पंजाब

अपना कारोबार शुरू करने वाले पंजाब के युवाओं को मिल रही मदद

पंजाब के कई युवा नौकरी के लिए दूसरे शहरों या विदेश जाते हैं। कुछ युवा अपना उत्पाद या सेवा तैयार करके कारोबार शुरू करना चाहते हैं। कोई खेती से जुड़ी समस्या का हल खोज रहा है, कोई इलाज की सेवाओं में तकनीक ला रहा है, तो कोई सॉफ्टवेयर बना रहा है। ऐसे नए कारोबारों को स्टार्टअप कहा जाता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने इनकी मदद को अपनी उद्योग नीति और अलग कार्यक्रमों में जगह दी है।

9 जून 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 31 स्टार्टअप शुरू करने वालों को कुल 1.07 करोड़ रुपये की शुरुआती आर्थिक मदद दी। सरकारी जानकारी के अनुसार, सात स्टार्टअप को 5-5 लाख और 24 को 3-3 लाख रुपये मिले। शुरुआती दिनों में ऐसी मदद से छोटे लेकिन जरूरी खर्च पूरे किए जा सकते हैं। साल 2026 की नीति में शर्तें पूरी करने वाले स्टार्टअप के लिए इस मदद की अधिकतम सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई है।

जुलाई 2026 में मोहाली में पंजाब इन्वेस्टर सर्कल और स्टार्टअप पंजाब हब के नए कार्यक्रम न्यूरॉन 2.0 की शुरुआत हुई। इन्वेस्टर सर्कल ऐसा मंच है, जहां नया कारोबार शुरू करने वाले लोग निवेशकों और अनुभवी कारोबारियों से मिल सकें और सलाह ले सकें। शुरुआत के मौके पर आईटी, स्वास्थ्य, खेती की तकनीक और सामान बनाने जैसे क्षेत्रों के 14 स्टार्टअप ने अपने विचार रखे।

जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट में उद्योग विभाग के हवाले से बताया गया कि पंजाब में नए कारोबार बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, स्टार्टअप पंजाब उस समय तक 222 कारोबारों को 6.8 करोड़ रुपये से ज्यादा की शुरुआती मदद दे चुका था। यह बताता है कि सरकार ने कितनी सहायता दी। लेकिन कारोबार की सफलता उसकी बिक्री, ग्राहकों की मांग, रोजगार और लंबे समय तक चलने से तय होगी।

युवाओं को पैसे के साथ प्रयोगशाला, उत्पाद की जांच और अनुभवी लोगों की सलाह भी चाहिए। अपनी खोज या डिजाइन के कानूनी अधिकार सुरक्षित करने में भी मदद जरूरी है। न्यूरॉन 2.0 के तहत ऑनलाइन सुरक्षा की प्रयोगशाला और बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधाएं बनाने की घोषणा की गई है। विभाग के अनुसार, पहले न्यूरॉन कार्यक्रम में 114 तकनीकी स्टार्टअप को कारोबार शुरू करने और बढ़ाने की मदद मिली थी। खोज, डिजाइन और दूसरे बौद्धिक अधिकारों से जुड़े 67 आवेदन भी आगे बढ़ाए गए थे।

भगवंत मान सरकार की उद्योग नीति में रोपड़, मोहाली और दूसरे शहरों के तकनीकी संस्थानों व विश्वविद्यालयों को उद्योगों से जोड़ने की बात है। कॉलेज में तैयार किसी विचार को बाजार तक पहुंचाने के लिए उसकी जांच, उसे बनाने की व्यवस्था और ग्राहकों की जरूरत समझना जरूरी है। खेती, खाने-पीने की चीजों, स्वास्थ्य और आईटी से जुड़े नए काम पंजाब की स्थानीय जरूरतें भी पूरी कर सकते हैं। इसके लिए कॉलेजों और उद्योगों को लगातार मिलकर काम करना होगा।

अपना कारोबार शुरू करने के मौके सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं होने चाहिए। गांवों की महिलाओं और युवाओं को पास में प्रशिक्षण, ऑनलाइन सेवाएं और साझा काम करने की जगह मिले तो शुरुआत आसान हो सकती है। नीति में ऐसे विकल्प हैं। साथ ही यह जानकारी भी आसानी से मिलनी चाहिए कि कौन-सी सुविधा कहां और कब मिलेगी।

इन कार्यक्रमों से कुछ कारोबार शुरू करने वालों को आर्थिक मदद मिली है और निवेशकों से मिलने का मंच भी बना है। अब देखना होगा कि मदद पाने वाले कितने कारोबार चलते रहे, उनकी बिक्री कितनी बढ़ी और कितने लोगों को काम मिला। युवाओं के विचारों का फायदा तभी बढ़ेगा, जब शुरुआत के बाद भी उन्हें कारोबार आगे बढ़ाने का सही मौका मिलेगा।

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