बिहार/झारखंडराज्य

RBI गवर्नर की सम्राट से मुलाकात ने बढ़ाई हलचल, बड़े नेताओं को किया बायपास—क्या है इसके मायने?

 

पटना

 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर से किसी राज्य के मुख्यमंत्री से मुलाकात कोई बड़ी बात नहीं है। ये रूटीन मीटिंग का हिस्सा माना जाता है। मगर, आरबीआई चीफ ने पटना में न वित्त मंत्री न ही दूसरे डिप्टी सीएम से मुलाकात की बल्कि सम्राट चौधरी से उनकी मुलाकात जरूर हुई। दरअसल, बिहार की राजनीति इस समय उस मोड़ पर खड़ी है, जहां हर छोटी मुलाकात के बड़े मायने निकाले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पद छोड़ने की चर्चाओं के बीच बीजेपी में नए नेता की रेस शुरू है। इसी कड़ी में रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की पटना विजिट ने सियासी घी का काम किया।

RBI चीफ की मुलाकात के निकाले जा रहे मायने
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास जाकर नीतीश कुमार से मुलाकात की, लेकिन उसके तुरंत बाद वे केवल डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पहुंचे। उन्होंने न तो दूसरे डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा से मुलाकात की और न ही राज्य के वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव से। इस 'चुनिंदा' मुलाकात ने गलियारों में चर्चा छेड़ दी है कि क्या दिल्ली ने अगले सीएम का नाम तय कर लिया है?

प्रोटोकॉल से हटकर मुलाकात की हो रही चर्चा
सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि अगर RBI गवर्नर को शिष्टाचार भेंट करनी ही थी, तो वित्त मंत्री का नंबर सबसे पहले आना चाहिए था। सीएम से मिलने के बाद किसी एक ही डिप्टी सीएम के घर जाना सामान्य प्रक्रिया नहीं मानी जा रही है। जानकार इसे सम्राट चौधरी के बढ़ते कद और केंद्र के 'ग्रीन सिग्नल' के तौर पर देख रहे हैं।

विजय सिन्हा और वित्त मंत्री से मुलाकात नहीं
बिहार की एनडीए सरकार में विजय कुमार सिन्हा भी समान पद पर हैं। बिजेंद्र प्रसाद यादव वित्त मंत्री हैं। गवर्नर का इन दोनों दिग्गजों से दूरी बनाना और केवल सम्राट चौधरी से मिलना महज इत्तेफाक नहीं लग रहा। सम्राट के पास गृह विभाग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसे भावी मुख्यमंत्री की दावेदारी के पक्ष में एक मजबूत तर्क माना जा रहा है।

'समृद्धि यात्रा' में नीतीश बता रहे उत्तराधिकारी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों 'समृद्धि यात्रा' पर हैं। इस दौरान कई मौकों पर उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर गर्मजोशी दिखाते देखा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार खुद भी सम्राट को आगे कर ये संकेत दे रहे हैं कि उनके बाद गठबंधन की कमान किसके हाथों में सुरक्षित हो सकती है?

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