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बिहार के दो युवाओं का कमाल, शंघाई वर्ल्ड स्किल्स कंपटीशन में दिखाया हुनर, पीएम मोदी ने किया सम्मानित

पटना
 हुनर को सही दिशा और समय मिले, तो बिहार के युवा वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं। राजधानी पटना के दो युवाओं आदित्य प्रकाश और आशीष राजवंश ने इसे साबित किया है।

चीन के शंघाई में आयोजित वर्ल्ड स्किल्स कंपटीशन में आदित्य ने इंसानी इशारों को समझने और रास्ते में आने वाली बाधाओं से बचने वाला रोबोट तैयार कर अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

वहीं, आशीष ने एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस जैसे जिम्मेदारी भरे क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दोनों युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मानित किया।

उनकी उपलब्धियां बताती हैं कि आज के दौर में डिग्री के साथ व्यावहारिक कौशल और समय प्रबंधन भी सफलता के लिए अहम हैं।
दो घंटे में चुनौती पूरी करने का दबाव, आदित्य ने रोबोटिक्स में दिखाई प्रतिभा

पटना के गोला रोड निवासी 22 वर्षीय आदित्य प्रकाश ने वर्ल्ड स्किल्स कंपटीशन की ऑटोनॉमस मोबाइल रोबोटिक्स श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें 'मेडलियन फॉर एक्सीलेंस' सम्मान मिला। आदित्य ने ऐसा रोबोट तैयार करने की तकनीक पर काम किया, जो इंसानी इशारों को समझने के साथ अपने रास्ते की बाधाओं को पहचानकर आगे बढ़ सके।

आदित्य के मुताबिक, रोबोटिक्स में उनकी रुचि बचपन से थी, लेकिन शुरुआत में उन्हें यह नहीं पता था कि इस क्षेत्र में आगे कैसे बढ़ना है।

ओडिशा के सीवी रमन कॉलेज में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उन्हें प्रयोगशाला में रोबोटिक्स को करीब से समझने का अवसर मिला। यहीं से उन्होंने अपने शौक को तकनीकी कौशल में बदलने की दिशा में काम शुरू किया।

कई बार असफल हुए, फिर तकनीक सीखकर खुद को किया बेहतर
आदित्य ने बताया कि रोबोटिक्स की बारीकियां सीखने में उन्हें लगभग दो साल लगे। उन्होंने बुनियादी स्तर से शुरुआत की और कई बार असफलताओं का सामना किया। हालांकि, हर बार अपनी गलतियों से सीखते हुए उन्होंने तकनीक को बेहतर बनाया और लगातार अभ्यास किया।

प्रतियोगिता के दौरान समय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती थी। प्रतिभागियों को सीमित समय में प्रोजेक्ट को समझना, रणनीति तैयार करना, कोडिंग करना और तय मानकों के अनुसार काम पूरा करना होता था।

आदित्य ने अपने प्रोजेक्ट में आरएएस-2, ऑटोनॉमस नेविगेशन और ओपनसीवी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तकनीकी ज्ञान के साथ काम करने का अनुशासन और सुरक्षा नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण होता है।

विमान के रखरखाव में छोटी चूक भी बन सकती है बड़ा जोखिम
आशीष राजवंश ने एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, यानी विमान के रखरखाव के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह ऐसा क्षेत्र है, जहां तकनीकी जानकारी के साथ सावधानी, सटीकता और सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है। विमान को उड़ान के लिए सुरक्षित घोषित करने से पहले उसके विभिन्न हिस्सों और प्रणालियों की जांच की जाती है।

आशीष के अनुसार, विमान के रखरखाव से जुड़ी जिम्मेदारी केवल मशीनों की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यात्रियों की सुरक्षा भी जुड़ी होती है।

इसी कारण उन्होंने इस क्षेत्र को गंभीरता से समझने और इसमें विशेषज्ञता हासिल करने के लिए प्रशिक्षण लिया। प्रतियोगिता में उनका अनुभव उन्हें विमानन क्षेत्र की व्यावहारिक चुनौतियों को समझने का अवसर दे गया।

छह महीने की ट्रेनिंग के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचे आशीष
आशीष ने एयरोस्पेस एंड एविएशन सेक्टर स्किल काउंसिल के विशेषज्ञों के निर्देशन में लगभग छह महीने तक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से पहले दिसंबर के अंत में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की थी। इसके बाद फरवरी में 10 दिन, मार्च में 14 दिन और फिर 23 अप्रैल से सितंबर तक लगातार प्रशिक्षण चला।

आशीष का परिवार पीढ़ियों से मैकेनिकल क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उनके परदादा, दादा और पिता स्वर्गीय चंदन शर्मा भी इसी क्षेत्र में काम करते रहे।

मशीनों की कार्यप्रणाली को समझने का अनुभव उनके लिए मददगार रहा, लेकिन विमानन क्षेत्र की तकनीकी बारीकियां उनके लिए नई थीं। ऐसे में उन्हें अपनी तैयारी के दौरान लगातार नई चीजें सीखनी पड़ीं।

मैन्युअल प्रशिक्षण से वर्चुअल सिस्टम तक का सफर रहा चुनौतीपूर्ण
आशीष ने प्रतियोगिता की चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर उनका प्रशिक्षण मुख्य रूप से मैन्युअल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ था, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में वर्चुअल सिस्टम पर काम करना पड़ा। इस बदलाव के कारण उन्हें अलग तरह की तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

निर्धारित समय के भीतर काम पूरा करना भी कठिन रहा। आशीष प्रतियोगिता में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सके, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सीख और अनुभव उनके लिए महत्वपूर्ण रहे।

विमानन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लगातार अभ्यास, तकनीकी प्रशिक्षण और समय के अनुसार काम करने की क्षमता का विशेष महत्व है।

हुनर के साथ समय प्रबंधन भी सफलता की अहम कुंजी
आदित्य और आशीष की कहानियां युवाओं को यह संदेश देती हैं कि केवल शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं है। अपने क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करना, लगातार सीखते रहना और समय का सही इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है।

आदित्य ने रोबोटिक्स में अपनी रुचि को अंतरराष्ट्रीय पहचान तक पहुंचाया, जबकि आशीष ने विमान रखरखाव जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा का अनुभव हासिल किया।

दोनों युवाओं का सफर बताता है कि असफलता भी सीखने का अवसर बन सकती है। जरूरत है सही मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और अपने हुनर को निखारने के लिए पर्याप्त समय देने की।

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