छत्तीसगढ़राज्य

अक्षय तृतीया से पहले बाल विवाह पर सख्ती, डॉ. वर्णिका शर्मा के सख्त निर्देश

रायपुर. 
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा दिनांक 10-04-2026 को आगामी 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया पर्व के परिप्रेक्ष्य में ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों एवं जिलों में बाल विवाह की रोकथाम संबंधी सक्रियता बढ़ाये जाने के आशय से आयोग कार्यालय में अपरान्ह 02ः00 से 05ः00 बजे तक एक वीडियो काॅन्फ्रेसिंग का आयोजन किया गया । वीडियो काॅफे्रेसिंग में आयोग की माननीय अध्यक्ष महोदया डाॅ. वर्णिका शर्मा, श्रीमती संगीता बिन्द सहायक संचालक तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सर्व जिला कार्यक्रम अधिकारी, सर्व जिला बाल संरक्षण अधिकारियों ने प्रतिभागी के रूप में भाग लिया। वीडियो काॅन्फ्रेसिंग में बाल विवाह की रोकथाम पर जिलेवार जानकारी विभाग के अधिकारियों द्वारा प्राप्त हुई । डाॅ. वर्णिका शर्मा द्वारा समस्त जिलों से मुख्य बिन्दुओं यथा बाल विवाह के संबंध में मुनादी, संबंधितों को आवश्यक निर्देश पत्र जारी किये जाने, कार्यवाही हेतु टीम का गठन कर उसे सक्रिय किये जाने, बाल विवाह की रोकथाम हेतु पूर्व जागरूकता संबंधी कार्यवाही यथा बैठक, प्रचार-प्रसार की रणनीति एवं नवाचारों पर प्रतिभागियों से वीडियो काॅन्फ्रेसिंग में संवाद किया गया ।  

वीडियो काॅन्फ्रेसिंग में विभिन्न जिलों के अधिकारियों द्वारा बाल विवाह संबंधी रोकथाम हेतु टीम का गठन किये जाने तथा मार्च एवं अप्रैल माह के शुरूआत में ग्राम पंचायत तथा नगरीय क्षेत्रों में बैठक का आयोजन किये जाने, प्रचार प्रसार हेतु दीवालों पर लेखन, नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाल विवाह को रोके जाने पर स्थानीय प्रशासन के माध्यम से किये गये कार्यों से अवगत कराया गया।  

संबंधित वीडियो काॅन्फ्रेसिंग में बाल विवाह की रोकथाम के संबंध में नवाचारों पर कांकेर जिले से ’’मेरी आवाज सुनो’’ जिसमें 17-18 वर्ष की आयु की बालिकाओं द्वारा अपने मन की बात खुलकर रखने एवं अपनी समस्याओं को व्यक्त करने के सशक्त मंच प्रदान करने संबंधी नवाचारी कैम्पेन के माध्यम से सराहनीय कार्य हो रहा है। इस नवाचार के जरिए बालिकाओं में जागरूकता एवं आत्मविश्वास बढ़ेगा जिससे वे बाल विवाह जैसी कुरीतियों के विरूद्ध आवाज उठा सकेंगी। बीजापुर जिले से ’’बीजा दूतिन’’ के माध्यम से स्वयं सेवी किशोर किशोरियों द्वारा बाल विवाह की स्थिति में संबंधित बालिका को क्या करना चाहिए ? इस संबंध में जागरूक किया जा रहा है। सुकमा जिले से स्थानीय गोंडी भाषा व जशपुर जिले से स्थानीय सादरी व कुरूख भाषा में बाल विवाह रोकने संबंधी प्रचार प्रसार की पहल को डाॅ. वर्णिका शर्मा ने काफी सराहा एवं अन्य जिलों से भी आवश्यकतानुसार बाल विवाह रोकथाम के प्रचार प्रसार में स्थानीयता का पुट डाले जाने का वीडियो काॅन्फ्रेसिंग के माध्यम से आग्रह किया। बाल विवाह बाहुल्य जिला सूरजपुर से वर्षवार बाल विवाह के प्रकरणांे में क्रमिक रूप से कमी आना एवं गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले अंतर्गत आने वाली विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय की बालिका द्वारा स्वयं अपने बाल विवाह रोकने के लिए पूर्व सूचना दिये जाने जैसे नवाचारों पर वीडियो काॅन्फ्रेसिंग के माध्यम से हर्ष व्यक्त किया। 

अध्यक्ष महोदया द्वारा वीडियो काॅन्फ्रेसिंग के माध्यम से जिलों के अधिकारियों को 14 अप्रैल को आयोजित होने वाली आगामी विशेष ग्राम सभा में अनिवार्यतः बाल विवाह के रोकथाम के संबंध में पंचायत स्तरीय अमले में पुनः सक्रियता लाने के आशय से जानकारी दिये जाने हेतु निर्देश दिये । साथ ही कतिपय जिलों द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध 2006 की धारा 16 की उपधारा 3 अंतर्गत बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के कर्तव्यों को सरल भाषा में प्रसारित कराये जाने के अनुरोध को डाॅ. वर्णिका शर्मा द्वारा संज्ञान में लिया गया। अंत में प्रचार प्रसार में स्थानीय भाषा के अधिक से अधिक उपयोग, की गई कार्यवाहियों का लगातार अनुवर्तन, स्वयंसेवी युवाओं का सहयोग लिये जाने, चाइल्ड हेल्प लाईन नम्बर 1098, बाल विवाह की रोकथाम में प्रयोग किये जाने वाले प्रचार प्रसार माध्यमों को जन जन तक पहुँचा कर समाज में बाल विवाह की कुरीति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाये जाने का परामर्श दिया गया।

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