
रायपुर
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि सिंधी समाज स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रतीक है। देश के विभाजन की विभीषिका और विस्थापन की पीड़ा सहने के बावजूद इस समाज ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प से न केवल स्वयं को पुनः स्थापित किया, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाई है। राज्यपाल डेका आज रायपुर में पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित ‘मुखी संवाद’ (विचार, तर्क एवं सुझाव परिचर्चा) कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
विस्थापन के दर्द को ताकत बनाकर रचा नया इतिहास
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विभाजन के समय अपनी मातृभूमि, संपत्ति और सांस्कृतिक धरोहरों को छोड़कर आए सिंधी समाज ने उस असीम वेदना को अपनी शक्ति बनाया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद समाज ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए व्यापार, उद्योग, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय मुकाम हासिल किया है।
पंचायतें समाज की रीढ़, 128 पंचायतों की एकजुटता सराहनीय
डेका ने कहा कि किसी भी समाज की रीढ़ उसकी पंचायतें होती हैं। सिंधी समाज की पंचायत व्यवस्था सामाजिक समरसता बनाए रखने के साथ-साथ प्रगतिशील सोच को भी बढ़ावा देती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि ‘मुखी संवाद’ में प्रदेशभर की 128 पंचायतों के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्रित हुए हैं, जो समाज की संगठनात्मक शक्ति को दर्शाता है।
युवा पीढ़ी को भाषा और संस्कृति से जोड़ने का आह्वान
राज्यपाल ने समाज के प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे सिंधी भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए एकजुट होकर प्रयास करें। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने तथा महिला विंग के माध्यम से महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। इस अवसर पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए पंचायतों के मुखी, प्रतिनिधि, महिला विंग के सदस्य तथा बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।



