बिहार में सिर्फ ₹2 में होगा मरीजों का इलाज! मोदी सरकार ने 598 शहरी PHC को दी मंजूरी

पटना
बिहार में अब मरीज 2 रुपये में अपना इलाज करा सकेंगे। मोदी सरकार ने बिहार को यह बड़ा तोहफा दिया है। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में 598 शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को स्थापित करने की मंजूरी केंद्र सरकार द्वारा दी गई है। इन स्वास्थ्य केंद्रों में मात्र दो रुपये में मरीजों को इलाज की सुविधा मिलेगी। इससे शहरी क्षेत्रों के निवासी एवं खासकर स्लम बस्तियों में रहने वाले लोगों को इलाज की बेहतर सुविधा मिलेगी।स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनयूएचएम) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा और मजबूत करने का निर्णय लिया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य में कुल 164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 434 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के संचालन को भारत सरकार से स्वीकृति मिल गई है।
इन नए स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को सभी स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त दी जाएंगी। ओपीडी में दिखाने के लिए मरीजों को मात्र 2 रुपये का पर्चा (सुविधा शुल्क) कटवाना होगा। लोगों की सहूलियत के लिए यूपीएचसी में ओपीडी का समय सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक रहेगा, जबकि यूएचडब्ल्यूसी सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होंगे।
एक विशेष पहल के अनुसार, पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल के तहत पटना में संचालित 11 जन सेवा केंद्रों को भी अब शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में संचालित किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार से इन 11 केंद्रों के संचालन को भी हरी झंडी मिल चुकी है।
मिलेगी 12 तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं
यूपीएचसी पर मुख्य रूप से ओपीडी, मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सेवा, नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन, परामर्श, संचारी व गैर-संचारी रोगों की जांच और मुफ्त दवा वितरण सहित 12 प्रकार की सेवाएं उपलब्ध होंगी। स्लम बस्तियों के लोगों तक सीधे लाभ पहुंचाने के लिए विशेष दूरस्थ स्वास्थ्य शिविर और आयुष्मान आरोग्य शिविर लगाने का भी प्रावधान किया गया है।
इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में भी खुलेंगे सेंटर
युवाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शहरी निकाय क्षेत्र में आने वाले 19 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों और 14 राजकीय अभियंत्रण (इंजीनियरिंग) महाविद्यालयों में भी यूएचडब्ल्यूसी का संचालन किया जा रहा है, जिन्हें केंद्र सरकार से स्वीकृति मिल गई है। शहरी क्षेत्रों में स्लम आबादी के आसपास किराये के भवन में स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन किया जाएगा। इसमें शहरी आश और महिलाओं की अहम भागीदारी होगी।



