पंजाब

श्री अकाल तख़्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती देने पर परमजीत सिंह सरना को तलब किया जाए: सरचंद सिंह ख्याला

श्री अकाल तख़्त साहिब की सर्वोच्चता पर सवाल

सिख चिंतक एवं पंजाब भाजपा के प्रवक्ता प्रो. सरचंद सिंह ख्याला ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (DSGMC) के पूर्व अध्यक्ष और अकाली दल बादल (दिल्ली स्टेट) के अध्यक्ष सरदार परमजीत सिंह सरना को श्री अकाल तख़्त साहिब की सर्वोच्चता को खुली चुनौती देने के आरोपों में तत्काल जवाबदेही के लिए तलब किए जाने की मांग की है।

2010 के तथाकथित “घोषणापत्र” पर गंभीर आरोप

प्रो. ख्याला के अनुसार, 11 अप्रैल 2010 को नई दिल्ली के गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब स्थित भाई लखी शाह वणजारा हॉल में सरदार परमजीत सिंह सरना के नेतृत्व में “विश्व सिख कन्वेंशन” के नाम पर एक तथाकथित घोषणापत्र प्रस्तुत किया गया था। उनका आरोप है कि यह दस्तावेज़ सीधे तौर पर श्री अकाल तख़्त साहिब की सर्वोच्चता पर प्रहार था और इसका उद्देश्य पाँचों तख़्तों की सिद्धांतगत एकता को कमजोर करना था।

हुकमनामों की प्रामाणिकता पर संदेह

प्रो. ख्याला ने कहा कि इस घोषणापत्र के जरिए पंथिक परंपरा के अनुसार जारी हुकमनामों की प्रामाणिकता पर जानबूझकर संदेह उत्पन्न किया गया। इसके माध्यम से सिख संगत को हुकमनामों के प्रति अपाबंद बनाने का सुनियोजित प्रयास किया गया, जो पंथिक मर्यादा के विपरीत है।

पटना साहिब और हज़ूर साहिब पर निशाना

उनका कहना है कि यह कहकर कि “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समान किसी अन्य ग्रंथ का प्रकाश करने वाली संस्थाओं या व्यक्तियों को पंथिक निर्णयों में शामिल होने का कोई अधिकार नहीं है,” इस घोषणापत्र का स्पष्ट निशाना तख़्त श्री हरिमंदर जी पटना साहिब और तख़्त सचखंड श्री हज़ूर साहिब, नांदेड़ थे।

अकाल तख़्त की सर्वोच्चता को चुनौती

प्रो. ख्याला के मुताबिक, इन तख़्तों के जत्थेदार सिंह साहिबानों की भागीदारी से श्री अकाल तख़्त साहिब द्वारा जारी हुकमनामों को गैर-प्रामाणिक ठहराना, सीधे तौर पर अकाल तख़्त साहिब की सर्वोच्चता और अधिकार को चुनौती देने के समान है।

पंथिक अनुशासन और परंपरा का उल्लंघन

उन्होंने स्पष्ट किया कि श्री अकाल तख़्त साहिब खालसा पंथ की स्वतंत्र, संप्रभु और सर्वोच्च पंथिक संस्था है, जहां गुरमत की रोशनी में पाँच सिंह साहिबानों द्वारा लिए गए निर्णयों को ऐतिहासिक रूप से ‘हुक्म’ मानकर स्वीकार किया जाता रहा है।

निष्कासन के प्रयास का आरोप

प्रो. ख्याला ने यह भी आरोप लगाया कि सरदार सरना के नेतृत्व में लिए गए उक्त निर्णय, पाँचों तख़्तों की सामूहिक भागीदारी से जारी हुकमनामों को परोक्ष रूप से अस्वीकार करने के समान हैं और पंथ से निष्कासित प्रोफेसर दर्शन सिंह रागी के पक्ष में वातावरण बनाने का प्रयास प्रतीत होते हैं।

कठोर कार्रवाई की मांग

अंत में प्रो. सरचंद सिंह ख्याला ने मांग की कि इस गंभीर प्रकरण को देखते हुए सरदार परमजीत सिंह सरना को तत्काल श्री अकाल तख़्त साहिब के समक्ष तलब कर जवाबदेही तय की जाए और दोषी पाए जाने पर पंथिक परंपराओं के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या संस्था श्री अकाल तख़्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती देने का दुस्साहस न कर सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button