पंजाबराज्य

बेमौसम मार, उत्तर भारत में बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल बर्बाद और लुढ़का पारा

चंडीगढ़

उत्तर भारत में मौसम के बदले मिजाज ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है। अप्रैल के महीने में, जब सूरज की तपिश महसूस होनी चाहिए थी, तब जनवरी जैसी कड़ाके की ठंड और बेमौसम बरसात ने दस्तक दी है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में पिछले 48 घंटों से जारी बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी ने भारी तबाही मचाई है। आलम यह है कि मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर गया है।

पंजाब कृषि विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। राज्य के करीब 1.25 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। सबसे ज्यादा नुकसान मुक्तसर, फाजिल्का और बठिंडा जिलों में दर्ज किया गया है, जहां फसल कटाई के लिए तैयार थी। 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने पकी हुई फसल को खेतों में बिछा दिया है, जिससे उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका है।

हरियाणा : 6 जिलों में ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट
हरियाणा में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मौसम विभाग ने गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूह, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी सहित दक्षिण-पूर्वी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी ओलावृष्टि की संभावना है। हिसार, सिरसा और फतेहाबाद के किसान पहले ही ओलावृष्टि की मार झेल रहे हैं, जहां गेहूं और सरसों की फसलों को व्यापक क्षति हुई है। किसान अब सरकार से विशेष गिरदावरी और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

चंडीगढ़: 5 साल में सबसे ठंडा रहा अप्रैल का यह दिन
ट्राइसिटी (चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली) में मंगलवार और बुधवार को हुई बारिश ने पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान गिरकर 27.6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जो सामान्य से करीब 6 डिग्री कम है। पिछले 5 साल में 7-8 अप्रैल का दिन इतना ठंडा कभी दर्ज नहीं किया गया। सड़कों पर लोग एक बार फिर जैकेट और गर्म कपड़ों में नजर आ रहे हैं, जो अप्रैल के महीने में एक दुर्लभ दृश्य है।

हिमाचल: अटल टनल और रोहतांग में बर्फबारी
पहाड़ों पर कुदरत का सफेद तांडव जारी है। हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों जैसे रोहतांग दर्रा, अटल टनल, लाहौल-स्पीति और किन्नौर में ताजा बर्फबारी हुई है। शिमला के खड़ापत्थर और नारकंडा में भारी बारिश के बाद भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे कई संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं। बर्फबारी और गिरते तापमान ने सेब बागवानों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि यह समय सेब के पेड़ों में फ्लावरिंग (फूल आने) का है और अत्यधिक ठंड से फसल पूरी तरह खराब हो सकती है।

विशेषज्ञों की चेतावनी और राहत की उम्मीद
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 24 घंटों तक उत्तर भारत के इन राज्यों में मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहेगा। 9 अप्रैल के बाद ही आंशिक सुधार की उम्मीद है। जलवायु विशेषज्ञों ने बेमौसम की इस मार को 'क्लाइमेट चेंज' के बढ़ते खतरों से जोड़कर देखा है। फिलहाल, प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी का उचित प्रबंध करें और बिजली कड़कने के दौरान खुले क्षेत्रों में जाने से बचें।

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