
चंडीगढ़
प्लॉट-फ्लैट के नाम पर हजारों करोड़ रुपये का घोटाला करने के आरोपित पार्श्वनाथ डेवलपर्स को अब हरियाणा में लाइसेंस नहीं मिलेंगे। प्रदेश सरकार ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड के साथ ही सात निदेशकों को भी प्रतिबंधित कर दिया है।
कंपनी पर पिछले 20 वषों में सोनीपत में आठ सेक्टरों, रोहतक में तीन और पानीपत में दो सेक्टरों में विभिन्न परियोजनाओं के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इसी तरह दिल्ली में भी विभिन्न आरोपों को लेकर बाराखंभा रोड पर स्थित थाने में एफआईआर दर्ज हैं, जिनकी सुनवाई अदालत में चल रही है।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के निदेशक अमित खत्री ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड और निदेशकों को विभिन्न अनियमितताओं के प्लॉट व फ्लैट के नाम पर हजारों करोड़ के घोटाले के आरोपित, दिल्ली में भी दर्ज हैं एफआईआर आरोपों के चलते हरियाणा में भविष्य में कोई भी लाइसेंस नहीं देने के आदेश जारी कर दिए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स को वर्ष 2006 में सोनीपत में आवासीय परियोजनाएं विकसित करने के लिए चार, 2007 में पानीपत और वर्ष 2010 में रोहतक में एक-एक लाइसेंस दिए थे। इन परियोजनाओं का लाइसेंस हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम 1975 और उसके नियम 1976 के प्रविधानों के तहत धोखाधड़ी के चलते निष्क्रिय किया जा चुका है।
भूखंडों और फ्लैटों की बिक्री के दौरान धोखाधड़ी, जालसाजी और किए गए वादों का पालन न करने के संबंध में सरकार के पास आमजन से कई शिकायतें पहुंची हैं। हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (हरेरा) भी लाइसेंसधारी कंपनी के खिलाफ कई आदेश पारित कर चुका है।
दिवालियापन के कगार पर पहुंची कंपनी
गंभीर वित्तीय और कानूनी समस्याओं का सामना कर रही पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड दिवालियापन के कगार पर पहुंच चुकी है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) 452 करोड़ से अधिक के डिफाल्ट के बाद कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया पन समाधान प्रक्रिया शुरू करने की याचिका स्वीकार कर चुका है।
एनसी एलटी ने कंपनी के मामलों का प्रबंधन करने के लिए एक अंतरिम समाधान पेशेवर भी नियुक्त किया है। इससे पहले नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने सोनीपत के कुंडली में 84.155 एकड़ क्षेत्र में आवासीय कालोनी विकसित करने के लिए कंपनी को दिया गया लाइसेंस रद कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट भी विभिन्न मामलों में कंपनी को दोषी ठहराते हुए प्रतिकूल आदेश जारी कर चुके हैं।
ईडीसी-एसआइडीसी के 331 करोड़ नहीं कराए जमा
पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड पर 19 सितंबर 2024 तक बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) और एसआइडीसी का 333.31 करोड़ रुपये बकाया था, जिसे जमा नहीं कराया। गंभीर आरोपों में जांच का सामना कर रही कंपनी ने लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन तक नहीं किया।
इन निदेशकों पर लगा प्रतिबंध
दीपा गुप्ता, रक्षिता शर्मा, राजीव जैन, प्रदीप कुमार जैन, संजीव कुमार जैन, सुभाष चंद्र सेतिया व अशोक कुमार



