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मोहाली में GAMADA की बड़ी लापरवाही, 6 साल तक रोके 7 लाख; अब ब्याज समेत लौटाने होंगे पैसे

मोहाली.

प्लाॅट की उम्मीद में गमाडा के पास सात लाख रुपये जमा कराने वाले एक आवेदक को अपनी रकम वापस पाने के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ा। आईटी सिटी, मोहाली में 500 वर्ग गज के औद्योगिक प्लाॅट के लिए वर्ष 2016 में जमा कराई गई यह राशि आखिरकार अक्टूबर 2022 में वापस मिली।

अब जिला उपभोक्ता फोरम ने गमाडा को इस रकम पर ब्याज देने के साथ मानसिक परेशानी और मुकदमे का खर्च भी अदा करने के आदेश दिए हैं। मामला कांसल निवासी ओम प्रकाश वर्मा का है। उन्होंने अक्टूबर 2016 में गमाडा की ओर से आईटी सिटी में 200 औद्योगिक प्लाॅट्स के लिए निकाली गई योजना में 500 वर्ग गज के प्लाॅट के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ उन्होंने 7 लाख रुपये अर्नेस्ट मनी जमा कराई थी। प्लाट की अनुमानित कीमत 70 लाख रुपये थी।

30 नवंबर 2016 के ड्रा में नाम वेटिंग लिस्ट में पहले नंबर पर आया। वर्मा ने जनवरी 2017 में गमाडा को आधार कार्ड की प्रति भी जमा कराई। इसके बाद उन्होंने जून 2018 में आरटीआई के जरिए यह जानकारी मांगी कि सफल आवेदकों को एलओआई और अलाटमेंट लेटर कब जारी हुए और क्या किसी का प्लाट रद्द हुआ है। फोरम के रिकार्ड के अनुसार, इसके बावजूद वर्मा की अर्नेस्ट मनी वापस नहीं की गई। उन्होंने आखिरकार 11 अप्रैल 2022 को रकम लौटाने की मांग की। गमाडा ने अगस्त 2022 में रिफंड मंजूर किया और 4 अक्टूबर 2022 को सात लाख रुपये का चेक जारी कर दिया।

गमाडा ने कहा आवेदक ने चुना था यह विकल्प
गमाडा ने फोरम में दलील दी कि आवेदक ने आवेदन में वेटिंग लिस्ट में नाम आने पर आवेदन और अर्नेस्ट मनी को 12 महीने तक बरकरार रखने का विकल्प चुना था। गमाडा ने 2021 के एक ड्राॅ का भी हवाला दिया, जिसमें आवेदक के वेटिंग में पहले नंबर पर होने की बात कही गई। हालांकि फोरम ने पाया कि इस संबंध में गमाडा पर्याप्त दस्तावेज रिकार्ड पर पेश नहीं कर सका। फोरम ने माना कि वेटिंग की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद गमाडा को रकम वापस कर देनी चाहिए थी। कार्यालयी प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक रकम रोकना उचित नहीं था।

अब ब्याज और 45 हजार रुपये अतिरिक्त
फोरम ने गमाडा को 1 जून 2018 से 4 अक्टूबर 2022 तक सात लाख रुपये पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 25 हजार रुपये मानसिक परेशानी और 20 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने होंगे। भुगतान एक महीने में नहीं किया गया तो ब्याज दर 9 प्रतिशत सालाना हो जाएगी और वास्तविक भुगतान तक लागू रहेगी।

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