बिहार/झारखंडराज्य

झारखंड में गोशाला निर्माण पर CAG की आपत्ति, 15.96 करोड़ से बनीं 2540 अतिरिक्त गोशालाएं

 रांची
 मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत राज्य में बनने वाले गोशाला निर्माण में नियमों का उल्लंघन करने पर सीएजी ने आपत्ति जताई है। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार, निर्धारित संख्या से अधिक गोशाला का निर्माण कराया गया है।

नौ गोशाला में गायों की जगह पर लाभुक अपने परिवार के साथ रह रहे हैं और एक गोशाला सामान रखने के उपयोग में लाया जा रहा है। कुछ गोशाला निर्माण में निर्धारित सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया है और भुगतान भी प्राप्त कर लिया गया है।

आडिट टीम की ओर से इसकी जानकारी विभाग को दी गई है, लेकिन विभाग की ओर से 2,540 अतिरिक्त गोशालाओं के निर्माण और निर्माण में निम्न स्तरीय सामग्री के उपयोग पर कोई जानकारी नहीं दी गई है।

सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना (एमपीवीवाई) और मनरेगा के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में पांच गोशालाओं का निर्माण किया जाना था, जिसमें जरूरतमंद लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जानी थी।

जनवरी 2022 में सरकार की ओर से जारी योजना के मॉडल अनुमान के अनुसार, पांच गायों के लिए गौशाला निर्माण की अनुमानित लागत 1.51 लाख थी। ऑडिट टीम ने पांच जिलों की चुनिंदा ग्राम पंचायतों में परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि पंचायतों की संख्या 51 होने के आधार पर केवल 255 गोशालाओं की आवश्यकता थी, लेकिन कुल 2,795 गोशालाओं का निर्माण किया गया।

इसके परिणामस्वरूप 15.96 करोड़ की लागत से 2,540 अतिरिक्त गोशालाओं का निर्माण हुआ, जो विभागीय निर्देशों का उल्लंघन है। पांच जिलों की 19 ग्राम पंचायतों में 24 गोशालाओं का दिसंबर 2024 एवं फरवरी 2025 के दौरान भौतिक सत्यापन किया गया।

पाकुड़ जिले में आठ और गुमला जिले में दो गोशाला में गाय रखने की बजाय अन्य कार्यों के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। नौ गोशालाओं का उपयोग लाभार्थियों द्वारा आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।

वहीं, एक का उपयोग भंडारण के लिए किया जा रहा था। गुमला जिले में 2021-22 के दौरान निर्मित दो गोशालाओं में प्रविधानों के उल्लंघन करते हुए, छत के निर्माण के लिए जीसीआइ शीट के बजाय बांस या एस्बेस्टस शीट का उपयोग किया गया था, जबकि इसके निर्माण के लिए बांस या एस्बेस्टस की जगह जीआइ पाइप/जीसीआइ शीट के लिए निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान किया गया है।

 

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