देश

ट्रंप से निपटने की मोदी की रणनीति पर NYT की नजर, 20 देशों के दौरे से मजबूत हुआ भारत का नेटवर्क

नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ अब अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी की है। इस लेख में बड़ा जिक्र यह है कि भारत पिछले एक साल से चुपचाप क्या-क्या कर रहा है। इसके हालिया एनालिसिस में कहा गया है कि 'पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निपटने के लिए तैयारी कर रहे हैं, एक बार में एक डील के साथ'। इसमें कहा गया है कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल दुनिया भर में भारत की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारियों का नेटवर्क बढ़ाने में बिताया है।

पीएम मोदी के दौरे ने बदल दी भारत की तस्वीर
जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक(DGP) रहे शेष पॉल वैद ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा-NYT का यह विश्लेषण अच्छा है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया भर के अलग-अलग देशों की यात्रा कर रहे हैं और समझौते कर रहे हैं, लेकिन इससे यह नतीजा निकालना गलत है कि यह अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ है। भारत एक संप्रभु देश है और वह ऐसे व्यापार और समझौते करने के लिए स्वतंत्र है जो हमारे विकास और तरक्की के लिए फायदेमंद हों, खासकर तब जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख भारत के हितों को नुकसान पहुंचा रहा हो। अपने हितों की रक्षा के लिए काम करने का मतलब यह नहीं है कि आप अमेरिका के खिलाफ काम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने साल भर में किए 20 दौरे
NYT के अनुसार, अगस्त 2025 से, पीएम मोदी ने कम से कम 20 देशों का दौरा किया है, जबकि 13 देशों के नेताओं ने भारत की यात्रा की है। अखबार इनमें से कई मुलाकातों को सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार के आदान-प्रदान के बजाय खास लक्ष्यों को हासिल करने के मकसद से की गई ठोस, कारोबारी बातचीत बताता है। और इसके नतीजे अब साफ दिखने लगे हैं।
पीएम मोदी ने अगस्त, 2025 से अब तक कम से कम 20 देशों का दौरा किया है, जबकि 13 देशों के नेताओं ने भारत की यात्रा की है।

भारत और ब्रिटेन में डील बड़ी भूमिका
एक्स पर पॉलिटिकल एनालिस्ट ने लिखा-भारत-UK FTA, जो 15 जुलाई 2026 को लागू हुआ, हजारों उत्पादों पर टैरिफ कम करता है या खत्म करता है। स्कॉच व्हिस्की पर भारत का टैरिफ तुरंत 150% से घटकर 75% हो जाएगा और 10 सालों में 40% हो जाएगा, जबकि भारतीय सामानों के 99% हिस्से पर UK का टैरिफ खत्म कर दिया जाएगा। इस समझौते से लंबे समय में सालाना द्विपक्षीय व्यापार में £25.5 बिलियन की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

यूरोपीय संघ से समझौता एक ऐतिहासिक कामयाबी
लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद, भारत और EU ने 27 जनवरी 2026 को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बातचीत पूरी की। यूरोपीय आयोग EU को भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बताता है, जिसका 2025 में सामान का व्यापार €118 बिलियन का था। यह व्यापार के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा भी देता है।

फ्रांस से AI, इनोवेशन और रणनीतिक सहयोग
भारत और फ्रांस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रिसर्च और शिक्षा में सहयोग को और गहरा किया है। दोनों देशों ने पेरिस में 2025 AI एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता की, जिसमें AI से जुड़े लगभग 100 ठोस कदम उठाए गए, और फरवरी 2026 में अपने रिश्तों को 'विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया।

नॉर्वे और EFTA निवेश और नौकरियां
भारत-EFTA आर्थिक साझेदारी, जिसमें नॉर्वे भी शामिल है, के तहत EFTA देशों का लक्ष्य है कि वे 15 सालों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश जुटाएं और दस लाख नौकरियां पैदा करने में मदद करें। नॉर्वे की सरकार ने इस वादे को फिर से दोहराया है।

