पंजाब

सुनील जाखड़ पंजाबियों को कर रहे गुमराह; INDIA – US समझौता किसान और देश विरोधी: कुलदीप धालीवाल

आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने तथाकथित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कड़ी निंदा करते हुए इसे किसान-विरोधी और देश-विरोधी करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह समझौता भारतीय कृषि को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा और लाखों किसानों को आर्थिक बर्बादी की ओर धकेल देगा।

आप पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि भाजपा नेता सुनील जाखड़ इस समझौते का जश्न मना रहे हैं, जबकि वे इसके गरीब और छोटे किसानों पर पड़ने वाले विनाशकारी असर को या तो समझ नहीं रहे हैं या जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं।

धालीवाल ने कहा, “सुनील जाखड़ कह रहे हैं कि ‘आप’ चुप है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम चुप नहीं हैं। जिस दिन से यह समझौता घोषित हुआ है, उसी दिन से पिछले दस दिनों से हम लगातार आपत्तियां उठा रहे हैं। असल में भाजपा ने देश को अंधेरे में रखा। प्रधानमंत्री संसद में इस मुद्दे पर नहीं बोले और देश को इस समझौते की जानकारी डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट से मिली।”

उन्होंने कहा कि ट्रंप ने अपने बयानों में बार-बार ‘एग्रीकल्चर’ यानी कृषि शब्द का इस्तेमाल किया है, जो हर भारतीय किसान के लिए चिंता का विषय है। धालीवाल के अनुसार, यह समझौता भारतीय बाजारों को भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोल देता है, जिससे उन भारतीय किसानों को सीधा नुकसान होगा जिन्हें पहले से ही बहुत कम या कोई सरकारी सहायता नहीं मिलती।

लाल ज्वार (रेड सॉर्गम) का उदाहरण देते हुए धालीवाल ने बताया कि इसका करीब 75 प्रतिशत उत्पादन अमेरिका में होता है, जबकि भारत में इसे महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों के गरीब किसान बिना किसी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के उगाते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी लाल ज्वार और अन्य अमेरिकी अनाज व डेयरी उत्पाद भारतीय बाजारों में आए, तो मक्का, बाजरा और अन्य देसी फसलें बुरी तरह प्रभावित होंगी। इसका सीधा असर पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के किसानों पर पड़ेगा।

धालीवाल ने सवाल उठाया कि अगर सब्सिडी वाली अमेरिकी कपास भारत में आई तो देश के कपास किसानों का क्या होगा? यदि अमेरिकी बादाम और अखरोट बाजार पर छा गए तो जम्मू-कश्मीर के किसान कहां जाएंगे? हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के सेब उत्पादक सस्ते अमेरिकी सेबों के सामने कैसे टिक पाएंगे? इसके बाद डेयरी और अन्य कृषि उत्पादों पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।

भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए धालीवाल ने कहा कि पहले भारतीय उत्पादों पर 2.8 प्रतिशत टैरिफ लगता था, लेकिन ट्रंप के सत्ता में आने के बाद इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया। वर्तमान में भारतीय निर्यात पर 18 प्रतिशत टैरिफ है, जबकि भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ 60 प्रतिशत से घटाकर लगभग शून्य कर दिया है। उन्होंने इसे व्यापार समझौते के बजाय “आर्थिक समर्पण” बताया।

सुनील जाखड़ पर निशाना साधते हुए धालीवाल ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तब जाखड़ इंदिरा गांधी की प्रशंसा करते थे और आज वे नरेंद्र मोदी की प्रशंसा कर रहे हैं, लेकिन वे कभी किसानों या पंजाबियों के हित में नहीं बोलते। उन्होंने कहा, “किसानों के लिए बोलिए, अपने राजनीतिक आकाओं के लिए नहीं।”

धालीवाल ने दोहराया कि यह समझौता भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और भारतीय कृषि को तबाह कर देगा। उन्होंने सवाल किया कि अमेरिका को अपने बचे हुए कृषि उत्पादों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार मिल गया, लेकिन हमारे किसान कहां जाएंगे?

अंत में धालीवाल ने सुनील जाखड़ और भाजपा सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि देश की जनता को बताया जाए कि यह समझौता भारतीय किसानों के हित में कैसे है। उन्होंने भाजपा नेताओं को चेतावनी दी कि बोलने से पहले सोचें और देश को गुमराह करना बंद करें। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इस कथित “किसान-विरोधी साजिश” का हर स्तर पर पर्दाफाश करती रहेगी।

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