मध्य प्रदेशराज्य

कर्नल सोफिया कुरैशी केस में विजय शाह को बड़ी राहत, राज्यपाल ने नहीं दी अभियोजन की अनुमति

भोपाल
 ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह को बड़ी राहत मिल गई है. मोहन यादव कैबिनेट ने विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा न चलाने की अनुशंसा की थी जिसपर राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मुहर लगा दी है. बीते 25 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में अभियोजन की अनुमति न देने की अनुशंसा का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा गया था। 

वहीं, सोमवार 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में मध्य प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम ने बताया था कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पेश की जा चुकी है. आगे की कार्रवाई के लिए अभियोजन की मंजूरी का इंतजार है, जिस पर अंतिम फैसला राज्यपाल के स्तर पर लंबित है। 

अब दाखिल होगी क्लोजर रिपोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्या जांच पूरी होने के बाद अब केवल सरकार की मंजूरी का इंतजार है. इस पर सरकार की ओर से हां में जवाब दिया गया. कोर्ट को बताया गया कि अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद जांच रिपोर्ट संबंधित सक्षम अदालत में पेश की जाएगी. वहीं, यदि अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है तो मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी. वहीं, अब राज्यपाल द्वारा अभियोजन की अनुमति न देने के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जायेगी। 

राज्यपाल ने पुनर्विचार का भरोसा दिया है
नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी की कथनी और करनी में अंतर है। उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि वे इस मामले में पुनर्विचार करें और सरकार को मंत्री के खिलाफ केस चलाने के निर्देश दें। सिंघार ने बताया कि राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि वे मामले में पुनर्विचार करेंगे और सरकार से चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्यपाल इस मामले में उचित निर्णय लेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए सिंघार ने सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई सरकार कोर्ट के आदेश की भी परवाह नहीं करती है तो क्या भाजपा की सरकार कोर्ट से बड़ी हो गई है? क्या वह सर्वोच्च न्यायालय से भी बड़ी हो गई है? उन्होंने कहा कि इस सवाल को वह देश और विदेश की जनता के सामने छोड़ रहे हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि विजय शाह के विवादित बयान के मामले में सरकार ने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय अभियोजन की मंजूरी के प्रस्ताव को मंजूरी देकर मामले को राज्यपाल के पाले में डाल दिया है। पार्टी अब राज्यपाल से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रही है।

केके मिश्रा बोले- ऐसे फैसले में राज्यपाल का शामिल होना पद की गरिमा के खिलाफ
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने विजय शाह मामले में राज्यपाल मंगू भाई पटेल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कर्नल सोफिया कुरैशी पर अपमानजनक टिप्पणी के मामले में गैर-जमानती धाराओं में दर्ज संज्ञेय अपराध के बावजूद अभियोजन की स्वीकृति से जुड़े सरकार के फैसले में राज्यपाल का शामिल होना उनके संवैधानिक और निष्पक्ष पद की गरिमा के विपरीत है।

मिश्रा ने कहा कि यह मामला देश की संप्रभुता, एकता-अखंडता और भारतीय सेना के सम्मान से जुड़ा है। न्यायपालिका के स्वतः संज्ञान के बाद एफआईआर दर्ज हुई है, ऐसे में लोकभवन को न्यायपालिका और संविधान को चुनौती देने वाले प्रतिष्ठान का रूप नहीं लेना चाहिए। उन्होंने व्यापमं मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि 2015 में तत्कालीन राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ भी हाईकोर्ट के निर्देश पर एसटीएफ ने एफआईआर दर्ज की थी। मिश्रा ने राज्यपाल से लोकभवन की प्रतिष्ठा और संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की।

कैबिनेट ने यह बनाया था आधार
कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों ने कहा था कि विजय शाह इस मामले में सार्वजनिक मंचों पर और लिखित रूप में चार बार माफी मांग चुके हैं. उनकी मंशा सेना या महिला अधिकारी का अपमान करने की कतई नहीं थी. इसलिए अब उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं बनता है. इस आधार पर विधिक सलाह लेकर राज्यपाल से अनुशंसा की गई थी। 

विजय शाह का विवादित बयान क्या था
बता दें कि 11 मई 2025 को विजय शाह ने महू के एक कार्यक्रम में विवादित बयान दिया था. जहां उन्होंने कहा कि "मोदीजी समाज के लिए जी रहे हैं. जिन्होंने हमारी बेटियों के सिंदूर उजाड़े. वो कटे पिटे लोगों को हमने उन्हीं की बहन भेजकर ऐसी की तैसी करवाई. उन्होंने कपड़े उतारकर कर हमारे हिंदूओं को मारा मोदीजी ने उनकी बहन को उनकी एसी की तैसी करने उनके घर पर भेजा." आगे ये बयान इतना आपत्तिजनक है कि इसे यहां कोट नहीं किया जा सकता। 

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