मध्य प्रदेशराज्य

एमपी हाईकोर्ट को मिलेंगे 7 नए जज, संख्या बढ़कर 45 होगी; सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दी मंजूरी

जबलपुर 

 उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सात नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। सोमवार को हुई बैठक के बाद कॉलेजियम ने आधिकारिक बयान जारी कर इन नियुक्तियों की अनुशंसा की। इस कदम से उच्च न्यायालय में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 45 हो जाएगी, जिससे लंबित मुकदमों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।

इन अधिवक्ताओं की हुई अनुशंसा
कॉलेजियम ने जिन सात अधिवक्ताओं को न्यायाधीश बनाने की मंजूरी दी है, उनमें इंदौर के डॉ. विवेक शरण, ग्वालियर के राजेश कुमार शुक्ला और इंदौर की भक्ति व्यास शामिल हैं। इनके अलावा जबलपुर से कनक गहरवार उर्फ कनक लता सिंह, श्रेयस पंडित और अविनाश जरगर के नाम पर मुहर लगी है। सातवें अधिवक्ता के रूप में नई दिल्ली के मृणाल एलकर उर्फ मृणाल मजुमदार के नाम की सिफारिश की गई है। इन सभी अधिवक्ताओं को न्यायाधीश पद पर नियुक्त करने की प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी।

स्वीकृत पदों और रिक्तियों का गणित
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के कुल 53 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में केवल 38 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं, जिसके कारण 15 पद खाली थे। सात नए न्यायाधीशों की पदोन्नति और औपचारिक नियुक्ति के बाद कुल कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 45 हो जाएगी। इसके बावजूद स्वीकृत क्षमता के मुकाबले आठ पद खाली रहेंगे। इस वृद्धि से न्यायालय के कार्यभार में कुछ राहत मिलने और मुकदमों के त्वरित निस्तारण की संभावना जताई जा रही है।

कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद अब केंद्र सरकार के विधि मंत्रालय और राष्ट्रपति भवन के स्तर पर आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। वहां से औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही सातों अधिवक्ता पद की शपथ लेंगे और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगे।

53 स्वीकृत पदों में आठ रहेंगे रिक्त
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 53 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में 38 न्यायाधीश कार्यरत हैं। सातों प्रस्तावित नियुक्तियां पूरी होने पर यह संख्या 45 हो जाएगी। इसके बावजूद स्वीकृत पदों के मुकाबले आठ पद रिक्त रहेंगे।

लंबित मामलों के निपटारे की उम्मीद
न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता में वृद्धि हो सकती है। इससे लंबित प्रकरणों के निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव नए न्यायाधीशों की नियुक्ति, मामलों के आवंटन और न्यायालय के समग्र कार्यभार पर निर्भर करेगा।

अब औपचारिक नियुक्ति की प्रतीक्षा
कॉलेजियम की अनुशंसा नियुक्ति प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। इसके बाद केंद्र सरकार और राष्ट्रपति के स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने तथा नियुक्ति की अधिसूचना जारी होने पर ही सातों अधिवक्ताओं की न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति औपचारिक रूप से पूरी होगी।

 

 

 

 

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