बिहार/झारखंडराज्य

यूपी में पौधारोपण महाअभियान, 35 करोड़ पौधे लगाने की तैयारी, बनेगा ‘नवीन विशिष्ट वन’ मॉडल

 लखनऊ

प्रदेश में इस बार पौधारोपण सिर्फ हरियाली बढ़ाने का अभियान नहीं होगा, बल्कि सामाजिक समरसता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन का व्यापक मिशन भी बनेगा।

“नवीन विशिष्ट वनों की स्थापना” थीम के तहत सरकार ने अलग-अलग उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के वनों के विकास की योजना तैयार की है। महाअभियान कई अभिनव माडलों के जरिए प्रदेश के पर्यावरणीय परिदृश्य को नई दिशा देने का प्रयास करेगा।

पिछले वर्षों की भांति इस मानसून सीजन में भी एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने की तैयारी है। अभियान के तहत महर्षि चरक ''औषधि वन'', ''समरस वन'', ''समृद्धि वन'', ''कृषि वन'', ''ऊर्जा वन'', ''कपि '''' और पौराणिक वनों के पुनर्स्थापन जैसी योजनाएं तैयार की हैं। इसके साथ ही विशेष तिथियों में पौधारोपण कार्यक्रमों की शृंखला भी तय की गई है, जिससे आमजन की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

‘विविधता में एकता’ की थीम पर आधारित समरस वन में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी पौधारोपण में होगी। ब्लाक स्तर तक पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित कर सामाजिक सौहार्द को मजबूत किया जाएगा। समृद्धि वन में किसानों की आय बढ़ाने वाले पौधे लगाए जाएंगे। कृषि भूमि पर विकसित किए जाने वाले समृद्धि वन से किसानों को कार्बन क्रेडिट और अतिरिक्त आय का लाभ मिलेगा।

बंदरों के लिए आबादी के बाहर फलदार पौधे लगाकर ''कपि वन'' विकसित किए जाएंगे। इसके जरिए शहरों में इनके प्रवेश को रोका जाएगा। ऊर्जा वन में ऐसी प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे जिनसे ग्रामीणों को ईंधन के लिए लकड़ी मिल सके। महर्षि चरक औषधीय वन प्रत्येक जिले में औषधीय पौधों के संरक्षण और प्रचार के लिए न्यूनतम एक हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा।

अभियान का एक प्रमुख हिस्सा ‘मिशन छाया’ भी है, जिसके तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे लगाए जाएंगे। एक अध्ययन में पाया गया कि पेड़ों की छाया में तापमान में लगभग आठ डिग्री सेल्सियस तक कमी दर्ज की गई।

इस मॉडल को प्रदेशभर में लागू करने की तैयारी है। प्रदेश के 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे सहित अन्य मार्गों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। मथुरा में 36 पौराणिक वनों के पुनर्जीवन के लिए 487 हेक्टेयर क्षेत्र में इको-रेस्टोरेशन कार्य किया जा रहा है। इन वनों में इस बार पारंपरिक और धार्मिक महत्व वाले पौधों का रोपण किया जाएगा।

विशेष अवसरों पर भी होगा पौधारोपण
15 अगस्त: वंदे मातरम् वाटिका-‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर प्रत्येक जिले में कम से कम एक वाटिका विकसित की जाएगी, जिसमें 150 पौधे लगाए जाएंगे। इसमें ट्रस्ट, सामाजिक संगठनों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

28 अगस्त: भाई-बहन पौधारोपण-रक्षाबंधन के दिन इसमें भाई-बहन मिलकर पौधे लगाएंगे।

5 सितंबर: ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ अभियान-शिक्षक दिवस के दिन प्रदेश में एक पौधा गुरु के नाम पर लगाया जाएगा।

 

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