छत्तीसगढ़राज्य

रजिस्ट्री हुई और नामांतरण भी, किसान चंद्रशेखर को नहीं लगाने पड़े दफ्तर के चक्कर

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी

रजिस्ट्री हुई और नामांतरण भी, किसान चंद्रशेखर को नहीं लगाने पड़े दफ्तर के चक्कर

ऑटोम्यूटेशन से संपत्ति पंजीयन के साथ आगे बढ़ी नामांतरण प्रक्रिया, समय और दौड़भाग से मिली राहत

तकनीक से आसान हो रही पंजीयन सेवाएं, ऑनलाइन भुगतान से आधार प्रमाणीकरण तक बढ़ी सुविधा और पारदर्शिता

रायपुर
संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद यदि नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, तो नागरिकों के लिए पूरी प्रक्रिया कितनी सहज हो सकती है, इसका अनुभव किसान श्री चंद्रशेखर निषाद ने किया। संपत्ति का पंजीयन कराने के साथ ही ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी और उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो गया। इससे न केवल उनका समय बचा, बल्कि अलग से कार्यालय जाने की जरूरत भी नहीं पड़ी। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इस बदलाव का अपना अनुभव साझा किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया में नागरिकों का समय बचाने के साथ अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करना और पारदर्शिता बढ़ाना है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन सुधारों के जमीनी प्रभाव और उनके अनुभवों को भी जान रहा है।

रजिस्ट्री के साथ नामांतरण ने बचाया समय

श्री चंद्रशेखर निषाद ने बताया कि पहले संपत्ति के पंजीयन के बाद नामांतरण के लिए अलग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी और इसमें समय भी लगता था। इस बार ऑटोम्यूटेशन की सुविधा से रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ी और उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो गया। श्री निषाद ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “मेरा नामांतरण तुरंत हो गया। इससे मेरे समय की बहुत बचत हुई और मुझे अलग से कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े।” ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था में संपत्ति के पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ने से नागरिकों को अलग से आवेदन और कार्यालयों में जाकर प्रक्रिया पूरी कराने की आवश्यकता कम हुई है। किसानों और आम नागरिकों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है।

आधार प्रमाणीकरण से पहचान सत्यापन हुआ मजबूत

पंजीयन व्यवस्था में तकनीक का उपयोग केवल नामांतरण तक सीमित नहीं है। पक्षकारों की पहचान के सत्यापन को अधिक मजबूत बनाने के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण की सुविधा भी अपनाई गई है। इसके माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान सत्यापित करने में मदद मिलती है, जिससे गलत पहचान के आधार पर पंजीयन की आशंका को कम करने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायता मिल रही है। इसके साथ ही ऑनलाइन भुगतान, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाओं ने पंजीयन प्रक्रिया को और सहज बनाया है। नागरिक पंजीयन शुल्क का भुगतान नेट बैंकिंग और यूपीआई जैसे डिजिटल माध्यमों से कर सकते हैं।

तकनीक ने घटाई प्रक्रिया, नागरिकों को मिली सहूलियत

श्री चंद्रशेखर निषाद की कहानी बताती है कि पंजीयन व्यवस्था में तकनीक आधारित सुधारों का लाभ केवल रजिस्ट्री तक नहीं, बल्कि उससे जुड़ी आगे की प्रक्रियाओं में भी नागरिकों को मिल रहा है। ऑटोम्यूटेशन से नामांतरण की प्रक्रिया सहज होने से समय और अनावश्यक दौड़भाग दोनों कम हुए हैं।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के दौरान सामने आया उनका अनुभव नागरिक सेवाओं में तकनीक के उपयोग से आ रहे बदलाव की एक तस्वीर पेश करता है। रजिस्ट्री से लेकर नामांतरण तक प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ने की पहल से संपत्ति पंजीयन का अनुभव अधिक सरल और सुविधाजनक बन रहा है।

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