दक्षिण कोरिया जहाज निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग
दक्षिण कोरिया ने भारत के साथ ज्यादा निवेश और जहाज निर्माण में सहयोग करने का वादा किया है। इस साझेदारी में औद्योगिक सहयोग शामिल है, जिसमें भारतीय शिपयार्ड और कोरियाई जहाज निर्माण की विशेषज्ञता का तालमेल भी शामिल है। भारत का लक्ष्य 2047 तक दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण करने वाले देशों में शामिल होना है।

न्यूजीलैंड के साथ समुद्री सुरक्षा समझौता
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच संबंध पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़ गए हैं। अब बातचीत समुद्री सुरक्षा और व्यापार पर केंद्रित है, जो पहले हुए रक्षा सहयोग समझौते पर आधारित है।

जर्मनी रक्षा तकनीक का खासतौर पर जिक्र
    NYT खास तौर पर जर्मनी की पनडुब्बी तकनीक का जिक्र करता है, जो भारत की हालिया कूटनीतिक कोशिशों के ठोस नतीजों में से एक है। बात सिर्फ यह नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी विदेश यात्रा करते हैं। भारतीय प्रधानमंत्री हमेशा से विदेश यात्राएं करते रहे हैं।
    NYT जिस फर्क को उजागर करता है, वह है सिर्फ बड़े-बड़े बयानों के बजाय खास मकसदों, मापने योग्य लक्ष्यों और ठोस आर्थिक या रणनीतिक नतीजों पर ध्यान देना।

भारत की अपनी रणनीतिक जरूरतें
अखबार यह भी बताता है कि देश खुद भी भारत की ओर तेजी से देख रहे हैं, जिसकी वजह भारत की अर्थव्यवस्था का आकार और विकास और उनकी अपनी रणनीतिक जरूरतें हैं।
जापान और ऑस्ट्रेलिया इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अहम साझेदार हैं। फ्रांस AI और रणनीतिक तकनीक के मामले में भारत के साथ काम कर रहा है। यूरोप व्यापार का एक बड़ा मौक़ा दे रहा है। UK के साथ व्यापार समझौता पहले ही लागू हो चुका है। नॉर्वे और अन्य EFTA देशों ने बड़े निवेश का वादा किया है। दक्षिण कोरिया भारत की जहाज बनाने की क्षमता पर नजर रखे हुए है।

मेलोनी को टॉफी का पैकेट भी एक संदेश
    इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ एक मीटिंग के दौरान, पीएम मोदी ने उन्हें 'मेलोडी' टॉफी का एक पैकेट भेंट किया – एक छोटा सा ऐसा काम जिसे NYT ने भी खास माना और उसका जिक्र किया। इससे मिलने वाला बड़ा संदेश साफ है-भारत अपनी सभी उम्मीदें या संसाधन किसी एक ही जगह पर नहीं लगा रहा है।
    आज की अनिश्चित दुनिया में, भारत व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, ज़रूरी मिनरल्स, शिक्षा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में अपने विकल्पों का दायरा बढ़ा रहा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण का मकसद क्या है
    इसका मकसद अमेरिका के खिलाफ होना या डोनाल्ड ट्रंप से ऊपर दिखना नहीं है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि व्हाइट हाउस में चाहे कोई भी बैठे, भारत रणनीतिक रूप से स्वतंत्र और आर्थिक रूप से मजबूत बना रहे। NYT के विश्लेषण का असली महत्व यही है।
    फ्रांस से लेकर जर्मनी, ब्रिटेन से लेकर नॉर्वे, दक्षिण कोरिया से लेकर न्यूजीलैंड, जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ तक, भारत स्पष्ट हितों और नतीजों वाली साझेदारियां बना रहा है। विदेश नीति का असल मकसद यही होता है कि आप अपने देश के लिए क्या हासिल करते हैं। और तेजी से, भारत टेक्नोलॉजी, निवेश, बाजार तक पहुंच, नौकरियां, रणनीतिक साझेदारियां और भारतीय कारोबारियों व नागरिकों के लिए नए मौके हासिल कर रहा है।
    आत्मविश्वास से भरा भारत अब दुनिया के उसे चुनने का इंतजार नहीं कर रहा है। भारत अपना रास्ता खुद चुनने के लिए काफी साझेदारियां बना रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button