इलेक्ट्रिक गाड़ियों और इलेक्ट्रॉनिक चिप के उद्योग बढ़ाने की तैयारी

इलेक्ट्रिक गाड़ियों, मोबाइल फोन और इलाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के साथ उद्योगों की जरूरतें बदल रही हैं। पंजाब भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में काम बढ़ाना चाहता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने 2026 में इलेक्ट्रिक वाहन बनाने और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की डिजाइन, निर्माण व सेमीकंडक्टर के लिए अलग नीतियां जारी की हैं। सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक चिप बनाने में होता है।
8 मार्च 2026 को जारी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण नीति में गाड़ियां, बैटरी, मोटर, कंट्रोलर, चार्जिंग उपकरण और दूसरे पुर्जे शामिल हैं। शर्तें पूरी करने वाले निवेशकों के लिए कुल लाभ की अधिकतम सीमा स्थायी संपत्ति पर हुए निवेश का 125 प्रतिशत या 500 करोड़ रुपये, दोनों में जो कम हो, उतनी रखी गई है। यह नीति के तहत मिलने वाले कुल लाभ की सीमा है। इसका मतलब हर निवेशक को तुरंत इतनी नकद रकम मिलना नहीं है।
गाड़ियां बनाने के साथ उन्हें चार्ज करने की सुविधा पर भी ध्यान है। नीति में सार्वजनिक चार्जिंग केंद्रों के लिए राज्य की बिजली कंपनी से विशेष कनेक्शन और सरकारी रूप से तय बदलने वाली दर पर बिजली देने की व्यवस्था है। नई इलेक्ट्रिक गाड़ियों के पंजीकरण शुल्क और नीति की अवधि में रोड टैक्स से जुड़ी छूट का भी जिक्र है। कौन-सी छूट मिलेगी, यह गाड़ी के प्रकार और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। इन उपायों का फायदा चार्जिंग केंद्र बढ़ने और लोगों को आसानी से उपलब्ध होने पर दिखेगा।
नीति में तैयार गाड़ियों के साथ उनके पुर्जे बनाने वाली फैक्ट्रियों को भी शामिल किया गया है। बैटरी, मोटर और कंट्रोलर बनाने के लिए अलग तकनीकी जानकारी चाहिए। इससे पंजाब के पुराने इंजीनियरिंग कारोबारों को नए ग्राहक मिल सकते हैं। लेकिन मदद की नीति बनना और फैक्ट्री में उत्पादन शुरू होना अलग-अलग चरण हैं। इसलिए नए निवेश की मंजूरी और उसके बाद होने वाला काम देखना जरूरी है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के लिए भी सरकार ने अलग नीति जारी की है। इसमें चिप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने वाली इकाइयों को मदद देने की शर्तें हैं। इन उद्योगों को भरोसेमंद बिजली, अच्छी गुणवत्ता का पानी, प्रशिक्षित कर्मचारी और बहुत सटीक मशीनों की जरूरत होती है। पंजाब सरकार ऐसी जरूरतों के लिए सुविधाएं तैयार करना चाहती है। अभी नीति में मदद की घोषणा को चालू चिप फैक्ट्री या पूरी हो चुकी परियोजना नहीं माना जा सकता।
भगवंत मान सरकार की इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण और सेमीकंडक्टर नीति 2026 में योग्य इकाइयों को 5 साल तक पानी के शुल्क का 25 प्रतिशत वापस देने की व्यवस्था है। जरूरत और संबंधित नियामक संस्था की मंजूरी के अनुसार दो अलग बिजली ग्रिड से आपूर्ति देने का प्रावधान भी है। ये सुविधाएं निवेशकों की काम से जुड़ी जरूरतें पूरी करने के लिए हैं। इनका असर नई इकाइयां लगने पर साफ होगा।
नए कारखानों के लिए तकनीकी पढ़ाई और प्रशिक्षित कामगार जरूरी हैं। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के उद्योग में डिजाइनर, बिजली का काम करने वाले, मशीन चलाने वाले और गुणवत्ता जांचने वाले कर्मचारी चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक्स में तकनीशियन, नई तकनीक पर काम करने वाले और पुर्जे सप्लाई करने वालों की जरूरत होती है। पंजाब के कॉलेज और पुराने इंजीनियरिंग उद्योग इसमें मदद कर सकते हैं। इसके लिए प्रशिक्षण को फैक्ट्रियों की जरूरतों से जोड़ना होगा।
पंजाब सरकार ने इलेक्ट्रिक गाड़ियां, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप से जुड़े उद्योगों को बढ़ाने के लिए नीतियां जारी कर दी हैं। अब उनका नतीजा नई फैक्ट्रियां लगने, उत्पादन शुरू होने और स्थानीय लोगों को तकनीकी काम मिलने से पता चलेगा। मंजूर परियोजनाएं कब चालू होती हैं, यह भी देखना होगा। इसी से पंजाब में इन नए उद्योगों की सही स्थिति सामने आएगी।



