक देने वाली फ्रीहोल्ड संपत्ति में बदलने की व्यवस्था भी है। कई फैक्ट्रियों को विस्तार के लिए और जमीन चाहिए, लेकिन कागजी काम और मंजूरी में समय लगता है। ये बदलाव ठीक से लागू हुए तो पुराने और पारिवारिक कारोबारों को भी राहत मिल सकती है।
इन कामों का फायदा सिर्फ कारोबारियों तक सीमित नहीं है। औद्योगिक इलाकों में रोज काम करने वाले लोगों के लिए भी अच्छे रास्ते, रोशनी, पानी और जल निकासी जरूरी हैं। सुविधाएं सुधरने से उनका रोज का काम आसान हो सकता है। सरकार की योजनाओं का असर इसी बदलाव से नजर आएगा।
अब यह देखना जरूरी है कि मंजूर बजट से काम कब पूरा होता है और उसकी गुणवत्ता कैसी रहती है। काम की समयसीमा और प्रगति की जानकारी नियमित मिले तो कारोबारी भी अपनी योजना बेहतर बना सकते हैं। लुधियाना और दूसरे औद्योगिक इलाकों में सुधार के साथ प्लॉट से जुड़ी ऑनलाइन सेवाएं भी ठीक से चलनी चाहिए। लगातार होने वाले ऐसे सुधारों से ही वहां की स्थिति बेहतर होगी।



