
लुधियाना की फैक्ट्रियां और जालंधर का खेल सामान पंजाब की पहचान रहे हैं। अब इन कारोबारों को नई मशीनें अपनाने और बाजार की बदलती जरूरतों के साथ चलने की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने 7 मार्च 2026 को उद्योग और कारोबार के विकास की नई नीति को मंजूरी दी। इसके सरकारी नियम 8 मार्च को जारी किए गए।
यह नीति सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए नहीं है। इसमें छोटे और मध्यम उद्योगों, नया कारोबार शुरू करने वालों और पहले से चल रही फैक्ट्रियों के लिए भी मदद के विकल्प हैं। मशीनें बदलने या उत्पादन बढ़ाने वाले कारोबारों को भी लाभ मिल सकता है। इसके लिए उन्हें नीति की शर्तें पूरी करनी होंगी और जरूरी मंजूरी लेनी होगी।
नीति तैयार करने से पहले सरकार ने उद्योग चलाने वालों की राय ली। अगस्त 2025 में अलग-अलग क्षेत्रों की 24 समितियां बनाई गईं। इनमें कारोबारियों और जानकारों को शामिल किया गया। उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा के अनुसार, बैठकों से 601 सुझाव मिले और करीब 77 प्रतिशत सुझाव नीति में शामिल किए गए। भगवंत मान सरकार का कहना है कि इससे कारोबार की असली जरूरतों को समझने में मदद मिली।
निवेश करने वालों के लिए 20 तरह की मदद और छूट के विकल्प हैं। शर्तें पूरी करने वाली परियोजनाओं को राज्य जीएसटी, स्टांप ड्यूटी, बिजली शुल्क और रोजगार देने से जुड़ी राहत मिल सकती है। कुछ मामलों में यह लाभ अधिकतम 15 साल तक मिल सकता है। हर फैक्ट्री को सभी छूट नहीं मिलेंगी। मदद कितनी मिलेगी, यह कारोबार के प्रकार, उसकी जगह, परियोजना और मंजूरी की शर्तों से तय होगा।
सरकार ने खाने-पीने की चीजें तैयार करने, इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप, खेल सामान, कपड़े, आईटी और फसल के बचे हिस्सों से जुड़े उद्योगों पर खास ध्यान दिया है। सीमावर्ती जिलों और कंडी क्षेत्र के लिए अतिरिक्त मदद की व्यवस्था भी है। इससे नए उद्योग पंजाब के दूसरे इलाकों में भी पहुंच सकते हैं।
निवेश के आंकड़ों का सही मतलब समझना जरूरी है। अप्रैल 2026 में उद्योग मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में पंजाब को करीब 60,276 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। इससे कंपनियों की रुचि का पता चलता है। लेकिन प्रस्ताव मिलने का मतलब यह नहीं कि पूरी रकम लग चुकी है या फैक्ट्रियां चालू हो गई हैं। असली नतीजा तब दिखेगा, जब परियोजनाओं में काम शुरू होगा और लोगों को रोजगार मिलेगा।
पंजाब में कारोबार शुरू करने वाले लोगों को टैक्स में छूट के साथ समय पर मंजूरी, अच्छी सड़कें, बिजली और प्रशिक्षित कर्मचारी भी चाहिए। माल बेचने के लिए बाजार तक पहुंच भी जरूरी है। नई नीति में ऑनलाइन सेवाओं, जरूरी सुविधाओं, नई तकनीक पर काम और प्रशिक्षण का जिक्र है। इन व्यवस्थाओं का फायदा तभी दिखेगा, जब आवेदन पर समय से जवाब मिले और काम आसानी से आगे बढ़े।
नई नीति से छोटे उद्योगों को कारोबार बढ़ाने और नई फैक्ट्रियों को रोजगार देने का मौका मिल सकता है। इसके लिए मंजूर परियोजनाओं का समय पर पूरा होना जरूरी है। अभी सरकार ने मदद के विकल्प और नियम तय किए हैं। आने वाले सालों में कितना पैसा वास्तव में लगा, कितना उत्पादन हुआ और कितनी नौकरियां मिलीं, इससे नीति का असर समझ में आएगा।



